रविवार, 27 अक्टूबर 2013

कैंसर से लड़ने में मदद करेगा फंगस!

एक फंगस में अपने इलाके की रक्षा के लिए पाए जाने वाले एक अनजाने अवयव के संश्लेषण व परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इसमें कैंसर रोधी दवा बनने का गुण मौजूद है। यह बात हाल ही में हुए शोध के बाद सामने आई है। कुछ वर्षों पहले मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में केमिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद मोवासाघी के नेतृत्व में रिसर्चरों की टीम ने पाया था कि एक जटिल फंगस अवयव में कैंसर रोधी गतिविधियां देखने को मिल रहीं हैं। जर्नल केमिकल साइंस में छपी रिपोर्ट के अनुसार, मोवासाघी ने बताया कि यह और संबंधित अवयव प्राकृतिक तौर पर बहुत कम मात्रा में मिले जिसके कारण अवयव की संरचना व इसकी गतिविधियों के बीच संबंध पर तुलनात्मक अध्ययन करना मुश्किल हो गया। हालांकि, यह अनुसंधान दवा विकास में सहायता कर सकता है। मोवासाघी बताते हैं कि इस शोध से हमें काफी आंकड़े प्राप्त हुए हैं, ये चौंकाने वाले आंकड़े हैं लेकिन हम चाहते थे कि इन अवयवों को बड़े पैमाने पर लेकर एक समान तरीके से इनका मूल्यांकन करें। नए अनुसंधान में मोवासाघी व एमआईटी के सहयोगियों के साथ ही यूनिवर्सिटी ऑफ इलियंस एट अरबना-चैम्पेजन ने ऐसे 60 फंगस अवयव को डिजाइन व परीक्षित किया है जिनमें मानव कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता है। मुख्य रिसर्चर मोवासाघी बताते हैं कि हम यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि इनमें से कई तो कैंसर कोशिकाओं से भी ज्यादा शक्तिशाली थीं। एमआईटी के निकोलस बॉयर, छात्र जस्टिन किम, इलियंस इंस्टीट्यूट में केमिस्ट्री के प्रोफेसर पॉल हर्जेनरॉदर और ग्रेजुएट छात्र करेन मॉरिसन इस शोध में मोवासाघी के साथ थे। 

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