बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

अस्वस्थ हृदय द्वार कर सकता है बीमार

यदि हार्ट वाल्व में कोई परेशानी होती है तो उसका प्रभाव दिल की सेहत पर पड़ता है। इसमें गड़बड़ी होने पर हृदय के जरिए रक्त प्रवाह में परेशानी होती है। चारों हार्ट चेंबर्स के द्वार वाल्व द्वारा नियंत्रित होते हैं। ये हृदय के जरिए रक्त प्रवाह की वन-वे कार्यप्रणाली में अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही रक्त  आगे की दिशा में बह रहा है या नहीं, इसे भी सही रूप में संचालित करने की जिम्मेदारी इन वाल्व्स की होती है। रक्त के बैकवर्ड डायरेक्शन में किसी प्रकार का लीकेज होने पर परेशानी का कारण बन सकता है।
हार्ट वाल्व डिजीज के कारण 
सामान्य स्थितियों में हार्ट वाल्व खुलते और बंद होते रहते हैं। यदि इनमें किसी प्रकार की गड़बड़ी हो जाए तो वाल्व पूरी तरह से बंद नहीं हो पाते,  जिससे जन्म लेती हैं कई बीमारियां। इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। वैसे हार्ट वाल्व डिजीज होने के कई कारण हो सकते हैं।
उम्र से संबंधित 
65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के वाल्व में कैल्शियम और अन्य तत्वों के जमा होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे वाल्व के आस-पास मोटी परत बनने लगती है और इसके जरिए रक्त का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता। एओरटिक वाल्व अन्य वाल्व्स की तुलना में अधिक प्रभावित होता है। जिन लोगों में एथ्रोस्केलेरॉसिस की समस्या होती है, उनमें भी इस तरह के पदार्थों का जमाव देखा गया है।
रुमेटॉइड फीवर 
स्ट्रेप बैक्टीरिया के कारण होने वाले रुमेटॉइड फीवर के कारण वाल्व डिजीज होने की आशंका और बढ़ जाती है। शरीर द्वारा इन स्ट्रेप बैक्टीरिया से लड़ने की कोशिश में कई बार हार्ट वाल्व्स को नुकसान पहुंचता है। रुमेटॉइड फीवर के कारण हार्ट वाल्व के डैमेज होने का खतरा सबसे अधिक बुजुर्गों को होता है।
संक्रमण
 सामान्य कीटाणु भी रक्त में मिलकर हृदय तक पहुंचते हुए कई बार इसकी अंदरूनी परत को संक्रमित कर देते हैं, जिससे हार्ट वाल्व्स भी प्रभावित होते हैं। इसे इंफेक्टिव एंडोकार्डिटिस कहते हैं। ये कीटाणु आपके रक्त में इंजेक्शन या अन्य मेडिकल उपकरणों के जरिए प्रवेश कर सकते हैं। जिन लोगों में जन्मजात या या अन्य किसी वजह से हृदय वाल्व सबंधी परेशानी है, जिसकी वजह से रक्त का प्रवाह असामान्य रूप से होता है, उनमें भी यह बीमारी हो सकती है।  

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