धर्मेंद्रसिंह राजावत
राजनीति में कॅरिअर बनाने में नाकाम रहे राधेश्याम और अनिल आपस में अपना दुखड़ा रो रहे थे कि तभी एक ज्योतिषी उनके पास से गुजरा। राधेश्याम ने आवाज लगाकर उसको रोका और अपना भविष्य देखने का आग्रह किया।
'पंडित जी! हम दोनों का हाथ देखकर बताएगा कि हम नेता बनेंगे या नहीं?"
पंडित जी ने काफी बारीकी से दोनों के हाथ देखे और फिर कुछ सोचने लगे। कुछ पल के लिए आकाश की ओर देखने के बाद बोले-'तुम दोनों नेता बनने के लिए पैदा ही नहीं हुए। तुम तो नेता पैदा करने के लिए पैदा हुए हो।"
पंडित जी की बात सुनकर दोनों भौंचक रह गए। फिर आश्चर्य के साथ दोनों ने सवाल किया
'पंडित जी! क्या कह रहे हैं आप? क्या यह सही है या फिर मजाक कर रहे हैं। सच-सच बताइए न?"
पंडित जी ने जवाब देने के बजाय सवाल किया
'तुम दोनों मुझे यह बताइए कि क्या मैडम खुद पीएम (किंग) बनी? नहीं न। यदि वह पीएम बन जातीं तो क्या वह किंग मेकर कहलातीं। पीएम न बनने पर ही उनके किंग मेकर बनने का रास्ता साफ हुआ। समझे। अब सोच क्या रहे हो? लोगों को नेता बनाना है या नहीं? यदि हां तो उपाय मेरे पास है, मगर कुछ दक्षिणा देनी होगी। यदि दोगे तो उपाय बताऊं?"
दोनों ने दक्षिणा देने की हामी भर ली तो पंडित जी ने उपाय बताना शुरू किया।
'एक ब्लड बैंक शुरू करो। उसमें आम मरीजों के जरूरत के अलावा नेता बनने के इच्छुक लोगों के लिए भी ब्लड रखो। खयाल रहे ब्लड खास तौर पर उत्तरप्रदेश के कुछ चुनिंदा नेताओं का ही हो।"
'नेताओं का ब्लड क्यों? अनिल ने उत्सुकता बस सवाल किया
'अरे मूर्ख! यूपी के नेताओं के ब्लड से ही तो नेता पैदा करोगे।'
'मैं समझा नहीं।' अनिल फिर बोला
'अच्छा मुझे यह बताओ तुम लोग कहां के रहने वाले हो?
'गुजरात के।" दोनों एक साथ बोले।
'तभी तुम्हें मालूम नहीं। मैं बताता हूं। यूपी में लोगों को राजनीति सिखाई नहीं जाती। वहां लोगों के खून में राजनीति घुली होती है। बच्चा पैदा होने के साथ ही राजनीति सीख जाता है। यही वजह है कि केंद्र में सरकार किसकी बननी है यह यूपी ही तय करता है। अभी भी माया और मुलायम से ही सरकार चल रही है। दूसरा, मैडम को सभी लोग विदेशी-विदेशी चिल्लाते हैं, मगर उनका रिश्ता कहां से है। यूपी से। अब समझ में आया या नहीं। यूपी के नेताओं का ही नहीं वहां के तो किसी भी व्यक्ति का खून किसी में चढ़ा दोगे तो वह उम्दा और कामयाब नेता बन जाएगा।"
दूसरे दिन दोनों पहले कस्टमर के घर पहुंचे तो बेटे पर ब्लड के रिएक्शन का सवाल करते ही उसकी मां भड़क गईं।
'आप लोगों ने मेरे बेटे की जिंदगी खराब कर दी। बनाना था नेता, मगर वह बन गया क्रिमनल। पहले किसी को पलटकर जवाब तक नहीं देता था, लेकिन अब बात-बात पर लोगों को चाकू मार देता है। न जाने क्या किया आप लोगों ने।"
'आंटीजी! आप नाराज मत होइए। यह तो नेता बनने के शुरुआती लक्षण हैं। कोई भी व्यक्ति क्रिमनल बनने के बाद ही बड़ा नेता बनता है।" राधेश्याम ने किसी तरह समझाने की कोशिश की।
आंटी कुछ और कहतीं उससे पहले दोनों वहां से खिसक लिए। फिर दूसरे कस्टमर के यहां पहुंचे। लेकिन, यहां तो स्थिति और भी खराब निकली। जो लड़का किसी लड़की को आंख उठाकर नहीं देखता था, वह अब कब-किसे अपनी हवस का शिकार बना ले इसका कोई पता नहीं। किसी तरह लड़के के माता-पिता को समझाया कि बहन जी के राज के कुछ मंत्रियों या विधायकों में से किसी का ब्लड चढ़ गया होगा, इसलिए ऐसा रिएक्शन हो रहा है, मगर चिंता की बात नहीं। ये लक्षण भी एक अच्छे नेता के ही हैं। आपका बेटा, नेता तो अच्छा बनेगा ही।
दो कस्टमरों के अनुभव ने अनिल की चिंताएं बढ़ा दीं। मन में कुछ संशय होने लगा। एक बार उसने तय किया कि अब रिएक्शन देखने नहीं जाना, मगर राधेश्याम की जिद पर चल दिए तीसरे के यहां। दरवाजे की घंटी बजाई तो एक बुजुर्ग आंटी ने गेट खोला। अपना परिचय दिया तो वह खुश होकर दोनों लोगों को घर के अंदर ले गईं। आंटी के चेहरे की खुशी देखकर दोनों लोगों की उत्सुकता फिर बढ़ी। उन्होंने आंटी से ब्लड के रिएक्शन के बारे में सवाल किया।
'बेटा मैं तो अपने बेटे को पढ़ाना-लिखाना चाहती थी, मगर उसके पिता को उसे नेता बनाना का भूत सवार था। अलबत्ता, ऊपरवाले ने मेरी सुन ली। आप लोगों ने उसे किसका ब्लड दिया, मुझे नहीं मालूम, लेकिन अब वह जब देखो तब पढ़ता ही रहता है।"
आंटी की बात सुन अनिल के मन में फिर सवाल उठा, आखिर यूपी के ब्लड का असर दिख क्यों नहीं रहा है। किसी में नेता जैसे गुण क्यों नहीं दिख रहे हैं।
'क्यों राधेश्याम? पहले दो केस का मामला तो समझ में आता है, मगर तीसरे केस में ये पढ़ाई का चक्कर कुछ समझ में नहीं आया। ये नेताओं के लक्षण तो बिल्कुल नहीं लग रहे। आखिर माजरा क्या है?' अनिल ने काफी चिंतित होकर सवाल किया
'ब्लड तो यूपी का ही है। पहले दो केस में भी और तीसरे में भी।"
'क्राइम और किसी का रेप करने की बात तो समझ में आती है कि यह यूपी के नेता के खून का ही असर है, मगर पढ़ाई मेरी समझ में नहीं आई। यह कैसे मुमकिन है?' अनिल ने फिर सवाल किया
'तीसरे कस्टमर को या तो बहन जी का ब्लड चढ़ गया या फिर बबलू भैया का। दरअसल, बहन जी पढ़ने की इतनी शौकीन हैं कि भाषण भी पढ़कर ही देती हैं। दूसरा, बबलू भैया सीएम बन गए, पर युवाओं के बीच पढ़ाई का संदेश वह आज भी खुद की मिसाल पेश करके देते हैं। तभी तो चाहे प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या फिर आम सभा, हर जगह अपनी बात शुरू करने से पहले कागज का टुकड़ा निकाल लेते हैं। पढ़ने की कितनी ललक है उनको।'
'राधेश्याम! सही कह रहे हो तुम। तीनों में यूपी का ही असर दिखा है। अच्छा !अब चौथे के भी हाल जान लेते हैं।' अनिल ने चलने का इशारा करते हुए कहा।
चौथे के यहां पहुंचे तो उसके पिता ने दोनों लोगों का काफी गर्मजोशी से स्वागत किया। कुछ समय तक यहां-वहां की बात करने के बाद दोनों लोगों ने उसके पिता से बेटे के रिएक्शन के बारे में पूछा।
'बेटा भाषण तो बहुत अच्छा देता है, वह भी बिना किसी कागज-पत्तर के। जब बोलता है तब काफी तेजस्वी दिखता है। निश्चित ही बहुत बड़ा नेता बनेगा, मगर एक समस्या भी है। जब देखो तब वह यही कहता रहता है कि मैं पीएम बनूंगा, मैं ही पीएम बनूंगा। उसे पीएम बनने की इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।"
रिएक्शन जानने के बाद जब दोनों वापस लौट रहे थे तो वह चौथे केस के बारे में चर्चा करने लगे।
'क्यों राधेश्याम? तुम्हें कुछ गड़बड़ नहीं लग रहा है। पीएम बनने को लेकर चिल्लाना समझ में आता है, क्योंकि कई चिल्लाते रहते हैं, मगर यूपी का नेता तेजस्वी और बिना किसी कागज-पत्तर के भाषण, यह बात कुछ समझ में नहीं आई।"
'हां, कुछ गड़बड़ मुझे भी लग रही है।"
कुछ सोचने के बाद अनिल ने फिर सवाल किया, 'राधेश्याम! एक मरीज के लिए नमो ब्लड डोनेट करने आए थे, कहीं तुमने उनका ब्लड तो..... ।"
दोनों ने लम्बे-लम्बे कदम बढ़ाए और ब्लड बैंक
पहुंचे। वहां जाकर फाइल पलटी तो पता चला कि जिस मरीज के लिए नमो ने ब्लड डोनेट किया था, उसको उनका ब्लड दिया ही नहीं गया।



