बुधवार, 6 अगस्त 2014

लैब में बदला तितली के पंखों का रंग

प्रेट्र : वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोगश्ााला में तितली के पंखों का रंग बदलने में कामयाबी हासिल की है। अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं ने भूरे रंग के पंखों वाली तितली के पंखों को बैंगनी में बदल दिया।
यूनिवर्सिटी में परिस्थ्ािति विज्ञान और विकासमूलक जीवविज्ञान के पूर्व प्रोफेसर एंटोनिया मोंतेरो के मुताबिक, हमने बिना यह जाने कि तितली के पंखों के लिए यह रंग पाया जा सकता है या नहीं, उसके लिए एक रंग की कल्पना की और फिर इसके लिए क्रमानुसार तितलियों का चयन किया। मोंतेरो और उनकी टीम ने बाइसाइकल्स एनायनना के पख्ंाों का रंग भूरे से बैंगनी किया। इस तितली का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसकी कजन स्पेसीज में स्वतंत्र तौर पर दो बार बैंगनी रंग पाया गया थ्ाा।
अभी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि प्रकृति में रंग कैस्ो पैदा होता है, हालांकि श्ाोधकर्ताओं ने हाल के वर्ष्ाों में विस्तृत रूप से इस प्रक्रिया का अध्ययन किया है।
रंग बदलने की प्रक्रिया के तरीकों में ज्यादातर वैज्ञानिक पहले प्रकृति में एक मनचाहा रंग पाने का प्रयास करते हैं और बाद में लैब में इसकी नकल करते हैं। 

बैक्टीरिया भी करते हैं सोशल नेटवर्किंग

प्रेट्र : सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ये सच है। एक अध्ययन में पाया गया कि बैक्टीरिया भी एक दूसरे के साथ्ा संवाद स्थ्ाापित करते हैं। इस संवाद के जरिए ही वे मनुष्य समेत अन्य प्रजातियों को अपनी चपेट में लेने में सक्षम होते हैं। वैज्ञानिकों ने अपने श्ाोध में पाया कि संक्रमण्ा फैलाने के वक्त बैक्टीरिया एक दूसरे के साथ्ा मिलकर काम करते हैं। इस खोज से इस बात का पता लगाने में सफलता मिलेगी कि जानवरों की बीमारियां मनुष्यों को कैसे संक्रमित करती हैं। बैक्टीरिया माहौल में ढलने के लिए कुछ अण्ाु मुक्त करते हैं और इसी के जरिए एक दूसरे से संपर्क करते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे बैक्टीरिया जो अपने पनपने के लिए वातावरण्ा बनाने के लिए एक दूसरे का सहयोग करने में सक्षम होते हैं, वे मनुष्य समेत बहुत सी प्रजातियों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इस खोज के जरिए ऐसी बीमारियों को वर्गीकृत करना आसान होगा जो ज्यादा प्रजातियों को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। ऐसी बीमारियां मनुष्यों को आसानी से प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे वर्गीकरण्ा से स्वास्थ्य संबंधी खतरों को पहचानने और उनसे निपटने में आसानी होगी। मनुष्यों में पाए गए नए संक्रमण्ाों में से ज्यादातर ऐसी बीमारियों से फैले हैं जो कि जानवरों से मनुष्यों में आई हैं। इनमें एंथ्ा्राक्स और सुपरबग एमआरएसए जैसे बेहद गंभीर और कठिनाई से नियंत्रित होने वाले संक्रमण्ा श्ाामिल हैं। यह श्ाोध यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग की अगुवाई में करीब 200 बैक्टीरिया के जेनेटिक कोड के विश्लेष्ाण्ा के जरिए किया गया।  

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

एक पेड़ पर उगा दिए चालीस तरह के फल

प्रेट्र : एक अमेरिकी क लाकार ने आड़ू, बेर, खुबानी और चेरी जैसे गुठली वाले चालीस तरह के फल एक ही पेड़ पर उगाए हैं। सिराकस यूनिवर्सिटी के कला विभाग के एसोश्ािएट प्रोफे सर सैम वेन एकेन ने यह कारनामा कर दिखाया है। एकेन ने कुछ समय पहले ही एक प्रोजेक्ट में सब्जियां और फूल एक साथ्ा तैयार किए थ्ो। इस पर उनसे इनका बगीचा तैयार करने का आग्रह भी किया गया थ्ाा। जब उन्हें इसके लिए अनुदान दिया गया तो उन्होंने एक ही पेड़ पर पूरा बगीचा उगाने का विचार किया।
उगाने की इस प्रक्रिया में पेड़ों की कलम इकट्ठा करना श्ाामिल होता है। उसके बाद इन कलमों को पेड़ पर समान आकार के कट बनाकर उनमें पट्टी से बांध दिया जाता है। इसके बाद उस जगह से ही यह नई कलम पानी और हवा लेकर श्ााखा बन जाती है। गुठली वाले फलों में एक जैसी गुण्ासूत्र संरच्ाना होने के चलते ही ऐसा करना संभव है। एकेन के मुताबिक, जैसे-जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ा, मैने पाया कि गुठली वाले फलों की सैकड़ों प्रजातियां हैं जबकि हमें पंसारी की दुकान पर महज तीन या चार मिलती हैं। तब मैंने तय किया कि मैं एक पेड़ पर 40 फल्ा तैयार करूंगा।