हमारा शरीर कई बार कुछ पदार्थों को लेकर काफी संवेदनशील हो जाता है। इन पदार्थों का सेवन करते ही उसका असर भी शरीर पर दिखने लगता है। ऐसी ही एक बीमारी है- सीलिएक।
150 लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी का कारण है शरीर का ग्लूटेन नामक प्रोटीन को अवशोषित न कर पाना। ऐसे में जब भी व्यक्ति ग्लूटेन युक्त किसी खाद्य पदार्थ का सेवन करता है, तो वह बीमार हो जाता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसका सबसे बेहतर उपचार खुद मरीज के पास ही है।
* क्या है यह बीमारी :
सीलिएक छोटी आंत की बीमारी है। इसे गेहूं या अन्य साबुत अनाजों से होने वाली एलर्जी भी कहा जा सकता है। जब खाना ग्लूटेन से निकलता है तो यह पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। ग्लूटेन जौ, राई और गेहूं जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। सीलिएक से पीड़ित लोगों को गेहूं, जौ और ओट्स में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन से एलर्जी होती है।
दवा या अन्य किसी तरीके से इसका इलाज नहीं किया जा सकता है। ग्लूटेन-फ्री आहार वह आहार है, जिसमें ग्लूटेन प्रोटीन शामिल नहीं होता है। यह आहार सीलिएक के लक्षणों को नियंत्रित करने और जटिलताओं को रोकने में मदद करता है।
* क्या है कारण :
सीलिएक का कोई निश्चित कारण सामने नहीं आ पाया है। शोध और रिसर्च की मानें तो इसे एक अनुवांशिक बीमारी भी कहा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने तक किसी भी उम्र में इस बीमारी का शिकार हो सकता है। इसके लक्षण अक्सर किसी तनावपूर्ण दौर से गुजरने के बाद सामने आते हैं, जैसे सर्जरी, बीमारी, इंफेक्शन या बच्चों का जन्म।
* गौर करें लक्षण :
इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षणों की बात करें तो
-दस्त या कब्ज, पेट दर्द और वजन बढ़ना या कम होना।
-चक्कर आना, जोड़ों या हड्डियों में दर्द और एनीमिया।
-महिलाओं में मासिक धर्म का अनियमित होना।
-त्वचा पर निशान बनना।
* ऐसे करें बचाव :
इससे बचने के लिए गेहूं, राई, जौ या बीयर जैसे पेय पदार्थ या ऐसा कोई भी खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, अनाज युक्त नाश्ता, पास्ता और पिज्जा जिसमें गेहूं और गेहूं उत्पाद शामिल हों का सेवन नहीं करना चाहिए। सीलिएक बीमारी से ग्रस्त लोग चावल और मक्का का सेवन कर सकते हैं।
150 लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी का कारण है शरीर का ग्लूटेन नामक प्रोटीन को अवशोषित न कर पाना। ऐसे में जब भी व्यक्ति ग्लूटेन युक्त किसी खाद्य पदार्थ का सेवन करता है, तो वह बीमार हो जाता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसका सबसे बेहतर उपचार खुद मरीज के पास ही है।
* क्या है यह बीमारी :
सीलिएक छोटी आंत की बीमारी है। इसे गेहूं या अन्य साबुत अनाजों से होने वाली एलर्जी भी कहा जा सकता है। जब खाना ग्लूटेन से निकलता है तो यह पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। ग्लूटेन जौ, राई और गेहूं जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। सीलिएक से पीड़ित लोगों को गेहूं, जौ और ओट्स में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन से एलर्जी होती है।
दवा या अन्य किसी तरीके से इसका इलाज नहीं किया जा सकता है। ग्लूटेन-फ्री आहार वह आहार है, जिसमें ग्लूटेन प्रोटीन शामिल नहीं होता है। यह आहार सीलिएक के लक्षणों को नियंत्रित करने और जटिलताओं को रोकने में मदद करता है।
* क्या है कारण :
सीलिएक का कोई निश्चित कारण सामने नहीं आ पाया है। शोध और रिसर्च की मानें तो इसे एक अनुवांशिक बीमारी भी कहा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने तक किसी भी उम्र में इस बीमारी का शिकार हो सकता है। इसके लक्षण अक्सर किसी तनावपूर्ण दौर से गुजरने के बाद सामने आते हैं, जैसे सर्जरी, बीमारी, इंफेक्शन या बच्चों का जन्म।
* गौर करें लक्षण :
इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षणों की बात करें तो
-दस्त या कब्ज, पेट दर्द और वजन बढ़ना या कम होना।
-चक्कर आना, जोड़ों या हड्डियों में दर्द और एनीमिया।
-महिलाओं में मासिक धर्म का अनियमित होना।
-त्वचा पर निशान बनना।
* ऐसे करें बचाव :
इससे बचने के लिए गेहूं, राई, जौ या बीयर जैसे पेय पदार्थ या ऐसा कोई भी खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, अनाज युक्त नाश्ता, पास्ता और पिज्जा जिसमें गेहूं और गेहूं उत्पाद शामिल हों का सेवन नहीं करना चाहिए। सीलिएक बीमारी से ग्रस्त लोग चावल और मक्का का सेवन कर सकते हैं।