यह एक ऐसा रोग है, जिसमें बिना किसी शारीरिक कमी के रोगी में रह-रहकर बार-बार न्यूरो व मस्तिष्क से जुड़े गंभीर लक्षण पैदा होते हैं। चूंकि रोगी शारीरिक रूप से स्वस्थ होता है। इसलिए लक्षणों व तकलीफ से जुड़ी सभी प्रकार की जांचें जैसे कैट स्केन, सीने का एक्स-रे, ईसीजी, आंख या गले से जुड़ी जांचों में कोई भी कमी नहीं निकलती है।
कारण
लक्षण
इलाज
कारण
- तनाव : हिस्टीरिया रोग प्राय: रोगी के चेतन या अचेतन मन में चल रहे किसी तनाव के चलते ही होता है। ये लक्षण बनावटी तौर पर जानबूझकर रोगी द्वारा पैदा नहीं किए जाते हैं। अक्सर तनाव से बाहर निकलने का रोगी के पास जब कोई रास्ता शेष नहीं रह जाता, तब ही उसे रह-रहकर हिस्टीरिया के दौरे पड़ने लगते हैं। यह रोग दस में से नौ बार महिलाओं में होता है, विशेषकर उन महिलाओं में जिन्हें तनाव से निपटने के लिए सामाजिक या पारिवारिक सहयोग नहीं मिलता।
- कमजोर व्यक्तित्व : प्राय: स्वभाव से ऐसे रोगी बहुत जिद्दी होते हैं और जब इनके मन के अनुरूप कोई बात नहीं होती तब वे बहुत परेशान होते हैं, जिद पकड़ लेते हैं और आवेश में आकर चीजें फेंकते हैं व स्वयं को नुकसान पहुंचाते हैं। वे विपरीत परिस्थितियों में बदहवास हो जाते हैं। उनकी सांस उखड़ने लगती है व अचेत हो सकते हैं।
लक्षण
- दौरे पड़ना : रह-रहकर हाथ, पैरों व शरीर में झटके आना, ऐंठन होना व बेहोश हो जाना।
- अचेत हो जाना : रोगी अचानक या धीरे-धीरे अचेत हो सकता है। इस दौरान उसकी सांसें चलती रहती हैं, शरीर बिल्कुल ढीला हो जाता है लेकिन दांत कसकर भिंच जाते हैं। यह अचेतन अवस्था कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक बनी रह सकती है। उसके बाद रोगी स्वयं उठकर बैठ जाता है और ऐसा व्यवहार करता है जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं।
- उल्टी सांसें चलना : रोगी जोर-जोर से गहरी-गहरी सांसें लेता है। रह-रहकर छाती व गला पकड़ता है और ऐसा प्रतीत होता है कि रोगी को सांस आ ही नहीं रही है और उसका दम घुट जाएगा।
- हाथ पैर न चलना : कभी-कभी रोगी के हाथ व पैर ढीले पड़ जाते हैं और रोगी कुछ समय (घंटों) के लिए चल-फिर नहीं पाता है।
- अचानक गले से आवाज निकलना बंद हो जाना : ऐसे में रोगी इशारों से या फुसफुसा के बातें करने लगता है। कभी कभी हिस्टीरिया से ग्रस्त रोगी को अचानक दिखाई देना भी बंद हो जाता है।
- उपरोक्त लक्षण दौरे के रूप में एक साथ या बदल-बदलकर कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक रहते हैं फिर स्वत: ठीक हो जाते हैं। इलाज के अभाव में यही दौरे दिनभर में दस-दस बार पड़ते हैं, तो कभी 2-3 महीनों में एक दो बार ही हिस्टीरिया के दौरे पड़ते हैं।
इलाज
- चूंकि हिस्टीरिया के सभी लक्षण किसी न किसी मस्तिष्क या न्यूरो की गंभीर बीमारी जैसे प्रतीत होते हैं। ऐसे में रोगी का किसी कुशल डॉक्टर की सहायता से जांच करना जरूरी होता है। जांचों में जब कोई कमी नहीं निकलती तब मनोचिकित्सक की सहायता से इस रोग का इलाज कराना चाहिए।
- इस रोग का सीधा संबंध चेतन व अचेतन मन में चल रहे तनाव से होता है। ऐसे में दवा के विपरीत इलाज में मनोचिकित्सा का प्रमुख स्थान है।
- मनोचिकित्सा के दौरान रोगी में व्याप्त तनाव की पहचान व उससे निपटने के लिए सही विधियां बताई जाती हैं।

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