सोमवार, 24 मार्च 2014

हर साल दस लाख बच्चे होते हैं टीबी से ग्रस्त

आइएएनएस : विश्व टीबी दिवस के मौके पर सोमवार को जारी  रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार के बदलते रुख व उन्न्त चिकित्सीय सेवाओं के बावजूद तपेदिक (टीबी) से पीड़ित बच्चों की संख्या में वर्ष 2011 के बाद से हर साल दो गुनी बढ़ोतरी हुई है।
बोस्टन स्थित ब्रिघ्ाम एंड वुमंस हॉस्पिटल (बीडब्ल्यूएच) और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (एचएमएस) के श्ाोधकर्ताओं ने दावा किया कि दुनियाभर में हर साल दस लाख बच्चे टीबी से ग्रसित होते हैं। यह संख्या पूर्वानुमानों से दोगुनी और दुनियाभर में हर साल सामने आने वाले टीबी के मामलों की तीन गुनी है। श्ाोधकर्ताओं ने ये भी अनुमान लगाया कि हर साल 32 हजार से अधिक बच्चे लाइलाज एमडीआर-टीबी से ग्र्रस्त हो जाते हैं। टीबी के इस प्रकार पर कई तरह की दवाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
बीडब्ल्यूएच में मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर टेड कोहेन ने बताया, दुनियाभर की आबादी का एक तिहाई हिस्सा बच्चे हैं लेकिन अब तक इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सका था कि कितने बच्चे एमडीआर-टीबी से ग्रस्त होते हैंं। बच्चों में टीबी के मामलों को लेकर हमारा अनुमान वर्ष 2011 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमान से दोगुना और दुनियाभर में हर साल सामने आने वाले टीबी के मामलों का तीन गुना है। श्ाोधपत्र के सह लेखक मर्सिडीज बेकेरा ने बताया कि श्ाोधकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के कई स्त्रोतों का इस्तेमाल किया। श्ाोध के तहत तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2010 में दस लाख बच्चे टीबी से ग्र्रस्त हुए थे। इनमें से 32 हजार बच्चों को एडीआर टीबी थी। यह रिपोर्ट प्रतिष्ठित जर्नल द लासेंट में प्रकाश्ाित हुई है।  

अल्जाइमर का पता लगाना होगा आसान

 प्रेट्र : अब अल्जाइमर के विकसित होने का पता एक नए परीक्षण्ा से लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टेस्ट विकसित किया है जिसमें स्पाइनल फ्लूइड में असामान्यताओं का पता लगाने से अल्जाइमर विकसित होने की आश्ांका का पता लगाया जा सकेगा। अल्जाइमर बुढ़ापे में होने वाली बीमारी है। इसमें यादाश्त चली जाती है। उम्र बढ़ने के साथ ही इसका दुष्प्रभाव भी बढ़ता जाता है।
यह परीक्षण्ा मरीजों की स्पाइनल फ्लूइड में छोटे और उलझ्ो हुए प्रोटीन के टुकड़े जिन्हें बीटा एमिलायड ओलीगोमर्स कहा जाता है उनकी पहचान करेगा। पहले वैज्ञानिकों का मानना थ्ाा कि अल्जाइमर के लिए एमिलायड प्लेक के टुकड़े समस्या पैदा करते हैं। एमिलायड स्टार्च की तरह का प्रोटीन होता है जो लिवर, किडनी या कुछ अन्य बीमारियों में ऊतकों में जमा हो जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल स्कूल के क्लाडियो सोटो ने कहा, श्ाोध से स्पष्ट है कि अल्जाइमर के लिए बीटा एमिलायड ओलीगोमर्स दोष्ाी है। यह श्ाोध सेल रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाश्ाित हुआ है।   

...और बढ़ जाएगी सीखने की क्षमता

, प्रेट्र : क्या आप चाहते हैं कि आपका दिमाग तेजी से काम करें? अगर हां तो यह अब संभव है। श्ाोधकर्ताओं का दावा है कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता को हल्का सा बिजली का करंट देकर बढ़ाया जा सकता है। मगर इसे बढ़ाना या कम करना धारा के प्रवाह पर निर्भर करेगा। श्ाोध के मुताबिक बिजली का हल्का सा करंट लोगों को नई या मुश्किल चीज जल्दी सीखने में मदद करता है। जब हम कोई गलती करते हैं तो ओह जैसी प्रतिक्रिया देने के लिए मस्तिष्क के मेडियल फ्रंटल कारटेक्स को जिम्मेदार माना जाता है। पूर्व के श्ाोध बताते हैं कि जब व्यक्ति कोई गलती करता है तो मस्तिष्क के इस क्षेत्र से नकारात्मक प्रतिक्रिया तत्काल व्यक्त होती है, लेकिन किस वजह से होती है यह नहीं बताया थ्ाा। अमेरिका में वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ता इस बात की जांच करना चाहते थ्ो कि क्या यह गतिविधि सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है क्योंकि यह मस्तिष्क को हमारी गलतियों से सीखने की अनुमति देती है। यह श्ाोध न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाश्ाित हुआ है। 

महिलाओं में तनाव से बांझ्ापन का दोगुना खतरा

प्रेट्र : वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि महिलाओं में तनाव से गर्भावस्थ्ाा में विलंब और बांझ्ापन का खतरा दोगुना हो सकता है। श्ाोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसी महिलाएं, जिनके लार में तनाव बॉयोमार्कर के उच्चतम स्तर पाए जाते हैं वे दूसरी महिलाओं की तुलना में गर्भवती होने में अधिक समस्याओं से जूझ्ाती हैं। यह श्ाोध ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनेर मेडिकल सेंटर में रिप्रोडक्टीव एपडेमीओलॉजी के निदेश्ाक कोर्टनी डेनिंग-जॉनसन लिंच और उनके सहयोगियों के पूर्व के अध्ययन का विस्तार है। इसमें उन्होंने ब्रिटेन में उच्चतम तनाव और गर्भावस्थ्ाा की कम संभावना के बीच संबंध स्थ्ाापित किया थ्ाा। इस नए श्ाोध में पता चला कि महिलाओं में उच्च स्तर का अल्फा-ऐमलेस (लार में मापा गया तनाव का जैविक सूचक) 29 फीसद पाए जाने पर उनके गर्भवती होने की संभावना कम है। श्ाोध में यह भी बताया गया है कि इनमें उन महिलाओं की तुलना में बांझ्ापन के दोगुने खतरे की आश्ांका रहती है जिनमें इस प्रोटीन इन्जाइम का स्तर कम पाया जाता है। श्ाोधकर्ताओं ने अपने श्ाोध में 18 से 40 वषर््ा उम्र की 501 अमेरिकी महिलाओं पर अध्ययन किया।