शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

फूड सप्लीमेंट में क्या और कितना

बॉडी बनाने की कोशिशों के बावजूद भी आप तय नहीं कर पा रहे कि फूड सप्लीमेंट को खाएं या न खाएं तो जवाब है कि खा लें। ये कोई बुरी चीज नहीं होती। बुरी होती है उसकी क्वालिटी, बुरा होता है उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, बुरे होते हैं फूड सप्लीमेंट के उल्टे-सीधे कॉम्बिनेशन और इसके साथ ना बरती जाने वाली सावधानी ।
वक्त के साथ बॉडी बिल्डिंग के विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है। कम समय लगाकर या कम खाकर भी शरीर को उसकी जरूरत की हर चीज मुहैया कराने की कड़ी में फूड सप्लीमेंट ईजाद हुआ। दरअसल इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सही खानपान को जुटाना काफी मुश्किल होता है। जो लोग कॉलेज या दफ्तर जाते हैं उन्हें शरीर बनाने के लिए सप्लीमेंट्स की जरूरत पड़ जाती है।
इन प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते वक्त एक बात जरूर ध्यान रखें कि ये फूड सप्लीमेंट हैं और कभी भी मुख्य भोजन नहीं बन सकते। खाना-पीना छोड़कर इनके पीछे भागेंगे तो पैसे, वक्त और शरीर की बर्बादी होगी। अगर प्रोटीन पाउडर सूट नहीं कर रहा तो तुरंत उसे खाना छोड़ दें। सही तरीका यह है कि आप अपने ट्रेनर से पहले इस बारे में जान लें कि आपकी जरूरत के हिसाब से क्या ठीक है और क्या नहीं।
कौन सा अच्छा 
प्रोटीन बढ़िया है और महंगा भी। अगर बजट से बाहर जा रहा है तो एग (अंडा) प्रोटीन भी ले सकते हैं। ये सस्ता होता है और अच्छा भी। ध्यान रहे कि सप्लीमेंट सालों-साल खाने वाली चीज नहीं है। एक बार आपने टारगेट छू लिया तो फिर थोड़े दिन शरीर और पेट को आराम दें।
पूरी कीमत वसूल करें
पहली बात तो ये कि जिस दिन जिम न जाएं उस दिन प्रोटीन पाउडर या गेनर को तय डाइट से आधा लें। प्रोटीन से सबसे ज्यादा फायदा हासिल करने के लिए उसे पूरे खाने में तब्दील कर दें जैसे केले, चीनी, दूध, मक्खन, ड्राइ फ्रूट्स डालकर उसका शेक बना लें। इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इसे आप ठंडे दूध में भी ले सकते हैं। अगर लीन बॉडी चाहिए तो टोंड दूध का इस्तेमाल करें वरना फुल क्रीम वाले दूध के साथ लें। जूस में भी ले सकते हैं। इसके अलावा खाली पेट प्रोटीन पाउडर न पीएं।
इनसे बचकर रहें
ऐसे पाउडर्स का इस्तेमाल करने से परहेज करें तो बड़ी तेजी से मोटापा बढ़ाते हों। चेहरे पर सूजन सी आ जाए या ढेरों मुंहासे आने लगें तो सा
वधान हो जाएं। या तो वो पाउडर आपको सूट नहीं कर रहा या फिर उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है।
अक्सर ऐसा देखने में आया है कि जिन प्रोटीन पाउडरों की क्वालिटी ठीक नहीं होती उनमें पानी या दूध डालने पर ढेर सारी छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं, वो आसानी मिक्स नहीं हो पाती। बहुत ज्यादा चिकने या बहुत ज्यादा भुरभुरे सप्लीमेंट भी अच्छे नहीं माने जाते।
कितना खाएं 
हर डिब्बे पर इसके बारे में लिखा होता है। वैसे अच्छी कद-काठी वाले शख्स को एक माह में दो किलो प्रोटीन पाउडर लग जाता है। बहुत कम मात्रा में खाएंगे तो मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाएगा।  

फैट्स खाएं वजन घटाएं!

वजन घटाने के लिए अक्सर हम डाइट में फैट्स  से परहेज वजन घटाने में कारगर है? हाल में हुए एक शोध की मानें तो ऐसा जरूरी नहीं है।से भरपूर चीजें खाने से परहेज करते हैं, लेकिन क्या वाकई बीएमसी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, फैट्स में मौजूद कैलोरी हमारा मोटापा बढ़ाने के लिए लिए जिम्मेदार नहीं हैं इसलिए फैटी डाइट से परहेज करके मोटापे पर काबू नहीं पाया जा सकता है। शोधकर्ता प्रोफेसर डेविड लॉरेंस के अनुसार अलग-अलग डाइट में मौजूद कैलोरी शरीर को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती है। कार्बोहाइट्रेट में मौजूद कैलोरी वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है न कि फैट्स में मौजूद कैलोरी।
डेविड ने अपने शोध से मिलती-जुलते कई ऐसे शोधों का समर्थन किया है जिसमें वजन घटाने और फैट्स के संबंध को लेकर ऐसे निष्कर्ष निकाले गए हैं।
क्रीम या मीट से भी घट सकता है वजन
4स्वीडन के हेल्थ एंड टेक्नोलॉजी विभाग में कार्यरत प्रोफे सर डेविड ने अपने अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है कि लो कार्बोहाइड्रेट डाइट से वजन घटाने में आसानी होती है न कि लो फैट डाइट से।
416,000 अध्ययनों पर आधारित इस शोध के आधार पर शोधकर्ताओं का मानना है कि क्रीम, मीट या ऑलिव ऑयल जैसी फैटी डाइट से वजन घटाना अधिक आसान है क्योंकि इनमें कार्बोहाइड्रेट कम होता है और फैट्स अधिक होता है।
4अगर आप भी वजन घटाने के लिए अपने पसंदीदा फैटी फूड से दूरी रख रहे हैं तो एक रिस्क लेकर देखने में क्या हर्ज है। 

कसरत का लें पूरा फायदा...

आप घंटों जिम में पसीना बहाते हैं फिर भी कसरत का वह फायदा नहीं मिल पाता जिसके आप हकदार हैं। चाहे वजन घटाना हो या फिर फिट रहना कसरत का पूरा फायदा तभी मिल सकता है जब इसके बाद आप कुछ खास एहतियात जरूर बरतें।
तुरंत न रोकें 
आप चाहें जॉगिंग कर रहे हो या फिर कोई भी हैवी एक्सरसाइज, 20 से 30 मिनट की कसरत को अचानक से न रोकें। जिस तरह कसरत शुरू करने से पहले हल्का वार्म अप जरूरी है उसी तरह कसरत खत्म करने के पांच मिनट पहले अपनी गति धीमी कर लें। इससे आपकी धड़कनों को कवरअप करने का समय मिल जाता है और धड़कनें आसानी से सामान्य हो जाती हैं।
खूब पानी पिएं 
आप कसरत में जितना पसीना बहाते हैं उससे कैलोरी तो घटती है, साथ ही शरीर का पानी भी निकलता है। ऐसे में पानी की कमी को पूरा करने के लिए कसरत के बाद जमकर पानी पीने से गुरेज न करें। अगर बहुत अधिक पसीना आता है तो नारियल पानी से लेकर तमाम तरह की स्पोर्ट ड्रिंक्स अच्छा विकल्प हैं जिनसे पानी के साथ-साथ शरीर में ऊर्जा का स्तर भी
संतुलित रहता है।
स्ट्रेचिंग
जिस तरह कसरत से पहले थोड़ी स्ट्रेचिंग जरूरी है, उसी तरह कसरत के बाद भी स्ट्रेच करना आवश्यक है। इससे न सिर्फ मांसपेशियों का तनाव कम होता है बल्कि कसरत के बाद होने वाले दर्द और थकान से भी छुटकारा मिलता है।
डाइट
कसरत की वजह चाहे कुछ भी हो, लेकिन जमकर मेहनत के बाद खाली पेट अपना रुटीन कतई न शुरू करें। कसरत के बाद सेहतमंद और भरपूर डाइट लें। 

स्टीम बाथ: हर मौसम में फायदेमंद

स्टीम बाथ सिर्फ सर्दियों में ही नहीं, यह किसी भी मौसम में फायदेमंद होता है। यह त्वचा के रोमछिद्रों को खोलता है और अंदर से साफ करता है, जिससे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। इस तरह ऑक्सीजन मिलने से त्वचा की मृत कोशिकाएं निकल जाती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।
दिनभर की थकान मिटानी हो या फिर तनाव से मुक्ति पानी हो, स्टीम बाथ इन सबके लिए एक कारगर उपाय है। यह तन-मन को राहत देता है। कई लोग इसका इस्तेमाल वजन कम करने के लिए भी करते हैं।
इम्यूनिटी बढ़ाए 
नियमित रूप से स्टीम बाथ लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। स्टीम बाथ लेने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं। इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर रोगों से दूर रहता है। यह सर्दियों में फ्लू से भी दूर रखता है। साथ ही बंद नाक को खोलकर आराम देता है।
कैंसर से रखे दूर
स्टीम बाथ का तापमान 106 से 110 डिग्री फारेनहाइट होता है, जो कैंसरकारी तत्वों को नष्ट कर देता है। साथ ही किसी भी प्रकार के संक्रमण से शरीर को दूर रखता है।
बाहर निकाले विषैले तत्व
स्टीम और सोना बाथ शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने का सबसे बेहतरीन उपाय है। स्टीम बाथ से निकलने वाले पसीने के साथ ही शरीर के नुकसानदेह टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। अगर अधिक धूम्रपान करने वाला स्टीम रूम में बैठ जाए तो उसके तौलिये में पीले रंग का कुछ शेष नजर आएगा। मसाज के बाद स्टीम बाथ लेने से दोगुना आराम मिलता है। यह सिर से पांव तक पूरे शरीर और मांसपेशियों को आराम देता है। तनाव भी दूर करता है। स्टीम बाथ के बाद वार्म शॉवर लेने से रात में नींद बहुत अच्छी आती है। स्टीम से रक्त संचार बढ़ता है। यह बिना ब्लड प्रेशर बढ़ाए नाड़ी की गति को बढ़ाने में मदद करता है। क्योंकि गर्माहट के कारण रक्तवाहिकाएं फैल जाती हैं और रक्त संचार तेज हो जाता है। इस तरह त्वचा में पोषक तत्वों का संचार होता है, जो उसे सौम्य, कोमल और कांतिमय बनाता है।
ये ना लें स्टीम बाथ
हृदय रोगी और कार्डियोवस्कुलर एक्टीविटी करने वालों को स्टीम बाथ नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा गर्भवती स्त्रियों, जिन्हें बुखार हो और
शिशु को स्टीम बाथ नहीं लेनी चाहिए।
कुछ सावधानी भी 
स्टीम बाथ तब तक लें जब तक कि आपको आराम मिले, लेकिन ट्रीटमेंट के तौर पर एक बार में 15 मिनट से अधिक न लें। अगर किसी भी प्रकार की समस्या या दिक्कत हो तो स्टीम बंद कर दें। स्टीम बाथ से पसीना बहुत निकलता है। इसलिए पानी खूब पी लें। स्टीम लेने से पहले एक गिलास भर कर पानी जरूर पी लें। ट्रीटमेंट के बाद कुछ तरल पदार्थ जरूर लें। नीबू, नमक पानी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। स्टीम रूम में जाने से पहले शॉवर ले लें। बाथ लेने के बाद कमरे के तापमान में पहले सामान्य अवस्था में आएं फिर ठंडे या गर्म पानी से नहाएं। अगर आप दोबारा स्टीम सेशन लेना चाहती हैं तो पहले सामान्य अवस्था में आएं। 

दुबले हैं तो क्या हुआ

पहनावे से जुड़ी समस्याएं जितना मोटे लोगों को सताती हैं उससे कम बहुत दुबले लोगों के लिए नहीं होती हैं। पोशाक अगर अधिक टाइट हो तो भी बुरा लगता है और ढीली हो तो शरीर हैंगर जैसा लगने लगता है।
ऐसे में दुबली कद-काठी वाले लोग अगर थोड़े हेल्दी दिखना चाहते हैं तो पहनावे में ये बदलाव बड़े काम के साबित हो सकते हैं। जानिए पहनावे से जुड़े ऐसे आसान उपायों के बारे में, जिनकी मदद से आप अपना दुबलापन आसानी से छिपा सकते हैं।
लेयर ड्रेसिंग 
 एक साथ कई पोशाकों का कॉम्बिनेशन
पहनने से भी शरीर भरा पूरा दिखता है। आप शर्ट के साथ कॉटन जैकेट या स्कार्फ जैसे कॉम्बिनेशन बना सकते हैं। सर्दियों का मौसम इस मामले में बेहतर है जब आप शर्ट के साथ हाफ जैकेट फिर कोट जैसे आप्शन ट्राइ कर सकते हैं।
हैवी एक्सेसरीज न लें 
 बहुत हेवी एक्सेसरीज जैसे बड़े सनग्लास, बड़ा बैग या बहुत बड़े डायल वाली घड़ी आदि से बचें। इससे आपकी बनावट का प्रपोर्शन सही नहीं लग सकता है और आप अधिक दुबले लगेंगे।
फिटिंग पर दें ध्यान
बहुत अधिक ढीले या ओवर साइज कपड़े जितने बुरे लगेंगे उतने ही बुरे बहुत टाइट कपड़े भी लगेंगे। ऐसे में कपड़ों की फिटिंग बिल्कुल सामान्य होनी चाहिए जिससे आपका दुबलापन उभरकर न दिखे।
वर्टिकल स्ट्राइप से बचें 
वर्टिकल लाइन्स वाले प्रिंट स्मार्ट जरूर लगते हैं लेकिन बहुत दुबले लोगों पर नहीं। बहुत दुबले लोगों पर ऐसा प्रिंट उन्हें और भी दुबला लुक देता है इसलिए इससे बचें। 

ऐसे सुलझाएं बालों की उलझन

उलझे बालों को सुलझाना निश्चित ही महिलाओं के लिए बड़ी समस्या है। उचित देखभाल की कमी व सही पोषण न मिलने के कारण बाल रूखे व बेजान हो जाते हैं। और इन्हीं सब कारणों से वे टूटकर गिरने लगते हैं।
अक्सर महिलाएं यह चाहती हैं कि उनके बाल ऐसे हों, जिन्हें ज्यादा समय देने की जरूरत ना पड़े। बस कुछ ही मिनटों में उन्हें मनचाहा हेयर स्टाइल मिल जाए, लेकिन, उलझे बालों के साथ ऐसा संभव नहीं है। कुछ ऐसे टिप्स जो आपके उलझे बालों को सुलझाने में आपकी मदद करेंगे।
कैसे सुलझाएं बालों को 
बालों को कभी भी जड़ से नीचे तक ना सुलझाएं। इससे उलझे बाल नीचे तक टूटेंगे। बालों को सुलझाने के लिए एक-एक लट को धीरे-धीरे हल्के हाथों से सुलझाना ही अच्छा रहेगा। बालों को सुलझाने के लिए हमेशा चौड़े दांत वाले कंघे का प्रयोग करें।
कंडीशनर है जरूरी  
शॉवर लेने के बाद कंडीशनर इस्तेमाल जरूर करें। इनके इस्तेमाल से बाल नरम व मुलायम हो जाते हैं, जिससे  सूखने के बाद उन्हें सुलझाना आसान हो जाता है। बालों में जेल लगाने से बाल रूखे हो सकते हैं।
ब्लो ड्राइ से बचें
बालों को सुखाने के लिए ब्लो ड्राइ करने से बचें। इससे निकलने वाली गर्मी बालों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। इससे बाल ज्यादा सूख सकते हैं, जो बाद में उलझकर टूटने लगते हैं। इसलिए अच्छा तो यही रहेगा कि बालों को प्राकृतिक रूप से ही सूखने दें।
माइल्ड शैंपू प्रयोग करें 
बालों में हमेशा माइल्ड शैंपू का प्रयोग करना चाहिए। इससे बालों में रुखेपन की समस्या से निजात मिलेगी। माइल्ड शैंपू बालों को नुकसान नहीं पहुंचाते। हफ्ते में तीन बार बालों को शैंपू करना ठीक रहता है।
सामान्य पानी से धोएं 
बालों को हमेशा सामान्य पानी से धोना चाहिए। अधिक गरम या ठंडा पानी बालों को रूखा व बेजान बना देता
है, जो बालों के उलझने की मुख्य वजह है।
तेल मालिश 
बालों को समय-समय पर तेल लगाते रहना चाहिए। इससे बालों को पोषण मिलता रहता है। इससे वे कम उलझते हैं. अगर आपके पास समय की कमी है तो रात को सोते समय तेल लगाएं और सुबह शैंपू कर लें।
बालों को कवर करें 
घर से बाहर निकलने से पहले बालों को कवर करना ना भूलें। धूल मिट्टी व प्रदूषण के कारण बाल उलझकर टूटने लगते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि बालों को कवर करके ही बाहर निकलें।
बालों को खुला ना छोड़ें
उलझे बालों से निपटने के लिए जरूरी है कि उन्हें खुला ना छोड़े बालों में बैंड, कल्चर व जूड़ा के जरिए उन्हें बांधकर रखें। इससे बाल ना ही टूटेंगे और ना ही उलझेंगे।
हॉट ऑयल चंपी
नारियल का तेल,ऑलिव आयल और बादाम के तेल को मिला कर,गुनगुना करके बालों की जड़ों पर मालिश करें और गरम पानी से निचोड़े तौलिये से सिर को लपेटें। एक घंटे के बाद या अगले दिन बालों को नमी प्रदान करने वाले शैंपू से बालों को ध्ाो लें।  

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2013

स्लिम रहना है तो आदर्श नींद लें

अगर आपको स्लिम रहना है तो आदर्श नींद लें। यदि जरूरत से ज्यादा या कम नींद ली तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकती है। यह आपकी खूबसूरती आपसे छीन सकती है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि   जरूरत से ज्यादा और कम (छह घंटे से कम और नौ घंटे से ज्यादा) नींद लेने से व्यक्ति मोटा हो जाता है। 
वैज्ञानिकों के अनुसार नींद के दौरान शरीर में मौजूद हार्मोस प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि कम या ज्यादा नींद का असर हमारे-आपके वजन पर पड़ता है।  अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. फिलिप का कहना है कि इस बात का सबूत मिल गया है कि कम या ज्यादा सोने से भविष्य में शरीर पर चर्बी जमा होने की आशंका  बढ़ जाती है।

फिलिप के मुताबिक इस अध्ययन में वातावरण को आवश्यक रूप
से शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि वजन के कम या ज्यादा होने में इसका भी योगदान रहता है। पांच साल के अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पर्याप्त नींद नहीं लेने वाले लोगों का वजन उन लोगों की तुलना में कई किलो अधिक हो गया जो लोग सात से आठ घंटे की नींद लेते थे। इस अवधि से अधिक सोने वालों का वजन भी आदर्श अवधि की नींद लेने वालों की तुलना में थोड़ा सा बढ़ गया था। आदर्श अवधि की नींद लेने वालों की तुलना में कम सोने वाले 27 प्रतिशत लोग अधिक मोटे हो गए थे, जबकि ज्यादा सोने वाले 21 प्रतिशत लोग अधिक मोटे हो गए थे। 

बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

नास्ता जरूर करें, पर ऑयली और स्पाइसी नहीं

अक्सर लोग सुबह की भागदौड़ व काम का अत्यधिक दबाव होने के कारण नाश्ता नहीं करते हैं और फिर भूख लगने पर फास्ट फूड का सेवन करते हैं। डॉक्टरों की मानें तो आपकी यह आदत सेहत के लिए ठीक नहीं है। सुबह का नाश्ता हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि हमें सुबह की भागदौड़ व अन्य शारीरिक कार्य के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है और यह ऊर्जा हमें नाश्ते में ही मिल सकती है।
एक आहारविज्ञ के अनुसार दिन की शुरुआत के लिए तेलयुक्त या तला खाना ठीक नहीं है। कुछ आहार विशेषज्ञों ने उन भोज्य पदार्थों की एक सूची साझा की है, जिनसे परहेज करना चाहिए।
उनका कहना है कि तेल या घी में डूबे पराठे बिल्कुल न खाएं। अगर आपको उन्हें खाने की इच्छा हो तो बिल्कुल हल्के तेल या घी से उन्हें सेकें। उन पर अतिरिक्त घी और तेल लगाने से बचें। साथ ही इनका सेवन दही के साथ किया जाए तो ज्यादा अच्छा है।
छात्रावास में रहने वालों के लिए आलू-पूड़ी एक आम नाश्ता है। यह स्वास्थ्यकर विकल्प नहीं है। अगर कोई विकल्प नहीं हो तो पूड़ी एक टीशू या कागज पर रखें। कागज उसका अतिरिक्त तेल सोख लेगा। जंक फूड जैसे चिप्स, तले हुए फास्ट फूड और शीतल पेयपदार्थ या मीठा जैसे टॉफी के सेवन से बचें।  

व्रत में कुछ बातों का रखें ख्याल

नवरात्र हों या कुछ और अवसर। आप काफी दिनों तक व्रत रखने का विचार पक्का करने से पहले कई चीजों पर गौर कर लीजिए। नौ दिन का फास्ट रखना तो ठीक है लेकिन इसके साथ-साथ सेहत का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है। खासतौर से व्रत के  दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की मानें तो जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को व्रत करने से बचना चाहिए।
 इंसुलिन ले रहे हैं तो रहें होशियार
लाइफस्टाइल डिजीज में शामिल डायबिटीज के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे रोगियों के लिए व्रत रखना हानिकारक साबित हो सकता है। जो लोग शुगर कंट्रोल के लिए इंसुलिन ले रहे हैं तो वे फास्ट से दूर ही रहें और दवा लेने वाले जरूरी एहतियात बरतें। उन्हें फल और अन्य फलाहार लेते समय कैलोरी लेवल का बहुत ख्याल रखना होगा। गर्भवती महिलाओं, टीबी, एनीमिया और लंबे समय से बीमार लोगों को व्रत नहीं करना चाहिए।
संतुलन बनाकर रखें
फास्ट के दौरान नमक और अनाज लेने की मनाही होती है इसलिए लोग फल, सब्जियां, दूध, दही सहित अन्य चीजों को बराबर लेते रहें। दिन में तीन बार संतुलित डाइट के साथ पेय पदार्थ भी लेते रहने से कमजोरी नहीं होती। व्रत करने वाले लोगों को अत्यधिक मात्रा में कैलोरी लेने से बचना चाहिए, साथ ही तली चीजों से भी। जैसे आलू को उबालकर और मखाने को रोस्ट करके खाना चाहिए।
खाली अर्ली मॉर्निंग वॉक या वर्कआउट से बचें  
जो लोग रेग्युलर एक्सरसाइज करते हैं उन्हें फास्ट के दौरान खाली पेट अर्ली मॉर्निंग वॉक या वर्कआउट से बचना होगा। इससे कमजोरी फील हो सकती है। इससे बचने के लिए हल्की कैलोरी ले सकते हैं। जिन चीजों से परहेज है, उन्हें बिल्कुल प्रिफर न करें। जिम संचालक की मानें तो फास्ट के दौरान दोनों टाइम के बजाय केवल मॉर्निंग में ही एक्सरसाइज करें तो ठीक रहेगा, क्योंकि शाम को लोगों का एनर्जी लेवल काफी कम हो जाता है और एक्सरसाइज करने से उन्हें वीकनेस फील हो सकती है। अगर फास्ट रखा है, तो जिम में जाने के बाद ट्रेनर को इसकी जानकारी जरूर दें।
 इस पर ध्यान दें 

  • नाश्ता जरूर लें वरना खाली पेट गैस बन सकती है। जैसे मखाने को तेल में तलने के बजाय रोस्ट करके खाएं। केला भी ले सकते हैं। 
  • लंच में सिंघाड़े के आटे की पूड़ी खाने के बजाय रोटी या पराठा लें। आलू को तवे पर सेक सकते हैं। सलाद में खीरा और टमाटर उपयोग करें। 
  • फास्ट में सादा पानी पीने से अच्छा है कि दूध, लस्सी, फ्रूट जूस लेते रहें। 
  • मिठाई में फैट और कैलोरी दोनों ज्यादा होती है इसलिए दिनभर में एक पीस से अधिक न लें। 
  • समई के चावल (मोरधन) ले सकते हैं, इसमें कैलोरी कम होती है और इसे बेहतर फाइबरस माना गया है। 


सेब खाएं, मगर जूस से दूरी बनाएं

'एन एपल ए डे कीप द डॉक्टर अवे" जी हां, सेब के बारे में लगभग सभी को यह पता है कि रोज एक सेब का सेवन डॉक्टर को खुद से दूर रखने में मदद करता है। सेब के अनेक फायदे हैं, जिनकी वजह से सेब हमेशा सेहतमंद माना जाता है। लेकिन अगर सेब नहीं है तो क्या सेब का जूस भी उतना ही फायदेमंद है जितना सेब, जवाब है 'नहीं"।
बाजार में बिकने वाले सेब के जूस का स्वाद भले ही कितना भी लाजवाब क्यों न हो लेकिन इसकी कुछ ऐसी कमियां हैं जिन्हें जानने के बाद आप जूस के बजाय सेब खाना ही फायदेमंद समझेंगे।
आर्सेनिक तत्व
सेब के जूस में आर्सेनिक तत्व भी होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद नहीं हैं। यही वजह है कि कुछ समय पहले फूड एंड ड्रग ऑर्गेनाइजेशन (एफडीए) ने जूस बनाने वाली कंपनियों को आर्सेनिक की मात्रा सीमित करने और लेबल पर दिखाने के निर्देश दिए हैं।
*कैलोरी की अधिकता :
बाजार में बिकने वाले सेब के जूस में कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में होती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है।
 केमिकल्स 
डिब्बाबंद सेब के जूस को प्रिजर्व करने के दौरान उनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर, फ्लेवर और कई प्रकार के प्रिजर्वेटिव्स मिलाते हैं, जो सेब के पौष्टिक तत्वों को नष्ट कर देते हैं।
 शकर की अधिकता
सेब की अपेक्षा जूस में शक्कर की अधिकता होती है, जिस वजह से इसका अधिक सेवन शरीर में इन्सुलिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में शकर की वजह से दांतों पर भी इसका असर होता है।
पौष्टिकता पर सवाल
सेब में जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स के साथ-साथ फाइबर पर्याप्त मात्रा में होते हैं, लेकिन जूस बनाने की प्रक्रिया में कई जरूरी पोषक तत्व तो नष्ट होते ही हैं, फाइबर भी नहीं रहता। बेहतर विकल्प है कि सेब के जूस के बजाय नियमित रूप से सेब ही खाएं। 

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2013

दुनिया के 400 शीर्ष विश्वविद्यालयों में पांच भारतीय

 दुनिया की टॉप-400 यूनिवर्सिटी की सूची में भारत की स्थिति  पहले से सुधरी है। इस सूची में वर्ष 2012 में जहां तीन विश्वविद्यालय थे वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर पांच हो गई है।'टाइम्स हॉयर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग" (टीएचईडब्ल्यूयूआर) 2013-14 में पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी को स्थान मिला है, जिसे 226-250 समूह में रखा गया है। इसके साथ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली और कानपुर ने 351-400 के समूह में स्थान प्राप्त किया है, जबकि आईआईटी खड़गपुर की रैंकिंग में गिरावट आई है। इसे 226-250 के समूह से खिसकाकर 351-400 के समूह में रखा गया है। हालांकि, आईआईटी रुड़की ने 351-400 के समूह में अपना स्थान बरकरार रखा है।
टीएचईडब्ल्यूयूआर के संपादक फिल बटी ने कहा कि इस परिणाम से भारत का उत्साह बढ़ना चाहिए क्योंकि टॉप-200 यूनिवर्सिटी में भारत का एक भी संस्थान नहीं है, जबकि टॉप-400 विश्वविद्यालयों में अब इसके पांच विश्वविद्यालय शामिल हो गए हैं।  जो वैश्विक रैंकिंग में बढ़ रही प्रतिबद्धता का संकेत है। टीएचईडब्ल्यूयूआर के रैंकिंग विशेषज्ञ एलिजाबेथ गिबने ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि भारत दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
शीर्ष पर कौन-कौन
टॉप-400 रैंकिंग में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए लगातार तीसरे साल पहला स्थान हासिल किया है। जबकि दूसरे स्थान पर संयुक्त रूप से हॉवर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड को रखा गया है। पिछली बार हार्वर्ड विवि चौथे स्थान पर था। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी दूसरे नंबर से खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गई है। इनके अलावा रैंकिंग के टॉप-10 में मेसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (पांचवां), प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (छठा), यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज (सातवां), बर्कले (आठवां), यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (नौवां) व  इम्पीरियल कॉलेज लंदन (दसवां) शामिल हैं। 

बुढ़ापे से दूरी बनाना है तो खाने से करें मुहब्बत

सेहतमंद संतुलित खाना आपको कई तरह की बीमारियों से दूर रखता है। यह बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करता है और पूरी तरह से फिट रखने में मदद करता है। कुछ ऐसे ही खाद्य पदार्थ, जिसमें मौजूद पोषक तत्च अपने विशेष गुणों से युक्त होने के कारण कई प्रकार की शारीरिक प्रक्रियाओं को पूरा करता है और बीमारियों से बचाता है।
बढ़ता है मेटाबॉलिज्म
विटामिन 'डी" से भरपूर मशरूम शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा का संचार कर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और उन्हें बेहतर तरीके से काम करने में सहायता करता है। इससे जुड़े अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि विटामिन 'डी" मोटापा कम करने, टाइप 2 डाइबिटीज, हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोपोरोसिस और कुछ खास प्रकार के कैंसर से लड़ने में मददगार है। लेकिन अधिकांश लोगों में इसकी कमी पाई जाती है। सूर्य की किरणें विटामिन 'डी" के सबसे बेहतरीन स्रोतों में से एक मानी जाती हैं, लेकिन हर मौसम में इस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। बोस्टन यूनिवसिर्टी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोध में यह बात सामने आई है कि मशरूम भी विटामिन के बेहतर विकल्पों में से एक है।
दिमाग करता है दुरुस्त
बैरीज् के फायदों को लेकर कई तरह के शोध हो चुके हैं, जिसमें साबित हुआ है कि यह मोटापा कम करने, इंसुलिन का स्तर कम करने, हृदय रोगों से बचाव करने, कैंसर, उच्च रक्तचाप और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करता है। हाल ही में टफ्ट्स की एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बैरीज् मस्तिष्क के टॉक्सिस एलीमेंट्स को शरीर से बाहर निकालने का काम भी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार बैरीज् अल्जाइमर्स और पार्किंसन की आशंका को कम करने का काम करता है।
मोटापा करता है दूर 
अंगूर को बैरीज् के परिवार का फल माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट फ्लेवनॉइड्स पाया जाता है, जो रक्तसंचार को बेहतर बनाता है और हृदय रोगों को दूर रखता है, खून के थक्के जमने की समस्या दूर करता है और बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। यूनिविर्सिटी ऑफ मिशिगन के अध्ययन में यह पाया गया है कि लाल, हरे और काले अंगूर न केवल एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा को बढ़ाते हैं बल्कि सूजन कम करने, लिवर और पेट की चर्बी को कम करने का काम भी करते हैं। मेटाबॉलिक सिंड्रोम जिसके कारण हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है, उसके खतरे को भी कम करता है।
 ब्लड प्रेशर करता है कम
प्राकृतिक रूप से मीठा चुकंदर का रंग भी काफी गहरा होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सर होते हैं। कुछ शोधों में यह बात सामने आई है कि चुकंदर कैंसर की आश्ांका को कम करता है और एथेलिटिक योग्यता को बढ़ाता है। 'अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल हाइपरटेंशन" में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग नियमित रूप से चुकंदर का जूस पीते हैं, उससे हाई ब्लड प्रेशर में काफी फायदा होता है और इसका स्तर नियंत्रित हो जाता है।
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If you want to stay away from old age, then love to eat


Healthy balanced food keeps you away from many diseases. It reduces signs of aging and helps to keep fit perfectly. Some similar foods, which contain nutritional elements with their special properties, carry out many types of physiological processes and prevent diseases.

Metabolism increases

Vitamin 'D "rich mushrooms strengthen the muscles by transmitting energy to the cells of the body and help them function better. Studies related to this have revealed that vitamin' D" reduces obesity, It is helpful in fighting against type 2 diabetes, heart diseases, high blood pressure, osteoporosis and certain types of cancer. But it is found lacking in most people. Sun rays are considered one of the best sources of vitamin "D", but cannot be relied upon in all climates. Research from the Boston University School of Medicine has revealed that mushrooms are also superior to vitamins Is one of the options.

Mind fixes

Numerous researches have been done on the benefits of barries, which have been proven to reduce the risk of obesity, lower insulin levels, prevent cardiovascular diseases, cancer, hypertension and osteoporosis. Recently, in a research report by Tufts, it has been revealed that the Barrys also work to get the brain's toxic elements out of the body. According to the report, Barry's works reduce the risk of Alzheimer's and Parkinson's.

Does obesity go away

The grape is considered to be the fruit of the family of Barries. It contains antioxidant flavonoids, which improves blood circulation and keeps cardiovascular diseases, eliminates the problem of blood clotting and reduces bad cholesterol levels. A study by the University of Michigan has found that red, green and black grapes not only increase antioxidant levels but also work to reduce inflammation, reduce liver and abdominal fat. Metabolic syndrome that increases the risk of heart disease, stroke and type 2 diabetes also reduces the risk.


 Blood pressure low

Naturally sweet beetroot is also darker in color. It contains plenty of vitamins, minerals, antioxidants and a naturally occurring detoxer. Some research has revealed that sugar beet reduces the risk of cancer and enhances athelic capacity. According to a report in the "American Heart Association Journal Hypertension", people who drink beetroot juice regularly have a great benefit in high blood pressure and its levels are controlled.

Dharmendra Singh    movetonature.blogspot.com

बच्चों के दिमाग के लिए खतरा हैं ये पेय

रोज बादाम खिलाकर अगर आप अपने बच्चों का दिमाग तेज करने की जुगत में जुटे रहते हैं तो उसके मानसिक विकास पर मंडराने वाले खतरे के बारे में आप जरूर जानना चाहेंगे।
स्विट्जरलैंड में एक शोध के मुताबिक किशोरावस्था में बहुत अधिक कोला, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन, बच्चों के दिमाग के विकास की गति धीमी कर सकता है। शोध के अनुसार कोला, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन किशोरों की नींद को प्रभावित करता है, जिससे उनके मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि इनके अधिक सेवन से किशोरों को स्मृतिभ्रम, घबराहट, नशाखोरी और व्यवहार संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
इतनी मात्रा है घातक 
शोधकर्ताओं ने चूहों पर शोध करके यह निष्कर्ष निकाला है कि बहुत अधिक मात्रा में कोला, एनर्जी ड्रिंक और कॉफी का सेवन किशोरों को नुकसान पहुंचाता है। शोध में उन्होंने पाया कि 300 मिलीग्राम से लेकर 400 मिलीग्राम तक कैफीन यानी प्रतिदिन चार कैन कोल्ड ड्रिंक्स या तीन से चार कप कॉफी किशोरों के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
नींद से है संबंध
शोधकर्ता प्रोफेसर रेटो ह्यूबर के अनुसार ''दिमाग की सेटिंग नींद के दौरान व्यवस्थित होती है। इन ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन हमारी नींद पर विपरीत असर डालता है। जिससे अनिंद्रा के कारण दिमाग रिफ्रेश भी नहीं हो पाता है।"" इस शोध का विस्तृत विवरण 'पीएलओएस जर्नल" में प्रकाशित हुआ है। 

बाल पतले हैं तो भी कोई फिक्र नहीं

जिन महिलाओं के बाल पतले व हल्के होते हैं वे समझ नहीं पाती हैं कि उन पर कौन सा हेयर स्टाइल सूट करेगा। जिसकी वजह से वे सही हेयर स्टाइल और कट का चुनाव नहीं कर पाती हैं। ज्यादातर महिलाएं पतले बाल होने के कारण बालों को खुला रखने में या किसी भी प्रकार का हेयर स्टाइल अपनाने में हिचकती हैं। ऐसे ही पलते व हल्के बालों को खूबसूरत लुक देने के लिए हम लेकर आए हैं कुछ खास हेयर स्टाइल। जानें, किस तरह ये हेयर स्टाइल आपके व्यक्तित्व में चार चांद लगा सकती हैं।
घने स्ट्रेट फ्रिंज
यह हेयर स्टाइल आपके बालों को हैवी लुक देता है। इस कट में आपके सामने के बालों को इस प्रकार काटते हैं कि माथे पर सीधे फ्रिंज लटकते हैं, जो आइब्रो तक हो सकते हैं। यह कट कम उम्र या कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए बिल्कुल परफेक्ट हो सकता है।
 लेयर्स कट
पतले बालों पर बहुत ज्यादा प्रयोग करने की कोशिश ना करें। अगर आप सॉफ्ट लेयर्स के साथ शोल्डर लेंथ तक कट करवाएंगी, तो आपके बाल थोड़े घने दिखेंगे। आप सॉफ्ट वेव्स या पर्म भी करा सकती हैं। बालों को घना दिखाने के लिए हाइलाइट्स करा सकती हैं। सॉफ्ट टेक्सचर्ड बॉब भी आपके बालों पर अच्छा दिखेगा।
साइड बैंग्स
स्ट्रेट फ्रिंज जैसे ही कट को जब आप तिरछी मांग से सेट करते हैं तो यह साइड बैंग्स हो जाता है। इसमें बाल आंखों पर नहीं पड़ते इसलिए इसमें आराम भी अधिक महसूस होता है।
 साइड पार्टिंग
अगर आपके आगे के बाल लंबे हैं तो यह हेयरस्टाइल आप पर अधिक अच्छी लगेगी। इसमें बाल तिरछी मांग से निकालकर माथे को ढंकते हुए पीछे ले जाते हैं। चाहें तो पीछे से इन्हें पिन करके चोटी कर लें, खुला छोड़ दें या फिर पफ का इस्तेमाल करें।
आड़े-तिरछे फ्रिंज
अगर आपके सिर पर बाल बहुत ही हल्के हैं और माथा अधिक चौड़ा है तो इस हेयरस्टाइल में आप फबेंगे। इसमें फ्रिंज यानी लेयर्स को कुछ इस तरह काटते हैं कि बालों का कोई एक आकार न दिखे। यानी अलग-अलग आकार के ढेर सारे फ्लिप्स।
मेस्सी बॉब
बॉब कट तो हल्के बालों पर अच्छे लगते ही हैं लेकिन इन्हें शॉर्ट फ्रिंज के साथ बनाया जाए तो ये और भी अच्छे लगेंगे। साथ ही आपके बाल घने भी दिखेंगे।
मेस्सी ब्लंट कट
इसमें ढेर सारे छोटे फ्रिंज के साथ ब्लंट कट दिया जाता है। इसे कैरी करना जितना आसान है, आपके मैच्योर लुक को छिपाने में यह उतना ही कारगर है।  

घर में मौजूद सामान से रहें संभलकर

आपको जानकर शायद आश्चर्य हो सकता है, लेकिन आपके घर में मौजूद कई ऐसी चीजें हो सकती हैं जो गर्भावस्था के दौरान अबॉर्शन की वजहें भी बन जाती हैं! हाल में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध में माना गया है कि प्लास्टिक की बोतलों से लेकर मेकअप, शैंपू, डियोडरेंट आदि कई चीजों में इस्तेमाल होने वाला बाइस्फेनॉल ए (बीपीए) नामक रसायन के संपर्क से गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस शोध की तर्ज पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस केमिकल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रहा है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान प्लास्टिक बोतल, सनग्लास, सीडी केस आदि कई चीजों में मौजूद बीपीए की मात्रा और गर्भवती महिलाओं पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है। शोधकर्ता डॉ रूथ लैथे के अनुसार- इस अध्ययन के आधार पर हम मान सकते हैं कि बीपीए नामक केमिकल से बनी चीजों से दूरी रखकर महिलाओं को ऐसे गर्भपात से बचाया जा सकता है जिसकी वजह पता नहीं चल पाती है।
उन्होंने यह भी माना कि इस केमिकल से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं है पर सतर्कता जरूर बरती जा सकती है, मसलन गर्म भोजन सीधे प्लास्टिक के बर्तन में न निकालें या डिब्बाबंद डाइट आदि कम लें।
इसके अलावा अन्य शोध के दौरान वर्ष 2005 से लेकर 2009 तक गर्भधारण के प्रयास में जुटे 501 जोड़ों का अध्ययन किया गया है। जिसमें पाया गया कि बीपीए के साथ-साथ थैलेट्स की मात्रा भी प्रजनन क्षमता को कम करती है।
इस शोध में बीपीए को महिलाओं और थैलेट्स को पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए खतरा माना गया है। 

बच्चों के बेहतर बिहेवियर के लिए तय करें सोना

 पैरेंट्स के लिए यह ध्यान देने की बात है कि वे बच्चों की नींद और उनके सोने के समय पर पूरा ध्यान दें। वैसे भी दिनचर्या को लेकर शुरू से ही जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाली जाए तो यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक होती है। हाल ही में किए एक नए शोध में यह पाया गया है कि जिन बच्चों के सोने का समय नियमित नहीं होता, उनके सामने कई तरह की बिहेवियरल प्रॉब्लम्स आती है। यानी कि ऐसे बच्चों के बिहेवियर से जुड़ी परेशानियों में फंसने के चांस ज्यादा रहते हैं, जबकि समय पर सोने वाले और पर्याप्त नींद लेने वाले बच्चों में यह समस्या देखने को नहीं मिलती है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के रिस
चर्स ने पाया कि सोने के समय के एक-सा न होने से शरीर की कुदरती लय बिगड़ जाती है और इससे नींद में कमी आती है। केवल इतना ही नहीं दिमाग स्वाभाविक रूप से मॅच्योर नहीं हो पाता और बर्ताव करने की कुछ क्षमताओं को भी कमजोर कर देता है।
क्या कहता है शोध 
एपिडेमियोलॉजी और पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर यवोन केली के मुताबिक बच्चे के शुरुआती साल उसके विकास और भावी जीवन के लिए अहम नींव तैयार करते हैं। इस शोध में पाया कि जो बच्चे न तो समय पर सोते हैं और न समय पर जागते हैं, उनमें हाइपरएक्टिविटी, परेशानी सुलझाने में दिक्कत, साथियों के साथ कई तरह की समस्याएं और इमोशनल दिक्कतें सामने आती हैं। रिसर्च में बेडटाइम और बिहेवियर के बीच सीधा रिश्ता पाया गया है। जो इस बात को दर्शाता है कि नींद का असर बिहेवियर से जुड़ा होता है जिसके लिए बचपन से एक निश्चित आदत बनाने की जरूरत होती है।   

सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

ऐसे भी बनती है रिश्तों की मजबूत बॉन्डिंग...

 संसार में जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक इंसान रिश्तों के ताने-बाने के बीच जीता रहता है। इन्हीं में वह खुद से दूसरों के साथ के जुड़ाव को देखता है और रिश्तों की यही बॉन्डिंग उसे सामाजिक जीवन निर्वहन करने में मदद करती है। कोई रिश्ता जहां वह खून के संबंधों के साथ लेकर आता है तो कुछ को उन्हें ढूंढकर निभाना होता। इनमें सबसे अहम रिश्ता होता है विवाह का। हाल ही में विवाह के रिश्ते को लेकर 'मेट्रो डॉट को डॉट यूके" की रिपोर्ट में एक अनूठे शोध के बारे में बताया गया है। इसमें इस बात को खोजने की कोशिश की गई कि वाकई कौन से विवाह संबंध ज्यादा दिनों तक चलते हैं।
क्या कहता है शोध
वर्कप्लेस पर किसी सहकर्मी के साथ की हेल्दी रिलेशनशिप को अक्सर कंपनी और साथी कर्मचारी मजाक के लहजे में लेते हैं, मगर शायद उन्हें यह जानकर आश्चर्य हो कि इस तरह के रिश्ते लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। नए शोध में खुलासा हुआ है कि ऐसे रिश्तों के किसी भी दूसरे तरीके से शुरू हुए रिश्तों के मुकाबले शादी के अंजाम तक पहुंचने की संभावना ज्यादा होती है।
किसी नाइट क्लब या अन्य जगहों में शुरू हुए रिश्ते अक्सर प्रेम प्रसंगों या एक रात के बनाए गए संबंधों तक सीमित रह जाते हैं। वहीं दूसरी ओर वर्कप्लेस पर मिलने वाले 14 प्रतिशत लोग शादी तक पहुंचते हैं जबकि दोस्तों के परिचय से मिले हुए 11 प्रतिशत लोग शादी के बंधन में बंधते हैं। साथ ही रिश्तों की यह बॉन्डिंग लंबे समय तक उनके जीवन में हैप्पीनेस देती है।
2000 युवाओं पर किया अध्ययन
यह अध्ययन 2000 ऐसे युवाओं पर किया, जो अपनी लाइफ से बेहद खुश दिखाई दिए। शोधकर्ताओं ने पाया कि 51 प्रतिशत लोगों का मानना है कि किसी से मिलने का स्थान और स्थिति भी रिश्ते की सफलता को प्रभावित करते हैं। इनमें से अधिकांश ने यह माना कि काम के दौरान शुरू हुए रिश्तों के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं 23 प्रतिशत का कहना है कि पब या नाइटक्लब से ढूंढे जाने वाले रिश्ते क्षण मात्र के होते हैं, जिनकी कोई शुरुआत ही नहीं होती तो खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता। यही वजह है कि 5 में से एक व्यक्ति ने ऐसे रिश्तों को आगे बढ़ाने से मना कर दिया, क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता सताने लगती है कि जीवन को सतही तौर पर देखा या जीया नहीं जा सकता। इसका उनके फ्यूचर पर खासा असर होता है।
इस अध्ययन को सीबीएस नेटवर्क द्वारा पूर्ण किया गया। इसके प्रवक्ता ने बताया कि काम के तनाव और ऑफिस के साथियों के साथ ज्यादा समय बिताने के कारण लोगों में इस तरह की प्रवृत्ति नजर आने लगी है, जो रिश्तों के एक मजबूत बॉन्ड को दर्शाती है।  

रात की ड्यूटी में यूं रहें हेल्दी...

नाइट शिफ्ट वर्कर्स की वर्किंग साइकल बिल्कुल उलट हो जाती है इसलिए खाने-पीने की आदतों में लापरवाही हो सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप अपनी डाइट और सेहत से समझौता करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाइट शिफ्ट वर्कर्स की डाइट, डे वर्कर्स से बिल्कुल भी अलग नहीं है। बस नाइट वर्कर्स के पास खाद्य सामग्रियों के विकल्प कम होते हैं।
नाइट वर्कर्स के लिए हेल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि उन्हें तलीगली और अधिक वसा वाली चीजें खाने की आदत पड़ जाती है। उन्हें लगता है कि पेट ही तो भरना है इसलिए कुछ भी खाकर काम चला लेते हैं।
डिनर में आप रोटी, दाल, सब्जी, दही, सलाद या फिर सांभर, सब्जी, कर्ड राइस, ले सकते हैं। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो साबुत अनाज वाले ब्रेड से तैयार सैंडविच, उबले अंडे और फल या फिर सलाद ले सकते हैं।
ऑफिस में डिनर से पहले भूख लगे तो नट्स, पॉपकॉर्न, होल ग्रेन बिस्किट्स लें। पीनट्स, कद्दू के बीज, बादाम, अखरोट, किशमिश मुरमुरे, रोस्टेड चना, रोस्टेड कॉर्न को मिलाकर हल्का नमक डालकर खाने से ऊर्जा मिलती है। ऑफिस में शरीर में नमी को बनाए रखें, इसलिए सोडा या कोला लेने की जगह ग्लूकोज वॉटर, नीबू पानी, हर्बल टी और सूप ले सकते हैं।
नाइट शिफ्ट पर जाने से पहले हैवी स्नैक्स ना लें, इससे काम करने में सुस्ती महसूस होगी। ऑफिस जाने से पहले आप चटनी, ब्राउन राइस, वेजीटेबल पोहा, वेजीटेबल दलिया या दूध कॉर्नफ्लेक्स ले सकते हैं जो कि हल्का होने के साथ-साथ पेट भरे होने का अहसास कराते हैं।
नाइट शिफ्ट में काम करने वालों को हैवी खाना खाकर नहीं सोना चाहिए, इससे शरीर में अनावश्यक फैट जमा हो जाता है।

  • ज्यादा से ज्यादा फल और जूस लें, कई बार ऐसे लोग रात में दूध पीकर ही सो जाते हैं।
  • लेट नाइट वर्कर्स कॉफी और चाय सबसे ज्यादा पीते हैं, जो काफी नुकसानदायक होता है। ऑयली चीजें कम से कम लें और उबली हुई चीजों को डाइट में शामिल करें।  

किडनी में स्टोन: सावधानी समस्या का समाधान

किडनी में स्टोन का दर्द यकीनन असहनीय है लेकिन दवाओं से इसे यूरीन के रास्ते निकाला जा सकता है। ऐसे में डाइट में कुछ सावधानियां बरतने से किडनी के स्टोन से छुटकारा पाना आसान हो सकता है।
अधिक से अधिक पानी पीएं
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अधिक से अधिक पानी पीते रहें, जिससे किडनी में जमा स्टोन या टॉक्सिक यूरीन के प्रवाह के साथ निकल जा
एं। प्रतिदिन चार लीटर पानी का सेवन किडनी से स्टोन हटाने में मदद करता है।
 नींबू या एप्पल साइडर विनेगर 
डाइट में नींबू व एप्पल साइडर विनेगर की मात्रा बढ़ाएं। इससे शरीर के टॉक्सिक तत्वों को निकालने में आसानी होती है।
 कैल्शियम की अधिकता वाली डाइट 
डाइट में ऐसी चीजों की मात्रा बढ़ाएं, जिनमें कैल्शियम की अधिकता हो। 'क्लीनिकल जर्नल ऑफ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी" के शोध की मानें तो कैल्शियम ऑक्सलेट की अधिकता वाली डाइट किडनी में जमा स्टोन को तोड़ने और बाहर निकालने में मदद करती है। दूध, मक्खन, नट्स आदि का सेवन फायदेमंद है।
 सोडा के सेवन से बचें 
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए सोडा ड्रिंक से संबंधित कई भ्रांतियां हैं, लेकिन असलियत यह है कि सोडा में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड की अधिकता किडनी में स्टोन को बढ़ाती है।
 लो ऑक्सलेट डाइट लें 
ऑक्सलेट की कमी वाली डाइट किडनी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। काली चाय, अनाज, नट्स आदि का सेवन किडनी का स्टोन हटाने में फायदेमंद है।
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Kidney stone: Caution solve the problem

Stone pain in the kidney is unbearable, but drugs can be removed through urine. In this case, taking some precautions in the diet can make it easier to get rid of kidney stone.

Drink more water

It is important for patients with kidney stones to drink as much water as possible, thereby removing the flow of stone or toxic urine in the kidney.
A. Consuming four liters of water daily helps remove stones from the kidney.

 Lemon or Apple Cider Vinegar

Increase the amount of lemon and apple cider vinegar in the diet. This helps in removing the toxic elements of the body.

 Calcium rich diet

Increase the amount of things in the diet that are high in calcium. According to the "Clinical Journal of American Society of Nephrology", a diet rich in calcium oxalate helps break down and remove stones stored in the kidney. Consumption of milk, butter, nuts, etc. is beneficial.

 Avoid soda intake

There are many misconceptions related to soda drinks for stone patients in the kidney, but the fact is that the excess of phosphoric acid present in the soda increases the stone in the kidney.

 Take a low oxlet diet

Oxalate deficient diet is beneficial for kidney patients. Consuming black tea, grains, nuts etc. is beneficial in removing kidney stone.


Dharmendra Singh   movetonature.blogspot.com

खान-पान सही तो सेहत सही

त्योहारों और शादियों के मौसम में डाइट पर कंट्रोल तो बहुत मुश्किल है। ऐसे में स्पाइसी और ऑयली डाइट का मजा तब किरकिरा हो जाता है, जब इसकी कीमत पेट को चुकानी पड़ती है।
अगर आप इन दिनों खानपान की जरा-सी चूक की कीमत अक्सर एसिडिटी या गैस्ट्रिक प्रॉब्लम के रूप में चुका रहे हैं, तो इससे तुरंत आराम के लिए ये आसान उपाय आपकी मदद करेंगे।
लौंग
एसिडिटी या गैस्ट्रिक स्थिति में दो लौंग चबाएं। इसके रस से एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है।
जीरा
एक चम्मच जीरा तवे पर भून लें। भूनने के बाद उसे हल्का पीस लें और एक ग्लास पानी में मिलाएं। भोजन के बाद इसे जरूर लें।
गुड़
एसिडिटी या सीने में जलन की स्थिति में गुड़ का एक टुकड़ा चूसें। हां, डायबिटीज के मरीज इस नुस्खे को न आजमाएं।
 तुलसी पत्ता
तुलसी के पत्तों का सेवन भी एसिडिटी में आराम दिलाता है। पांच से छह तुलसी पत्ते या फिर तुलसी की चाय का सेवन करें, तुरंत आराम महसूस करेंगे।
 छाछ
छाछ पेट को ठंडक पहुंचाने में काफी मददगार है। इसमें एक चौथाई चम्मच काली मिर्च मिलाकर इसका सेवन करें। इससे एसिडिटी से तुरंत राहत मिलेगी।
अदरक 
भोजन से आधा घंटा पहले अदरक का छोटा टुकड़ा खाएं। इससे एसिडिटी और अपच जैसी समस्या में आराम मिलेगा। 

... तो खूबसूरत दिखेंगे आप

अब शुरू हो गया फेस्टिवल का सीजन और इसके साथ बैक टू बैक है-वेडिंग सीजन। सजने-संवरने के दिन, फैशनेबल कपड़े पहनने के दिन। क्या आप भी रेडी हैं ये जानने के लिए कि इस बार कौन-सी ड्रेस पहनें, जो त्योहारों और शादियों दोनों में काम आएं। अगर फंक्शन आपके घर का है तो फिर आपको पहनने होंगे हर दिन कुछ अलग-अलग ड्रेसेस जो कैरी करने में आसान हों और छोटी-छोटी रस्मों के अनुसार हो। इस बार ब्लू कलर का हर शेड इन ट्रेंड है, तो अपने कलेक्शन में ब्लू को जरूर शामिल करें।
त्योहार और शादी दोनों ही मौके पारंपरिक है, इसलिए अपने कलेक्शन को पारंपरिक और एथनिक कॉम्बिनेशन में रखेंगे तो ज्यादा सूट करेगा।
 हर मौके के लिए अलग
एथनिक और ट्रेडिशनल वियर का दायरा काफी बड़ा है और साथ ही आप को यह भी तय करना है कि जो भी आप सिलेक्ट करें वो आपको सूट भी करे और मौके के अनुसार हो। छोटे कार्यक्रमों के लिए लाइट और प्रिंटेड ड्रेसेज चुनें और बड़े कार्यक्रमों के लिए हैवी वर्क और ब्राइट शेड्स वाली ड्रेस पहनें।
 कुछ नया करें ट्राय
अच्छी हाइट वाली लड़कियों पर हर डिजाइन फबती है, लेकिन जिन लोगों की हाइट थोड़ी कम है तो फिर उनके लिए ए-लाइन या स्ट्रेट कटिंग वाला लहंगा बेस्ट होगा। आप लहंगे की चोली में भी एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं। कुछ बोल्ड ट्राय करने का मन है तो नूडल स्ट्रेप, सिंगल शोल्डर, बैक लेस या सेमी बैक टॉप ट्राय करके देखें। वैसे फुल स्लीव्स और लॉन्ग पैटर्न वाली चोली भी काफी जंचती है।
साड़ी भी है एक विकल्प
इन ऑकेजन्स के लिए साड़ी भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सिल्क, शिफॉन और क्रेप की वर्क वाली साड़ियां आपके लिए राइट च्वॉइस हो सकती है। प्लेन साड़ी के साथ हैवी वर्क वाला डिजानर ब्लाउज आपकी पर्सनालिटी में चार चांद लगा देगा।
कौन-सा प्रिंट करेगा सूट 
हल्के फंक्शन जैसे हल्दी, मेहंदी और भाई दूज के लिए चूड़ीदार, पटियाला सूट, सलवार सूट या अनारकली सूट बहुत अच्छे रहेंगे। इन्हें कैरी करने में आसानी होगी और आप तेजी से भाग दौड़ वाले काम भी कर पाएंगी। प्लेन लोअर और प्रिटेंड या वर्क वाले अपर आपको ग्लैमरस लुक देंगे। आप चाहें तो प्लेन या सेल्फ प्रिंट वाले कंप्लीट सूट के साथ हैवी वर्क वाला दुप्पटा ले सकती हैं यह काफी एलिगेंट लुक देता है। बिना दुप्पटे के शार्ट कुर्ती और फुल पटियाला पहनने का एक अलग लुक आता है।
 जब जाना हो कहीं और  
हैवी डिजाइनर अनारकली सगाई और लेडीज संगीत के लिए भी परफेक्ट च्वॉइस साबित होगा। चाहे घर में दुल्हन आनी हो या फिर लड़की वालों के यहां जाना हो दोनों ही मौकों पर अनारकली में सजी आपकी छवि सब लोगों पर आपकी पर्सनालिटी का रंग जमा देगी। सूट और अनारकली उन मौकों के लिए भी एकदम परफेक्ट हैं।  

रविवार, 13 अक्टूबर 2013

अच्छी नहीं है एसएमएस की आदत

मोबाइल के बिना तो आजकल जैसे लाइफ की गाड़ी आगे बढ़ती ही नहीं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़ी उम्र के लोगों में मोबाइल का चस्का देखा जा सकता है। खासकर युवा तो इससे जरा-सी भी दूरी बर्दाश्त नहीं कर पाते। दिनभर नई-नई एप्लीकेशन्स  नॉलेज के लिए तो अच्छी है, मगर इनकी लत बना लेना ज्यादा अच्छा नहीं है। कभी वॉट्स एप पर बिजी तो कभी नेट सर्फिंग करते रहना और बचा हुआ समय एसएमएस के जरिए पल-पल की खबर देते रहना...बस यही लगभग हर एक की दिनचर्या में शुमार हो चुका है। मगर यदि आप भी इस आदत को पूरी तरह से अपना चुके हैं, तो इसे छोड़ने की कोशिश कीजिए क्योंकि यह एसएमएस की एंग्जाइटी आपको नींद से लेकर कई तरह की परेशानियां दे सकती है।
'वाशिंगटन एंड ली यूनिवर्सिटी" में हाल ही में एक नया शोध किया गया। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक मैसेज भेजने वालों में नींद से जुड़ी समस्याएं होने लगती है। केवल इतना ही नहीं उनमें भावनात्मक अस्थिरता और शारीरिक निष्क्रियता जैसे लक्षण भी नजर आते हैं। जिस व्यक्ति को मैसेज भेजने की आदत जितनी ज्यादा होती है, उन्हें इन समस्याओं का उतना ही अधिक सामना करना पड़ता है।
कैसे निकाला निष्कर्ष
पुख्ता निष्कर्ष प्राप्त करने के लिए शोधकर्ताओं ने स्नातक के प्रथम वर्ष में पढ़ने वाले कुछ छात्रों पर अध्ययन किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों से एक प्रश्नावली भरवाई जिसमें उन्हें नींद से जुड़ी परेशानियों और भावानात्मक स्थिति के बारे में बताना था। साथ ही शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से यह भी पूछा कि एक दिन में औसतन वे कितने मैसेज भेजते और प्राप्त करते हैं। जिन छात्रों ने ज्यादा संख्या में एसएमएस भेजने और प्राप्त करने की बात कही, उनमें नींद से जुड़ी अधिक समस्याएं देखी गईं।
कैसे होता है नींद पर असर 
ज्यादा मैसेज भेजने की आदत दो तरीकों से नींद पर असर कर सकती है। पहला यह कि मोबाइल पर एसएमएस आने पर लोग उसका जवाब देने का दबाव महसूस करते हैं। दूसरा कारण यह कि अधिक एसएमएस करने वाले रात को सोते हुए भी मोबाइल को बिल्कुल करीब रखकर सोते हैं। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इस तरह की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा किशोरों और युवाओं में देखने को मिलती है।
यह अध्ययन 'जर्नल साइकोलॉजी ऑफ पापुलर मीडिया कल्चर" के अंक में प्रकाशित किया गया है। 

अब स्मार्ट बॉटल बताएगी कितना पानी पिएं

पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। पानी हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। वैसे तो पूरे दिन पी गई पानी की मात्रा को कोई भी याद नहीं रखता है, मगर कभी-कभी की स्थितियों में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या व्यक्ति सचमुच तो पानी कम नहीं पी रहा है। मगर अब इस समस्या का समाधान भी मिल गया है।
जी हां, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी 'स्मार्ट बॉटल" बनाई है जो आपके स्मार्टफोन के साथ संपर्क कायम कर यह बताएगी कि हर रोज आपको कितने पानी की जरूरत है। यह 'स्मार्ट बॉटल" अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित की गई है। कंपनी ने इसको
'ब्लूफिट" नाम दिया है। 'ब्लूफिट" नामक यह बॉटल प्रतिदिन व्यक्ति के वजन, उम्र, तापमान और नमी के आधार पर उसके पानी की जरूरत का आकलन करेगी।
पर्याप्त पानी नहीं होने पर शरीर की प्रत्येक कोशिका प्रभावित होती है। इससे मेटाबोलिज्म और ब्रेन की गतिविधियों पर असर पड़ता है। कंपनी ने कहा कि ब्लूफिट आपको इस मुश्किल से दूर रखेगी। साथ ही यह इस बात का भी आकलन कर लेगी कि आपको कितने पानी की जरूरत है और आपने कितना पानी पी रखा है। कंपनी ने किया दावा
निर्माता ने दावा किया है कि ब्लूफिट का ऐप पानी की जरूरत का आकलन करता है जिससे व्यक्ति का वजन, उम्र, तापमान, नमी आदि शामिल है। इस स्मार्ट बॉटल के प्रयोग करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी, साथ ही कई खतरनाक बीमारियों से बचाव हो सकेगा।  

हंसकर हराएं सदमे को

किसी भयानक दुर्घटना, शोषण, खून-खराबे की घटना या किसी अपने से जुदाई के कारण लोग गहरे सदमे में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति हंस कर सदमें से बाहर आ सकता है।
सदमा यदि गंभीर असर डाले तो इस स्थिति को पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर सिंड्रोम (पीटीएसडी) कहते हैं। हालांकि, सदमे के बाद यदि कुछ उपाय किए जाएं तो इस समस्या से उबरकर सामान्य जीवन जिया जा सकता है। इसराइल स्थित तेल अवीव यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में बताया गया कि कोई ऐसी घटना, जिससे सदमा लगने के तुरंत बाद सोना कतई नहीं चाहिए। ऐसी किसी घटना के तुरंत बाद सो जाने से बुरी यादें दिमाग में गहरी तरह बैठ जाती हैं। जो सालों तक नहीं जातीं और परेशान करती रहती हैं।
अपनों से शेयरिंग जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी सदमे के कम से कम 6 घंटे तक सोना नहीं चाहिए। बल्कि सदमा देने वाली घटना के बाद परिवार के सदस्यों और दोस्तों आदि से अपनी भावनाएं साझा करना चाहिए। ऐसे लोगों से बात करना चाहिए, जो पहले कभी भयानक दुर्घटनाओं का सामना किया हो। एक शोध के अनुसार सकारात्मक और दयालु भावना रखने से पीटीएसडी के लक्षण कम हो जाते हैं। शोध में यह भी बताया गया कि खूब हंसने से भी किसी सदमे से उबरने में मदद मिलती है। फायरफाइटर्स पर इस प्रयोग से पीटीएसडी के लक्षणों में कभी देखी गई। एक लेख के अनुसार ओमेगा-3 का प्रचुर मात्रा में लेने से किसी सदमे से बाहर आने में मदद मिलती है। एक शोध में देखा गया कि तनाव भी सदमा होने का कारण बन सकता है।
यह जानकारियां ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकोलॉजी, जर्नल ऑफ ट्रॉमेटिक स्ट्रेस, जर्नल ऑफ ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर, बायोलॉजिकल साइकाइट्री और द जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंडोक्रीनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म में छपे शोधों के आधार पर दी गई है।  

सावधान ! फेसबुक आपका स्वभाव न बदल दे

फेसबुक को इस्तेमाल करने वालों की तादाद एक अरब को पार कर चुकी है। अगर फेसबुक को एक मुल्क मान लिया जाए तो चीन और भारत के बाद यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क हो जाएगा। फेसबुक का इस्तेमाल दुनियाभर के लोग अपने दिल की बात कहने के लिए करते हैं। यहां लोग अपने दोस्तों से मिलते हैं और अपने दिल की बात करते हैं। लेकिन,
क्या आपको इस बात का अंदाजा है कि यही फेसबुक आपके स्वभाव पर भी असर डाल सकता है। क्या कभी इस बात पर गौर किया है कि फेसबुक पर किसी स्टेट्स को देखकर आपको अचानक गुस्सा आ गया हो या आपका स्वभाव अचानक बदल गया हो। ऐसा कई लोगों के साथ होता है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि फेसबुक पर अजीबोगरीब अपडेट देखकर लोग चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। जब कभी भी लोग फेसबुक पर ऐसा स्टेट्स देखते हैं, तो उन्हें गुस्सा आता है। इसका असर उनके नियमित स्वभाव पर भी पड़ता है। इसमें देखा गया है कि 10 में से चार लोग चाहते हैं कि उनके दोस्त और परिवार के लोग बकवास और बेमतलब की चीजें फेसबुक पर न डालें। एक चौथाई लोग यह भी चाहते हैं कि लोगों को अपनी फोटो खुद खींचकर सोशल नेटवर्किंग साइट पर साझा करने से बचना चाहिए। अध्ययन ने इस बात का भी खुलासा किया कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अपनी फोटो खुद खींचकर साझा करने में आगे होते हैं।  

...ताकि नीद में न पड़े खलल

एक अकेला मच्छर आपका चैन खत्म कर सकता है। यह बात बिल्कुल सही है। रात में सोए हों या फिर दोस्तों से बात कर रहे हों, ऐसे में मच्छरों के काटने के बाद होने वाली खुजली परेशानी का सबब हो जाती है। सोते समय अगर मच्छर काट ले, तो नींद ही उड़ जाती है। मच्छरों के डंक के असर को कम करने और मच्छरों को दूर रखने के लिए आप इन उपायों को आजमा सकते हैं।
बेकिंग सोडा 
गर्म पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा लेकर मिलाएं। मच्छर काटने वाली जगह पर इस मिश्रण को कॉटन की मदद से लगाएं। कुछ मिनट लगाने के बाद गुनगु
ने पानी से धो लें। इसके अलावा आप बेकिंग सोडा को हाउसहोल्ड क्लीनर अमोनिया के साथ मिक्स कर भी लगा सकते हैं। इससे इचिंग से राहत मिलती है।
सेब का सिरका
सेब के सिरके को कॉटन में लेकर मच्छर काटने वाली जगह पर लगाएं या सिरके को कॉर्न फ्लोर के साथ मिक्स कर इस पेस्ट को मच्छर काटी जगह पर लगाएं। सूखने के बाद इसे पानी से धो लें।
अरोमा ऑयल
इचिंग से राहत पाने के लिए आप एसेंशियल ऑयल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे-टीट्री या लेवेंडर ऑयल, इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और इचिंग से राहत पाएं। एलोवेरा जेल से भी मच्छरों के काटने से होने वाली इचिंग से राहत मिलती है। इसके अलावा तुलसी की ताजी पत्तियां भी मच्छरों के डंक के असर को कम करती हैं।  

व्रत: साबूदाना है न

यह समय व्रत और त्योहारों का है। यह सिलसिला काफी लंबे समय तक चलता रहता है। इस समय ज्यादातर लोगों के नवरात्र के व्रत हैं। ऐसे में लोगों के सामने जो सबसे बड़ी समस्या होती है वह खाने की। इसमें एक तरह का संशय बना रहता है क्या खाएं और क्या न खाएं। क्योंकि अगर आपने कुछ गलत खा लिया तो उसका बुरा असर पेट पर पड़ेगा।
व्रत रखने वाले अपने आहार में साबूदाना प्रयोग कर सकते हैं। व्रत के दौरान साबूदाना न सिर्फ फलाहारी भोजन का एक अच्छा विकल्प है बल्कि सेहत की नजर से इसके कई फायदे भी हैं। हाल ही में एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि साबूदाना खाने से आप तरोताजा रहते हैं।
'द न्यू ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ फूड प्लांट्स" ने इस पर शोध किया है। इसके अनुसार चावल के साथ साबूदाने का कॉम्बिनेशन शरीर की गर्मी को कम करने और ठंडक पहुंचाने में मदद करता है। साबूदाना पचने में आसान है इसलिए पेट से जुड़ी समस्याओं में इसका सेवन काफी फायदेमंद है।
साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होता है और फैट्स कम होता है, इसलिए इसके सेवन से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। व्रत के दौरान लंबे समय तक भोजन न करने से शरीर को कैलोरी की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए कार्बोहाइड्रेट से भरपूर साबूदाना अच्छा स्रोत हो सकता है।
प्रति 100 ग्राम साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट 94 ग्राम, फैट्स 0.2 ग्राम, प्रोटीन 0.2 ग्राम,10 मिग्रा केल्शियम,1.2मिग्रा आयरन होता है। इसमें केरोटिन, थाइमिन और एस्कार्बिक एसिड सहित 355 कैलोरी होती है। इसमें फायबर 0.5 ग्राम होता है। यही वजह है कि फलाहारी डाइट में इसे दूध, आलू, मूंगफली आदि के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिससे पोषक तत्वों की कमी पूरी हो सके।  

बेहतर रिश्ता बनाना है तो सपोर्ट करें, पर एक सीमा तक

इसमें कोई शक नहीं है कि आपके पार्टनर को आपके सपोर्ट की जरूरत होती है, और एक अच्छे रिश्ते के लिए तो यह और भी जरूरी है। मगर, एक स्टडी के मुताबिक अगर आप पार्टनर को बहुत ज्यादा सपोर्ट करने लगते हैं या गलत तरीके से सपोर्ट करते हैं तो इसका असर आपके रिश्ते पर भी पड़ सकता है। यदि आप मानते हैं कि पार्टनर को ज्यादा सपोर्ट करने से आपकी मैरिज लाइफ बेहतर होगी तो ये आपकी गलतफहमी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक-दूसरे का ज्यादा सपोर्ट करने से कई बार रिश्ते में पर्सनल स्पेस नहीं मिल पाता है, ऐसे में कपल्स के बीच तनाव बढ़ जाता है। कई बार ज्यादा मदद करने से आपके पार्टनर को लगता है कि आप उसकी काबिलियत पर भरोसा नहीं करते हैं।
हर वक्त न दें सलाह 
हो सकता है कि आप अपने पार्टनर की हेल्प करने के लिए उसे बहुत सारी सलाह दे रहे हों, लेकिन ऐसे में अक्सर ये पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उसे इन सलाहों की जरूरत है भी या नहीं।
पार्टनर को न समझें माइंड रीडर
कपल्स के एक-दूसरे की ज्यादा हेल्प करने से कई बार लगता है कि उनके पार्टनर उन्हें अच्छी तरह जानते हैं इसलिए वह उनकी जरूरतों को बिना बताए ही जान जाएंगे, लेकिन माइंड रीडर्स का ये रूल हमेशा कारगर नहीं होता है। किसी को अपने पार्टनर से माइंड रीडर होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। वे कपल्स ज्यादा खुश रहते हैं जो अपनी जरूरतें शेयर करते हैं और एक-दूसरे से हेल्प मांगते हैं।
ऐसे बनाइए बैलेंस
सपोर्ट बिल्कुल ना करना या बहुत ज्यादा सपोर्ट करना दोनों ही
स्थितियां सही नहीं मानी जाएंगी। बेहतर होगा कि आप बीच का रास्ता अपनाएं, बेहतर संवाद संतुलन बनाने में मदद करेगी। खुद मदद करने से अच्छा है कि उसे यह अहसास दिलाएं कि आप उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं, यदि उसे जरूरत होगी तो आपसे मदद ले लेगा।
विश्वास करना सीखें
अपने पार्टनर की जिम्मेदारियां अपने हाथों में लेना भी एक तरह का सपोर्ट होता है। वहीं अपने पार्टनर का हेल्पिंग हैंड बने बगैर उस पर विश्वास करना भी एक तरह का सहयोग ही माना जाना जाएगा।