शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

अब किसके लिए रहें फिट?

हर एक के मन में यह चाह रहती है वह स्मार्ट और फिट दिखाई दे। इसके पीछे की सिंपल-सी सोच यह है कि हम कभी किसी के सामने ऐसे न दिखाई दें, जिससे हमें कोई पसंद न करे। इसी थीम को लेकर हाल ही में एक सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि पुरुषों को इन बातों से ज्यादा लेना-देना नहीं होता। केवल इतना ही नहीं वे 46 साल की उम्र में अपनी फिजिकल फिटनेस पर ध्यान देना पूरी तरह बंद कर देते हैं। हालांकि, महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं है। वे 46 की उम्र के बाद भी आने वाले 13 साल तक अपनी फिटनेस को लेकर संजीदा रहती हैं। पुरुष सोचते हैं कि अब फिट और स्मार्ट दिखने से क्या फायदा? उनकी यही सोच उन्हें एक नीरस-सा जीवन जीने को मजबूर कर देती है। वहीं महिलाओं में यह क्रम काफी लंबा चलता है।
क्या कहता है अध्ययन
रिसर्चर्स के अनुसार 46 वर्ष की उम्र तक आते-आते पुरुष अमूमन लेटेस्ट फैशन की चिंता करना छोड़ देते हैं और यहां तक कि वे अपनी फिजिकल फिटनेस पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। वहीं, महिलाएं 59 साल तक खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना पसंद करती हैं।
2000 लोगों पर किया सर्वे
यह सर्वे तकरीबन 2 हजार लोगों पर किया गया। सर्वे के दौरान चार में से एक व्यक्ति ने कहा कि खुद को हेल्दी और गुड लुकिंग बनाए रखने में खर्च बेहद ज्यादा आता है, इससे अच्छा है हम जैसे हैं वैसे ही ठीक हैं।
...और भी कई तर्क
एक ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन में से दो लोग यह मानते हैं कि जब आपके पास लंबे वक्त के लिए पार्टनर होता है तो अपने लुक्स को लेकर चिंता बंद करना एक आम-सी बात है। वहीं,
आधे से ज्यादा लोगों ने यह माना कि शादी के पहले वे अपनी फिटनेस पर जितना ध्यान देते थे, उससे काफी कम ध्यान अब दे पाते हैं। 

अमेरिका में भारतीय का डंका, श्रीनिवासन ने न्यायाधीश पद की शपथ ली

भारतीय मूल के मशहूर कानूनविद श्रीकांत श्री श्रीनिवासन ने शुक्रवार को भगवत गीता पर हाथ रखकर अमेरिका की दूसरी सबसे शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट की खंडपीठ में शामिल होने वाले पहले भारतीय अमेरिकी बन गए हैं।

चंडीगढ़ में जन्मे 46 वर्षीय श्रीनिवासन के माता-पिता 1970 में अमेरिका आकर बस गए थे। खचाखच भरे अदालती कक्ष में उन्हें जस्टिस सैंड्रा डे ओकॉनर ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान उनके दोस्त, परिजनों के अलावा कानूनविद भी मौजूद थे। शपथग्रहण समारोह में श्रीनिवासन की मां सरोज श्रीनिवासन ने गीता पकड़ रखी थी जिस पर हाथ रखकर उन्होंने शपथ ली। इस मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद थीं।विदित हो कि गत मई में अमेरिकी सीनेट ने सर्वसम्मति से 97-0 मतों से श्रीनिवासन को जज बनाए जाने की पुष्टि की थी।  

गुरुवार, 26 सितंबर 2013

दुनिया का दूसरा सबसे ईमानदार शहर है मुंबई


 आपको यह जानकर खुशी होगी कि भारत की आर्थिक  राजधानी कही जाने वाली मुंबई ने ईमानदारी के मामले में दुनिया के कई नामी शहरों को पछाड़ दिया है। मुंबई को दुनिया का दूसरा सबसे ईमानदार शहर चुना गया है। रीडर्स डाइजेस्ट मैग्जीन द्वारा विश्व के 16 शहरों पर किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी इस सूची में पहले स्थान पर रही है।
चार अलग-अलग महाद्वीपों के विभिन्न शहरों में ईमानदारी का टेस्ट करने के लिए पैसों से भरे पर्स को जानबूझ कर गिराया गया और देखा गया कि कितने लोग इसे वापस लौटा देते हैं। सर्वेक्षण के तहत यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के विभिन्न शहरों  में 192 पर्स गिराए गए। हर पर्स में एक फोन नंबर, परिवार की तस्वीर, कुछ कूपन, बिजनेस कार्ड और 50 डॉलर (करीब तीन हजार रुपये) रखे गए थे। ये पर्स पार्क, शॉपिंग मॉल्स और सड़क के किनारे छोड़े गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 192 में से करीब 90 यानि 47 प्रतिशत पर्स लौटा दिए गए। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में 12 में से 11 पर्स लौटा दिए गए। मुंबई में 12 में से नौ पर्स लौटा दिए गए। इस सूची में तीसरे नंबर पर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट और अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क ने अपनी जगह बनाई है। यहां आठ पर्स लौटाए गए। इस सूची में सबसे निचले स्थान पर पुर्तगाल का लिस्बन शहर रहा। जहां महज एक पर्स लौटाया गया। 

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

भारतीय पर्यावरणविद् रॉय और मलाला को क्लिंटन ग्लोबल अवार्ड

भारतीय पर्यावरणविद् बंकर रॉय और लड़कियों की शिक्षा की पैरोकार पाकिस्तानी किशोरी मलाला यूसुफजई को इस वर्ष के प्रतिष्ठित क्लिंटन ग्लोबल सिटिजन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। बुधवार को न्यूयॉर्क में इसके लिए आयोजित होने वाले वार्षिक समारोह में एक हजार से अधिक कारोबारी, सरकारी अधिकारी और शीर्ष हस्तियां मौजूद रहेंगी। रॉय बेयरफुट कॉलेज के संस्थापक हैं जो 40 साल से ग्रामीण समुदायों की समस्याओं का निवारण कर रहा है। बेयरफुट के कार्यों के परिणामस्वरूप दस लाख लीटर बारिश के पानी को संरक्षित कर उसे पीने के लायक बनाया जाता है। यह पानी पूरे विश्व में 1,300 समुदायों के 2,39,000 स्कूली बच्चों के पीने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। बेयरफुट कॉलेज
एक सामुदायिक मॉडल पर काम करता है। गार्जियन अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बंकर रॉय को उन 50 पर्यावरणविदें में शामिल किया है, जो इस ग्रह को बचा सकते हैं। टाइम पत्रिका ने उन्हें 100 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की सूची में रखा है। क्लिंटन ग्लोबल सिटिजन अवार्ड की शुरुआत 2007 में की गई थी।