शनिवार, 27 अप्रैल 2013
शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013
मंदिर बना रोकेंगे महंगाई (व्यंग्य)
धर्मेंद्र सिंह राजावत
राजनीति में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति ने इलाहबाद में एक शौचालय को तुड़वाकर मंदिर बनवा दिया। मंदिर के बजाय शौचालय बनाने को तवज्जो देने की केंद्रीय मंत्री की कवायद को इससे काफी बड़ा झटका लगा। व्यक्ति की इस गुस्ताखी से खफा मंत्री जी ने इलाहबाद जाकर उसको काफी भला-बुरा कहा। इसके साथ ही अनेक केस लगवाकर जेल में डलवा देने की उसको धमकी भी दे दी। व्यक्ति भी उम्मीद से ज्यादा दबंग निकला। उसने भी मंत्री जी की धमकी का जवाब धमकी से दिया। इतना ही नहीं उसने तो उनको न केवल मंत्री पद बल्कि पार्टी से पत्ता साफ करा देने की धमकी दे डाली। इस वाक्या के दूसरे ही दिन वह दिल्ली में मैडम के पास जा पहुंचा। कोशिश की तो उसको मिलने का समय भी मिल गया।
'हां, बताएं क्या समस्या है आपको?" मैडम ने सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! समस्या मुझे नहीं है, मगर आपको जरूर होने वाली है।"
'क्या मतलब है आपका?" मैडम ने फिर सवाल किया।
रामनाथ, ' गुश्ताखी की माफी चाहूंगा, पर मैं सही कह रहा हूं। आपने मंत्री जी को कुछ भी बोलने की छूट दी, यह अच्छी बात है, मगर कुछ भी बनवाने की आजादी देकर अच्छा नहीं किया।"
' आप क्या कहना चाहते हो। साफ-साफ कहो। मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है।" मैडन ने डांटते हुए कहा
रामनाथ, 'मैडम! मंत्री जी शौचालय बनवाकर अपनी ही सरकार को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं।"
'शौचालय से सरकर का क्या लेना-देना?" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! जिस घर में शौचालय होगा, उस घर के लोग बेफिक्र होकर खाएंगे- पिएंगे। निश्चित है कि ऐसा होने पर खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ेगी। और जब खपत बढ़ेगी तो महंगाई का आसमान छूना तय है। इसके बाद सरकार का क्या होगा, मुझे लगता है कि यह आपको बताने की जरूरत नहीं है। अब आप ही तय कीजिए कि यह सरकार के खिलाफ मंत्री जी की साजिश नहीं है तो क्या है। दूसरा, मैं जो सरकार के हित में कर रहा हूं, उसमें वह अड़ंगा लगा रहे हैं।"
' मंत्री जी को मैं देख लूंगी, पर आप यह तो बताइए की आप सरकार के लिए क्या कर रहे हैं?" मैडम ने उससे फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! आपके इस सेवक ने इलाहबाद में शौचालय को मंदिर बनवाकर इसकी शुरुआत कर दी है।"
' मंदिर बनाने से क्या होगा। यह तो विपक्षी पार्टी का काम है। हम इसे क्यों करें।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम ! मंदिर बनवाकर हम बेहतर शासन का तो रास्ता साफ करेंगे ही साथ ही विपक्षी पार्टी को मुकाबले से ही बाहर कर देंगे।"
' आप कहना क्या चाहते हैं। मैं समझी नहीं। आप तो साफ-साफ बताइए।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' जब हम शौचालयों को तोड़कर मंदिर बनवाएंगे तो निश्चित है कि उसमें भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। और जब व्यक्ति भगवान की भक्ति में लीन होगा तो खाना-पीना सब भूल जाएगा। कम से कम लोग व्रत तो रखना शुरू कर ही देंगे।"
' इससे क्या होगा?" मैडम ने फिर सवाल दागा
रामनाथ, ' मैडम ! सीधा सा फंडा है, जब लोग कम खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की खपत भी कम होगी। और जब खपत कम होगी तो महंगाई भी औंधे मुंह नीचे आ जाएगी। फिर हम फक्र से लोगों के बीच चुनाव में कह पाएंगे कि हमने महंगाई को कभी भी सिर नहीं उठाने दिया।"
मैडम, 'यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। मंदिर बनवाने का इतना बड़ा फायदा। यही वजह है कि विपक्षी इस मुद्दे को छोड़ते ही नहीं। आरे हैं! आप विपक्षी पार्टी को मुकाबले से बाहर करने की भी बात कह रहे थे। उसे कैसे बाहर करेंगे?"
रामनाथ, ' अरे मैडम! विपक्षी केवल एक मंदिर बनवाने को लेकर राजनीति कर रहे हैं, मगर हम तो हजारों बनवाएंगे। इसके बाद उनके पास कोई मुद्दा बचेगा क्या? मैडम ! 2014 नजदीक है और जिस तरह के हालात हैं, उससे तो लगता है कि कभी भी चुनाव हो सकते हैं। इसलिए, 'शौचालय तोड़ मंदिर बनाओ" निगम बनाकर मुझे उसका मुखिया बना दीजिए। इसके बाद देखिए कैसे हम आपकी सरकार को सत्ता में लाकर एक बार फिर आपको किंग मेकर बना देते हैं।"
मैडम, ' मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। वाकई यह कमाल का आइडिया है।"
रामनाथ, ' मैडम ! लेकिन, मंत्री जी का क्या करना है?"
मैडम, ' क्या करना है। मन से कहती हूं कि वह मंत्री जी से कहंे कि वह किसी मंदिर में जाकर 'जय राम-जय राम" करें। इससे उनका भी भला होगा और मेरा भी।"
मैडम ने तत्काल मन को बुलाकर मंत्री जी को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश दे दिया। जब उनको मंत्रालय से बेदखल कर दिया गया तो रामनाथ उनसे जाकर मिला।
' मंत्री जी शौचालय आम आदमी की जरूरत हो सकती है, पर आपकी नहीं। फिर क्यों इसके लिए सभी से लड़ाई मोल ले रहे थे। अभी तो मैंने अपका मंत्रालय छिनवाया है। आगे से राजनीति के ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दूंगा कि शौचालय जाने से भी डर लगने ल
गेगा आपको। मैं भी जनता हूं कि मंदिर जाए बिना लोग कई दिनों तक रह सकते हैं, पर शौचालय के बिना एक भी दिन नहीं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि भी कोई चीज होती है। जब सबको सारी सुविधाएं मुहैया करा दोगे तो फिर राजनीति किस मुद्दे पर करोगे। कुछ अपना और हम जैसे लोगों के बारे में भी सोचा करो?
राजनीति में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति ने इलाहबाद में एक शौचालय को तुड़वाकर मंदिर बनवा दिया। मंदिर के बजाय शौचालय बनाने को तवज्जो देने की केंद्रीय मंत्री की कवायद को इससे काफी बड़ा झटका लगा। व्यक्ति की इस गुस्ताखी से खफा मंत्री जी ने इलाहबाद जाकर उसको काफी भला-बुरा कहा। इसके साथ ही अनेक केस लगवाकर जेल में डलवा देने की उसको धमकी भी दे दी। व्यक्ति भी उम्मीद से ज्यादा दबंग निकला। उसने भी मंत्री जी की धमकी का जवाब धमकी से दिया। इतना ही नहीं उसने तो उनको न केवल मंत्री पद बल्कि पार्टी से पत्ता साफ करा देने की धमकी दे डाली। इस वाक्या के दूसरे ही दिन वह दिल्ली में मैडम के पास जा पहुंचा। कोशिश की तो उसको मिलने का समय भी मिल गया।
'हां, बताएं क्या समस्या है आपको?" मैडम ने सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! समस्या मुझे नहीं है, मगर आपको जरूर होने वाली है।"
'क्या मतलब है आपका?" मैडम ने फिर सवाल किया।
रामनाथ, ' गुश्ताखी की माफी चाहूंगा, पर मैं सही कह रहा हूं। आपने मंत्री जी को कुछ भी बोलने की छूट दी, यह अच्छी बात है, मगर कुछ भी बनवाने की आजादी देकर अच्छा नहीं किया।"
' आप क्या कहना चाहते हो। साफ-साफ कहो। मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है।" मैडन ने डांटते हुए कहा
रामनाथ, 'मैडम! मंत्री जी शौचालय बनवाकर अपनी ही सरकार को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं।"
'शौचालय से सरकर का क्या लेना-देना?" मैडम ने फिर सवाल कियारामनाथ, ' मैडम! जिस घर में शौचालय होगा, उस घर के लोग बेफिक्र होकर खाएंगे- पिएंगे। निश्चित है कि ऐसा होने पर खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ेगी। और जब खपत बढ़ेगी तो महंगाई का आसमान छूना तय है। इसके बाद सरकार का क्या होगा, मुझे लगता है कि यह आपको बताने की जरूरत नहीं है। अब आप ही तय कीजिए कि यह सरकार के खिलाफ मंत्री जी की साजिश नहीं है तो क्या है। दूसरा, मैं जो सरकार के हित में कर रहा हूं, उसमें वह अड़ंगा लगा रहे हैं।"
' मंत्री जी को मैं देख लूंगी, पर आप यह तो बताइए की आप सरकार के लिए क्या कर रहे हैं?" मैडम ने उससे फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! आपके इस सेवक ने इलाहबाद में शौचालय को मंदिर बनवाकर इसकी शुरुआत कर दी है।"
' मंदिर बनाने से क्या होगा। यह तो विपक्षी पार्टी का काम है। हम इसे क्यों करें।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम ! मंदिर बनवाकर हम बेहतर शासन का तो रास्ता साफ करेंगे ही साथ ही विपक्षी पार्टी को मुकाबले से ही बाहर कर देंगे।"
' आप कहना क्या चाहते हैं। मैं समझी नहीं। आप तो साफ-साफ बताइए।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' जब हम शौचालयों को तोड़कर मंदिर बनवाएंगे तो निश्चित है कि उसमें भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। और जब व्यक्ति भगवान की भक्ति में लीन होगा तो खाना-पीना सब भूल जाएगा। कम से कम लोग व्रत तो रखना शुरू कर ही देंगे।"
' इससे क्या होगा?" मैडम ने फिर सवाल दागा
रामनाथ, ' मैडम ! सीधा सा फंडा है, जब लोग कम खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की खपत भी कम होगी। और जब खपत कम होगी तो महंगाई भी औंधे मुंह नीचे आ जाएगी। फिर हम फक्र से लोगों के बीच चुनाव में कह पाएंगे कि हमने महंगाई को कभी भी सिर नहीं उठाने दिया।"
मैडम, 'यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। मंदिर बनवाने का इतना बड़ा फायदा। यही वजह है कि विपक्षी इस मुद्दे को छोड़ते ही नहीं। आरे हैं! आप विपक्षी पार्टी को मुकाबले से बाहर करने की भी बात कह रहे थे। उसे कैसे बाहर करेंगे?"
रामनाथ, ' अरे मैडम! विपक्षी केवल एक मंदिर बनवाने को लेकर राजनीति कर रहे हैं, मगर हम तो हजारों बनवाएंगे। इसके बाद उनके पास कोई मुद्दा बचेगा क्या? मैडम ! 2014 नजदीक है और जिस तरह के हालात हैं, उससे तो लगता है कि कभी भी चुनाव हो सकते हैं। इसलिए, 'शौचालय तोड़ मंदिर बनाओ" निगम बनाकर मुझे उसका मुखिया बना दीजिए। इसके बाद देखिए कैसे हम आपकी सरकार को सत्ता में लाकर एक बार फिर आपको किंग मेकर बना देते हैं।"
मैडम, ' मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। वाकई यह कमाल का आइडिया है।"
रामनाथ, ' मैडम ! लेकिन, मंत्री जी का क्या करना है?"
मैडम, ' क्या करना है। मन से कहती हूं कि वह मंत्री जी से कहंे कि वह किसी मंदिर में जाकर 'जय राम-जय राम" करें। इससे उनका भी भला होगा और मेरा भी।"
मैडम ने तत्काल मन को बुलाकर मंत्री जी को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश दे दिया। जब उनको मंत्रालय से बेदखल कर दिया गया तो रामनाथ उनसे जाकर मिला।
' मंत्री जी शौचालय आम आदमी की जरूरत हो सकती है, पर आपकी नहीं। फिर क्यों इसके लिए सभी से लड़ाई मोल ले रहे थे। अभी तो मैंने अपका मंत्रालय छिनवाया है। आगे से राजनीति के ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दूंगा कि शौचालय जाने से भी डर लगने ल
गेगा आपको। मैं भी जनता हूं कि मंदिर जाए बिना लोग कई दिनों तक रह सकते हैं, पर शौचालय के बिना एक भी दिन नहीं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि भी कोई चीज होती है। जब सबको सारी सुविधाएं मुहैया करा दोगे तो फिर राजनीति किस मुद्दे पर करोगे। कुछ अपना और हम जैसे लोगों के बारे में भी सोचा करो?
बुधवार, 24 अप्रैल 2013
फांसी पर झूल जाना चाहता हूं (मासूम से रेप करने वाले के पिता का दर्द)
धर्मेन्द्र सिंह राजावत
उस कम्बख्त पल को याद करहर पल को भूल जाना चाहता हूं
जो पल कभी न भूलना था हमें
उसे याद कर फांसी पर झूल जाना चाहता हूं।
जिस चिराग से कभी रोशन हुआ था घर
उस रोशनी से दूर जाना चाहता हूं
हवस के कलंक से झुका दिया है सिर
यह फिर उठे, उससे पहले फांसी पर झूल जाना चाहता हूं।
किसी को कोख में मार, मैंने जानवर जना
यह सोचकर अफसोस के दरिया में डूब जाना चाहता हूं
बेगुनाह को मार मैंने कितना बड़ा गुनाह कियाइसका अहसास कर फांसी पर झूल जाना चाहता हूं।
बेटों से कहीं अधिक बढ़कर होती हैं बेटियां
यह आपसे ही नहीं सभी से कहना चाहता हूं
मैंने जो अपराध किया वह आप न करें
यह देश सहित दुनिया को संदेश देना चाहता हूं।
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
सेलिब्रिटी बनें (व्यंग्य )
धर्मेंद्र सिंह राजावत
दिल्ली के पटपड़गंज में रहने वाली रज्जो जब घर के कामकाज में व्यस्त थी तभी उसकी बेटी अर्पिता हाथ में अखबार थामे ठिठोली करती हुई उसके पास पहुंची। बेटी को इस अंदाज में देख रज्जो कोई सवाल करती उससे पहले ही उसने अपनी बात शुरू कर दी।
'मां ! आज मेरी किस्मत का दरवाजा खुल गया है। आसमान में मुझे मेरी किस्मत की सितारा साफ नजर आ गया है।"
अर्पिता कुछ और कहती उससे पहले ही रज्जो ने उसे टोक दिया।
'क्या मतलब? किस्मत का तारा-सितारा, क्या है यह? दिन में सपने देखना बंद कर और काम में मेरा हाथ बंटा।"
अर्पिता, ' अरे मां ! अब मैं सेलिब्रिटी बनूंगी।"
रज्जो, ' क्या होता है सलबटी?"
अर्पिता, ' सलबटी नहीं मां, सेलिब्रिटी... सेलिब्रिटी। मतलब, बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति।"
रज्जो, 'अच्छा, मगर ये तो बताओ बनोगी कैसे?"
अर्पिता, ' अब मैं ही नहीं आप भी सेलिब्रिटी बनेंगी। ये अखबार देखा आपने? इसमें एक विज्ञापन आया है। सेलिब्रिटी बनना है तो कल इंडिया गेट पर मिलें। जानती हो, इसके लिए कोई योग्यता की बाध्यता नहीं है। और न ही उम्र का कोई बंधन। मतलब, आब आप भी सेलिब्रिटी बन सकती हो। हम दोनों साथ-साथ फेमस होंगे। फिर देखना मोहल्ले में सभी हमें कितनी इज्जत देंगे।"
अर्पिता बताते-बताते ख्वाबों में खो जाती है। रज्जो उसको झकझोर कर उसका ख्वाब तोड़ती है।
' अच्छा, अब घर का काम निपटवाने में मेरी मदद कर कल होगा तब चलेंगे इंडिया गेट।"
दूसरे दिन मां-बेटी तय समय पर इंडिया गेट पहुंच गए। यहां लोगों की खासी भीड़ थी। हर वर्ग के लोग भीड़ मे शामिल थे। शायद उम्र और शिक्षा का कोई बंधन नहीं होने की वजह से लाइन कुछ ज्यादा ही लंबी थी। दो लोग कुर्सियों पर बैठे सभी को बारी-बारी से कुछ समझा रहे थे। काफी इंतजार के बाद मां-बेटी का भी नंबर आया। सामने कुर्सी पर बैठा व्यक्ति उनसे कुछ पूछता या कुछ समझता उससे पहले ही अर्पिता ने सवालों की बौछार कर दी।
' सुबह से लाइन में लगी हूं और अब जाकर कहीं नंबर आया। मैं तो परेशान हो गई। अब आप जल्दी से बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना है?"
घनश्याम, ' देखिए मैडम ! आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह बहुत ही आसान काम है। और मुझे पता है कि आप इसे कर लेंगी।"
अर्पिता, ' आप वह सब छोड़िए, मैं तो कर ही लूंगी। आप तो मुझे यह बताओ कि मुझे करना क्या है?"
घनश्याम, 'महरौली के समीप कछनिया मोहल्ला में तीन दिन पहले सास-बहू में झगड़ा हो गया है। बात बहुत बढ़ गई है। मोहल्ले के ही स्कूल परिसर में रविवार को घरेलू घिंसा कानून और दिल्ली सरकार सहित दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन है।"
घनश्याम को बीच में ही टोकते हुए अर्पिता ने सवाल दागा।
'सास-बहू के झड़गे से मुझे क्या लेना-देना? मुझे तो सेलिब्रिटी बनने के बारे में बताइए?"
घनश्याम, 'अरे मैडम! प्रदर्शन से ही तो पब्लिसिटी मिलेगी तभी तो आप सेलिब्रिटी बनेंगी।"
अर्पिता, ' क्या पागलों जैसी बात कर रहे हो। प्रदर्शन करने से कोई सेलिब्रिटी बनता है क्या?"
घनश्याम, ' दिल्ली में जो प्रदर्शन होते हैं, उसमें शामिल होने वालों को आप पागल समझती हैं?"
अर्पिता, ' यह किसने कहा? जो प्रदर्शन होते हैं, उनमे शिरकत करने वाले देश और समाज प्रेमी होते हैं। वह लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन करते हैं। वह समाज को साफ-सुधरा बनाना चाहते हैं, न कि खुद सेलिब्रिटी बनना चाहते हैं। लेकिन, आप यह सब छोड़िए और मुझे जल्दी बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना होगा?"
घनश्याम, ' पहले आप मेरे सवाल का जवाब दें। जिस व्यक्ति के कवि होने पर लोगों को कभी 'विश्वास" नहीं होता था आज वही व्यक्ति बहुत बड़ा सेलिब्रिटी बनकर एक प्रोग्राम की इतनी फीस वसूल रहा है कि लोगों को 'विश्वास" नहीं होता। दूसरा, कुछ समय पहले जो व्यक्ति टीवी के लिए लोगों के इंटरव्यू लेता था आज मीडिया उसके इंटरव्यू लेती है। आखिर यह सब कैसे हुआ?"
अर्पिता ने कोई जवाब नहीं दिया। वह चुपचाप हतप्रभ होकर कुछ सोचती रही। उसको चुप देख घनश्याम ने फिर बोलना शुरू किया।
' मैडम, मैं बताता हूं। यह सब प्रदर्शन से मिली पब्लिसिटी का कमाल है। टीवी-अखबार सभी में फोटो और नाम आता है तो लोग रातों-रात स्टार बन जाते हैं। हां, यह अलग बात है कि उन्होंने अब अपनी टोपियां बदल कर पहन ली हैं। मैडम, प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार को पिटाई से जो पब्लिसिटी मिली वह उसे 20-25 साल पत्रकारिता करते हुए नहीं मिली थी। दूसरी बात, आप जो देशभक्ति और समाज सेवा की बात करती हो तो मैं आपको बता दूं कि यह सब आप जैसे लोगों का भ्रम है। दिसंबर में जब लोग सड़क पर सरकार, समाज और कानून बदलने के लिए सक्रिय थे, उस दरम्यान भी रेप की वारदातें थमी नहीं थीं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 15 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर 2012 के बीच हर रोज तीन युवतियों और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, जबकि अन्य दिनों का औसतन आंकड़ा दो की आबरू लूटने का ही था। यदि प्रदर्शन का असर या डर होता हो इसमें बढ़ोतरी नहीं होती। मैडम, प्रदर्शन से पब्लिसिटी मिलती है, यह मेरे मोहल्ले की सीमा, गीता, मोहन और सुधा ने भी साबित कर दिया है। उन्होंने रामलीला की लीला में शिरकत की थी, इस लिए आज उन्हें पूरा मोहल्ला जानता है। आस-पास इलाके के लोग भी उनके नाम को जानते हैं। सोशल मीडिया पर उनके फ्रेंड लिस्ट पहले से काफी लंबी हो गई। इलाके में जब भी कुछ होता है तो मीडिया वाले उन्हीं के घर पहुंचते हैं। फिर टीवी-अखबारों में उनके फोटो आते हैं। इतना ही नहीं कुछ समय पहले तक काम की तलाश में यहां-वहां भटकने वाली सीमा तो अब 'आप" के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
अर्पिता, ' समझ गई। मैं सब कुछ समझ गई। प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर मैं भी अपने इलाके की स्टार बन जाऊंगी। मैं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार हूं।"
अब आप क्या सोच रहे हो? आपको भी प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर टीवी-चैनलों और अखबारों में छाना है तो रविवार को तैयार रहें। हां, पता याद रखें महरौली के समीप कछनिया मोहल्ले का स्कूल परिसर। झगड़ा सास-बहू का।
दिल्ली के पटपड़गंज में रहने वाली रज्जो जब घर के कामकाज में व्यस्त थी तभी उसकी बेटी अर्पिता हाथ में अखबार थामे ठिठोली करती हुई उसके पास पहुंची। बेटी को इस अंदाज में देख रज्जो कोई सवाल करती उससे पहले ही उसने अपनी बात शुरू कर दी।
'मां ! आज मेरी किस्मत का दरवाजा खुल गया है। आसमान में मुझे मेरी किस्मत की सितारा साफ नजर आ गया है।"
अर्पिता कुछ और कहती उससे पहले ही रज्जो ने उसे टोक दिया।
'क्या मतलब? किस्मत का तारा-सितारा, क्या है यह? दिन में सपने देखना बंद कर और काम में मेरा हाथ बंटा।"
अर्पिता, ' अरे मां ! अब मैं सेलिब्रिटी बनूंगी।"
रज्जो, ' क्या होता है सलबटी?"
अर्पिता, ' सलबटी नहीं मां, सेलिब्रिटी... सेलिब्रिटी। मतलब, बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति।"
रज्जो, 'अच्छा, मगर ये तो बताओ बनोगी कैसे?"
अर्पिता, ' अब मैं ही नहीं आप भी सेलिब्रिटी बनेंगी। ये अखबार देखा आपने? इसमें एक विज्ञापन आया है। सेलिब्रिटी बनना है तो कल इंडिया गेट पर मिलें। जानती हो, इसके लिए कोई योग्यता की बाध्यता नहीं है। और न ही उम्र का कोई बंधन। मतलब, आब आप भी सेलिब्रिटी बन सकती हो। हम दोनों साथ-साथ फेमस होंगे। फिर देखना मोहल्ले में सभी हमें कितनी इज्जत देंगे।"
अर्पिता बताते-बताते ख्वाबों में खो जाती है। रज्जो उसको झकझोर कर उसका ख्वाब तोड़ती है।
' अच्छा, अब घर का काम निपटवाने में मेरी मदद कर कल होगा तब चलेंगे इंडिया गेट।"
दूसरे दिन मां-बेटी तय समय पर इंडिया गेट पहुंच गए। यहां लोगों की खासी भीड़ थी। हर वर्ग के लोग भीड़ मे शामिल थे। शायद उम्र और शिक्षा का कोई बंधन नहीं होने की वजह से लाइन कुछ ज्यादा ही लंबी थी। दो लोग कुर्सियों पर बैठे सभी को बारी-बारी से कुछ समझा रहे थे। काफी इंतजार के बाद मां-बेटी का भी नंबर आया। सामने कुर्सी पर बैठा व्यक्ति उनसे कुछ पूछता या कुछ समझता उससे पहले ही अर्पिता ने सवालों की बौछार कर दी।' सुबह से लाइन में लगी हूं और अब जाकर कहीं नंबर आया। मैं तो परेशान हो गई। अब आप जल्दी से बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना है?"
घनश्याम, ' देखिए मैडम ! आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह बहुत ही आसान काम है। और मुझे पता है कि आप इसे कर लेंगी।"
अर्पिता, ' आप वह सब छोड़िए, मैं तो कर ही लूंगी। आप तो मुझे यह बताओ कि मुझे करना क्या है?"
घनश्याम, 'महरौली के समीप कछनिया मोहल्ला में तीन दिन पहले सास-बहू में झगड़ा हो गया है। बात बहुत बढ़ गई है। मोहल्ले के ही स्कूल परिसर में रविवार को घरेलू घिंसा कानून और दिल्ली सरकार सहित दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन है।"
घनश्याम को बीच में ही टोकते हुए अर्पिता ने सवाल दागा।
'सास-बहू के झड़गे से मुझे क्या लेना-देना? मुझे तो सेलिब्रिटी बनने के बारे में बताइए?"
घनश्याम, 'अरे मैडम! प्रदर्शन से ही तो पब्लिसिटी मिलेगी तभी तो आप सेलिब्रिटी बनेंगी।"
अर्पिता, ' क्या पागलों जैसी बात कर रहे हो। प्रदर्शन करने से कोई सेलिब्रिटी बनता है क्या?"
घनश्याम, ' दिल्ली में जो प्रदर्शन होते हैं, उसमें शामिल होने वालों को आप पागल समझती हैं?"
अर्पिता, ' यह किसने कहा? जो प्रदर्शन होते हैं, उनमे शिरकत करने वाले देश और समाज प्रेमी होते हैं। वह लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन करते हैं। वह समाज को साफ-सुधरा बनाना चाहते हैं, न कि खुद सेलिब्रिटी बनना चाहते हैं। लेकिन, आप यह सब छोड़िए और मुझे जल्दी बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना होगा?"
घनश्याम, ' पहले आप मेरे सवाल का जवाब दें। जिस व्यक्ति के कवि होने पर लोगों को कभी 'विश्वास" नहीं होता था आज वही व्यक्ति बहुत बड़ा सेलिब्रिटी बनकर एक प्रोग्राम की इतनी फीस वसूल रहा है कि लोगों को 'विश्वास" नहीं होता। दूसरा, कुछ समय पहले जो व्यक्ति टीवी के लिए लोगों के इंटरव्यू लेता था आज मीडिया उसके इंटरव्यू लेती है। आखिर यह सब कैसे हुआ?"
अर्पिता ने कोई जवाब नहीं दिया। वह चुपचाप हतप्रभ होकर कुछ सोचती रही। उसको चुप देख घनश्याम ने फिर बोलना शुरू किया।
' मैडम, मैं बताता हूं। यह सब प्रदर्शन से मिली पब्लिसिटी का कमाल है। टीवी-अखबार सभी में फोटो और नाम आता है तो लोग रातों-रात स्टार बन जाते हैं। हां, यह अलग बात है कि उन्होंने अब अपनी टोपियां बदल कर पहन ली हैं। मैडम, प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार को पिटाई से जो पब्लिसिटी मिली वह उसे 20-25 साल पत्रकारिता करते हुए नहीं मिली थी। दूसरी बात, आप जो देशभक्ति और समाज सेवा की बात करती हो तो मैं आपको बता दूं कि यह सब आप जैसे लोगों का भ्रम है। दिसंबर में जब लोग सड़क पर सरकार, समाज और कानून बदलने के लिए सक्रिय थे, उस दरम्यान भी रेप की वारदातें थमी नहीं थीं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 15 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर 2012 के बीच हर रोज तीन युवतियों और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, जबकि अन्य दिनों का औसतन आंकड़ा दो की आबरू लूटने का ही था। यदि प्रदर्शन का असर या डर होता हो इसमें बढ़ोतरी नहीं होती। मैडम, प्रदर्शन से पब्लिसिटी मिलती है, यह मेरे मोहल्ले की सीमा, गीता, मोहन और सुधा ने भी साबित कर दिया है। उन्होंने रामलीला की लीला में शिरकत की थी, इस लिए आज उन्हें पूरा मोहल्ला जानता है। आस-पास इलाके के लोग भी उनके नाम को जानते हैं। सोशल मीडिया पर उनके फ्रेंड लिस्ट पहले से काफी लंबी हो गई। इलाके में जब भी कुछ होता है तो मीडिया वाले उन्हीं के घर पहुंचते हैं। फिर टीवी-अखबारों में उनके फोटो आते हैं। इतना ही नहीं कुछ समय पहले तक काम की तलाश में यहां-वहां भटकने वाली सीमा तो अब 'आप" के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
अर्पिता, ' समझ गई। मैं सब कुछ समझ गई। प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर मैं भी अपने इलाके की स्टार बन जाऊंगी। मैं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार हूं।"
अब आप क्या सोच रहे हो? आपको भी प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर टीवी-चैनलों और अखबारों में छाना है तो रविवार को तैयार रहें। हां, पता याद रखें महरौली के समीप कछनिया मोहल्ले का स्कूल परिसर। झगड़ा सास-बहू का।
सोमवार, 22 अप्रैल 2013
सत्ता, सेक्स और सीडी का सच
धर्मेंद्र सिंह राजावत
सत्ता, सेक्स और सीडी जब भी करीब आते हैं, राजनीति के गलियारों में भूचाल आ जाता है। सियासत में फिर ऐसा गुबार उठता है, मानों यह देश-दुनिया की सारी गंदगी को उड़ा ले जाएगा। हालांकि, बिगड़ैल आंधी की तरह यह टीन-टप्पर को तहस-नहस (किसी को पदमुक्त) करने के बाद शांत हो जाती है, मगर सियासत का बवंडर थम जाने के बाद भी आम लोगों की जिज्ञासाएं हिलोरें लेती रहतीं हैं। वे उस सच को जानने की जुगत में जुट जातीं हैं, जो राजनीति की गहराई में छुपी होती हैं। यह अलग बात है कि हर मुमकिन कोशिश के बाद भी वह अपने टास्क को पूरा करने में नाकाम रहतीं हैं। अलबत्ता, आम लोगों की बेचैनी का नेता पूरा ख्याल रखते हैं। तभी तो कुछ अंतराल के बाद वह उनको सच को सामने लाने का टास्क देते रहते हैं। यही वजह है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, भाजपा के संगठन महामंत्री संजय जोशी और राजस्थान की सत्ता में काबिज कांग्रेस सरकार के दबंग मंत्री रहे महिपाल मदेरणा व भंवरी देवी की सेक्स सीडी का ज्यादातर लोग सच्चाई जानने में असफल रहे तो कांग्रेस के प्रवक्ता और केंद्र सरकार में स्थाई समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स सीडी ने उनको टास्क दे दिया है। इस मामले को अभी कुछ महीने ही गुजरे थे कि नया मामला मध्य प्रदेश के ग्यावालिर से आ गया। बताया जाता है कि मुरैना-चंबल संभाग के जौरा विधानसभा क्षेत्र से बीएसपी विधायक मनीराम धाकड़ की सेक्स सीडी ने यहां नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
सत्ता, सेक्स और सीडी का रिश्ता नया नहीं हैं। दिमाग पर जोर डालेंगे तो एहसास होगा कि पिछले कुछ सालों से नियमित अंतराल के बाद किसी न किसी नेता या फिर किसी चर्चित शख्सियत की सेक्स सीडी खूब सुर्खियां बटोरतीं रहीं हैं। अब इसी कड़ी में नया नाम जुड़ा है बीएसपी विधायक मनीराम धाकड़ का। दावों के मुताबिक ग्वालियर के किसी होटल में बनी सीडी में धाकड़ किसी महिला का साथ अपत्तिजनक स्थिति में हैं। महिला कैलारस क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि उसका पति फौज में नौकरी करता है। हालांकि, धाकड़ ने इसे राजनीतिक साजिश करार देकर सीडी को ही फर्जी बता दिया है। अलबत्ता, सीडी कांड में सियासत पहली बार शर्मसार नहीं हुई है। इससे पहले भी कई ऐसे कांड हुए हैं, जिन्होंने देश की छवि को धूलित किया है। इनमें वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, भाजपा के संगठन महामंत्री संजय जोशी और राजस्थान के कांग्रेसी मंत्री रहे महिपालमदेरणा के अलावा पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांतिभूषण एवं पूर्व सपा नेता अमरसिंह की सीडी का नाम शामिल है।
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी से जुड़ी सेक्स सीडी इंटरनेट पर आई, तभी से राजनीति के गलियारों से लेकर सोशल नेटवर्किंग साइटों और आम लोगों के बीच वह चर्चा का विषय रही। बताया जाता है कि सीडी में वह एक महिला वकील के साथ आपत्तिजनक अवस्था में दिख रहे हैं। सीडी के मुताबिक वह महिला को जज बनाने का लालच देकर उसके साथ संबंध बनाते हैं। सीडी की शुरुआत में ही महिला उनसे कहती है, 'जज कब बना रहे हो"। इतना ही नहीं कुछ लोगों का तो यहां तक दावा है कि सीडी में जो जगह दिख रही है, वह कोर्ट परिसर का ही हिस्सा है। यदि यह हकीकत है तो वाकई शर्मसार करने वाला है, मगर हकीकत कब पता चलेगी, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। गौरतलब है कि सिंघवी पिछले साल लोकपाल बिल की वजह से सुर्खियों में आए थे। उनकी अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिश के आधार पर ही सरकार ने बिल तैयार किया था। हालांकि, सीडी के प्रसारण पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और सिंघवी ने भी इसे उनके खिलाफ साजिश करार दिया है, मगर लोग कयास लगाने लगे हैं। कयास लगाना लाजिमी भी है। दरअसल, धुआं वहीं उठता है, जहां आग होती है। सीडी में सिंघवी के वाहन के पूर्व चालक का नाम भी लिया जा रहा है। कोर्ट ने एक मीडिया हाउस और पूर्व चालक को नोटिस भी भेजा है। अलबत्ता, हकीकत क्या है, यह जानने के लिए सभी उत्सुक हैं।
एनडी तिवारी की सेक्स सीडी वर्ष 2009 में तब सुर्खियों में आई थी, जब वह आंध्रप्रदेश के गर्वनर थे। एक तेलगू टीवी चैनल ने सीडी का खुलासा किया था। उसके मुताबिक सीडी में पूर्व यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर एनडी तिवारी दो जवान महिलाओं के साथ विस्तर पर देखे गए हैं। महिलाओं के साथ विस्तर पर तिवारी बिना पायजामा के हैं। बाजार में सीडी आने के बाद राजनीति में कई साल गुजारने वाले तिवारी की खासी आलोचना हुई थी। आधे घंटे के वीड़ियो ने उनकी राजनीति कॅरिअर में ऐसा तूफान मचाया कि उनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा के संगठन महामंत्री संजय जोशी करीब छह साल पहले विवादित सीडी को लेकर यकायक चर्चा में आए थे। भाजपा में काफी असरदार साबित हो रहे जोशी भी सीडी में एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखे गए। सीडी ने उनके राजनीतिक कॅरिअर में ऐसा ग्रहण लगाया कि उनको कई साल गुमनामी में काटने पड़े। हालांकि कुछ समय पहले ही वह सक्रिय राजनीति में वापस आ गए हैं, मगर सीडी की हकीकत अभी भी सामने नहीं आई है। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे महिपाल मदेरणा और नर्स भंवरी देवी की सीडी ने तो राजस्थान की राजनीति में ऐसा तूफान खड़ा किया कि कई दिनों तक यह खबर देश के प्रमुख अखबारों और चैनलों पर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। सीडी में मदेरणा के साथ दिखने वाली भंवरी की हत्या ने इस मामले को और तूल दे दिया। हालांकि, मदेरणा के साथ ही उनकी पत्नी ने सीडी को साजिश करार दिया। इतना ही नहीं मदेरणा की पत्नी ने तो यहां तक कह दिया कि सीडी को भंवरी ने ही बनवाया था। वह मदेरणा को ब्लैकमेल करना चाहती थी। यह मामला राजस्थान सरकार को गले की फांस बनता दिखा तो उसने इसे सीबीआई को सौंप दिया। काफी पड़ताल के बाद भंवरी की हत्या की पुष्टि हो गई। इतना ही नहीं उसकी हत्या करने वाले आरोपियों ने उन वस्तुओं को भी उपलब्ध करा दिया, जिससे उसकी हत्या की गई थी। पुलिस ने उस नदी से भंवरी की कुछ वस्तुओं को भी गोताखोरों के जरिए इकट्ठा कर लिया, जिसमें उसको जलाने के बाद उसकी राख फेंकी गई थी। वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सेक्स सीडी में तब नाम उछला जब पुलिस ने एक सबीना नाम की महिला को गिरफ्तार किया। सबीना ने कई चौकाने वाले खुलासे किए थे। नतीजा, इस मामले में कई पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों का नाम चर्चा में आया। दो पूर्व मंत्री, एक आईएस अधिकारी, एक डीआईजी और दो डीएसपी के साथ ही 18 लोगों की इस मामले में गिरफ्तारी हुई तो पूरे राज्य में हंगामा हो गया। पड़ताल के बाद उमर को इस मामले में दोषमुक्त करार दिया गया।
कई सफेदपोश पर लगे बलात्कार के आरोप
सेक्स सीडी में नाम उछलने के अलावा भी कई मर्तबा सफेदपोशों ने जनता के भरोसे को तार-तार किया है। भोली जनता की अस्मत लूटने में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ही नहीं साउथ के नेता भी पीछे नहीं रहे। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में उनके कुछ मंत्रियों के साथ ही विधायकों पर भी बलात्कार के आरोप लगे थे। यूपी के कद्दावर नेता अमरमणि
त्रिपाठी और कवयित्री मधुमिता के बीच संबंधों के किस्सों ने भी उस समय खूब सुर्खियां बटोरीं थी। पिछले दिनों साउथ में हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट की सरगना फिल्म अभिनेत्री तारा चौधरी ने अपनी गिरफ्तारी के बाद कई सनसनीखेज खुलासे किए थे। उसने अपने बयान ने बताया कि न केवल पुलिस वाले उस पर सेक्स के लिए दबाव डालते थे बल्कि वह उससे लड़ियों को हायर कर नेताओं के विस्तर तक पहुंचाते थे।
रविवार, 21 अप्रैल 2013
Time
When your time is good
your mistakes r taken as a joke
But when when ur time is bad
even ur jokes are noticed as mistakes
MILESTONE.
The only thing i like about stones
that come in my way is, once i pass
them, they automatically become my
MILESTONE.
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