रविवार, 21 अप्रैल 2013

खुशी


धर्मेंद्र सिंह राजावत
पल-पल जिसे पाने के लिए
न जाने कितने साल तरसे
ये नैना भी न जाने
कितनी बार बरसे
खैर, छोटी ही सही
आखिर खुशी मिल ही गई
अब रब से दुआ है
तो बस इतनी
खुशी ऐसे ही
खिलखिलाती रहे
सब की आंखों का नूर बन कर
सभी को ऐसे ही हंसाती रहे।

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