मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

सेलिब्रिटी बनें (व्यंग्य )

धर्मेंद्र सिंह राजावत
दिल्ली के पटपड़गंज में रहने वाली रज्जो जब घर के कामकाज में व्यस्त थी तभी उसकी बेटी अर्पिता हाथ में अखबार थामे ठिठोली करती हुई उसके पास पहुंची। बेटी को इस अंदाज में देख रज्जो कोई सवाल करती उससे पहले ही उसने अपनी बात शुरू कर दी।
'मां ! आज मेरी किस्मत का दरवाजा खुल गया है। आसमान में मुझे मेरी किस्मत की सितारा साफ नजर आ गया है।"
अर्पिता कुछ और कहती उससे पहले ही रज्जो ने उसे टोक दिया।
'क्या मतलब? किस्मत का तारा-सितारा, क्या है यह? दिन में सपने देखना बंद कर और काम में मेरा हाथ बंटा।"
अर्पिता, ' अरे मां ! अब मैं सेलिब्रिटी बनूंगी।"
रज्जो, ' क्या होता है सलबटी?"
अर्पिता, ' सलबटी नहीं मां, सेलिब्रिटी... सेलिब्रिटी। मतलब, बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति।"
रज्जो, 'अच्छा, मगर ये तो बताओ बनोगी कैसे?"
अर्पिता, ' अब मैं ही नहीं आप भी सेलिब्रिटी बनेंगी। ये अखबार देखा आपने? इसमें एक विज्ञापन आया है। सेलिब्रिटी बनना है तो कल इंडिया गेट पर मिलें। जानती हो, इसके लिए कोई योग्यता की बाध्यता नहीं है। और न ही उम्र का कोई बंधन। मतलब, आब आप भी सेलिब्रिटी बन सकती हो। हम दोनों साथ-साथ फेमस होंगे। फिर देखना मोहल्ले में सभी हमें कितनी इज्जत देंगे।"
अर्पिता बताते-बताते ख्वाबों में खो जाती है। रज्जो उसको झकझोर कर उसका ख्वाब तोड़ती है।
' अच्छा, अब घर का काम निपटवाने में मेरी मदद कर कल होगा तब चलेंगे इंडिया गेट।"
दूसरे दिन मां-बेटी तय समय पर इंडिया गेट पहुंच गए। यहां लोगों की खासी भीड़ थी। हर वर्ग के लोग भीड़ मे शामिल थे। शायद उम्र और शिक्षा का कोई बंधन नहीं होने की वजह से लाइन कुछ ज्यादा ही लंबी थी। दो लोग कुर्सियों पर बैठे सभी को बारी-बारी से कुछ समझा रहे थे। काफी इंतजार के बाद मां-बेटी का भी नंबर आया। सामने कुर्सी पर बैठा व्यक्ति उनसे कुछ पूछता या कुछ समझता उससे पहले ही अर्पिता ने सवालों की बौछार कर दी।
' सुबह से लाइन में लगी हूं और अब जाकर कहीं नंबर आया। मैं तो परेशान हो गई। अब आप जल्दी से बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना है?"
घनश्याम, ' देखिए मैडम ! आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह बहुत ही आसान काम है। और मुझे पता है कि आप इसे कर लेंगी।"
अर्पिता, ' आप वह सब छोड़िए, मैं तो कर ही लूंगी। आप तो मुझे यह बताओ कि मुझे करना क्या है?"
घनश्याम, 'महरौली के समीप कछनिया मोहल्ला में तीन दिन पहले सास-बहू में झगड़ा हो गया है। बात बहुत बढ़ गई है। मोहल्ले के ही स्कूल परिसर में रविवार को घरेलू घिंसा कानून और दिल्ली सरकार सहित दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन है।"
घनश्याम को बीच में ही टोकते हुए अर्पिता ने सवाल दागा।
'सास-बहू के झड़गे से मुझे क्या लेना-देना? मुझे तो सेलिब्रिटी बनने के बारे में बताइए?"
घनश्याम, 'अरे मैडम! प्रदर्शन से ही तो पब्लिसिटी मिलेगी तभी तो आप सेलिब्रिटी बनेंगी।"
अर्पिता, ' क्या पागलों जैसी बात कर रहे हो। प्रदर्शन करने से कोई सेलिब्रिटी बनता है क्या?"
घनश्याम, ' दिल्ली में जो प्रदर्शन होते हैं, उसमें शामिल होने वालों को आप पागल समझती हैं?"
अर्पिता, ' यह किसने कहा? जो प्रदर्शन होते हैं, उनमे शिरकत करने वाले देश और समाज प्रेमी होते हैं। वह लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन करते हैं। वह समाज को साफ-सुधरा बनाना चाहते हैं, न कि खुद सेलिब्रिटी बनना चाहते हैं। लेकिन, आप यह सब छोड़िए और मुझे जल्दी बताइए कि मुझे सेलिब्रिटी बनने के लिए क्या करना होगा?"
घनश्याम, ' पहले आप मेरे सवाल का जवाब दें। जिस व्यक्ति के कवि होने पर लोगों को कभी 'विश्वास" नहीं होता था आज वही व्यक्ति बहुत बड़ा सेलिब्रिटी बनकर एक प्रोग्राम की इतनी फीस वसूल रहा है कि लोगों को 'विश्वास" नहीं होता। दूसरा, कुछ समय पहले जो व्यक्ति टीवी के लिए लोगों के इंटरव्यू लेता था आज मीडिया उसके इंटरव्यू लेती है। आखिर यह सब कैसे हुआ?"
अर्पिता ने कोई जवाब नहीं दिया। वह चुपचाप हतप्रभ होकर कुछ सोचती रही। उसको चुप देख घनश्याम ने फिर बोलना शुरू किया।
' मैडम, मैं बताता हूं। यह सब प्रदर्शन से मिली पब्लिसिटी का कमाल है। टीवी-अखबार सभी में फोटो और नाम आता है तो लोग रातों-रात स्टार बन जाते हैं। हां, यह अलग बात है कि उन्होंने अब अपनी टोपियां बदल कर पहन ली हैं। मैडम, प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार को पिटाई से जो पब्लिसिटी मिली वह उसे 20-25 साल पत्रकारिता करते हुए नहीं मिली थी। दूसरी बात, आप जो देशभक्ति और समाज सेवा की बात करती हो तो मैं आपको बता दूं कि यह सब आप जैसे लोगों का भ्रम है। दिसंबर में जब लोग सड़क पर सरकार, समाज और कानून बदलने के लिए सक्रिय थे, उस दरम्यान भी रेप की वारदातें थमी नहीं थीं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 15 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर 2012 के बीच हर रोज तीन युवतियों और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, जबकि अन्य दिनों का औसतन आंकड़ा दो की आबरू लूटने का ही था। यदि प्रदर्शन का असर या डर होता हो इसमें बढ़ोतरी नहीं होती। मैडम, प्रदर्शन से पब्लिसिटी मिलती है, यह मेरे मोहल्ले की सीमा, गीता, मोहन और सुधा ने भी साबित कर दिया है। उन्होंने रामलीला की लीला में शिरकत की थी, इस लिए आज उन्हें पूरा मोहल्ला जानता है। आस-पास इलाके के लोग भी उनके नाम को जानते हैं। सोशल मीडिया पर उनके फ्रेंड लिस्ट पहले से काफी लंबी हो गई। इलाके में जब भी कुछ होता है तो मीडिया वाले उन्हीं के घर पहुंचते हैं। फिर टीवी-अखबारों में उनके फोटो आते हैं। इतना ही नहीं कुछ समय पहले तक काम की तलाश में यहां-वहां भटकने वाली सीमा तो अब 'आप" के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
अर्पिता, ' समझ गई। मैं सब कुछ समझ गई। प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर मैं भी अपने इलाके की स्टार बन जाऊंगी। मैं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तैयार हूं।"
अब आप क्या सोच रहे हो? आपको भी प्रदर्शन से पब्लिसिटी पाकर टीवी-चैनलों और अखबारों में छाना है तो रविवार को तैयार रहें। हां, पता याद रखें महरौली के समीप कछनिया मोहल्ले का स्कूल परिसर। झगड़ा सास-बहू का।

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