गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

कुदरती उपायों से भगाएं बुखार

हल्की हरारत या बुखार अमूमन मौसम बदलने पर होने वाली आम समस्याओं में से एक है। वैसे तो यह मौसमी बुखार दो-तीन दिन में खुद ही खत्म हो जाता है इसलिए अक्सर हम इसके लिए डॉक्टर को दिखाने के बजाय सामान्य दवाएं ले ही लेते हैं।
आपके घर में ही ऐसे कई उपाय मौजूद हैं, जिनसे आपको बुखार कम करने में मदद मिल सकती है और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। हां, अगर इनसे आराम न लगे तो डॉक्टरी परामर्श लेने में देर भी न करें।
* गर्म पानी से नहाएं :
अगर आप बुखार में मरीज को ठंडे पानी से नहलाते हैं तो ऐसा बिल्कुल न करें क्योंकि बुखार घटाने के लिए डॉक्टर भी गर्म पानी से नहाने की सलाह देते हैं। बुखार के दौरान पसीने वाले शरीर से बेहतर है नहाकर शरीर को साफ रखा जाए।
इससे न सिर्फ बुखार हल्का होता है बल्कि शरीर का तापमान भी संतुलित होता है और मरीज हल्का महसूस करता है।
* स्पॉन्ज थैरेपी :
तेज बुखार की स्थिति में कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर निचोड़ें और इससे शरीर पोछें। बुखार में शरीर का तापमान कम करने के लिए भी यह थैरेपी मददगार हो सकती है।
* लहसुन का पेस्ट :
लहसुन का पेस्ट बनाकर उसमें नारियल तेल या ऑलिव ऑयल मिलाएं और पंजों पर इसे लगाकर रात भर छोड़ दें। सुबह उठने पर शरीर का तापमान सामान्य मिलेगा।
* अंडे का सफेद भाग या प्याज :
अंडे का सफेद भाग टिशु पर लगाएं या फिर पैरों पर प्याज के टुकड़े काटकर रखें और फिर मोजे पहन लें। 15 मिनट तक रखने के बाद पैरों को गुनगुने पानी से साफ करें। इससे भी  बुखार बहुत जल्दी उतर जाता है।  

सर्दी की कंपकंपाहट भी बना सकती है स्लिम!

मेलबोर्न (प्रे)। अक्सर सर्दी के मारे कंपकंपाहट होती रहती है। मगर क्या आप जानते हंै कि जितनी ज्यादा सर्दी लगती है उतना ही शरीर से बॉडी फैट बर्न होता जाता है! जी हां, हाल ही में किए एक नए शोध में यह खुलासा किया गया है।
इस शोध में बताया गया है कि यह सब हॉर्मोन्स पर डिपेंड करता है कि वे कैसे सर्दी के दौरान शरीर रिस्पॉन्ड करता है। इस शोध में पाया गया कि सर्दियों में शिवरिंग होने के दौरान शरीर से विशेष प्रकार के हॉर्मोन्स का सिक्रिशन होता है जो ऑर्डिनरी व्हाइट फैट को जलाते हुए ब्राउन फैट में तब्दील कर देता है। यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि ऑर्डिनरी व्हाइट फैट जिसमें प्रारंभिक तौर पर एक्सेस कैलोरी स्टोर रहती है वहीं ब्राउन फैट एक्चुअली बॉडी की कैलोरी बर्न होने के दौरान सक्रिय होता है।
इस शोध के नतीजों के लिए सर्दी के दौरान वॉलेन्टियर्स के ब्लड सेंपल्स चेक किए गए। शोधकर्ताओं ने पाया कि ठंड के दौरान इरसिन और एफजीएफ21 हार्मोन्स का सिक्रिशन पाया गया। इरसिन का सिक्रिशन शिवरिंग मसल्स से होता है जबकि एफजीएफ21 का एक्टिवेटेड ब्राउन फैट से। इसके अलावा ली ने अमेरिका स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) में जाकर सर्वे भी किया।
यह शोध पूर्व में किए गए उस शोध के आधार पर किया गया जिसमें कहा गया था कि वे लोग जो लोग दुबले-पतले होते हैं उनमें ब्राउन फैट ज्यादा होता है जबकि ओवरवेट लोगों में यह बहुत कम होता है।  

दांतों को दें आहार की मजबूती

दांतों को स्वस्थ रखने के लिए उनकी नियमित व सही सफाई के साथ सही आहार की भी जरूरत होती है। कुछ आहार दांत को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि अन्य कई आहार दांतों को स्वस्थ, मजबूत और कैविटी से दूर रखने के लिए उपयोगी होते हैं। दांतों को स्वस्थ रखने के लिए ऐसा आहार लेना चाहिए जो प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी और विटामिन सी से भरपूर हो। आइए हम आपको बताते है दांतों को स्वस्थ और मजबूत बनाने वाले कुछ सर्वेष्ठ आहारों के बारे में।
* नारियल तेल :
तिल के तेल की तरह ही नारियल तेल भी मुंह में माउथवॉश की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। हजारों वर्षों से इसका इस्तेमाल एक पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता है। नारियल तेल ओरल बैक्टीरिया से लड़ने के लिए विशेष रूप से प्रभावी होता है। इसमें मौजूद एंजाइम मुंह से जर्म्स को बाहर निकाल फेंकते हैं और दांत मजबूत रहते हैं।
* कैल्शियम :
मजबूत और कैविटी मुक्त दांतों के लिए कैल्शियम लेना बहुत जरूरी है। कैल्शियम हमें दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही और पनीर आदि से मिलता है। इसके साथ ही सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज और हरी सब्जियों में भी कैल्शियम काफी मात्रा में होता है।
* साबुत अनाज :
साबुत अनाज में विटामिन 'बी" और लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होता हैं, जो मसूड़ों को स्वस्थ रखने में और दांतों को कैविटी से बचाने में मदद करता है। साबुत अनाज हड्डियों और दांतों के लिए मैग्नीशियम का एक महत्वपूर्ण घटक है। साथ ही साबुत अनाज में फाइबर बहुत अधिक पाया जाता है। चोकर, ब्राउन राइस साबुत अनाज का अच्छा स्रोत है।
 * फाइबर :
फाइबर से परिपूर्ण आहार लेने से मुंह में सलाइवा पूरी मात्रा में बनता है जो दांतों को कैविटी से बचाने और स्वस्थ रखने में मदद करता है। जैसे किशमिश, अंजीर, केले, सेब, संतरे, सेम, मूंगफली, बादाम, चोकर और मटर आदि फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शमिल कर आप दांतों की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
* प्याज और मशरूम :
प्याज और मशरूम दांतों के लिए सर्वश्रेष्ठ आहारों में से एक है। दांतों को मजबूत और कैविटी मुक्त रखने में यह बहुत उपयोगी होता है। प्याज मुंह में उत्पन्ना बैक्टीरिया को खत्म करता है और मशरूम बैक्टीरिया को बनने से रोकता है।
* अजवाइन और लौंग
कैविटी को दूर करने में अजवाइन व लौंग सबसे ज्यादा मददगार होता है। अजवाइन चबाने से निकलने वाली लार मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारती है।
* कच्ची सब्जियां और फल :
कच्ची सब्जियां और फल कैविटी से लड़ने और सांस को तरोताजा बनाने में मदद करते हैं। इसलिए केले, सेब, संतरे और गाजर आदि को अपने दैनिक आहार में शामिल करें। यह फल और सब्जियां आपको दांतों की सभी प्रकार की परेशानियों से लड़ने में मदद करते हैं।
* विटामिन सी :
एंटीऑक्सीडेंट विटामिन जैसे विटामिन सी, फल और सब्जियों में मौजूद अन्य पोषक तत्व मसूड़ों और अन्य ऊतकों में मौजूद बैक्टीरिया से दांतों को रक्षा प्रदान करते हैं। 

ताली बजाने से बेहतर होती है सेहत

अगर हम कहें कि ताली बजाने से स्वास्थ्य को लाभ होता है तो यह मजाक लगता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह बिल्कुल सही है और लाभदायक भी है। सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि ताली बजाते हुए दो हाथों की आवाज सुबह के संगीत की तुलना में अधिक प्रभावशाली होती है। आमतौर पर हम किसी को खुश करने या फिर प्रोत्साहित करने के लिए ताली बजाते हैं। खुश और उत्साहित होने पर भी हम ताली बजाते हैं। बहुत से लोग गाते हुए भी ताली बजाते हैं। ताली बजाने में मजा आता है, इसलिए बच्चे ताली बजाना पसंद करते हैं। आइए, देखें कि किस प्रकार ताली बजाना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
ताली बजान से हाथों के सारे बिंदु दब जाते हैं और धीरे-धीरे शरीर में व्याप्त रोगों का सुधार होता है।
1. ताली बजाने से आपको हृदय रोग और अस्थमा संबंधित समस्याओं से राहत पाने में बहुत मदद मिलती है।
2. हृदय, लिवर, फेफड़ों आदि से जुड़ी नसों के लिए यह बहुत मददगार साबित होता है। अगर आप ताली बजाते हैं तो नसों को बेहतर कार्य करने में मदद मिलती है।
3. इससे आप बेहतर और अधिक आराम महसूस करेंगे।
4. यह आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाता है क्योंकि यह आपके शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं को मजबूत करता है। ये किसी भी बीमारी से आपके शरीर की रक्षा करते हैं।
5. यह बच्चों में कौशल बढ़ाने और अकादमिक प्रदर्शन को सुधारने में मदद करता है।
6. ताली बजाने से रक्त संचरण बढ़ता है और नसों तथा धमनियों से खराब कोलेस्ट्रॉल सहित सारे अवरोध हट जाते हैं।
7. अगर आप एक दिन में 1500 बार ताली बजाते हैं तो आप स्वस्थ रहेंगे।
 8. हाथ से ताली बजाने से बच्चों का हस्त कौशल सुधरता है, जिससे उनकी लिखावट साफ हो सकती है, वे बेहतर लिख सकते हैं और स्पेलिंग संबंधी गलतियां कम होती हैं।
9. हर रोज भोजन करने के बाद कुछ देर के लिए ताली बजाएं। इससे आप गर्मी महसूस करेंगे तथा आपके हाथों और पैरों पर पसीना भी आ सकता है।
 10. अच्छे परिणाम पाने के लिए ताली बजाने से पहले हथेलियों पर नारियल या सरसों का तेल लगाना चाहिए ताकि यह शरीर में अवशोषित हो जाए।
 11. हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, डिप्रेशन, अस्थमा, जुकाम, गठिया, सिरदर्द, अनिद्रा और बालों का झड़ना आदि बीमारियों का इलाज ताली बजाने से किया जा सकता है। 

सांसों की दुर्गंध से यूं पाएं छुटकारा ।Get rid of bad breath

किसी से बात करने के दौरान न सिर्फ आपका पूरा बॉडी पॉश्चर महत्वपूर्ण होता है बल्कि आपके बोलने का टोन भी बहुत जरूरी होता है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि आप सामने वाले से बेहतरीन तरीके से कैसे बात करते हैं। मगर क्या आपको पता है कि नजदीक से बात करने के दौरान आपकी सांसों की दुर्गंध भी सामने वाले को परेशान कर सकती है और आपका इम्प्रेशन कम हो जाता है। इसके लिए बहुत जरूरी है सांसों को तरोताजा रखना। यह तरोताजगी सिर्फ आपके शरीर में उचित जल स्तर को बनाए रखने से आएगी। इसलिए जनाब, अब महंगे माउथवॉश की जरूरत नहीं है सिर्फ कुछ बातों का विशेष रूप में ध्यान रखिए...।
*ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं :
 शरीर में जल का स्तर संतुलित रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। इससे सांसों की ताजगी को बनाए रखा जा सकता है, क्योंकि जब हमारे शरीर में जल का स्तर कम हो जाता है तो मुंह में लार का बनना कम हो जाता है। लार बनने से मुंह में पनपने वाले जीवाणु साफ होते रहते हैं, जिससे सांसों में बदबू नहीं पनपती।
* विटामिन 'सी" का सेवन :
संतरा या नीबू प्रजाति के रस वाले फलों में विटामिन 'सी" भरपूर मात्रा में पाई जाती है, तथा ये फल सांसों की बदबू दूर करने में बहुत मददगार होते हैं। विटामिन 'सी" को जीवाणुओं से लड़ने वाले पदार्थ के रूप में जाना जाता है। जो खट्टे पदार्थ ज्यादा नहीं खा सकते वे विटामिन 'सी" की गोलियां भी ले सकते हैं।
* सेब करता है मुंह की सफाई :
जब हम सेब को काटकर खाते हैं, तो हमारे मुंह में लार का स्राव तेजी से होता है। इससे हमारे मुंह की एक तरह से सफाई हो जाती है और सारे जीवाणु निकल जाते हैं। इसके बाद हमारी सांसों में बदबू पैदा नहीं होती।
* दालचीनी की चाय :
दालचीनी हमारी रसोई में मिलने वाला बेहद सामान्य मसाला है। खड़े गरम मसालों में शुमार दालचीनी की चाय पीने से मुंह से आने वाली बदबू से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।