शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा मलेरिया के उपचार का नया तरीका

प्रे। भारतीय मूल के वैज्ञानिक प्रोफेसर नीरज टोलिया ने मलेरिया के उपचार का एकदम नया कारगर तरीका खोजा है। उन्होंने पता लगाया है कि मलेरिया का परजीवी लाल रक्त कोश्ािकाओं पर किस तरह हमला करता है। यह परजीवी विश्ोषतौर पर भारत और दक्षिण्ा पूर्व एश्ािया में पाया जाता है। इस खोज से मलेरिया का टीका तैयार करने में काफी मदद मिल सकती है। यह श्ाोध जर्नल पीएलओएस पैथजन में प्रकाश्ाित हुआ है।
सेंट लुई स्थित वाश्ािंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की श्ाोध टीम के प्रमुख प्रोफेसर टोलिया के मुताबिक, प्लासमोडियम वीवेक्स नाम का मलेरिया परजीवी लाल रक्त कोश्ािकाओं पर दो प्रोटीन छोड़ता है। इससे कोश्ािका पर हमला करना आसान हो जाता है। मॉलिक्यूल बायोलॉजी, बायोकैमेस्ट्री और मॉलिक्यूल बायोफिजिक्स के प्रोफेसर टोलिया ने कहा, अन्य परजीवियों की तुलना में प्लासमोडियम वीवेक्स परजीवी के कारण्ा ज्यादा लोग मलेरिया का श्ािकार होते हैं। हम अपनी खोज के नतीजों का इस्तेमाल कारगर टीका बनाने में कर रहे हैं।
उन्होंने बताया, प्लासमोडियम वीवेक्स लीवर में छिप कर रहता है और कई वर्षों बाद उभर कर सामने आता है। इससे नए संक्रमण्ा पैदा होते हैं जिनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इनका इलाज भी अपेक्षाकृत मुश्किल होता है। इससे पहले के श्ाोध में दावा किया गया था कि पी वीवेक्स लाल रक्त कोश्ािका पर एक ही प्रोटीन छोड़ता है। नए श्ाोध में पता चला है कि यह परजीवी दो प्रोटीन छोड़ता है। यह रासायनिक प्रक्रिया काफी जटिल होता है जिसे अब से पहला समझ्ाा नहीं जा सका था। 

नई तकनीक बताएगी कब पड़ेगा दिल का दौरा

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। शोधकर्ताओं   ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जो बताएगी कि आपको दिल का दौरा कब पड़ने वाला है। अभी तक इस तरह की कोई भी पद्धति चिकित्सकीय जगत में मौजूद नहीं थी। इस खोज से उन लोगों को काफी मदद मिल सकेगी जिनमें दिल का दौरा पड़ने के लक्षण्ा मौजूद हैं।
कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीएसआरआई) के शोधकर्ताओं   ने 'फ्लुइड (तरल पदाथर््ा) बायोप्सी तकनीक" की खोज की है। इसके जरिये रक्त में मौजूद कुछ विश्ोष कोश्ािकाओं की पहचान करके भविष्य में दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका का पता लगाया जा सकता है। श्ाोध के प्रमुख लेखक व सहायक प्रोफेसर पीटर कुन ने बताया, यह तकनीक रक्त में सर्कुलेटिंग एंडोथेलियल कोश्ािकाओं (सीईसी) की आसानी से पहचान कर लेती है। स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा दिल का दौरा झ्ोल चुके व्यक्ति के रक्त में ये कोश्ािकाएं पाई जाती हैं। जर्नल फिजिकल बायोलॉजी में प्रकाश्ाित रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ता अब इस तकनीक का परीक्षण्ा दिल का दौरा पड़ने के प्रारंभिक चरण्ा में रोगी की पहचान करने के लिए कर रहे हैं। एंडोथेलियल कोश्ािकाएं धमनियों के चारों तरफ एक तरह की दीवार बना देती है जिससे दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका कई गुना बढ़ जाती है। 

जीमेल पर पाएं गूगल प्लस से मेल

नई दिल्ली (एजेंसी)। गूगल ने जीमेल में एक नया फीचर लांच किया है। इसके जरिए गूगल प्लस व जीमेल के यूजर्स एक-दूसरे को ई-मेल भेज व पा सकेंगे।
गूगल अपने गूगल प्लस प्लेटफॉर्म को इंटीग्रेटेड करने पर लगातार काम कर रही है। ढाई साल पुराने सोशल नेटवर्क गूगल प्लस के फिलहाल 54 करोड़ यूजर्स हैं। गूगल का कहना है कि यह नया फीचर उन लोगों के लिए आसानी लेकर आएगा, जो जीमेल व गूगल प्लस, दोनों का इस्तेमाल करते हैं।
फिल्टर सुविधा भी
हालांकि जो यूजर्स इससे अपने ई-मेल आईडी के सार्वजनिक हो जाने से भयभीत हैं, उनके लिए गूगल ने फिल्टर की भी व्यवस्था की है। इसके तहत जीमेल की सेटिंग्स में जाकर फिल्टर लगाया जा सकता है, ताकि उन्हें उसी व्यक्ति से ई-मेल मिले, जिसे उन्होंने अपने नेटवर्क में ऐड किया है।
गूगल का यह भी कहना है कि जीमेल यूजर्स को गूगल प्लस से बिल्कुल अनजाने लोगों के मेल मिल तो सकते हैं, लेकिन ये मेल उनके इनबॉक्स में एक स्पेशल सेक्शन के जरिए जाएंगे। अगर जीमेल यूजर इनका जवाब नहीं देना चाहते, तो जीमेल ऐसे मेल आईडी को भविष्य में किसी मेल भेजने से ब्लॉक कर देगा।  

मंगलवार, 7 जनवरी 2014

स्तन कैंसर को मस्तिष्क तक फैलाने वाले प्रोटीन की पहचान

स्तन कैंसर के मस्तिष्क तक फैलाने वाले मुख्य कारक का पता लगाने में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। एक कैंसर रिसर्च टीम ने उस प्रोटीन की पहचान की है जो स्तन कैंसर को मस्तिष्क तक फैलाने की मुख्य वजह हो सकता है।  विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के मेडिसन विभाग के श्ाोधकर्ताओं को सेल मॉडल के इस्तेमाल से पता चला कि कैंसर की कोश्ािकाओं को अल्फाबी-क्रिस्टिलिन नाम का प्रोटीन प्रभावित करता है। क्लीनिकल कैंसर रिसर्च जर्नल में प्रकाश्ाित श्ाोध के अनुसार, यह प्रोटीन उन कोश्ािकाओं को ईंडोथ्ाीलियल सेल्स में जमे रहने में मदद करती है जहां से मस्तिष्क की पतली रक्त वाहिकाएं जुड़ी होती हैं। इसके अलावा यह प्रोटीन ब्लड ब्रेन बैरियर के माध्यम से स्तन कैंसर कोश्ािकाओं के मस्तिष्क में प्रवेश्ा को बढ़ाता है। आमतौर पर यह बैरियर कोश्ािकाओं और अन्य कण्ाों के मस्तिष्क में प्रवेश्ा पर रोक लगाता है। श्ाोधकर्ताओं ने बताया कि एक बार मस्तिष्क में जब स्तन कैंसर कोश्ािकाएं मेटास्टेसिस बनाने में सक्षम हो जाती हैं तो कैंसर एक अंग से दूसरे अंग में फैलने लगता है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क तक कैंसर के फैलने का पता अक्सर नहीं लग पाता, जब तक कि रोगियों में इसके गंभीर लक्षण्ा नहीं दिखते हैं। यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर विंसेंट क्रिंस ने कहा कि स्तन कैंसर के उपचार में हमारी यह उपलब्धि सहायक साबित हो सकती है। हालांकि इसके लिए अभी और श्ाोध की जरूरत है।
 

वजन घटाना है तो बदलें प्लेट का रंग

यदि आपको अपना वजन घटाना है तो आप जिस प्लेट में खाते हैं उसका रंग बदल दें। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है। फीमेलफर्स्ट डॉट सीओ डॉट यूके ऑनलाइन पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि लोग सफेद रंग की प्लेट की जगह पर किसी चमकीले रंग की प्लेट में खाना खाते हैं तो इससे खाने की मात्रा कम हो जाती है। श्ाोध में पता चला है कि खाना और प्लेट के रंगों से तो कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन इस बात से फर्क पड़ता है कि दोनों के रंगों में कितना अंतर है। इसके मुताबिक यदि लोग सफेद प्लेट में चावल खाते हैं तो वे अधिक मात्रा में खा लेते हैं। यदि यही चावल लाल प्लेट में खाते हैं तो वे कम मात्रा में खाना खाते हैं। पोष्ाण्ा विश्ोष्ाज्ञ मेलिना जंपोलिस के हवाले से फोर्ब्स पत्रिका ने कहा है कि इस तरीके से लोग अपना वजन घटा सकते हैं।