शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

लतीफा: बाकी के साढ़े चार रुपए वापस कर

रामू, ' पापा रात को मैंने सपना देखा कि आपने मुझे पांच रुपए दिए।"
पापा, ' चल, पचास पैसे जेब खर्च के रख और बाकी के साढ़े चार रुपए मुझे वापस कर।"

लतीफा: घड़ी को छोड़कर बाकी सब चीजों का बीमा कर दो

फैक्ट्री का मालिक, ' इस घड़ी को छोड़कर बाकी सब चीजों का बीमा कर दीजिएगा।
बीमा एजेंट, ' घड़ी का क्यों नहीं?"
मालिक, ' दफ्तर में क्लर्कों की आंख हमेशा इसी पर लगी रहती है। इस लिए इसके चोरी होने का कोई डर नहीं।"

लतीफा: कविताएं पढ़ता हूं तो मुझे आश्चर्य होता

एक श्रोता कवि से बोला, ' जनाब! मैं जब भी आपकी कविताएं पढ़ता हूं तो मुझे आश्चर्य होता है।
 कवि, ' शायद इस बात पर कि मैं इन्हें लिखता कैसे हूं।
श्रोता, ' जी नहीं, इस बात पर कि आप आखिर इन्हें लिखते ही क्यों हो?"

लतीफा: मुझे साफ-सुथरा रहने की आदत है

एक भिखारी सरकारी नल पर नहा रहा था तभी उसके एक भिखारी मित्र ने कहा, ' जहां तक मुझे याद पड़ता है, इससे पहले तुम पिछले महीने नहाए थे।"
दूसरा बोला, ' हां, भैया। तुझे तो मालूम है कि मुझे साफ-सुथरा रहने की आदत है।" 

लतीफा: वर्ना हम जाग जाएंगे

सरकारी कार्यालय के मुख्य द्वार के सूचना बोर्ड पर लिखा था, '' कृपया शोर न करें"
एक शरारती लड़के ने उससे आगे बड़े अच्छरों में लिख दिया, 'वर्ना हम जाग जाएंगे।" 

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

ऐसे निभाएं घर और दफ्तर की जिम्मेदारी

ऑफिस के साथ-साथ घर की देखभाल की जिम्मेदारी कोई आसान काम नहीं है। ज्यादातर महिलाएं घर व ऑफिस के बीच तालमेल बैठाने के चलते अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इसके कारण उन्हें आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को कुछ आसान फिटनेस टिप्स की मदद लेनी चाहिए, जिन्हें अपनाकर वे फिट रह सकती हैं। फिटनेस की इन खास टिप्स को अपनाने के लिए ना आपको जल्दी उठने की जरूरत है ना देर रात तक जागने की। बस अपनी नियमित दिनचर्या में कुछ खास बातों का खयाल रखें और स्वस्थ आदतों को अपनाने मात्र से ही आप खुद को फिट एंड फाइन रख सकती हैं।
पैदल चलना है जरूरी
अगर दफ्तर घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है तो संभवत: रिक्शे की मदद लेने की जगह पैदल चलें। अगर ऑफिस जाते समय आपको समय नहीं मिलता है तो मॉर्निंग वॉक या खाने के बाद भी टहल सकती हैं। इससे आपकी शारीरिक गतिविधि बढ़ेगी और आप फिट रहेंगी। इसके अलावा ऑफिस में लिफ्ट की जगह पर सीढ़ियों का इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए अच्छा रहेगा।
थोड़ा-थोड़ा खाएं, सेहत बनाएं
एक ही बार भरपेट खाने से अच्छा है कि थोड़ी-थोड़ी देर बाद कुछ न कुछ खाती रहें। लेकिन, खाते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि वह पौष्टिक हो। तला खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दफ्तर में शाम को अगर भूख लगे तो हेल्दी स्नैक्स का ही सहारा लें। मसलन, स्प्राउट्स, फल, सूखे मेवे, चने, नट्स आदि।
 काम के बीच में ब्रेक
ऑफिस में दिनभर कम्प्यूटर के सामने ना बिताएं। यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं। काम के बीच में थोड़ी-थोड़ी देर का ब्रेक जरूर लें। सीट से उठकर थोड़ी देर टहलें, हाथ-पैरों को हिलाएं व हल्का-फुल्का व्यायाम भी करें। हर बीस मिनट के बाद दूर जगह पर दृष्टि डालें, नजर टिका कर देखने की कोशिश करें।  कम्प्यूटर पर काम करते वक्त बार-बार पलकें भी झपकाएं, यह आंखों की अच्छी एक्सरसाइज है।
तनाव को रखें दूर
ऑफिस में काम की ज्यादा टेंशन लेने से बचें। टेंशन लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। अपनी समस्या के बारे में शांत दिमाग से सोचें अगर इसका हल नहीं मिल रहा है तो सहकर्मियों की मदद लेने से ना हिचकें। तनाव से बचने का आसान तरीका है कि आप अपने कामों की एक सूची बनाएं और हर काम के लिए समय निर्धारित कर लें, जिससे आपको काफी मदद मिलेगी।
प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट लेना ना भूलें
कार्बोहाइड्रेट से शरीर को ऊर्जा मिलती है इसलिए इसे अपने आहार में जरूर शामिल करें। स्नैक्स के तौर पर फलों व फाइबर युक्त क्रैकर को अपने आहार में शामिल करें। इसके अलावा प्रोटीन के स्रोतों को लेना ना भूलें।मसलन, अंडे, दूध, बीन्स व चीज का सेवन करें। मासिक चक्र के दौरान मूड में
काफी परिवर्तन आ जाता है। यहां तक कि बैक पेन भी होने लगता है। इसके लिए आप अपने आहार में आयरन और कैल्शियम बढ़ा सकती हैं।  

बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

बेमौका उबासी, मतलब कुछ गड़बड़

दफ्तर की मीटिंग हो या फिर क्लास में बोरिंग लेक्चर, कई बार आपको उबासी लेते हुए किसी न किसी ने टोका ही होगा। अमूमन उबासी शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन यह जब बहुत अधिक हो, तो यह सेहत से जुड़ी कई समस्याओं की ओर इशारा हो सकती है।
कई शोधों के आधार पर जानिए,
बहुत अधिक उबासी सेहत से जुड़ी किन समस्याओं की ओर इशारा करती है।
- अनिद्रा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोध के अनुसार उबासी जब सामान्य से अधिक आए तो इसकी वजह नींद से जुड़ी समस्या हो सकती है। दिन में कई बार उबासी आने के अलावा अगर आपको बहुत अधिक उलझन, खीझ, ध्यान न लगना, कमजोरी आदि दिक्कतें हों तो इस समस्या की आशंका अधिक हो सकती है।
-  मोटापा 
आपका वजन अगर निरंतर बढ़ता जा रहा है यानी आप मोटापे का शिकार हो चुके हैं तो दिन में कई बार उबासी आना आपके बढ़ते मोटापे का लक्षण हो सकता है। इस स्थिति में उबासी के साथ-साथ दिन में नींद आना, बीपी बढ़ जाना, दर्द और आलस्य जैसी समस्याएं अधिक होती हैं।
-  दिल का दौरा 
जरूरी नहीं कि हर बार दिल का दौरा अचानक ही पड़े। कई बार इसकी तीव्रता का अहसास तुरंत नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में भी बहुत अधिक उबासी आती है। इस स्थिति में उबासी के अलावा, दिल की धड़कनों का बढ़ जाना, हाई या लो बीपी और दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।
-  ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया :
इस समस्या के दौरान सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में बहुत अधिक उबासी, हाई बीपी, श्वास संबंधी दिक्कतें होती हैं।  स्थिति को गंभीरता से न लें तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
- धमनियों में ब्लॉकेज 
दिल से रक्त बाहर निकालने वाली सबसे बड़ी धमनी-एओर्टा में ब्लॉकेज की वजह से भी बहुत अधिक उबासी का लक्षण दिख सकता है। इस दौरान पेट और कमर में दर्द, चलने में दिक्कत और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। 

जल्दी उठकर तनाव को कहें बाय-बाय

'अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज"  यह कहावत यूं ही नहीं बनी है। सुबह उठने के कितने भी फायदे हम हमेशा से सुनते आ रहे हों लेकिन बात जब सोने के तौर-तरीकों की होती है, तो इसका संबंध न सिर्फ हमारी जीवनशैली से होता है बल्कि हमारे दिमाग और हार्मोन्स से भी होता है। जर्मनी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में एमआरआई के आधार पर यह अंदाजा लगाया है कि जल्दी उठने वालों और देर से उठने वाले लोगों के दिमाग में क्या अंतर हो सकता है। अमूमन नींद के मामले में तीन तरीके के लोग होते हैं। पहले जो सुबह जल्दी उठते हैं, दूसरे जो देर से उठते हैं और तीसरे जो दोनों परिस्थितियों में रह सकते हैं। नींद के मामले में सिर्फ इनका व्यवहार ही अलग नहीं है बल्कि इनके दिमाग में भी एक बड़ा अंतर होता है जिसका पता हाल में हुए एक शोध में चला है। शोध में पाया गया कि जो लोग स्वाभाविक तौर पर देर से उठते हैं उनके मस्तिष्क में व्हाइट मैटर सबसे बुरी स्थिति में होता है, विशेष रूप से दिमाग के उस हिस्से में जहां से अवसाद और दुख के भाव पैदा होते हैं। यही वजह है कि देर से उठने वाले लोगों को अवसाद और तनाव अधिक होता है। यह शोध 'साइंस डायरेक्ट जर्नल" में प्रकाशित हुआ है। अब अगर आप भी रोज देर से उठते हैं तो अपनी यह आदत बदल ही लें तो यह आपके लिए बेहतर होगा।

सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

नजरिया बदलिए तो मन ही नहीं, तन भी जवान रहेगा

मन में बनी खुद की ही छवि बदल डालिए 
कानों में यदि बुढ़ापा शब्द पहुंचे तो ज्यादातर लोगों के मन में खुद की एक तस्वीर उभरती है।झुर्रियों वाली देह, झुकी हुई पीठ और अखबार के साथ चाय वाली मुद्रा। बुढापे के बारे में इस तरह की तस्वीर पहले ही बना लेने से इंसान कई तरह के भ्रमों में घिर जाता है। आप अपनी 50-60 की उम्र को भी बेबाकी, फुर्ती और जोश से जीने के बारे में क्यों नहीं सोच पाते। इसकी एक वजह यह भी है कि शायद बुढ़ापे को लेकर लोगों में कई सारे मिथक हैं।
इससे पहले कि उम्र बढ़ने से जुड़े कोई भी भ्रम या गलतफहमियां आपकी जिंदगी के रंग को कम करें, उन्हें जानिए और जीना सीखिए अपनी जिंदगी को भरपूर।
ये हैं बुढ़ापे से जुड़े कुछ मिथक 
बढ़ती उम्र में वजन घटाना मुश्किल
 उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर को भोजन पचाने में अधिक समय लगने लगता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप इसको लेकर यह सोचें कि बढ़ती उम्र में वजन कम करना भी मुश्किल होता है। अगर आप उम्र के बढ़ते पड़ाव पर हैं,लेकिन अगर आप कम कैलोरी वाला भोजन ले रहे हैं तो आपके लिए वजन कम करना उतना ही आसान है जितना 25-30 साल के किसी वयस्क के लिए।
 आपके जीन्स करते हैं आपको बूढ़ा  
यह बात सही है कि आपके शरीर पर आपके जींस का काफी प्रभाव होता है। कई बार आदतें और बीमारियां वगैरह आपको सिर्फ इसलिए झेलनी पड़ जाती हैं क्योंकि परिवार में माता-पिता या किसी अन्य करीबी ने भी उन्हें झेला था। लेकिन,इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका
बुढ़ापा पूरी तरह आपके जींस पर टिका है। सच्चाई ठीक इसके उलट है। आपके आसपास का वातारण, खानपान और अन्य आदतें आपको इस कदर प्रभावित करती हैं कि यदि आप इन पर कंट्रोल करें तो बहुत आसानी से अपनी बढ़ी उम्र के हाल और शक्ल को बदल सकते हैं।
 पीली त्वचा होती है जल्दी बूढ़ी !
हाल में हुई रिसर्च के अनुसार इस तरह की किसी भी बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि यदि त्वचा का रंग पीला हो तो आप बाकी लोगों की तुलना में जल्दी बूढ़े हो जाएंगे। इसलिए आपकी त्वचा का रंग कोई भी हो बस सन बर्न से बचने के लिए उपाय करें और खुशी से जिएं।
उम्र के साथ शारीरिक  गतिविधियां बढ़ाएं 
शायद आपको यह सुनकर आश्चर्य हो लेकिन उम्र के साथ अपनी शरीर की गतिविधियां घटानी नहीं बल्कि बढ़ानी चाहिए। क्योंकि एक उम्र के बाद इंसान शरीर से ज्यादा काम लेना बंद कर देता है और उतनी शारीरिक गतिविधियां भी नहीं करत,जितना उन्हें फिट रहने के लिए करना जरूरी है। इसलिए जब तक डॉक्टर सलाह न दें बढ़ती उम्र में भी खूब चलें, पौधों को पानी डालें और वो सारी हल्की-फुल्की कसरतें करें, जो आपके लिए संभव हों।