रविवार, 10 नवंबर 2013

दूध और शुगरी फूड दे सकते हैं आपको मुहांसे

हाई ग्लाईकेमिक इंडेक्स (जीआई) युक्त खाद्य पदार्थ जैसे व्हाइट राइस (सफेद चावल) और दूध पीने से न सिर्फ मुहांसे होते हंै बल्कि कुछ मामलों में यह काफी गंभीर भी हो जाता है। तकरीबन 50 वर्षों तक किए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है।  लाखों युवाओं में त्वचा पर पड़ने वाले प्रभाव देखे जा सकते हंै, जो युवावस्था में धीरे-धीरे बढ़ते जाते हंै। इस तरह की त्वचा की वजह से फेस, नेक, चेस्ट और बैक पर कई भद्दे स्पॉट नजर आने लगते हैं। इस तरह स्पॉट का व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ता है। मुहांसों से एंक्जाइटी, लो सेल्फ-एस्टीम, डिप्रेशन के हालात बनते हैं।
खान-पान से जुड़ा मामला
19वीं सदी के अंतिम दौर में अनुसंधानकर्ताओं ने यह बात साबित कर दी थी कि मुहांसों का संबंध खान-पान से जुड़ा है। अधिक मात्रा में चॉकलेट, शगर और फैट का सेवन करने से मुहांसे होने लगते हैं। लेकिन 60 के दशक और उसके बाद अध्ययनों में बताया गया कि डाइट का मुहांसों से कोई संबंध नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ न्यूट्रीशन, फूड स्टडीज एंड पब्लिक हेल्थ और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में स्टेनहार्ट स्कूल ऑफ कल्चर, एजुकेशन एंड ह्युमन डेवलपमेंट की डॉ. जेनिफर बुरीस का कहना है कि मुहांसों के प्रति एटीट्यूड में यह बदलाव दो महत्वपूर्ण अध्ययनों के बाद आया, जिसमें लिटरेचर और पॉपुलर कल्चर का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि डाइट और मुहांसों के बीच कोई संबंध नहीं है। अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि हाई जीआई फूड्स खाने से इंसुलिन समेत अन्य हार्मोनों का स्तर बढ़ जाता है, जो शरीर में सीबम का प्रोडक्शन करने लगता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें