रविवार, 10 नवंबर 2013

रोने का तरीका बताती है बच्चे की फीलिंग्स

स्पेन में किए गए अध्ययन में कहा गया है कि बच्चे रोने के तरीके से बताता है कि वह इसके जरिए गुस्सा जता रहा है, अपने शरीर में उठे दर्द को बता रहा है या भय जाहिर कर रहा है।
यूनिवर्सिटी ऑफ वैलेंसिया की अनुसंधानकर्ता मॅरियानो शोलिज का कहना है कि बच्चों के पास अपनी निगेटिव फीलिंग्स को जाहिर करने के लिए रोने के सिवा और कोई चारा नहीं होता है। उनका कहना है कि रोने का यह पैटर्न 3 से 18 माह के बच्चों में नजर आता है और उसके तीन ही कारण होते हैं-भय, गुस्सा और दर्द।
ये होते हैं लक्षण
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि जब बच्चा गुस्से के कारण रो रहा होता है तो उसकी आंखें खुली, अधखुली रहती हैं लेकिन जब वह दर्द के कारण रोता है तो उस दौरान उसकी आंखें बंद रहती हैं।
अगर बच्चा गुस्से में है तो उसके रोने की इंटेसिटी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। दर्द और भय के कारण रोने के दौरान भी यही पैटर्न नजर आता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जब बच्चा गुस्से के कारण रोता है तो उसकी आंखें खुली या आधी खुली रहती हैं। उसका मुंह खुला या आधा खुला रहता है और उसके रोने की इंटेसिटी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।
भय में रोने के दौरान बच्चे की आंखें पूरे समय पूरी खुली रहती हैं। वह अपने सिरे को बार-बार पीछे की ओर ले जाने की कोशिश करता है।
दर्द में रोने के दौरान बच्चा अपनी आंखें पूरी तरह बंद रखता है। अगर आंखें खुलती भी हैं तो वह कुछ क्षणों के लिए और निगाहें स्थिर रहती हैं। आंखों के आसपास तनाव उभरता है। रोने की इंटेसिटी अधिकतम स्तर पर होती है।


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