रविवार, 10 नवंबर 2013

कॉन्फिडेंट बनिए, नहीं तो तनाव घेर लेगा

वर्कप्लेस पर किसी भी व्यक्ति के लिए कॉन्फिडेंट होना आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति में कॉन्फिडेंस की कमी रहती है तो उसे किसी न किसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह कमी अक्सर महिलाओं में देखने को मिलती है। मगर यदि वे इस कमी से ऊपर आ जाएं तो किसी भी क्षेत्र में अव्वल रहने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
एक नए शोध में बताया गया है कि वर्कप्लेस पर महिलाओं में कॉन्फिडेंस के कारण उनका दिमागी संतुलन बिगड़ता है और वे मानसिक तनाव का शिकार होती हैं। इतना ही नहीं इसके कारण वे करियर में भी पीछे रहती हैं।
चार्टर्ड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट ने हाल ही में इस पर एक शोध किया है। इस शोध के अनुसार महिलाएं अपनी खामियों को सही-सही आंक नहीं पाती हैं और यही उनको मानसिक विकार के साथ करियर में भी असफल बनाता है। इस शोध के मुताबिक महिलाएं अपनी कार्यक्षमता को लेकर पशोपेश में रहती हैं इसके कारण ही वह छोटी-छोटी बातों को लेकर शर्मींदगी भी महसूस करती हैं और बाद में यही तनाव का कारण भी बनता है।  सर्वे के अनुसार अपने कॉन्फिडेंस के कारण कामकाजी महिलाएं वरिष्ठ पदों तक पहुंचने से चूक जाती हैं। जूनियर मैनेजर के स्तर पर जहां 60 फीसद महिलाएं पहुंचती हैं वहीं वरिष्ठ पदों पर केवल 20 फीसद महिलाएं ही पहुंच पाती हैं।
*शो नहीं करतीं महिलाएं :
महिलाओं को लगता है कि उन्हें अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने की जरूरत नहीं है जबकि पुरुषों की प्रवृत्ति इस मामले में बिल्कुल उलट होती है। जो महिलाएं करियर में पीछे रह जाती हैं उनको तनाव और अवसाद जैसे मानसिक विकार होते हैं। इसका असर उनके करियर के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी पड़ता है।  

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