रविवार, 10 नवंबर 2013

फिश ऑयल का सेवन रखे सेहतमंद

फिश ऑयल और एस्प्रिन का कॉम्बिनेशन आर्थराइटिस सहित कई जीर्ण रोगों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ये दोनों चीजें एकसाथ मिलकर शोथ को हटाने में कारगर होती हैं। शोथ ही कई तरह की बीमारियों जैसे हार्ट डिसीज, कैंसर और आर्थराइटिस का कारक है। विशेषज्ञ हमेशा लो-डोज एस्पिरिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभावों का बखान करते रहते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड फ्लैक्स सीड्स (अलसी) और सालमोन (एक तरह की मछली) में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हालांकि अभी इसके प्रभाव के पूरे मैकेनिज्म पर अध्ययन जारी है।
सेल प्रेस जर्नल कैमिस्ट्री एंड बायोलॉजी में प्रकाशित नए शोध में यह बताया गया है कि एस्पिरिन शरीर में 'रिसोलविन्स" नामक मॉलिक्यूल के उत्पादन को सक्रिय करने में मदद करती है और यह मॉलिक्यूल शरीर में प्राकृतिक रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के द्वारा बनते हंै। इसलिए एस्पिरिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स को अध्ययन में साथ में शामिल किया गया। यह रिसोलविन्स लंग डिसीज, हार्ट डिसीज और आर्थराइटिस को रोकता है। चूहों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं को काफी हद तक सफलता मिली है। इसी से अंदाजा लगाया जा रहा है कि मनुष्यों पर भी यह मेथड लाभदायक सिद्ध होगी।
उम्र की रफ्तार पर भी लगता है कंट्रोल 
फिश ऑयल कई मायनों में सेहत के लिए बहुत गुणकारी माना है। विशेषकर महिलाओं को बढ़ती उम्र में इसके सेवन की ज्यादा हिदायत दी जाती है। एक अन्य अध्ययन में यह बात सामने आई है कि फिश ऑयल का नियमित सेवन उम्र की रफ्तार को भी कंट्रोल करता है। यही वजह है कि बाजार में आने वाली महंगी एंटी-एजिंग क्रीमों में विटामिन 'ई" की मात्रा ज्यादा होती है। मछली के तेल में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड के कारण महिलाओं की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। एबरडीन ब्रिटिश साइंस फेस्टिवल में इस शोध के नतीजों को पेश किया गया। शोध में यह पाया गया कि ओमेगा-3 के नियमित सेवन से बढ़ती उम्र का प्रभाव दिखाई नहीं देता है। शाकाहारियों के लिए फिश आयल का उत्तम विकल्प है फ्लैक्स सीड्स (अलसी) जो ओमेगा-3 से भरपूर है।  

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