अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पुराने दर्द के उभरने के लिए जिम्मेदार रसायन को ढूंढ़ने का दावा किया है। टेक्सास विश्वविद्यालय के श्ाोधकर्ताओं के मुताबिक डोपामाइन लंबे समय से चले आ रहे दर्द को बढ़ाता है। विवि के एसोसिएट प्रोफेसर टेड प्राइस ने बताया कि ताजा अध्ययन से पुराने दर्द को बनाए रखने में डोपामाइन की भूमिका का पता चला है। उनके मुताबिक इस खुलासे से इस तरह के दर्द से निपटने को लेकर पहले से कारगर दवाइयां बनाई जा सकती हैं। वैज्ञानिकों ने चुहिया पर किए गए श्ाोध में दर्द के मस्तिष्क से रीढ़ की हड्डी तक पहुंचने की प्रक्रिया का विश्लेषण्ा किया। उन्होंने पाया कि ए11 नामक न्यूरॉन के समूह को हटाने से पुराने दर्द में काफी हद तक कमी दर्ज की गई। डोपामाइन ए11 में ही जमा रहता है। श्ाोधकर्ताओं के मुताबिक जख्म होने की स्थिति में रीढ़ की हड्डी तक दर्द का संकेत बिजली की तर्ज पर प्रवाहित होता है। यहां से अन्य कोश्ािकाओं तक इसके संकेत भेजे जाते हैं।
गुरुवार, 7 मई 2015
हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए सस्ता उपकरण
दिल के दौरे का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने थर्मोमीटर सरीखा नया उपकरण विकसित किया है। दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं का मानना है कि इस नए उपकरण से दूर-दराज के इलाकों में निम्न आय वाले लोग भी कम खर्च पर हार्ट अटैक का पता लगा सकेंगे। मौजूदा प्रक्रिया काफी खर्चीली है।
पोहैंग विश्वविद्यालय के संगमिन जेयॉन ने बताया कि जांच से पहले लोगों से हार्ट अटैक के बारे में कुछ जानकारी लेनी होती है। इसके बाद ट्रोपोनिन नामक प्रोटीन का स्तर मापा जाता है। दिल तक खून का प्रवाह बाधित होने की स्थिति में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मांसपेशी को नुकसान पहुंचता है। जेयॉन ने बताया कि जांच के लिए कांच की शीशी, विशेष नैनोपार्टिकल्स, एक बूंद स्याही और एक पतली ट्यूब की जरूरत होती है। ट्रोपोनिन मिश्रित मानव सीरम को नैनोपार्टिकल्स के साथ मिलकार शीशी में डाल दिया जाता है। ट्रोपोनिन की अधिकता पर स्याही ट्यूब तक पहुंच जाती है। इससे हार्ट अटैक का पता चल जाता है।
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Sangmin Jeon of Pohang University said that people have to get some information about heart attack before the investigation. The level of a protein called troponin is then measured. Troponin levels rise when blood flow to the heart is interrupted, causing muscle damage. Jeon stated that the glass vial, special nanoparticles, a drop ink and a thin tube were required for the test. Troponin-mixed human serum is put into a vial mixed with nanoparticles. In excess of troponin the ink reaches the tube. This causes a heart attack.
Dharmendra Singh movetonature.blogspot.com
पोहैंग विश्वविद्यालय के संगमिन जेयॉन ने बताया कि जांच से पहले लोगों से हार्ट अटैक के बारे में कुछ जानकारी लेनी होती है। इसके बाद ट्रोपोनिन नामक प्रोटीन का स्तर मापा जाता है। दिल तक खून का प्रवाह बाधित होने की स्थिति में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मांसपेशी को नुकसान पहुंचता है। जेयॉन ने बताया कि जांच के लिए कांच की शीशी, विशेष नैनोपार्टिकल्स, एक बूंद स्याही और एक पतली ट्यूब की जरूरत होती है। ट्रोपोनिन मिश्रित मानव सीरम को नैनोपार्टिकल्स के साथ मिलकार शीशी में डाल दिया जाता है। ट्रोपोनिन की अधिकता पर स्याही ट्यूब तक पहुंच जाती है। इससे हार्ट अटैक का पता चल जाता है।
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Cheap tool to detect heart attack
Scientists have developed a new instrument, such as a thermometer, to detect heart attacks. Researchers in South Korea believe that this new device will allow low-income people in remote areas to detect heart attacks at low cost. The current process is quite expensive.Sangmin Jeon of Pohang University said that people have to get some information about heart attack before the investigation. The level of a protein called troponin is then measured. Troponin levels rise when blood flow to the heart is interrupted, causing muscle damage. Jeon stated that the glass vial, special nanoparticles, a drop ink and a thin tube were required for the test. Troponin-mixed human serum is put into a vial mixed with nanoparticles. In excess of troponin the ink reaches the tube. This causes a heart attack.
Dharmendra Singh movetonature.blogspot.com
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