बुधवार, 20 अगस्त 2014

दुनिया का पहला इको फ्रेंडली मंदिर ब्रिटेन में

उत्तर पश्चिम लंदन में दुनिया का पहला इको फ्रेंडली मंदिर बनाया गया है। इस हिदू मंदिर में सौर पैनल और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं।
किंग्सबरी में बने स्वामीनारायण मंदिर में भारतीय वास्तुकला और आधुनिक पर्यावरण संवेदी तकनीक का प्रयोग किया गया है। मंदिर की छत पर सौर पैनल के साथ वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी है। इसे दुनिया का पहला इको फ्रेंडली मंदिर माना जा रहा है। मंदिर को मंगलवार को लोगों के लिए खोल दिया गया। इस अवसर पर मंदिर के वैश्विक धार्मिक प्रमुख आचार्य स्वामीश्री महाराज उपस्थित रहे। इससे पहले भारत और स्कॉटलैंड के 150 से ज्यादा वादकों ने शांति मार्च निकाला। भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, पूर्वी अफ्रीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिभागियों ने नृत्य, संगीत और कला का अनूठा उदाहरण पेश किया। लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने इस नए मंदिर को विलक्षण और प्रभावशाली बताया।

सांभारः प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया
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World's first eco friendly temple in Britain

The world's first eco friendly temple has been built in North West London. Arrangements like solar panels and rain water harvesting have been made in this Hindu temple.
The Swaminarayan temple at Kingsbury uses Indian architecture and modern environmental sensing techniques. There is also a system of rainwater harvesting with solar panels on the roof of the temple. It is considered to be the first eco friendly temple in the world. The temple was opened to the public on Tuesday. Acharya Swamishri Maharaj, the global religious head of the temple, was present on the occasion. Earlier, more than 150 players from India and Scotland took out a peace march. Participants from India, Britain, America, East Africa, Europe and Australia set a unique example of dance, music and art. London Mayor Boris Johnson described the new temple as unique and impressive.



Logistics: Press Trust of India

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Dharmendra Singh    movetonature.blogspot.com

भारतीय मूल की महिला को दक्षिण अफ्रीका में शीर्ष सम्मान

जोहांसबर्ग, प्रेट्र : भारतीय मूल की दक्षिण्ा अफ्रीकी श्ािक्षाविद लीला पटेल को विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय ने अफ्रीकी देश्ाों की श्ाीषर््ा महिला श्ाोधार्थ्ाी के सम्मान से नवाजा है। विटवाटर्सरैंड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाली लीला पटेल फिल्ाहाल अफ्रीका में सामाजिक विकास केंद्र में सामाजिक विकास अध्ययन की प्रोफेसर हैं। इस केंद्र की स्थ्ाापना उन्होंने 2002 में की थ्ाी।
यह वाष्र्ािक अवार्ड उस क्षेत्र में मास्टर या डाक्टर्स की डिग्री रखने वाली उन महिलाओं के काम को मान्यता देता है, जिनमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। पटेल ने 1994 में नेल्सन मंडेला की रिहाई के बाद देश्ा में समाज कल्याण्ा के क्षेत्र में आगे आकर काम किया थ्ाा। इसी साल देश्ा में चुनाव हुए थ्ो। चुनाव से एक साल पहले उनकी किताब आई थ्ाी, जिसमें उन्होंने समाज कल्याण्ा के जिन कानूनों की बात की थ्ाी, उन्हें तीन साल बाद संसद ने स्वीकार किया थ्ाा। उन्हें 2005 में सामाजिक कल्याण्ा विभाग का महानिदेश्ाक बनाया गया थ्ाा। इसी साल आई उनकी दूसरी किताब में दुनिया से गरीबी कम करने के विकल्प पर चर्चा की गई थ्ाी। 

बच्चों के नदी तैरकर स्कूल जाने पर गुजरात को नोटिस

नई दिल्ली, प्रेट्र: गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के पांच गांवों के बच्चे अपनी जान जोखिम डालकर श्ािक्षा हासिल करने को मजबूर हैं। दरअसल इन गांवों से होकर गुजरती हिरन नदी पर कोई पुल नहीं होने की वजह करीब 125 बच्चों को तैरकर नदी उस पार सरकारी स्कूल जाना पड़ता है। इस बारे में आई एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि गुजरात सरकार के मुख्य सचिव से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है। आयोग ने मामले को बाल अधिकारों का उल्लंघ्ान माना है। ग्रामीण्ाों का आरोप है कि वे लंबे समय से नदी पर पुल के निर्माण्ा की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रश्ाासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।