मंगलवार, 14 मई 2013

... तो उड़ जाएंगे अपने भी तोते (व्यंग्य)


धर्मेंद्रसिंह राजावत
सीबीआई पर कोर्ट की टिप्पणी से ज्यादा दिग्गी राजा भाजपा की प्रतिक्रिया से खफा हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर सीबीआई को तोता कहने पर भाजपा ने ऐतराज क्यों नहीं जताया। मीडिया के माध्यम से दिग्गी ने लोगों से सवाल तो किया ही, मगर भाजपा का रुख जानने के लिए वह पहुंच गए पार्टी के सबसे भ्रष्टाचारी नेता के आरोपी खाटखड़ी के पास।
'देखो खाटखड़ी जी! मैं आपकी पार्टी के किसी भी नेता की तुलना में आपको सबसे ज्यादा समझदार समझता हूं। दरअसल, राजनीति और भ्रष्टाचार को जितना आप समझते हैं, उतना आपकी पार्टी में कोई नहीं समझता। सभी अपने आप को भ्रष्टाचार विरोधी कहते फिरते हैं, मगर कोई भ्रष्टाचार का सही मतलब समझता है क्या? भ्रष्टाचार क्या बुरी चीज है? अरे ! यह भ्रष्टाचार न होता तो न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद हो जातीं और गरीबों को अपना पेट काटकर न जाने कितने रुपए सरकार को देने पड़ते। अब आप ही बताइए, क्या किसी की जिंदगी बचाना गलत काम है? क्या गरीबों की जेब पर डाका नहीं डालने देना भी बुरा काम है?" दिग्गी राजा ने काफी गुस्से में सवाल किया
खाटखड़ी, 'अरे दिग्गी राजा, क्यों इतने नाराज हो रहे हो। आखिर हुआ क्या है?"
'सीबीआई क्या कांग्रेस की जागीर है? नहीं न। वह तो सरकार की गुलाम है? आज हम सत्ता में हैं तो हमारी गुलामी कर रही है। आने वाले दिनों में आप की पार्टी सत्ता में आएगी तो आपकी भी गुलामी करेगी की नहीं? और हां, हमारी पार्टी तो कुछ ही दिन की मेहमान रह गई है तो इसलिए उसको तोता कहने पर आपकी पार्टी ने ऐतराज क्यों नहीं किया? देखो ! इस मामले का विरोध तो आपकी पार्टी को ही करना चाहिए था, मगर आप लोगों की चुप्पी देखकर मैंने एक अच्छे राजनेता के नाते आपके काम की शुरुआत कर दी है। आखिर हम-आप हैं तो एक ही थाली के चट्टे-बट्टे, पर अब आप लोग इसका विरोध करिए नहीं तो पांच साल विपक्ष में बैठकर जो पीड़ा झेली है, उसका बदला लेना मुश्किल हो जाएगा? फिर यह मत कहना कि कांग्रेसी बहुत चालाक होते हैं, पहले जमकर भ्रष्टाचार किया और फिर जाते-जाते सीबीआई को सरकार से मुक्त कर हमारा हथियार हमसे छीन ले गए।"
दिग्गी की बात खाटखड़ी के कुछ समझ में आई। मगर कुछ जिज्ञासाएं भी उनके मन में उठीं तो उन्होंने फिर से सवाल किया।
'सीबीआई की बात तो मुझे सौ टका समझ में आ गई है, मगर भ्रष्टाचार की बात मुझे कुछ पल्ले नहीं पड़ी। भ्रष्टाचार से हमारा-आपका भला होता है, यह तो मुझे समझ में आता है, मगर लोगों की जिंदगी और गरीबों के रुपए बचाने की बात मेरी समझ से परे है।"
दिग्गी, 'आप मुझे यह बताइए कि कोई व्यक्ति यदि किसी का मर्डर कर देता है या फिर किसी के साथ रेप कर देता है तो उसके साथ क्या सलूक किया जाता है?"
खाटखड़ी, 'उसको सजा के तौर पर या तो जेल में डाल दिया जाता है या फिर फांसी दी जाती है।"
'क्या यह सही है? इससे जिसका मर्डर हुआ वह वापस आ जाता है? जिसकी अस्मत लुटती है, वह वापस मिल जाती है? नहीं न। लेकिन, सजा देकर आरोपी की जिंदगी जरूर बर्बाद कर दी जाती है। ऐसे में केवल एक भ्रष्टाचार ही है जो कुछ अच्छा काम करता है। किसी अधिकारी को कुछ रुपए दिलवाकर आरोपी की जिंदगी बचा लेता है। इससे एक नहीं बल्कि दो फायदे होते हैं। एक दो आरोपी की जिंदगी बर्बाद होने से बच जाती है, दूसरा भ्रष्टाचार करने वाले को इतने रुपए मिल जाते हैं कि उसकी जिंदगी और भी शानदार हो जाती है। जिस मां-बाप का एक ही बेटा हो और वह जेल चला जाए तो बेटे के साथ उनकी भी जिंदगी बर्बाद होगी की नहीं, मगर कुछ घूसखोर पुलिस वाले कुछ ले-देकर एक नहीं बल्कि तीन-तीन जिंदगियां बचा लेते हैं। अब आप ही बताइए कि भ्रष्टाचार भला होता है या ईमानदारी?"
'सही कह रहे हैं आप। मैंने भी कई लोगों की जिंदगी बनाई है, मगर मेरा तरीका दूसरा था। ड्राइवरों को कई कंपनियों का निदेशक बनाकर मैंने वह काम किया, जो वह सपने में भी नहीं सोच सकते थे, लेकिन पार्टी ने मेरी दरियादिली को समझा ही नहीं। काश, दूसरा कार्यकाल दे देते तो न जाने कितनों की जिंदगी बना देता। अलबत्ता, यह बताइए कि भ्रष्टाचार से गरीबों का कैसे भला हो रहा है?" खाटखड़ी ने फिर सवाल किया
'खाटखड़ी जी ! आप भी अच्छा मजाक करते हो। आपको नहीं पता? खैर, कोई बात नहीं, मगर आप यह बताइए कि क्या आप भी समझते हैं कि देश के सबसे बड़े घोटाले (2-जी) से केवल घोटालेबाजों का ही भला हुआ है? मैं बताता हूं। इससे केवल उनका ही भला नहीं हुआ। इससे देश के हर एक नागरिक का भला हुआ है। यदि यह घोटाला नहीं हुआ होता तो मोबाइल की कॉल दरें क्या होतीं इसकी कल्पना करने भर से आम आदमी के पसीने छूट जाते। यह भ्रष्टाचार की ही देन है कि लाखों करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम कौड़ियों में आवंटित कर देने से कंपनियां मामूली कॉल दर वसूलने पर भी भारी मुनाफा कमा रही हैं। यदि कंपनियों की जेब से रुपए जाते तो वह वसूलतीं तो आम उपभोक्ता से ही न। कमोबेश यह स्थिति कोयला घोटाले में है। यदि न के बराबर कीमत में किसी नेता की कंपनी को कोल ब्लॉक नहीं मिला होता तो वह बिजली की भारी कीमत वसूलता, ऐसे में उसका बोझ तो सभी बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ता की नहीं? घोटाला कर कम कीमत में कोल ब्लॉक देने से आम उपभोक्ताओं का ही भला हुआ है। अब तो भाजपा को भ्रष्टाचार की अहमियत समझनी चाहिए कि नहीं?"
खाटखड़ी, 'सही कह रहे हो दिग्गी जी ! आप की सरकार की कार्यशैली को समझने के लिए दिमाग चाहिए, जोकि ज्यादातर के पास है ही नहीं। नहीं तो कोई भ्रष्टाचार का विरोध करता क्या। 'आप" के मुखिया भी पार्टी बनाने के बाद सीबीआई को स्वतंत्र करने की बात नहीं करते। लेकिन, आप चिंता मत करें। सरकार आपकी बने या फिर मेरी, भ्रष्टाचार तो जारी रहेगा। आखिर लोगों की जिंदगी और उनकी जेब का सवाल है। हां, मेरी पार्टी ने नमो को कमान दे दी तो उनको भी आपका पढ़ाया गया  पाठ पढ़ा दूंगा। उनसे कहूंगा कि विकास की बात छोड़ो और भ्रष्टाचार की बात करो। दूसरा, तोता पर तीखी प्रतिक्रिया दो नहीं तो केंद्र में आने के बाद भी अपने तोते उड़ जाएंगे ।