बुधवार, 1 जनवरी 2014

धार्मिक हैं तो अवसाद से बचे रहेंगे

जिन बातों को हम पहले से जानते हैं, उन पर विज्ञान की मुहर लगती है तो उनमें हमारा विश्वास और प्रबल होता है। सोमवार को खबर आई थी कि छोटे-छोटे निवाले खाने से भूख को काबू में रखने में मदद मिलती है। यह सदियों पुरानी समझ्ा है। इसे विज्ञानियों ने साबित किया। अब विज्ञान ने यह साबित किया है कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले लोग अवसाद का श्ािकार कम होते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे लोगों के मस्तिष्क की बाहरी सतह यानी कॉर्टेक्स मोटी होती है।
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ताजा श्ाोध में यह जानकारी सामने आई है। श्ाोध का नेतृत्व कर रही डॉ माइरना वाइजमैन कहती हैं, 'हमारा मस्तिष्क हमारे विचारों और मनोदश्ााओं का आईना होता है। इमेजिंग की नई तकनीक से यह सब कुछ देखना संभव हुआ है। हमारा मस्तिष्क एक असाधारण्ा अंग है, जो न सिर्फ हम पर नियंत्रण्ा रखता है बल्कि हमारी मनोदश्ााओं से नियंत्रित भी होता है।"
इस नए श्ाोध से पता चलता है कि मस्तिष्क की बाहरी सतह की मोटाई और आध्यात्मिकता में गहरा रिश्ता है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि जिन लोगों के मस्तिष्क के कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है वे आध्यात्मिक भी होते हैं। अलबत्ता यह तय है कि जो धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं उनके कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है। इससे यह भी पता चला है कि जो लोग अवसाद का श्ािकार होते हैं उनके कॉर्टेक्स की सतह धार्मिक लोगों के मुकाबले पतली होती है।
इस श्ाोध में ऐसे लोगों को श्ाामिल किया गया जिनके माता-पिता या दादा-दादी अवसाद से संबंधित पहले के अध्ययन में श्ाामिल थे। इनमें से कुछ के परिवार में अवसाद पीढ़ीगत बीमारी के रूप में काबिज थी। इस समूह की तुलना ऐसे लोगों के साथ की गई, जिनमें अवसाद के कोई लक्षण्ा नहीं थे।
सांभार: जागरण 

कैसे करें गिफ्ट का सिलेक्शन

किसी दोस्त की शादी हो तो सबसे जरूरी होता है ये डिसाइड करना कि उसे क्या गिफ्ट दिया जाए। हम आपको दे रहे हैं कुछ ऐसे ही गिफ्टिंग आइडिया, जिनमें से आप भी अपने दोस्तों के लिए एक गिफ्ट सिलेक्ट कर सकते हैं।
किसी को भी गिफ्ट्स देते वक्त उसकी उपयोगिता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। गिफ्ट देते वक्त सामने वाले के नेचर, पर्सनालिटी, उसकी जरूरत और हमसे उसकी क्या उम्मीदें हैं, इन सभी बातों का ख्याल रखना चाहिए।
 करीबी दोस्तों के लिए 
अपने किसी करीबी को ऐसा गिफ्ट देना चाहिए जिसे देखकर वह सरप्राइज हो जाए। एक उदाहरण के तौर पर हम इस बात को आसानी से जान सकते हंै, जिसमें एक युवती ने अपनी बेस्ट फ्रेंड को उसकी शादी में देने के लिए उसके सभी क्लोज फ्रेंड्स का एक वीडियो बनाया और गिफ्ट किया। इस वीडियो में सिर्फ फ्रेंड्स ही नहीं बल्कि पुराने टीचर्स और कलीग्स के भी फुटेज थे। पुराने दिन याद दिलाने वाला यह गिफ्ट उसे बेहद पसंद आया।
 ऑफिस के दोस्तों के लिए 
कॉर्पाेरेट कल्चर में काम करने वाले लोगों को उनके शौक के मुताबिक गिफ्ट्स देने चाहिए। जैसे कि अगर किसी को किताबें पढ़ने का शौक है तो उसे उसकी मनचाही फील्ड से रिलेटेड बुक्स गिफ्ट की जा सकती हैं। किसी की हॉबी म्यूजिक है तो उसे म्यूजिक सीडी, इंस्ट्रूमेंट्स, आई पॉड वगैरह गिफ्ट कर सकते हैं। जिन लोगों को टेक्नोलॉजी से लगाव है उन्हें लेटेस्ट टेक आइटम्स जैसे प्लेस्टेशन वगैरह गिफ्ट कर सकते हैं।
सबके लिए गिफ्ट
कुछ ऐसे आइटम्स भी होते हैं जो कभी भी, किसी को भी दिए जा सकते हैं। उनमें से कुछ गिफ्ट्स हैं-

  • हैंडीक्राफ्ट्स
  • ब्यूटी हैम्पर्स फॉर वुमन
  • परफ्यूम और कोलोंग सेट्स
  • कम्प्यूटर एक्सेसरीज
  • टेक्निकल प्रोडक्ट्स
  • पर्सनलाइज्ड कैरीकैचर
  • हैंडमेड आर्टिकल्स
  • फ्लॉवर्स

दूर रहने वाले लोगों के लिए ऑनलाइन गिफ्टिंग परफेक्ट ऑप्शन है। इसमें आप घर बैठे गिफ्ट ऑर्डर कर सकते हैं। आपका गिफ्ट जब आपके किसी खास को मिलेगा तो वह किसी सरप्राइज से कम नहीं होगा।  

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 7 कारण

अस्वस्थ खानपान
सैचुरेटेड फैट का ज्यादा इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का अहम कारण होता है। रेड मीट, मक्खन, पनीर, केक और घी आदि में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा न बढ़े इसके लिए इस प्रकार के आहार से परहेज करना चाहिए।
आनुवंशिक कारण 
हाई कोलेस्ट्रॉल के लिए आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार होते हैं। आनुवंशिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कई बार समय पूर्व ब्लॉकेज और स्ट्रोक की समस्या हो सकती है। आपके परिवार में किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर आप भी इस समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं।
 ज्यादा वजन 
शरीर का ज्यादा वजन हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे को बढ़ा देता है। वजन ज्यादा होने से ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाता है, जो भविष्य में ब्लॉकेज का कारण हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे से बचे रहने के लिए वजन नियंत्रित रखना जरूरी है।
 धूम्रपान और शराब का सेवन 
धूम्रपान और शराब के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है। साथ ही शराब का सेवन लीवर और हार्ट की मांसपेशियों के लिए भी नुकसानदायक होता है, जो कि कई बार हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन जाता है।
 उम्र और लिंग 
जानकारों के मुताबिक 20 साल की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ना शुरू हो जाता है। यह स्तर 60 से 65 वर्ष की उम्र तक महिलाओं और पुरुषों में समान रूप से बढ़ता है। मासिक धर्म शुरू होने से पहले महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रहता है। मासिक धर्म के बाद पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का लेवल अधिक रहता है।
 तनाव 
लंबे समय तक तनाव में रहना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण हो सकता है। आमतौर पर कुछ लोग तनाव में होने पर शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने लगता है।
 बीमारियों के कारण 
बीमारियां भी कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का कारण होती हैं। डायबिटीज और हाइपोथायरॉइडिज्म के कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि आपकी डायबिटीज ज्यादा न हो। 

घुटने का दर्द! सर्जरी नहीं समाधान

घुटने का दर्द उम्र के साथ अमूमन हर व्यक्ति के साथ जुड़ता चला जाता है। बस फर्क इतना है कि किसी में यह दर्द कम होता है तो किसी में ज्यादा। इसका संबंध व्यक्ति के शरीर के आकार-प्रकार और वजन पर भी निर्भर करता है। आज के तकनीकी जीवन में कई लोग इस दर्द से मुक्त होने के लिए घुटनों की सर्जरी कराते हैं। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि यह सर्जरी वाकई इस बीमारी से बाहर आने का अचूक उपाय है? तो फिर इस मामले में आपकी ज्यादा मदद करेगी हाल ही के एक अध्ययन से सामने आई रिपोर्ट। जिसमें कहा गया है कि अनावश्यक सर्जरी की अपेक्षा फिजियोथैरेपी घुटने के दर्द के इलाज में ज्यादा कारगर हो सकती है।
आर्थोस्कोपिक सर्जरी आम बात है, लेकिन फिनलैंड में कराए गए अध्ययन की मानें तो हजारों लोग अनावश्यक रूप से सर्जरी कराते हैं। अध्ययन के अनुसार इस सर्जरी की संख्या कम होनी चाहिए तथा फिजियोथैरेपी इस रोग के निदान का अच्छा विकल्प है।
*80 फीसद मामलों में कारगर नहीं :
हालांकि फिनलैंड के शोध में सर्जरी को कुछ मामलों में कारगर माना गया है, लेकिन यह कम उम्र के रोगियों पर ही किया जाना चाहिए है। शोध में कहा गया है कि 80 फीसद मामलों में सर्जरी उतनी कारगर साबित नहीं होती।
*5 अस्पतालों के 146 मरीज  :
अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्थोपेडिक सर्जन डेविड जेवसेवर ने कहा कि यह जाना-माना अध्ययन है। यह कई शोध को विश्वसनीयता देता है, जिसने यह दिखाया है कि मरीजों पर आर्थोस्कोपी हमेशा बेहतर साबित नहीं रहती। इस अध्ययन के लिए पांच अस्पताल और 35 से 45 साल के 146 मरीजों को शामिल किया गया।
जब मरीजों का परीक्षण किया गया तो दर्द के बावजूद कई मरीज लगातार स्वस्थ नजर आए मगर जिन मरीजों ने सर्जरी का सहारा लेते हुए दर्द से मुक्ति का उपाय चाहा, उनके जीवन से दर्द हटने के बजाए और अधिक बढ़ गया।  

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

अस्थमा के मरीज क्या खाएं और क्या नहीं

ऐसे खाद्य पदार्थों की लिस्ट बहुत लंबी है जिनसे अस्थमा के मरीजों को दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऐसी कई चीजें हैं जिनसे एलर्जी और अस्थमा अटैक पड़ने का खतरा होता है। तो आइए जानते हैं कि आपकी रसोई में ऐसे कौन से खाद्य पदार्थ हैं जो आपको अस्थमा से लड़ने में मददगार हो सकते हैं।
* बहुत कारगर है एंटी-ऑक्सीडेंट :
अपने खाने में, जितना संभव हो सके एंटी-ऑक्सीडेंट भोजन को शामिल करें। ऐसा भोजन जिसमें 'विटामिन-सी" की मात्रा अधिक हो आपके भोजन का अहम हिस्सा होना चाहिए। 'विटामिन-सी" सूजन और जलन को कम करने में मदद करता है। यह फेफड़ों पर असर करता है और श्वसन संबंधी समस्याओं से लड़ने में सहायता करता है। खट्टे फल और जूस, ब्रोकली, स्क्वॉश और अंकुरित आहार ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा होती है।
*रंग-बिरंगी सब्जियां करें शामिल :
अपने बोरिंग खाने में जरा रंग भरिए। गहरे रंग के फलों और सब्जियों, जैसे खुबानी, गाजर और लाल व पीली मिर्च और पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में अस्थमा के मरीजों के लिए लाभप्रद बीटा-कैरोटीन नाम का एक खास तत्व पाया जाता है। जिस सब्जी या फल का रंग जितना गहरा होगा उसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मात्रा उतनी अधिक होगी।
* आपके लिए नहीं है विटामिन-ई :
यूं तो विटामिन-ई काफी गुणों से भरपूर होता है, लेकिन अस्थमा मरीजों को इससे जरा दूर ही रहना चाहिए। यह खाना पकाने के लगभग सभी तेलों में मौजूद होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल जरा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। सूरजमुखी के बीज, केल (एक प्रकार की गोभी), बादाम और अधिक साबुत अनाजों में विटामिन-ई की मात्रा कम होती है। इन आहारों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें।
* विटामिन बी, बना है आपके लिए :
ऐसा भोजन जिसमें विटामिन-बी मौजूद हो, अस्थमा के मरीजों के भोजन का अहम हिस्सा होना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें, अस्थमा मरीजों को तनाव के जरिए होने वाले अटैक से बचाने में सहायक होती हैं। इस बात के  भी साक्ष्य मिले हैं कि विटामिन बी6 और नियासिन (विटामिन बी3, निकोटिन) की कमी से भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है।
* प्याज है फायदेमंद :
प्याज चाहे लाल हो या हरा, यह अस्थमा मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। प्याज में मौजूद सल्फर तत्व अस्थमा के मरीजों को जलन से राहत दिलाते हैं। यह बात साबित हो चुकी है कि प्याज का सेवन सांस संबंधी तकलीफों से भी राहत दिलाने वाला होता है।
* ओमेगा-3 फैटी एसिड दिलाए राहत :
ओमेगा-3 फैटी एसिड फेफड़ों में होने वाली जलन और उत्तकों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि लगातार जलन और खांसी से उत्तकों को काफी नुकसान पहुंचता है, जिसके चलते नियमित अस्थमा अटैक आते रहते हैं। यह मुख्य रूप से सलमन, मैक्रेल और ऐसी मछलियों में पाया जाता है जिनमें ऑयल की मात्रा अधिक होती है।
* मसालों से रहें दूर :
मसाले गर्म होते हैं और अस्थमा मरीजों को इनसे दूर ही रहना चाहिए। मसाले खाने से, मुंह, गले और फेफड़ों की कोशिकाएं उत्तेजित हो जाती हैं, परिणामस्वरूप उनमें से सेल्विया निकलने लगता है। सेल्विया से बलगम पतला हो जाता है।  

टमाटर खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है हेल्दी डाइट, क्योंकि इस पर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी होती है। वैसे तो बैलेन्स और रिच डाइट लेने वाली बात सभी को मालूम है, मगर कभी-कभी कोई चीज छूट जाए तो उसे याद कर खाने में शामिल करना न भूलें। यहां बात हो रही है टमाटर की। हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक टमाटर से युक्त आपकी रिच डाइट ब्रेस्ट कैंसर जैसे बीमारी के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोध में बताया गया कि टमाटर का सेवन महिलाओं के लिए बेहद गुणकारी है। जो पोस्टमैनोपॉजल से होने वाले खतरों को काफी कम करता है।
शोध में बताया गया है कि पोस्टमैनोपॉजल महिलाओं में उनके वजन बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसमें बताया गया है कि खाने में टमाटर की हाई डाइट लेने से शरीर में फैट और शुगर मेटाबोलिज्म को रेग्युलेट करने वाले हार्मोन के स्तर पर पॉजिटीव इफेक्ट पड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से दूर रहा जा सकता है।
रूटगर्स यूनिवर्सिटी में एपिडिमियोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर अदना लानोस ने बताया कि टमाटर का गुदा या टमाटर से बने उत्पादों की पर्याप्त मात्रा लेने से बहुत कम समय में ही कई फर्क दिखाई देने लगते हैं। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन तत्व न सिर्फ पोस्टमैनोपॉजल इफेक्ट को कम करता है बल्कि फैट और शुगर को कंट्रोल करते हुए व्यक्ति को हेल्दी और पूरी तरह से फिट भी रखता है।
इसके अलावा इस शोध में यह भी कहा गया है कि न्यूट्रीएंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स और फायटोकेमिकल्स जैसे लाइकोपीन से युक्त फ्रूट्स और वेजिटेबल्स का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।  

योगा करें, मगर सावधानी से

योगा आपको ध्यान केंद्रित करने, सकारात्मक और जीवंत बनाए रखने में मदद करता है। यदि योगा का संपूर्ण लाभ लेना हो तो कुछ गलतियों से बचें।
* खाना खाने के बाद योगा खतरनाक :
भरे पेट के साथ योगा करना कई सारी समस्याओं का कारण बनता है। खाने और योगा की प्रैक्टिस के बीच दो घंटे का अंतराल होना चाहिए।
* टाइट कपड़े न पहनें :
ठीक से सांस लेने और पसीना बेहतर तरीके से बाहर निकल पाए उसके लिए आरामदायक और लूज फिटिंग वाले कपड़े पहनकर योगा करें। शूज भी बहुत टाइट या लूज ना हो।
* जब कॉर्डियक प्रॉब्लम हो :
कॉर्डियक या हाइपरटेंशन जैसी कोई भी समस्या है तो बिना सही ट्रेनर के योगा करना उचित नहीं है। अगर घर पर योगा कर रहे हैं तो फॉर्वर्ड बेंडिंग और ऐसी मुद्राएं करने से बचें, जिसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़ना पड़े।
*मेंस्ट्रूएशन के दौरान न करें सारी मुद्राएं :
मेंस्ट्रूएशन के दौरान महिलाओं को सूर्य नमस्कार और शरीर को पीछे की ओर मोड़कर करने वाली मुद्राएं नहीं करनी चाहिए। ऐसे में पेट की मांसपेशियों पर दबाव न डाले।।
* वॉर्मअप जरूरी :
योगा करने से पहले 10 मिनट की वॉर्मअप या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। व्यायाम के बाद भी 10 मिनट तक आराम के साथ शवासन करें। इससे सांस लेने की क्षमता बढ़ती है और ध्यान केंद्रित करने की भी।
* दर्द में न करें प्रैक्टिस :
किसी भी एक्सरसाइज के दौरान झटके लगना, दर्द या असहजता होने पर उसे रोकना बेहतर होगा। ऐसे में किसी फिजियोथैरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह लें।
झटके से की जाने वाली मुद्राएं इंजुरी का कारण भी बन सकती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव होने का भी खतरा रहता है।  

संगीत के जरिए लौट सकती है खोई याददाश्त

संगीत के जरिए खोई हुई याददाश्त वापस लाई जा सकती है। ऐसा कहना है मशहूर मनोचिकित्सक रिचर्ड कोगन का। उन्होंने इस संबंध में जर्मन संगीतकार लुडविग वैन बीथोवन का उदाहरण देते हुए कहा है कि अत्यंत युवावस्था में बधिरता का शिकार होने के बावजूद संगीत की उपचार शक्ति के कारण वे कुछ बेहतरीन संगीत रचनाएं दे सके।
हर बीमारी की रामबाण दवा 
इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर का दर्द और जी-घबराना इन सभी स्थितियों में संगीत राहत दिला सकता है। कोगन खुद भी कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत में दर्द और व्यग्रता को कम करने की अद्भुत शक्ति है। एचटी सम्मेलन में 'राहत दिलाने की संगीत की शक्ति" पर सत्र को संबोधित करते हुए कोगन ने कहा कि हृदय रोगियों के लिए संगीत रक्तचाप को कम कर सकता है। यह कार्टिसोन (एक प्रकार का हॉर्मोन जो तनाव से सक्रिय होता है और कई प्रकार की बीमारियों की वजह बनता है) को कम कर सकता है। उन्होंने कहा कि आघात के बाद बोलने में कठिनाई वाले रोगियों के लिए भी संगीत मददगार हो सकता है।  

डस्की स्किन : कैसा हो मेकअप

सावंली त्वचा वाली महिलाओं को हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि वे अपनी त्वचा की रंगत निखार नहीं सकती। इसके लिए वे बाजार में उपलब्ध बहुत सारे उत्पादों का प्रयोग करती हैं। कभी-कभी इसकी वजह से वे हीन भावना की शिकार भी होती हैं।
डस्की स्किन वाली महिलाएं भी मेकअप के जरिए अपनी सुंदरता को और भी निखार सकती हैं। सांवली त्वचा वाली महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी स्किन टोन का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा चेहरे से मिलता-जुलता कलर, लिपलाइनर, और ब्लशर का इस्तेमाल करने से खूबसूरती और भी निखर जाएगी। आइए हम इसमें आपकी मदद करते हैं।
* लिक्विड फाउंडेशन :
सांवली महिलाएं मेकअप के लिए लक्विड फाउंडेशन का प्रयोग करें, यह तरल होती है न कि पावडर पेस्टी। यदि आपको अपनी स्किन टोन से मेल खाता हुआ फाउंडेशन नहीं मिलता है तो आप दो रंगों के फाउंडेशन को मिलाकर एक अच्छा रंग बना सकती है। फाउंडेशन लगाने से पहले चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगाइए, जिससे त्वाचा कोमल हो जाए।
*त्वचा को सुखाइए :
त्वचा पर लिक्विड फाउंडेशन लगाने के बाद उसे सुखाइए। इसके लिए आप पाउडर का इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि आपकी त्वचा ऑयली है तो अपने पास हर वक्त फेस पाउडर रखें। इससे त्वचा पर गीलापन नहीं आएगा और वह हमेशा ड्राय बनी रहेगी।
*गालों को ब्लश करें :
चेहरे पर हमेशा ब्लरशर लगाना सही नहीं होता मगर कभी-कभार पार्टी आदि में आप इसका प्रयोग करके सुंदर-सा लुक पा सकती हैं। चेहरे को ब्लश करने के लिए डीप ऑरेंज, वाइन या कोरल रंगों का प्रयोग करें। इससे आपकी त्वचा में निखार आएगा। सांवली त्वचा वाली महिलाओं को लिपस्टिक का चुनाव भी रंग के हिसाब से करना चाहिए। जिन महिलाओं का रंग डार्क हो उन्हें हल्के रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगर आपको लिपस्टिक लगाना पसंद है तो आप डार्क कलर की ही लिपस्टिक लगाएं, जैसे- वाइन, रेड, प्लम और ब्राउन आदि रंग आपकी सुंदरता निखारेंगे।
*आईब्रो के लिए :
डार्क रंग वाली महिलाएं मेकअप के दौरान अपनी आइब्रो को नजरअंदाज बिल्कुल भी ना करें। आईब्रो को शेप देने के लिए आपके लिए पेंसिल और पाउडर का प्रयोग करना बेहतर होगा। सुंदर आंखें खूबसूरती को बढ़ाती है।
* लिप लाइनर :
लिपस्टिक लगाने से पहले अपने होठों पर लिप लाइनर का प्रयोग कीजिए। एक अच्छी आउटलाइन आपके पूरे चेहरे की रंगत को निखार देगी। 

इनसे हो जाएगी नींद खफा

रात का खाना हमारी नींद और सेहत दोनों को प्रभावित करता है इसलिए रात में सोने से पहले कुछ चीजों से परहेज करें तो अच्छा है।
* पास्ता और पिज्जा :
पास्ता में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसे बनाने में काफी ज्यादा घी-तेल का इस्तेमाल होता है। रात में यदि आप पास्ता खाते हैं तो सोने के बाद यह सब फैट में बदलकर आपको मोटा कर सकता है। पास्ता की तरह ही पिज्जा भी एसिडिटी पैदा कर पाचनतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
* मिठाइयां :
रिसर्च की मानें तो सोने से पहले मिठाई खाने से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ती है। यह दिमाग की तरंगों पर भी प्रभाव डालती है, जिससे सोते समय बुरे सपने आने की आशंका बढ़ जाती है।
* मांस-मछली :
बिना चर्बी वाला मीट भी डिनर में नहीं लेना चाहिए। यह बेशक प्रोटीन और आयरन का भंडार है, लेकिन यदि आप इसे डिनर में शामिल करते हैं तो आरामदायक नींद नहीं ले पाएंगे।
* डार्क चॉकलेट :
विशेषज्ञ चॉकलेट को मस्तिष्क और याददाश्त के लिए फायदेमंद मानते हैं। लेकिन यह एक हाई-कैलोरी फूड है। इसमें मौजूद कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थ नींद को प्रभावित कर सकते हैं।
* कुछ विशेष सब्जियां :
प्याज, गोभी, ब्रोकली जैसी सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं। रात में इनका सेवन करने के बाद सोने की स्थिति में पेट फूलने और नींद न आने जैसी समस्या हो सकती है।
* शराब :
रात को सोने से पहले शराब का सेवन आपकी नींद को सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम कर देता है। आप ठीक प्रकार से नींद नहीं ले पाते और बीच-बीच में बार-बार जागते हैं। 

झूलने का मजा तो ले ही लीजिए...

झूले का नाम लेते ही बड़ी-बड़ी पैंगों के साथ झूलने का आनंद हर किसी को याद आ ही जाता है। मगर जब दूर जाकर इन झूलों का मजा नहीं लिया जा सकता तो घर पर भी यह आनंद आसानी से लिया जा सकता है। घर में लगने वाले झूले सिर्फ सजाने का सामान नहीं होते बल्कि आपके आराम के साथी भी बन जाते हैं और जब ठंड की गुनगुनी धूप का मजा लेना हो तो फिर इन झूलों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
झूले अब पेड़ों से हटकर घर की बालकनी, लॉन या गार्डन तक ही रह गए हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि लोगों को इसका शौक नहीं रह गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक झूले सभी को पसंद होते हैं। अब इनके स्टाइल्स भले ही मॉडर्न हो गए हों पर उस पर होने वाली मौज-मस्ती वही पुरानी है। अगर झूलों की बात की जाए तो इनके लिए घर में स्पेस होना काफी जरूरी है लेकिन कंटेम्पररी स्टाइल्स में ऐसी डिजाइंस हैं जो हर तरह की स्पेस में आसानी से फिट हो जाएंगी।
* कम्फी स्विंग  :
ये स्विंग्स साइज में बड़े होते हैं। यदि घर में जगह हो तो यह बहुत अच्छे लगेंगे। इन्हें और भी आरामदायक बनाना हो तो कुशंस से फर्निश कर सकते हैं। इन्हें शिफ्ट करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है पर ये बेहद लग्जरियस होते हैं।
* निटेड स्विंग :
ये स्विंग्स निटेड होते हैं, जिसकी वजह से इन्हें लगाना और उतारना बहुत आसान हो जाता है। रोप या फिर सॉफ्ट पॉलिस्टर फैब्रिक से बने होने के कारण इसे आसानी से फोल्ड भी किया जा सकता है। यही वजह है कि इन्हें आप अपने साथ आउटिंग्स पर भी ले जा सकते हैं। अलग-अलग शेप्स और कलर्स में भी ये आसानी से मिल जाएंगे।
* स्टेडिंग स्विंग :
स्टैंडिंग स्विंग कई आकार और किस्मों में मौजूद है। ओवल, राउंड या फिर ट्राएंगुलर ये सभी अच्छे लगते हैं। इन्हें बालकनी, लॉन या फिर गॉर्डन में रखा जा सकता है। मूवेबल होने की वजह से ये आसानी से कहीं भी शिफ्ट किए जा सकते हैं।
* डिटेचेबल स्विंग :
यह स्विंग आपको पुरानी यादों में ले जाएगा। ये दिखने में काफी स्टाइलिश लगते हैं और आप इसे कहीं भी हैंग कर सकते हैं। छोटे घर और फ्लैट्स के लिए ये अच्छा विकल्प हो सकते हैं। कम वजन वाला यह स्विंग काफी कम जगह में भी लगाया जा सकता है। इन्हें आप अपनी पसंद के अनुसार सिलेक्ट कर सकते हैं।  

अब कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाएगा स्मार्टफोन!

आधुनिक समय में स्मार्टफोन ने जिंदगी की राह को काफी आसान कर दिया है। इसके जरिए एक क्लिक में अब उन तमाम जानकारियों को पाया जा सकता है, जो पहले काफी कठिन लगती थी। इसमें तरह-तरह की मोबाइल एप्लीकेशन्स काफी मददगार साबित हो रही हैं। तो फिर स्मार्टफोन से एक और जानकारी आसानी से मिलेगी। जी हां, अब स्मार्टफोन कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने में भी आपकी मदद करेगा, अब इसके लिए आपको किसी भी प्रकार के ब्लड टेस्ट से गुजरने की जरूरत नहीं होगी!
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा एप्लीकेशन तैयार किया है जो आपके स्मार्टफोन के कैमरे के जरिए आपका कोलेस्ट्रॉल पता लगाने में मदद करेगा।
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन कोलेस्ट्रॉल एप्लीकेशन फॉर रेपिड डायग्नोटिक्स यानी एक ऐसा स्मार्टकार्ड बनाया है, जो एक मिनट के अंदर आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर बताने में सक्षम होगा। इससे पहले कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाने के लिए ब्लड की जांच की जाती थी। उसके आधार पर ही कोलेस्ट्रॉल का पता चलता था लेकिन इस एप्लीकेशन के जरिए यह काम बहुत आसान हो जाएगा। इस एप्लीकेशन के शोधकर्ता डेविड एरिकसन के अनुसार स्मार्टफोन की मदद से अब आपको कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए विशिष्ट उपकरणों की जरूरत नहीं होगी। यह आपके ब्लड, पसीने और लार में मौजूद बायो-मार्कर का निरीक्षण कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बताने में सक्षम होगा। इस सॉफ्टवेयर के जरिए शरीर की कोशिकाओं में मौजूद रंगों के आधार पर उनके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया जा सकेगा। यह शोध 'लैब ऑन ए चिप जर्नल" में प्रकाशित हुआ है।  

रविवार, 29 दिसंबर 2013

रिकॉर्ड संख्या में भारतीय-अमेरिकियों को नियुक्त किया ओबामा ने

वाशिंगटन , प्रेट्र : इस वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिकॉर्ड संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकियों को ह्वाइट हाउस में विभिन्न् पदों पर नियुक्त किया है। अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या करीब 30 लाख है।
ओबामा की दूसरी पारी के पहले वर्ष  में ह्वाइट हाउस में रिकॉर्ड संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों की नियुक्ति को विशेषज्ञ  इस समुदाय की प्रतिभा को पहचाने जाने के रूप में देखते हैं। संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय मूल के एक दर्जन से अधिक अमेरिकी लोगों को ह्वाइट हाउस में प्रमुख पदों पर नियुक्ति दी गई है। अमेरिका में शायद ही कोई ऐसा महत्वपूर्ण विभाग है जहां भारतीय मूल के लोग प्रमुख पदों पर आसीन नहीं हों। ओबामा प्रशासन  में भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों के बारे में कोई आधिकारिक सूची तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार यह संख्या 50 से अधिक है। यह अब तक का एक रिकॉर्ड है। ओबामा प्रशासन  में भारतीय मूल के पांच लोग महत्वपूर्ण पदों पर हैं, जिनकी नियुक्ति की संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने पुष्टि कर दी है। यूएसएड के प्रशासक  राजीव श्ााह ओबामा प्रशासन  मेंं श्ाीषर््ा पद पर आसीन भारतीय मूल के अमेरिकी हैं। इस वषर््ा निश्ाा बिस्वाल को दक्षिण्ा एश्ाियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री नियुक्त किया गया थ्ाा। इसके अलावा ह्वाइट हाउस फेलोश्ािप पर राष्ट्रपति के आयोग की सदस्य अजीता राजी, कृष्ाि संबंधी मुख्य वार्ताकार इस्लाम सिद्दीकी और वाण्ािज्य विभाग में कार्यकारी निदेश्ाक विनाई थ्ाुम्मलपल्ली की नियुक्ति को भी सीनेट ने मंजूरी दे दी है। यदि सीनेट की ओर से पुष्टि हो जाती है तो विवेक मुर्थ्ाी भारतीय मूल के पहले अमेरिकी सर्जन जनरल होंगे। भारतीय मूल के दो और अमेरिकी अपनी नियुक्ति की सीनेट द्वारा पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सहायक वाण्ािज्य मंत्री नियुक्त किए गए अरुण कुमार और राजनीतिक व सैन्य मामलों के लिए सहायक विदेश्ा मंत्री नियुक्त पुनीत तलवार श्ाामिल हैं। तलवार ने ईरान के परमाण्ाु समझ्ाौते को लेकर महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई थ्ाी। यदि तलवार की नियुक्ति की सीनेट द्वारा पुष्टि हो जाती है तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय में ऐसा पहली बार होगा जब दो सहायक विदेश्ा मंत्री भारतीय मूल के होंगे।