जिन बातों को हम पहले से जानते हैं, उन पर विज्ञान की मुहर लगती है तो उनमें हमारा विश्वास और प्रबल होता है। सोमवार को खबर आई थी कि छोटे-छोटे निवाले खाने से भूख को काबू में रखने में मदद मिलती है। यह सदियों पुरानी समझ्ा है। इसे विज्ञानियों ने साबित किया। अब विज्ञान ने यह साबित किया है कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले लोग अवसाद का श्ािकार कम होते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे लोगों के मस्तिष्क की बाहरी सतह यानी कॉर्टेक्स मोटी होती है।
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ताजा श्ाोध में यह जानकारी सामने आई है। श्ाोध का नेतृत्व कर रही डॉ माइरना वाइजमैन कहती हैं, 'हमारा मस्तिष्क हमारे विचारों और मनोदश्ााओं का आईना होता है। इमेजिंग की नई तकनीक से यह सब कुछ देखना संभव हुआ है। हमारा मस्तिष्क एक असाधारण्ा अंग है, जो न सिर्फ हम पर नियंत्रण्ा रखता है बल्कि हमारी मनोदश्ााओं से नियंत्रित भी होता है।"
इस नए श्ाोध से पता चलता है कि मस्तिष्क की बाहरी सतह की मोटाई और आध्यात्मिकता में गहरा रिश्ता है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि जिन लोगों के मस्तिष्क के कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है वे आध्यात्मिक भी होते हैं। अलबत्ता यह तय है कि जो धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं उनके कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है। इससे यह भी पता चला है कि जो लोग अवसाद का श्ािकार होते हैं उनके कॉर्टेक्स की सतह धार्मिक लोगों के मुकाबले पतली होती है।
इस श्ाोध में ऐसे लोगों को श्ाामिल किया गया जिनके माता-पिता या दादा-दादी अवसाद से संबंधित पहले के अध्ययन में श्ाामिल थे। इनमें से कुछ के परिवार में अवसाद पीढ़ीगत बीमारी के रूप में काबिज थी। इस समूह की तुलना ऐसे लोगों के साथ की गई, जिनमें अवसाद के कोई लक्षण्ा नहीं थे।
सांभार: जागरण
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ताजा श्ाोध में यह जानकारी सामने आई है। श्ाोध का नेतृत्व कर रही डॉ माइरना वाइजमैन कहती हैं, 'हमारा मस्तिष्क हमारे विचारों और मनोदश्ााओं का आईना होता है। इमेजिंग की नई तकनीक से यह सब कुछ देखना संभव हुआ है। हमारा मस्तिष्क एक असाधारण्ा अंग है, जो न सिर्फ हम पर नियंत्रण्ा रखता है बल्कि हमारी मनोदश्ााओं से नियंत्रित भी होता है।"
इस नए श्ाोध से पता चलता है कि मस्तिष्क की बाहरी सतह की मोटाई और आध्यात्मिकता में गहरा रिश्ता है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि जिन लोगों के मस्तिष्क के कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है वे आध्यात्मिक भी होते हैं। अलबत्ता यह तय है कि जो धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं उनके कॉर्टेक्स की मोटाई अधिक होती है। इससे यह भी पता चला है कि जो लोग अवसाद का श्ािकार होते हैं उनके कॉर्टेक्स की सतह धार्मिक लोगों के मुकाबले पतली होती है।
इस श्ाोध में ऐसे लोगों को श्ाामिल किया गया जिनके माता-पिता या दादा-दादी अवसाद से संबंधित पहले के अध्ययन में श्ाामिल थे। इनमें से कुछ के परिवार में अवसाद पीढ़ीगत बीमारी के रूप में काबिज थी। इस समूह की तुलना ऐसे लोगों के साथ की गई, जिनमें अवसाद के कोई लक्षण्ा नहीं थे।
सांभार: जागरण
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