शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

खून की कमी करें दूर

आज के दौर में ज्यादातर महिलाओं में खून की कमी की समस्या होती है। इस समस्या को नजरअंदाज करने से यह और विकराल रूप धारण कर लेती है, जबकि थोड़ा सा खानपान में बदलाव कर इससे निजात पाई जा सकती है। अंगूर में विटामिन सी और ग्लूकोज काफी मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में खून की वृद्धि भी करता है। इसके सेवन से एनेमिक व्यक्ति को फायदा होता है।

त्वचा को रखें जवान

यदि हम नियमित रूप से तेल मालिश करें, तो हमारी त्वचा काफी समय तक युवा बनी रह सकती है। रोजाना नहाने से पहले पूरे शरीर पर हल्की तेल मालिश करें और कमसेकम 45 मिनट बाद नहाएं तो त्वचा जवां रहेगी। नहाते समय शरीर पर साबुन लगाने के बाद भी शरीर पर
तेल रगड़ा जा सकता है। इसके बाद फिर से पानी से नहा लें, ऐसा करने से भी त्वचा को फायदा होता है।


होंठ बनाएं मुलायम

होंठ हमारे चेहरे की खूबसूरती का अहम हिस्सा होते हैं। यदि यह फटे या रूखे हों, तो चेहरा अपनी खूबसूरती खो देता है। ऐसे में रात को रोज सोने से पहले अपने होंठों पर वैसलीन या नीबू का रस लगाकर सोएं। एसपीएफ 15 वेल्यू वाला लिप बाम भी लगा सकते हैं। दिनभर में करीब आठ गिलास पानी जरूर पिएं, ऐसा करने से बदलते मौसम में होंठ नहीं फटेंगे।


...तो हाथ रहेंगे खूबसूरत

हाथों की खूबसूरती बनाए रखने के लिए पानी में काम करने के बाद और सुबह नहाने के बाद अच्छा अब्जॉर्बिंग लोशन लगाएं। रात में थोड़ा हैवी व क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं। हाथों की स्क्रबिंग के लिए होममेड स्क्रब, मसलन चीनी व बेसन का यूज करें और ताजे फलों का पैक लगाएं। सनस्क्रीन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह बॉडी के उन सभी पार्ट्स के लिए जरूरी है, जो सीधे धूप के संपर्क में आते हैं।


ऐसे बचें एक्ने से

रात को सोने से पहले मेकअप को पूरी तरह अच्छी से उतारें और फिर चेहरे को साफ करें। इससे त्वचा के रोमकूपों को ऑक्सीजन मिल सकेगी। दरअसल, मेकअप रोमकूपों को बंद कर रोगकारक कीटाणू बैक्टेरिया को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसके अलावा छाछ, पुदीना पेय, ठंडा दूध और नारियल पानी आदि का सेवन करने से भी एक्ने की समस्या से निजात पाया जा सकता है।


त्वचा, बाल और नाखूनों में आ जाएगा निखार

नियमित रूप से एक गिलास संतरे का जूस पीने से त्वचा से लेकर बाल और नाखूनों तक में निखार आ जाता है। संतरे का पीला रंग सूरज की किरणों से त्वचा को होने वाले नुकसान को कम करता है। संतरे में मौजूद विटामिन सी कोलाजोन के साथ ही महा पौष्ठिक लुटीन के उत्पादन के लिए भी जरूरी होता है।


सर्दी में खुद को रखें फिट

सर्दी के दिनों में शारीरिक म काफी कम हो जाता है। ऐसे में आप ठीक से सो नहीं पाते। इससे आपके बीमार होने की आशंकाएं काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। ऐसे में खुद को फिट रखने के लिए हर्बल टी और वेजीटेबल सूप जरूर पीना चाहिए। हरी सब्जियों और मौसमी फलों के सेवन से भी सेहत अच्छी रहती है।


स्मार्टफोन यानी तनाव का घर

स्मार्टफोन का उपयोग करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसी के चलते लोगों में तनाव का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। जितना लोग स्मार्ट फोन पर निर्भर होते जा रहे हैं, यह समस्या भी उतनी ही गंभीर रूप लेती जा रही है।
स्मार्टफोन की लत के कारण लोग घंटों इंटरनेट का उपयोग करते रहते हैं। जिस कारण उनको तनाव का सामना भी करना पड़ता है। ब्रिटिश लेखिका फ्रांसिस बूथ ने अपनी नई किताब में यह दावा किया है कि स्मार्टफोन्स के आने के बाद इसके आदी हो चुके लोगों में तनाव का स्तर 300 प्रतिशत तक बढ़ा है। बूथ की इस किताब के अनसुार स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण लोग हर समय इंटरनेट के माध्यम से ई-मेल, सोशल एप्स और मैसेंजर्स के संपर्क में बने रहते हैं। जिस कारण उनका दिमाग बिना रूके सक्रिय रहता है। जिस कारण दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और तनाव बढ़ने लगता है।
ऐसे की तनाव की जांच
इस परिणाम पर पहुंचने के लिए बूथ ने 40 वर्ष की आयु के कुछ वयस्कों में तनाव के स्तर की जांच की। इस जांच में  हिस्सा लेने वाले लोगों को एक सप्ताह स्मार्टफोन के साथ और एक सप्ताह बिना स्मार्टफोन के रहने को कहा गया।
क्या पाया
जिस सप्ताह वे लोग बिना स्मार्टफोन के रहे, उनमें तनाव का स्तर कम देखा गया। जबकि स्मार्टफोन के उपयोग करने वाले सप्ताह में इन्हीं लोगों के तनाव में काफी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्लिफोर्ड नास बताते हैं कि मानव मस्तिष्क एक साथ बहुत से काम करने के लिए नहीं बना है और तनाव की वजह से हमारी संज्ञात्मक सोच को नुकसान होता है।
भारत का पांचवां स्थान
शोधकर्ता मैरा पीकर ने एक रिपोर्ट में कहा कि स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले लोगों में भारत का पांचवा स्थान है। उनके मुताबिक वर्ष 2013 तक भारत में 6 करोड़ 70 लाख लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इन आंकड़ों में 81 प्रश की वृद्धि हुई है।  

सर्दियों में दें स्किन को देखभाल का तोहफा

सर्दियों का मौसम दस्तक दे चुका है पर आपकी तैयारियां क्या है? तैयारी से हमारा मतलब है रुखी त्वचा से लेकर टैनिंग जैसी सर्दियों की आम समस्याओं को लेकर, जिनसे बचने के लिए आपको अभी से अपनी त्वचा का ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए।
सर्दियों में त्वचा से जुड़ी दिक्कतें न हों, इसके लिए ये एहतियात अभी से रखना शुरू कर दें।
त्वचा की खुश्की की छुट्टी करेंगे ये आसान उपाय
 सनस्क्रीन
सनस्क्रीन की जरूरत जितनी गर्मियों में है, उतनी ही सर्दियों में भी है। आमतौर पर आप सर्दियों में सनस्क्रीन लगाना जरूरी नहीं समझते हैं लेकिन इस मौसम में भी अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचना जरूरी है।
 मॉइचराइजर
सर्दियों में त्वचा की नमी का खोना लाजमी है लेकिन इसकी भरपाई के लिए अगर आप अभी से मॉइश्चराइजर और मसाज ऑयल का इस्तेमाल करेंगे तो त्वचा की नमी बरकरार रहेगी। इस मौसम में ऑयल बेस गाढ़े मॉइश्चराइजर परफेक्ट हैं।
अल्कोहल बेस प्रोडक्ट
आप जो टोनर, आफ्टरशेव आदि का इस्तेमाल करते हैं, इसमें मौजूद अल्कोहल आपकी त्वचा को रुखा बनाता है। ऐसे में उत्पाद खरीदते वक्त देख लें कि उसमें अल्कोहल की मात्रा कितनी है।
नेचरल थैरेपी
इस मौसम में त्वचा का ऑयल बैलेंस बनाए रखने और दमकने के लिए जरूरी है कि आप घर में मौजूद चीजों जैसे मलाई, बेसन, दूध आदि से त्वचा को मॉइश्चराइज करते रहें। 

सूखे मेवों से पाएं सेहत का उपहार

शरीर को एनर्जी देने के लिए अक्सर सूखे मेवे खाने की सलाह दी जाती है और सर्दी के मौसम में तो यह सूखे मेवे स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं। इनसे जहां सर्दियों में बॉडी को हीट मिलती है वहीं यह एनर्जी के सबसे बेहतर स्रोत माने जाते हैं। केवल इतना ही नहीं, हाल ही में किए एक नए शोध में पाया गया है कि सूखे मेवे खाने से कैंसर और हृदय रोगों से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यानी यह 'सोने पर सुहागा" है क्योंकि यह पूरी सेहत प्रदान करते हैं।
नट्स का सेवन लाभदायक
वैज्ञानिकों ने पाया कि तीस वर्ष से अधिक समय से जो लोग नट्स का सेवन कर रहे हैं, उनके रोगों से मरने की आशंका कम होती है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में सूखे मेवों का सेवन करने से बीमारियों से मौत की आशंका औसतन 20 फीसद तक कम हो जाती है।
मोटापे से भी दूरी
हृदय रोगों से मौत का खतरा तीस फीसद और कैंसर से 11 फीसद तक कम हो जाता है। नियमित मेवों का सेवन करने वालों को मोटापे की समस्या भी परेशान नहीं करती। यानी सूखे मेवे आपको मोटापे से भी दूर रखने में मदद करते हैं।
11 हजार अमेरिकियों पर शोध
यह नतीजे 11 हजार अमेरिकी लोगों पर शोध के बाद सामने आए हैं। इन सभी  को सूखे मेवे काफी पसंद थे। मुख्य शोधकर्ता डॉक्टर फुचस का कहना है कि सूखे मेवे खाने का सबसे बड़ा लाभ हृदय रोगों से होने वाली मौतों के आंकड़े में 29 फीसद की कमी आना है। यह अमेरिका में होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह है। डॉक्टर फुचस बॉस्टन स्थित डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं। यह स्टडी 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन" में प्रकाशित हुई है।
कैंसर का खतरा भी कम 
डॉक्टर फुचस ने कहा कि सूखे मेवों से कैंस
र से होने वाली मौतों में भी 11 फीसद की कमी आती है। सूखे मेवे खाने वाले लोग सामान्य लोगों की अपेक्षा अपनी सेहत के प्रति अधिक सजग होते हैं। स्टडी में यह बात भी सामने आई है कि नियमित तौर पर सूखे मेवों का सेवन करने वाले पतले होते हैं, धूम्रपान के प्रति उनका रुझान कम होता है वे अधिक व्यायाम करते हैं और सब्जियों और फलों का सेवन भी अधिक करते हैं।
इस शोध के सह-लेखक प्रोफेसर डॉक्टर जिंग बाओ (बर्मिंघम एंड वूमन्स हॉस्पिटल) का कहना है कि इन सभी विश्लेषणों में यह बात सामने आई है कि लोगों ने जितना अधिक नट्स का सेवन किया तीस वर्षों के फॉलो-अप टाइम में उनकी मौत की आशंका उतनी ही कम हो गई।
क्या कहता है शोध 
वे लोग जो सप्ताह में केवल एक बार नट्स का सेवन करते थे, उनके सभी कारणों से होने वाली मौतों में 11 फीसद की कमी देखी गई वहीं जिन लोगों ने दो से चार बार नट्स का सेवन किया उनमें यह दर 13 फीसद थी और सप्ताह में छह बार इन पदार्थों के सेवन ने मौत की आशंका को 15 फीसद तक कम कर दिया। वे लोग जो रोजाना नट्स का सेवन करते थे उनमें तीन दशकों के समय में 20 फीसद कम मौत की आशंका देखी गई।  

भारत में 18वीं सदी में बने फर्नीचर की लंदन में होगी नीलामी

 भारत में 18वीं सदी में  हाथी के दांत पर श्ाानदार नक्काश्ाी कर बनाया गया फर्नीचर लंदन के सॉथबी ऑक्श्ान हाउस द्वारा चार दिसंबर को नीलाम किया जाएगा।
यह फर्नीचर मुर्श्ाीदाबाद के नवाब की विधवा ने तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स को दिया था। इस समय यह फर्नीचर एक निजी संकलन का हिस्सा है। फर्नीचर में दो जोड़ी कुर्सियां और एक सेटी श्ाामिल है, जो कभी मुर्श्ाीदाबाद के नवाब मीर जाफर की विधवा मण्ाि बेगम के खजाने का हिस्सा रही थी। सॉथबी ने अपने एक बयान में कहा है, 'मुर्श्ाीदाबाद में बने इस फर्नीचर को हेस्टिंग्स ने खरीद लिया था। उन्होंने इसे अर्ल ऑफ लोंसडाले संग्रहालय में भिजवा दिया था। इसके बाद यह एक निजी संग्रह का हिस्सा बन गया। अब इसें धर्मार्थ कार्यों के लिए बेचा जा रहा है।" कुर्सी का एक जोड़ा एक लाख से डेढ़ लाख पौंड (करीब एक करोड़ रुपये से डेढ़ करोड़ रुपये) के बीच नीलाम होने की उम्मीद है। फर्नीचर के अलावा 18वीं सदी की मश्ाहूर ब्रिटिश्ा पेंटिंग्स को भी इस नीलामी में रखा जाएगा।  

मेकअप के लिए पार्लर क्यों जाना!

पार्टी मेकअप का मतलब सिर्फ ब्यूटी पार्लर ही नहीं है। अगर सही जानकारी हो तो घर पर ही पार्टी मेकअप किया जा सकता है। व्यक्तित्व को निखारने में मेकअप का बड़ा अहम रोल होता है और अगर आपका व्यक्तित्व निखरा होगा तो आपमें आत्मविश्वास भी अधिक होगा। इसलिए सही अंदाज में किया मेकअप से ही पड़ेगा बेहतर इम्प्रेशन।
पार्टी के लिए तैयार होते समय हर महिला की चाहत सबसे अलग और खूबसूरत दिखने की होती है। मेकअप उसी का एक चरण है। पार्टी में कैसा मेकअप किया जाए, इस बात को लेकर अक्सर दुविधा रहती है। वैसे सही प्रकार से और सही अनुपात में किया जाने वाला मेकअप ही आपके रूप को निखारने में मदद करता है। जहां तक बात घर पर स्वयं मेकअप करने की है तो इसके लिए सबसे जरूरी है सही उत्पादों का चयन। अच्छे और सही उत्पाद आपको मन मुताबिक रूप हासिल करने में मदद करेंगे।
घर पर मेकअप करने के लिए आपको इन सामानों की जरूरत पड़ सकती है-

  • क्लींजर
  • बेस या फाउंडेशन
  • कॉम्पैक्ट
  • आईलाइनर
  • मस्कारा
  • लिपकलर
  • लिपस्टिक
  • आईब्रोपेंसिल
  • ब्लशऑन

फेस मेकअप
अपने चेहरे को मेकअप के जरिए निखारने के लिए सबसे पहले क्लींजिंग से चेहरे को अच्छी तरह से साफ करें। फिर टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग करें। इसके बाद कंसीलर लगाएं। कंसीलर से फेस के दाग-धब्बों को छिपाने में मदद मिलती है। फिर फाउंडेशन लगाएं। ध्यान रहे कि फाउंडेशन, स्किन कलर से मैच करता हुआ ही हो। शिमरलुक देने के लिए क्रीम ब्लशर लगाएं। इसके बाद फेस पाउडर लगाएं और एक नेचुरल बेस बनाएं।
आंखों का मेकअप
रात की पार्टी के लिए आंखों पर डार्क मेकअप आकर्षक बनाता है। दिन के समय लाइट शेड्स वाले आईशैडो का प्रयोग करे। लगाने से पहले ऊपरी पलकों पर
फाउंडेशन और लूज पाउडर बारी-बारी से हल्के ब्रश से लगाएं, साथ ही आई पेंसिल से ऊपर की पलकों के ऊपर पतली रेखा खींचकर उसे ब्रश से फैला दें, ताकि आईलिड बड़ी दिखे। यहां एक बात का ध्यान रहे कि थकी आंखों पर अधिक अथवा गहरा मेकअप भूल कर भी न करें।
हेयरस्टाइल हो कुछ खास
मेकअप के अलावा आपको हेयरस्टाइल भी बहुत मायने रखती है। हेयरस्टाइल्स में भी आप कुछ नया ट्राय कर सकती हैं। लूज कर्ल्स और रोमांटिक अपडोज के साथ बालों को स्टाइलिश लुक देने का ट्रेंड है। इसके साथ ही टाइट पॉनीटेल लो या हाई फिर से फैशन में है।
होठों का मेकअप
होठों को पतला दिखाने के लिए लिपस्टिक के शेड से मैच करते लिप लाइनर का प्रयोग होठों के अंदर की तरफ यानी इनर लाइन पर करें। डार्क शेड का प्रयोग बिल्कुल न करें और लिप ग्लॉस का सिंगल कोट चढ़ाएं। इसके विपरीत होठों को मोटा दिखाने के लिए लिप लाइनर को होठों के बाहरी किनारों पर लगाएं। लिपस्टिक का कोई भी रिच शेड लगाएं और लिप ग्लॉस की सहायता से ऊपर व नीचे के होंठ के बीच के हिस्से को हाईलाइट करें।
बस तो फिर देर किस बात की। पार्टी में जाने के लिए आप पूरी तरह तैयार हैं...।  

हेल्दी बालों के लिए डाइट में इन्हें करें शामिल

यदि आपके बाल भी लगातार झड़ रहे हैं तो गलत जीवनशैली, अधिक प्रदूषण या शरीर में पोषक तत्वों की कमी से बचें। क्योंकि जब भी बात बालों के झड़ने की आती है तो हार्मोनल बदलाव को छोड़कर ये सभी इसके बड़े कारण हो सकते हैं।
ऐसे में शरीर को पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए अगर आप अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करेंगे तो गंजेपन की समस्या से छुटकारे में काफी हद तक मदद मिल सकती है। बालों की सेहत के लिए शरीर में प्रोटीन, विटामिन ए, ई, बी और ओमेगा-3 जैसे कई पोषक तत्व का संतुलन जरूरी है। जानिए, डाइट में ऐसी कौन सी चीजें हैं, जो बाल झड़ने से रोकती हैं और उन्हें मजबूत बनाती हैं।
अंडे
अंडे में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है और यह विटामिन 'बी" का भी बड़ा स्रोत है। प्रोटीन और विटामिन बी, दोनों ही बालों की सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं इसलिए इसका सेवन नियमित रूप से करें।
डेयरी उत्पाद
दूध न सिर्फ कम्प्लीट फूड है बल्कि इससे बनी चीजें भी बालों के लिए काफी फायदेमंद है। यह विटामिन 'ए" का अच्छा स्रोत हैं। इनके सेवन से स्कैल्प (सिर की खाल) में सीबम (स्कीन की रक्षा करने वाला ऑयली सिक्रिशन) का निर्माण बढ़ाता है, जिससे बाल उगने में आसानी होती है और बाल झड़ते नहीं हैं।
पालक 
पालक में विटामिन बी, सी और ई अच्छी मात्रा में हैं। साथ ही यह पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी बड़ा स्रोत है। इसके से
वन से बाल घने होते हैं।
गाजर 
सर्दियों के मौसम में गाजर का सेवन बढ़ाएं और बालों की समस्याओं से निजात पाएं। गाजर में विटामिन ए और बीटा कैरोटीन नामक तत्व प्रचुर मात्रा में है जो बालों के लिए काफी फायदेमंद है।
 मछली
मछली में प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में है। अगर आप मांसाहार लेते हैं तो डाइट में नियमित रूप से मछली का सेवन करें, जिससे बालों की समस्या तेजी से दूर होंगी और बाल घने व मजबूत होंगे।
शकरकंद
शकरकंद भी बालों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें विटामिन सी, आयरन, कॉपर और प्रोटीन अच्छी मात्रा में हैं जो बालों को झड़ने से रोकने में काफी मददगार हैं।
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Include these in the diet for healthy hair
If your hair is also falling continuously, then avoid wrong lifestyle, excess pollution or lack of nutrients in the body. Because whenever it comes to hair loss, all these can be big reasons except hormonal changes.
In such a situation, if you include these things in your diet to meet the deficiency of nutrients in the body, then the relief from baldness can help to a great extent. For the health of hair, balance of many nutrients like protein, vitamin A, E, B and omega-3 in the body is necessary. Know, what are the things in the diet that prevent hair loss and make them strong.

Eggs
Eggs contain a good amount of protein and are also a great source of vitamin "B". Both protein and vitamin B are very important for hair health, so consume it regularly.

Dairy Products
Milk is not only complete food, but the things made from it are also very beneficial for hair. It is a good source of Vitamin 'A ". Consumption of these enhances the formation of sebum (skin-protecting oily secretion) in the scalp (scalp), which makes it easier to grow hair and does not cause hair loss.

Spinach
Spinach has good amounts of vitamins B, C and E. It is also a great source of potassium, antioxidants and omega-3 fatty acids. From this
The hair is thicker than the forest.

carrot
Increase carrot intake in winter season and get rid of hair problems. Carrots are rich in vitamin A and beta-carotene, which is very beneficial for hair.

 fish
Fish has good amounts of protein and omega-3 fatty acids. If you take non-vegetarian, then eat fish regularly in the diet, so that the hair problem will go away fast and the hair will be thick and strong.

Sweet potato
Sweet potato is also very beneficial for hair health. It has good amounts of vitamin C, iron, copper and protein which are very helpful in preventing hair fall.



Dharmendra Singh   https://movetonature.blogspot.com


दर्द को न समझें मामूली

अक्सर पीठ में रहने वाले दर्द को हम हल्के में लेते हैं, लेकिन एक शोध के नतीजों के बाद शायद आप ऐसा न करें। इस शोध में कहा गया है कि मामूली समझे जाने वाला पीठ दर्द असर में कई गंभीर बीमारियों होने की ओर इशारा करता है। बचपन से इस दर्द को झेलते रहने वालों को बाद के जीवन में कई परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है।
पीठ दर्द से बचने के लिए आप दर्द निवारक दवाओं का सेवन करते हैं, लेकिन इससे अस्थायी राहत ही मिलती है। स्थायी तौर पर इससे मदद मिल पाना संभव नहीं।
बर्मिंघम ब्लेडर क्लीनिक और क्वीन एलिजाबेथ हॉस्पिटल, बर्मिंघम के कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट डॉ. जकी अल्मालह के अनुसार महिलाओं में कई बार किडनी, मूत्राशय और पित्ताशय की बीमारियों को भी गलती से पीठ का दर्द मान लिया जाता है। वे कहती हैं कि लोग अक्सर इसके लिए अपने पलंग या कभी चोट लगने को जिम्मेदार मानने हैं।
 डॉक्टर से लें सलाह 
कैंसर रिसर्च यूके के प्रमुख कहते हैं कि अगर आप शरीर में कुछ भी असामान्य बदलाव महसूस करते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। वे कहते हैं कि बिना किसी कारण के पीठ में होने वाले दर्द के बारे में अच्छे डॉक्टर फौरन ही कई किस्म की जांच कराने की सलाह देते हैं। डॉक्टर अल्मालह प्रभावी संचार की सलाह देते है। उनके अनुसार अगर दर्द निवारक दवाएं राहत देने में कारगर नहीं साबित हो रही हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गंभीर बीमारियों के संकेत
रीढ़ की हड्डी में रहने वाला यह दर्द पाचक ग्रंथि में सूजन और कैंसर जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। लंदन के रॉयल हॉस्पिटल के डॉक्टर स्टीव पेररा का कहना है कि इस बीमारी का पता चलने से पहले 20 से 30 प्रतिशत महिलाएं डॉक्टर से पीठ के दर्द की शिकायत करती हैं। कई मामलों में यह दर्द फेफड़ों, मलाशय और कभी-कभार गर्भाशय के कैंसर से संबंधित हो सकता है।  

उम्र को छोड़ देंगे पीछे...

अब लंबे समय तक जवां दिखने का फॉर्मूला ढूंढ़ लिया गया है। त्वचा लंबे समय तक जवां दिखे- इसके लिए अब आपको महंगे कॉस्मेटिक्स पर पैसा बहाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका एक बेहद आसान उपाय खोज निकाला गया है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोध की मानें तो नहाने के पानी में 0.005 प्रतिशत ब्लीच मिलाकर नहाने से त्वचा की कसावट बरकरार रहती है और आप लंबे समय तक जवां दिखते हैं।
शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए अपने शोध में इसे न सिर्फ जवां त्वचा के लिए कारगर माना है बल्कि त्वचा के कैंसर के उपचार में भी मददगार माना है।
शोधकर्ता थॉमस लियांग के अनुसार ब्लीच का डाइल्यूट फॉर्म में इस्तेमाल एग्जिमा जैसे चर्म रोगों के उपचार में फायदेमंद है, लेकिन इसका इस्तेमाल कम प्रचलित हुआ है। हमने चूहों पर किए शोध में बहुत सकारात्मक परिणाम देखे हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस शोध की मदद से रेडिएशन थैरेपी
से कैंसर का उपचार कराने वाले लोगों व सनबर्न से झुलसी त्वचा को फायदा मिल सकता है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि फिलहाल ये परिणाम उन्होंने अस्थायी तौर पर देखे हैं और ब्लीच से नहाना बंद करने पर यह असर कम हो जाता है, फिर भी त्वचा से जुड़े इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 

आपके छुटकू का बदलता व्यवहार कुछ कहता है

अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के बदलते व्यवहार को माता-पिता बेहतर तरीके से समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में यदि कोई बाहरी व्यक्ति बच्चों के मामले में अभिभावकों को टोक दे तो उन्हें लगता है कि उनकी परवरिश में कोई खामी रह गई है। मगर ऐसा नहीं है। हाल ही में हुए एक शोध में इस बात को गलत बताया गया है। इस शोध में पाया गया कि कुछ बच्चों को अनुवांशिक रूप से संवदेनशील होने के कारण ही स्वभावगत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
शोध के मुताबिक कुछ बच्चों को प्री-स्कूल में जाने के दौरान स्व-नियंत्रण और गुस्से की परेशानी होती है। बच्चों को यह लक्षण अपने माता-पिता से विरासत में मिलता है। ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर क्यों कुछ बच्चे आसानी से प्री-स्कूल चले जाते हैं और क्यों कुछ को इस दौरान स्वभावगत समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्वाभाविक प्रक्रिया 
शोध के प्रमुख लेखक डॉक्टर शेनॉन लिप्सकॉम्ब ने कहा कि शोध के नतीजों के आधार पर हम कह सकते हैं कि ये बातें बच्चे अपने माता-पिता से सीखते हैं। ऐसे में हमें इस बारे में अधिक सोचना बंद कर देना चाहिए। लेकिन इस प्रकार की अनुवांशिक समस्या से परेशान कुछ बच्चे अलग माहौल, जैसे घर और छोटे समूहों में अपना स्वभाव बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।
233 परिवारों के डेटा एकत्र 
परिणाम पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 233 परिवारों से डेटा एकत्र किया और पाया कि जिन अभिभावकों में अधिक नकारात्मकता और कम स्व नियंत्रण की शिकायत थी, उनके बच्चों में स्वभावगत समस्याएं अधिक होने की आशंका थी। शोधकर्ताओं ने गोद लिए बच्चों के स्वभाव की भी जांच की और उनके जैविक माता-पिता से उनके स्वभाव की तुलना करने की कोशिश की।
हैरानी की बात यह कि उन बच्चों का स्वभाव भी अपने जैविक माता-पिता से प्रभावित था, हालांकि उनका लालन-पालन किसी और के द्वारा किया गया था। लिप्सकॉम्ब का कहना है कि हम बच्चों की अनुवांशिक जांच करवाने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन माता-पिता और अभिभावक बच्चे की जरूरतों का आकलन कर अधिक उपयुक्त मार्ग तलाश सकते हैं।
एक चुनौती है
इस शोध के जरिए हमें इस बात की जानकारी मिलती है कि आखिर क्यों कुछ बच्चे बड़ी मित्र मंडली और बड़े सामाजिक समूहों में स्वयं को असहज महसूस करते हैं। यह टीचर अथवा माता-पिता की समस्या नहीं है बल्कि बच्चे जैविक स्तर पर इस चुनौती का सामना कर रहे होते हैं।
माता-पिता इस बात को समझें

  • बच्चों के बदलते व्यवहार के पीछे उसे दोष देने के बजाए माता-पिता खुद के व्यवहार में बदलाव लाएं
  • आपको पता नहीं होता, लेकिन बच्चे कब वे आदतें जल्दी एडॉप्ट कर लेते हैं जो उनके माता-पिता में होती है, इसलिए धैर्यपूर्वक इस समस्या को दूर करने की कोशिश करें
  • समय-समय पर बच्चों को समझाना जरूरी है
  • उसके दोस्तों, आसपास के माहौल के अलावा उसकी गतिविधियों को देखते हुए उसे समझने की कोशिश करें
  • बच्चे के चिड़चिड़े स्वभाव पर खुद चिढ़ंे नहीं बल्कि बच्चे को बहुत प्रेम से समझाने और उसके व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करें 

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

किन्नू: गड़बड़ नहीं होगा पेट

संतरे की तरह दिखने वाला किन्नू सर्दियों में आसानी से मिल जाता है। यह स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही कई तरीके से फायदेमंद होता है। यह ऐसा फल है जो कि बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इसके तेल के इस्तेमाल करने से भी काफी फायदे होते हैं। यह पेट के लिए काफी अच्छा होता है, क्योंकि यह पाचन तंत्र को सही रखता है। इसके अलावा यह ब्लड  सर्कुलेशन को भी सही रखता है।

चमक उठेंगे दांत और दर्द हो जाएगा छूमंतर

केले के छिलके को प्रतिदिन दांतों पर रगड़ने से उनमें चमक आ जाती है। इतना ही नहीं शरीर में जिस जगह भी दर्द होता हो, वहां पर केले का छिलका लगाने से आराम मिलता है। छिलका लगाकर तीस मिनट तक छोड़ दें। ऐसे करने से जबर्दस्त दर्द में भी आराम मिल जाता है। सोरायसिस होने पर केले के छिलकों को पीस कर लगाएं, इससे दाग भी चले जाएंगे और आराम भी मिलेगा।
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Teeth will shine and pain will be lost
Rubbing the banana peels on the teeth daily makes them glow. Not only this, wherever there is pain in the body, applying banana peel on the body provides relief. Apply the peel and leave it for thirty minutes. By doing this, you get relief in tremendous pain. Grind banana peels on psoriasis, it will also remove stains and provide relief.

Dharmendra Singh 

https://movetonature.blogspot.com

सर्दियों में नहीं रहेंगे रूखे हाथ

सर्दियों के मौसम में हाथों के रूखेपन की ज्यादातर लोगों को समस्या होती है। ऐसे में हाथों को रूखपेन से दूर रखने के लिए पहले तो पानी खूब पिएं। दूसरा, हाथों पर दूध की मलाई का लेप जरूर लगाएं। इससे त्वचा मुलायम बनती है और रूखापन दूर होता है। शहद भी त्वचा के लिए लाभदायक होता है। नहाने से पहले शहद का लेप हाथों पर लगाएं तो लाभ होगा।
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Dry hands will not remain in winter

Most people have problems with the roughness of hands during the winter season. In such a situation, drink plenty of water first to keep your hands away from the cold. Secondly, apply a paste of milk cream on your hands. This makes the skin soft and removes dryness. Honey is also beneficial for the skin. Applying honey paste on hands before bathing will be beneficial.

Dharmendra Singh    movetonature.blogspot.com

दमक उठेंगे पैर

पैर भी हमारी खूबसूरती का एक हिस्सा होते हैं। ज्यादातर लोग इनकी उतनी केयर नहीं करते, जितनी कि इनको जरूरत होती है। आइए हम बताते हैं कि पैरों को भी कैसे खूबसूरत बनाया जा सकता है। बादाम का तेल, जैतून का तेल, ह्वीटजर्म ऑयल और यूकेलिप्टस एसेशियल ऑयल की बारह बूदों को एक साथ मिलाकर एक शीशी में रख लें। पैरों को साफ करने के बाद इस तेल को हिलाकर लोशन की तरह लगाएं। इससे आपके पैर दमक उठेंगे। इसके साथ ही पैरों की टैनिंग दूर करने के लिए स्किन ब्लीच का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह टैंड स्किन आसानी से हटा कर पैरों को पहली की तरह आकर्षक बनाता है।

अंडा नहीं होने देगा कुपोषण का शिकार

यदि आप रोज अंडे का सेवन करते हैं तो कुपोषण का शिकार नहीं होंगे। दरअसल, खनिजों, विटामिनों व कैल्सियम से भरपूर अंडा स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। प्रतिदिन एक अंडे के सेवन से न केवल दिनभर स्फूर्तिवान रहा जा सकता है बल्कि कुपोषण से भी बचा जा सकता है।


बेजान बालों में आ जाएगी जान

अब बेजान बालों की समस्या नहीं रहेगी। इसके लिए आपको सिर्फ थोड़ीसी मेहनत करनी होगी है। कहा जाता है कि केले में मौजूद पोटैशियम,विटामिन ए, सी और ई बेजान बालों को नारिश करने का काम करते हंै। ऐसे में केले का हेयर पैक बनाकर लगाने से बालों को फायदा होता है। इसके लिए दो केले, एक अंडे की जर्दी और एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे तीस मिनट तक बालों में लगाएं। इससे बेजान बालों में जान आ जाएगी।


साइनस का समाधान हल्दी दूध

हल्दी और दूध दोनों का ही सेवन लोगों के लिए फायदेमंद होता है, मगर इनको साथ में मिलाकर पिया जाए तो इसके और भी अनेक फायदे हंै। हल्दी एक एंटी माइक्रोबियल है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ पीने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। इतना ही नहीं गर्म दूध के साथ हल्दी  पीने से शरीर में जमा फैट्स घटता है। इसमें मौजूद मिनिरल व कैल्सियम वेट घटाने में मददगार साबित होते हैं।

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Sinus solution turmeric milk
Consuming both turmeric and milk is beneficial for people, but if they are mixed together and drunk, it has many other benefits. Turmeric is an anti-microbial, so drinking it with warm milk provides relief in asthma, bronchitis, phlegm in the lungs and sinus problems. Not only this, drinking turmeric with hot milk reduces the fat stored in the body. The mineral and calcium present in it are helpful in reducing weight.


Dharmendra Singh Rajawat                 www.movetonature.blogspot.com

मोटापे से बचना है तो सो जाएं

आज के दौर में मोटापा ज्यादातर लोगों की समस्या बन गया है। ऐसे में अनेक लोग वजन को संतुलित करने के लिए डायटिंग शुरू कर देते हैं। लोग ऐसा करने के बजाय सोने पर ध्यान दें तो वह अपना वजन संतुलित कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सेहत के लिए रात में अच्छी नीद लेना काफी जरूरी होता है। फंक्शनल मैगनेटिक रेजोनैंस इमेजिंग के इस्तेमाल से पता चला है कि खराब नीद के कारण समस्याओं के समाधान करने वाले दिमाग के हिस्से पर असर पड़ता है। इससे लोग अस्वस्थ्य भोजन की ओर आकर्षित होते हैं। इससे लेप्टिन (यह पेट भरने और खाने की मात्रा को नियंत्रित करता है) के स्तर में कमी व ग्रेलिन (भूख, चर्बी और मोटापे को बढ़ावा देते हंै) का स्तर बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे भूख में 24 फीसदी, खाने की इच्छा में 23 फीसदी और मोटे होने की इच्छा में 33 फीसदी की बृद्धि हो जाती है। ऐसे में कार्बोहाइड्रेट भोजने करने से इंसान को लगता है कि उसने जरूरी भोजन कर लिया। इस तरह से इंसान को ज्यादा भोजन करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जिस कारण व्यक्ति मोटा हो जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब आप कम सोते हैं तो आपकी इच्छी जंक फूड खाने की होती है और जब पर्याप्त नीद लेते हैं तो सेव या केक खाने की इच्छा होती है। इसलिए लोगों को रात को पर्याप्त नीद लेनी चाहिए।


खूबसूरत दिखने के भी होते हैं कुछ नुकसान!

खूबसूरत दिखने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, लेकिन खूबसूरत दिखने के हमेशा फायदे ही हों, ऐसा नहीं हो सकता। सुनकर तो हरेक को कुछ पल के लिए अटपटा ही लगेगा, मगर यह सही है। कभी-कभी खूबसूरत दिखने का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। हाल में हुआ एक शोध इस ओर इशारा करता है।
टेक्सास क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के शोध में यह माना गया है कि काफी खूबसूरत दिखने वाले लोगों को याददाश्त से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा ज्यादा होता है। इस शोध के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से कुछ सवाल किए और उनके जवाबों को नोट किया। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने इन्हीं प्रतिभागियों से कुछ समय बाद दोबारा उन्हीं सवालों को पूछा तो उन्होंने पाया कि खूबसूरत दिखने वाले लोगों को सही जवाब याद करने में काफी मुश्किल हुई।
फ्लर्ट करने में भी आगे 
इस शोध की प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक सारा ई. ब्रैंडी के मुताबिक आमतौर पर खूबसूरत दिखने वाले लोगों में फ्लर्ट करने की और झूठ बोलने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है, जिस कारण उन्हें कोई भी वाकया ठीक से याद रखने में समस्या होती है। साथ ही उनकी याददाश्त भी जल्दी कमजोर हो जाती है। शोध से निकले यह निष्कर्ष महिलाओं और पुरुषों, दोनों पर बराबर लागू होते हैं।
क्यों होता है ऐसा 
आमतौर पर याददाश्त कमजोर होने का संबंध पैराथॉइरॉयड ग्रंथियां (आमतौर पर ये चार होती हैं) से संबंधित होता है। पैराथाइरॉयड ग्रंथियां गर्दन के आधार पर थाइरॉइड ग्रंथि के पास स्थित होती हैं। ये छोटी-छोटी ग्रंथियां ब्लड में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित रखने वाले हार्मोन को पैदा करती हैं। यदि किसी कारणवश इनमें से किसी एक ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है तो उस हार्मोन की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिस कारण हड्डियों में जमा कैल्शियम का ब्लड में स्तर बढ़ जाता है। इस कारण मांसपेशियों में कमजोरी, याददाश्त खोना, भ्रमित रहना, साइकोसिस अल्स बनना, गंभीर कब्ज जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। 

दांतों को है मुंह की एसिडिटी से खतरा

मुंह में भी एसिडिटी होती है। यह बात शायद बहुत कम लोगों को मालूम होगी, मगर यह सच है। केवल इतना ही नहीं मुंह की एसिडिटी के कारण दांतों को नुकसान हो सकता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट मुंह को स्वस्थ रखने वाली एक अग्रणी ओरल प्रोडक्ट निर्माता कंपनी ने पेश की। इस रिपोर्ट के अनुसार शर्करायुक्त खाद्य पदार्थों, गैसयुक्त पेय एवं अन्य अम्लीय खाद्य पदार्थों के कारण मुंह में होने वाली एसिडिटी दांतों के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकती है। इसकी वजह से दांत जड़ से कमजोर हो जाते हैं।
मुंह से होती है शुरुआत
इस रिपोर्ट के मुताबिक एसिडिटी केवल पेट में नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत मुंह से होती है तथा इसके कारण दांत कमजोर हो जाते हैं। हालांकि कभी-कभी स्वस्थ आहार की वजह से मुंह में एसिडिटी हो सकती है और इसके कारण मुंह में हानिकारक जीवाणु पनप सकते हैं।
एसिडिटी में फायदेमंद हैं ये फल
एसिडिटी की तीव्रता अधिक होने पर दांतों की ऊपरी परत नष्ट हो सकती है। शुगरयुक्त खाद्य पदार्थ, गैसयुक्त पेय और कुछ विशेष फल जहां एसिडिटी बढ़ाते हैं वहीं केला, आलू, दूध से बने खाद्य और जल का अधिक सेवन एसिडिटी को कम करने में मददगार होते हैं।
पीएच स्तर में कमी
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खाने के बाद बाद मुंह में अगले दो घंटों के लिए पीएच स्तर में कमी आ जाती है और लार बनने वाले एसिड का असर कम करने और पीएच का स्तर बढ़ाने की कोशिश करता है।
यदि आप शर्करायुक्त खाद्य पदार्थों एवं गैसयुक्त पेय का सेवन लगातार करते रहते हैं तो इस स्थिति में लार अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। यह पीएच ही शरीर में क्षारीय तत्वों के संतुलन को प्रदर्शित करता है।   

वेडिंग सीजन की करें खास तैयारी...

जब तक आपकी ड्रेस में एनर्जेटिक वाइब्रेंट कलर्स, न्यू पैटर्न और कट्स नहीं होंगे, तब तक आप वेडिंग सीजन को पूरा एंजॉय नहीं कर पाएंगी। आपकी ड्रेस वेडिंग के उत्साह को दोगुना कर सकती है, लेकिन वेडिंग के दौरान आपके पास काम भी बहुत रहते हैं। ऐसे में आपको कुछ ऐसे रेडी टू वियर परिधान चाहिए, जो देखने में ट्रेंडी लगें और आपको सभी के आकर्षण का केंद्र भी बना दें। अगर आपने सिंपल आउटफिट पहना है तो एक्सेसरीज स्टाइलिश व हैवी पहनिए, ताकि आपका लुक और भी स्टाइलिश हो जाए..
कैसा हो रंग 
अपनी खुशियों के रंगों को और अधिक गहरा करने के लिए ब्राइट कलर्स ही पसंद करें। आजकल ग्रीन, रेड, मैरून, पर्पल, यलो जैसे वाइब्रेंट कलर्स ही चलन में हैं। नियॉन कलर्स का प्रयोग भी खुलकर किया जा रहा है। मस्ती भरे रंगों के साथ सेलिब्रेट कीजिए इस वेडिंग सीजन को। इन दिनों रेड, गुलाबी जैसे कलर्स ट्रेंड में हैं। दरअसल रंगों के साथ लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, ऐसे में चटख, रोमांटिक कलर्स के रेडी टू वियर परिधान आपको सबसे अलग दिखाएंगे।
हिट है रेडी टू वियर साड़ी लहंगा
फैशन में इन दिनों प्रेट-ओ-पोर्टर यानी रेडी टू वियर कपड़ों की धूम है। नए कट्स की लहंगा साड़ी और रेडी टू वियर साड़ी इन दिनों खासी डिमांड में है। यह लहंगे और साड़ी दोनों का लुक देती है। इसको पहनने में ज्यादा समय और मेहनत भी नहीं लगती। इसकी खास बात यह है कि इसे साड़ी के बजाए स्कर्ट की तरह पहनना होता है, लेकिन लगती है यह लहंगे जैसी ही। इन साड़ियों को पहनने से समय की बचत तो होती ही है साथ ही ट्रेडिशनल लुक भी मिल जाता है। पहनने में आसान और देखने में अलग होता है यह रेडी टू वियर स्टाइल। रेडी टू वियर साड़ियों का कॉन्सेप्ट आने के बाद से साड़ी बांधने का पहले जैसा झंझट भी नहीं रहा है।
एक्सेसरीज भी हैं अहम
प्लाजो पैंट या जींस पर साड़ी पहनने का चयन एकदम नया है। इन दिनों साड़ी पर बेल्ट जैसी एक्सेसरीज कैरी करने का भी फैशन है। स्लिम लुक के लिए नैरो पल्ला दिया जाता है। साड़ी को ग्लैमरस लुक देने के लिए ब्लाउज में भी एक्सपरीमेंट किए जा रहे हैं। हॉल्टर नेक ब्लाउज, स्लीवलेस ब्लाउज, नूडल स्ट्रैप ब्लाउज के साथ साड़ी पहनकर आप कंटेपरेरी लुक पा सकती हैं। एथनिक लुक के लिए ब्रोकेड की चोली बेस्ट ऑप्शन है। इस वेडिंग सीजन में लहंगे भी खास पसंद बने हुए हैं।
पारंपरिक हैंडलूम्स
कई फैशन डिजाइनर्स आज के यूथ की पसंद के मुताबिक जिस तरह खादी, चंदेरी, पटोला, भागलपुरी सिल्क और मलमल सहित कई सारे पारंपरिक फैब्रिक्स को कंटेपरेरी स्टाइल दे रहे हैं। इनसे बने घाघरा, अनारकली, प्लाजो बेहद कंफर्टेबल रहते हैं और दिखने में खूबसूरत भी होते हैं।  

विटामिन 'डी" की कमी से डायबिटीज का खतरा

अभी तक अधिकांश लोग यह जानते हैं कि डायबिटीज की बड़ी वजह मोटापा है लेकिन क्या आपको यह पता है कि मोटापे के साथ-साथ विटामिन 'डी" की कमी भी इस रोग की बड़ी वजह है।
'डायबिटीज केयर जर्नल" में प्रकाशित शोध की मानें तो अगर मोटापे और विटामिन 'डी" की समस्या किसी व्यक्ति को एकसाथ हो तो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को असंतुलित करने वाली इस बीमारी की आशंका और भी बढ़ सकती है।
6000 लोगों पर अध्ययन 
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने लगभग 6000 लोगों से जुड़ी जानकारी का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जो व्यक्ति मोटापे से परेशान हैं लेकिन उनके शरीर में विटामिन 'डी" की पर्याप्त मात्रा है, उनमें साधारण व्यक्तियों की तुलना में इंसुलिन असंतुलन की संभावना बीस गुना अधिक थी। लेकिन जिन व्यक्तियों में मोटापा होने के साथ विटामिन 'डी" का अभाव, दोनों लक्षण दिखाई दे रहे थे, उनमें यह आशंका 32 गुना अधिक थी।
क्या कहते हैं निष्कर्ष 
शोध के निष्कर्षों के अनुसार स्वतंत्र रूप से यह दोनों वजहें जिस अनुपात में इंसुलिन के असंतुलन कि वजह बन सकती हैं, उससे बहुत अधिक मात्रा में इस समस्या की आशंका इन दोनों घटकों के एक साथ होने से बढ़ सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन के आधार पर मधुमेह से निपटने में विटामिन 'डी" का इंजेक्शन प्रभावी विकल्प हो सकता है। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे देश में सूर्य का प्रकाश और दूध अच्छी मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन फिर भी हमारे यहां 30 से 70 प्रतिशत लोगों में विटामिन 'डी" की कमी है। यही कारण है कि विटामिन 'डी" की कमी, मधुमेह की बीमारी होने की वजह ना बनकर इस बीमारी को बढ़ाने की वजह बन सकती है। 

देर से सोना बच्चों के लिए अच्छा नहीं...

देर रात तक जागकर पढ़ाई करने वाले बच्चों का दिमाग कमजोर हो जाता है और वे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि रात में देर से सोने से बच्चों का दिमाग कमजोर होता है।
रात में देर से सोने वाले टीनएजर्स पढ़ने-लिखने में पीछे होते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भावनात्मक परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इनके मुकाबले जो बच्चे जल्दी सो जाते हैं, उनका शैक्षिक प्रदर्शन बेहतर होता है।
ग्रेड प्वाइंट्स में अंतर
हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस पर अध्ययन किया। इस रिसर्च टीम के प्रमुख लॉरेन के मुताबिक जो बच्चे रात में 11.30 के बाद बिस्तर पर जाते हैं, स्कूल में उनका ग्रेड प्वाइंट बेहद खराब होता है। इन्हें इमोशनल दिक्कतों से भी दो-चार होना पड़ता है। हाई स्कूल, ग्रेजुएशन और कॉलेज जाने के दिनों में भी इन्हें काफी मुश्किलें हो सकती हैं।
2,700 पर अध्ययन
इस अध्ययन के लिए 13 से 18 साल के बीच के तकरीबन 2,700 टीनएजर्स के सोने के घंटों पर शोध हुआ। यह शोध अमेरिका के नेशनल लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ एडोलसेंट हेल्थ की ओर से 1995 और 1996 में की गई थीं। इसके बाद 2001-02 में जब स्टडी में शामिल बच्चे और बड़े हो गए तो इनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की गईं। इस शोध का मकसद यह पता करना था कि क्या बच्चों के सोने के वक्त का उनकी शैक्षिक प्रदर्शन पर कोई असर पड़ता है या नहीं। शोध के दौरान यह पता चला कि इनमें से 23 प्रतिशत बच्चे 11.15 बजे या फिर इसके बाद सोने जाते हैं। स्टडी के बीच वक्त का जो अंतराल था, उसमें सारे टीनएजर्स कॉलेज तक पहुंच चुके थे। उनके शैक्षिक रिकॉर्ड से पता चला कि ग्रेजुएशन में उनका ग्रेड काफी चिंताजनक था।  

'कंगारू केयर" बनाती है बच्चों को स्वस्थ

मां का प्यार और स्नेह बच्चों को बड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिशु, दुनिया में आने के बाद सबसे पहले मां का स्पर्श और अहसास ही महसूस करता है। मां की गंध के प्रति शिशु सबसे पहले आकर्षित होते हैं, जो बच्चे का मां के प्रति लगाव दर्शाता है। यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्ग हमेशा से नई माताओं को बच्चों को खुद से चिपकाकर सुलाने और पास रखने की सलाह देते हैं। ताकि बच्चा अकेले में भयभीत न हो और पूरी तरह से स्वस्थ रहे।
कुल मिलाकर शिशु के आसपास मां का आवरण उसे बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में ब्रिटेन में किए एक शोध में कहा गया कि जन्म के बाद बच्चों को कंगारू की तरह शरीर से चिपकाकर रखने से समय पूर्व जन्म लेने वाली संतानों की मृत्यु दर और विकलांगता दर में वैश्विक स्तर पर कमी लाई जा सकती है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन(एएसएचटीएम) से जुड़ी प्रोफेसर जॉय लॉन कहती हैं कि 'कंगारू केयर" जैसा मामूली उपाय इस बचाव का मूलमंत्र है। कंगारू अपने बच्चे को अपने पेट में बनी थैली में रखता है, जिससे बच्चा कभी उससे दूर नहीं होता और पूरी तरह से स्वस्थ रहता है।
डेढ़ करोड़ का जन्म समयपूर्व
पूरी दुनिया में करीब डेढ़ करोड़ बच्चों का जन्म समय से पहले ही हो जाता है और बच्चों को होने वाली 10 प्रतिशत बीमारियों के लिए समयपूर्व प्रसव ही जिम्मेदार है। समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में करीब दस लाख बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाती है। और जो बच्चे जीवित रहते हैं उनमें से तीन प्रतिशत बच्चे औसत या गंभीर विकलांगता के शिकार होते हैं और करीब 4.4 प्रतिशत बच्चे मामूली विकलांगता से पीड़ित होते हैं।
गहन चिकित्सा
समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में लर्निंग डिस्एबिलिटी और सेरिब्रल पॉल्सी का होना  सामान्य है।
प्रोफेसर लॉन कहती हैं कि लोगों की सोच है कि समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों को सघन चिकित्सा की जरूरत होती है, मगर  निर्धारित समय से छह सप्ताह या उससे भी अधिक समय पहले जन्म लेने वाले 85 प्रतिशत बच्चों को कंगारू केयर के जरिए बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर बच्चे को सांस की कोई समस्या न हो तो 'कंगारू केयर" सचमुच लाभदायक होती है। इससे स्तनपान को भी बढ़ावा मिलता है और बच्चे में संक्रमण भी कम होता है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 'वर्ल्ड प्रीमैच्योर डे" के अवसर पर कहा कि समय पूर्व जन्म लेने वाले एक तिहाई बच्चों की स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण मौत हो जाती है। इन बच्चों को मामूली खर्चे से बचाया जा सकता है। इसके लिए कोई सघन चिकित्सा की भी जरूरत नहीं होती।
लड़कों को खतरा ज्यादा
कई शोध बताते हैं कि लड़कियां गर्भ में भी लड़कों से पहले परिपक्व हो जाती हैं। इसी सप्ताह पीडिएट्रिक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित होने वाले शोध के अनुसार लड़कियों की तुलना में लड़कों के समयपूर्व जन्म लेने की आशंका 14 प्रतिशत ज्यादा होती है। जिसकी वजह से जो लड़के समयपूर्व जन्म लेते हैं, उनमें लड़कियों की तुलना में विकलांगता या मृत्यु दर भी अधिक होती है।  

मीठे पेय का असर पड़ता है दिमाग पर

बहुत अधिक मीठे के शौकीनों के लिए यह थोड़ी बुरी खबर हो सकती है। हाल ही में एक शोध में माना गया है कि बहुत अधिक मीठे ड्रिंक्स पीने वालों के दिमाग के लिए बड़ा खतरा है।
ऑस्ट्रेलियाई शोध में माना गया है कि मीठे पेय का अधिक सेवन दिमाग का आकार बदल सकता है। दिमाग का यह आकार कैंसर और अल्जाइमर्स जैसे रोगों में बदलता है।
शोधकर्ता जेन फ्रैंकलिन के अनुसार शोध में हमने पाया कि पानी के विकल्प में तमाम तरह की मीठे ड्रिंक्स पीने वाले लोगों के दिमाग के आकार में बदलाव हुआ है। प्यास लगने पर पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक या मीठे ड्रिंक पीने वाले लोगों के लिए यह अलॉर्म है।
शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए अपने शोध में माना है कि मीठे ड्रिंक्स अधिक पीने से दिमाग हाइपरएक्टिव यानी अतिसक्रिय हो जाता है और उसकी कोशिकाओं में बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। ठीक ऐसे ही बदलाव दिमाग में अल्जाइमर्स या कैंसर जैसे रोगों की वजह से भी होते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि प्यास लगने पर पानी का विकल्प नहीं हो सकता है और जो लोग पानी की जगह दूसरे पेय को अधिक तरजीह देते हैं उन्हें दिमाग से जुड़े रोगों की आशंका अधिक होती है। 

कहीं आपकी खूबसूरती न बिगाड़ दे तनाव

 आज की आपाधापी भरी जिंदगी में अधिकांश लोग यदि किसी समस्या से ग्रस्त हैं तो वह है मानसिक तनाव। जिससे दूर रहने में ही समझदारी है, क्योंकि इसका आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। अगर आप भी छोटी-छोटी बातों पर टेंशन लेते हैं या अवसादग्रस्त हैं तो जरा सतर्क हो जाइए, क्योंकि इस टेंशन की वजह से आप भी जल्दी ही बुढ़ापे का शिकार हो सकते हैं।
 जी हां, हाल ही में हुए शोध में सामने आया है कि लंबे समय तक अवसाद और तनाव की स्थिति में रहने वाले लोग जैविक तौर पर जल्दी बुढ़ापे के शिकार हो जाते हैं। तनाव का असर किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर आसानी से देखा जा सकता है।
कई हैं खतरे
इससे पूर्व के शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि अवसाद पीड़ित व्यक्तियों में कैंसर, डायबिटीज, मोटापे और दिल की बीमारियों के खतरे बढ़ जाते हैं। मगर अब शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में पाया है कि इसके प्रभाव से कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं। यानी कि कुल मिलाकर अवसाद सिर्फ शरीर को रोगों से घेरने का काम करता है और यह आप पर नेगेटिव इफेक्ट भी डालता है।
खून के नमूनों में मिले संकेत
अमेरिका और हॉलैंड के शोधकर्ताओं ने 2,407 लोगों पर अध्ययन किया। इनमें से एक तिहाई लोग हाल में अवसाद से जूझ रहे थे। बाकी ने कभी भी इसका अनुभव नहीं किया। इन सभी लोगों के खून के नमूने लिए गए। इनमें कोशिकाओं को बूढ़ा करने वाले संकेतों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ता टेलोमीयर नामक भीतरी कोशिकाओं की संरचना में बदलाव को देखना चाहते थे। जो वास्तविक रूप  से तनाव लेने वाले लोगों में मिला। इसका मतलब यह है कि तनाव शरीर की हेल्दी सेल्स को भी डेमेज करने में कोई कसर नहीं छोड़ सकता है। इसलिए यदि आप भी समय से पहले बूढ़े नहीं दिखना चाहते हैं तो सबसे पहले तनाव को अपने आसपास से दूर भगाने की कोशिश कीजिए।  

खुश रहना हो तो इन गलतियों से बचिए

जीवन में खुशी की तलाश भला किसे नहीं होती है? लेकिन खुशहाल जीवन के लिए जरूरी है कि आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी आपका साथ दे और हर दिन आपके लिए ताजगी से भरपूर हो।
चाहे परिवार हो, आपकी सेहत हो या फिर आपका करिअर, खुशहाल जीवन की चाह रखते हैं तो इन पांच गलतियों  से हमेशा बचें।
रिश्तों के प्रति लापरवाही
आप तनाव मुक्त रहें और हमेशा सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने हर रिश्ते में सुरक्षित महसूस करें। कई शोधों में प्रमाणित हो चुका है कि जो लोग सामाजिक जीवन में समय देते हैं उनमें कैंसर से मृत्यु का खतरा कम होता है। एक अन्य शोध में 6000 लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि शादीशुदा लोगों का जीवनकाल अविवाहित लोगों की अपेक्षा अधिक होता है।
कुर्सी का लालच
यहां किसी नेता की कुर्सी की बात नहीं है बल्कि दिनभर बैठकर काम करने के बाद भी घर पर घंटों बैठने और देर तक टीवी देखने या काम करने की आपकी आदत, आपकी सेहत और खुशहाल जीवन पर ब्रेक लगा सकती है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स" में प्रकाशित शोध की मानें तो घंटों तक बैठकर टीवी देखने वाले लोगों को कार्डियोवास्कुलर रोग और अवसाद का खतरा अधिक होता है। इस शोध के दौरान 2,40,000 प्रतिभागियों पर अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है।
बहुत अधिक तनाव
छोटी-छोटी बातों पर अधिक तनाव लेने की आपकी आदत सबकुछ अच्छा होते हुए भी आपके लिए नकारात्मक माहौल बना देती है। ऐसे में अधिक तनाव न लें। हो सके तो योग को अपने रूटीन में जरा-सी जगह दें, जिससे आप तनावमुक्त रह सकें।
इसके अलावा आप अपनी रूचि के अनुसार कई ऐसे शगल पूरे कर सकते हैं जो तनाव भरे माहौल में आपके लिए ऑक्सीजन की तरह हो सकते हैं।
अपनी क्षमताओं पर करें भरोसा
दूसरों से तुलना कर अगर आप अपनी रचनात्मकता क्षमताओं को छोटा मानते हैं तो सबकुछ होते हुए भी मन में निराशा बरकरार रहती है। हॉर्वर्ड पब्लिक स्कूल के शोध में पाया गया है कि अवसाद और तनाव को दूर करने के लिए रचनात्मक कार्य काफी मददगार हो सकते हैं।
दिन भर घर में रहते हैं
कामकाजी हैं तो आपका सामाजिक दायरा बड़ा है और रुटीन में एक बदलाव हमेशा बना रहता है लेकिन घर में अधिक समय बिताने वाले मसलन बुजुर्ग व घरेलू महिलाओं में अवसाद की समस्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। जरूरी है कि आप थोड़ा बाहर निकलें जिससे न सिर्फ आप तरोताजा महसूस करेंगे बल्कि शरीर को विटामिन 'डी" भी मिलेगा, जो आपका मूड अच्छा रखने में मददगार है। 

दिल के दौरे से पहले अलर्ट कर देगी कार!

वैज्ञानिक दिनों दिन नई-नई तकनीकी ईजाद करने में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक नए शोध के तहत वैज्ञानिक एक ऐसी कार तैयार कर रहे हैं, जो ड्राइविंग के दौरान हार्ट अटैक के खतरे को भांपकर पहले ही सूचित कर देगी। जी हां, दिल के मरीजों के लिए यह बेहद राहतभरी खबर हो सकती है।
इस पर जापानी रिसर्चर्स प्रयोग कर रहे हैं। जापान के रिसर्चर्स एक ऐसी कार बना रहे हैं, जो ड्राइवर को हार्टअटैक के बारे में पहले ही सूचित कर देगी। यदि ड्राइवर को ऐसी कोई बीमारी शुरू हो गई है, जिससे दिल के दौरे का अंदेशा है तो यह कारण उसे पहले ही अलर्ट कर देगी। कार्डियोवॉस्कुलर के मरीजों को इससे बहुत फायदा मिलेगा साथ ही इस कार के जरिए हार्ट अटैक के कारण सड़क पर होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जा सकेगा। इस कार में दो इलेक्ट्रिक पोल होंगे जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफिक की मॉनिटरिंग करेंगे और स्टियरिंग की व्हील पर सेंसर लगे होंगे जो पल्स वेव पर नजर रखेंगे। पल्स वेव यानी खून की नलियों में दिल से हो रहे खून के बहाव पर नजर रहेगी।
निपो मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर तकाओ कातो कहते हैं कि हम इस सिस्टम को जल्द से जल्द तैयार कर देना चाहते हैं ताकि हार्ट अटैक के कारण सड़क पर होने वाले हादसे कम किए जा सकें।  

स्वस्थ रहने के लिए थोड़ा गुनगुनाइए...

कहते हैं संगीत हर मर्ज की दवा है, इसलिए आप भी यदि अकेले रहते हुए परेशानी का अनुभव करते हैं या फिर और कोई मानसिक समस्या की वजह से परेशान हैं तो कभी थोड़ा गुनगुना कर देखिए। यह न सिर्फ आपको स्वस्थ रखेगा बल्कि बढ़ती उम्र में अल्जाइमर्स जैसे रोग के खतरे से भी बचाकर रखेगा। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसके अनुसार जो संगीत आपको पसंद है, उसके अनुसार जब जी करे कुछ पल के लिए थोड़ा गुनगुना लीजिए, इससे ब्रेन फंक्शन बेहतर रहता है और अल्जाइमर्स का खतरा भी नहीं रहता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार सिंगिंग (गाना गाना) हेल्दी रहने के किसी बड़े चांस से कम नहीं, जिसे आप बिना किसी मेहनत के कर सकते हैं और बदले में आपको मिलता है स्वस्थ रहने के चांस।
शोध की प्रमुख लेखक लिंडा मागुरे ने लिखा है कि जो पेशेन्ट्स अल्जाइमर्स से जूझ रहे थे, उनके इलाज में भी हमें गीत सुनाने और उन पेशेन्ट्स द्वारा गुनगुनाने के लिए कहने पर फायदा देखा गया।
यह शोध सेन डिएगो में आयोजित सोसायटी फॉर न्यूरोसाइंस की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया। इस अध्ययन को करने का मुख्य उद्देश्य अल्जाइमर्स के पेशेन्ट्स को ठीक करना और बढ़ती उम्र में लोगों को इस बीमारी से बचाना था। चार माह तक चले इस शोध में हर रोज तकरीब 50 मिनट संगीत की यह प्रक्रिया अपनाई गई जिसका पेशेन्ट्स पर पॉजिटिव असर देखा गया।  

कॉफी की चुस्कियां दें सेहत का लाभ

चुस्ती-फुर्ती के लिए लोग अक्सर कॉफी का सहारा लेते हैं। इसे लेकर कई तरह के शोध भी हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश के परिणाम सकारात्मक ही आए हैं। बशर्ते इसका सेवन एक लिमिट में किया जाए। हाल ही में किए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कॉफी का सेवन ताजगी तो प्रदान करता है साथ ही यह व्यक्ति के मेंटल और फिजिकल परफॉर्मेंस को सुधारने में भी मदद करता है। इसका सीधा संबंध कॉफी में पाए जाने वाले कैफीन से है। यह कैफीन शरीर में एड्रेनलिन (अधिवक्क रस) का उत्पादन बढ़ाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह एड्रेनलिन ही ऊर्जा उत्पादन को संतुलित रखता है। यह मांसपेशियों और हृदय में ब्लड सर्क्युलेशन में सुधार करता है। जिससे मेंटल और फिजिकल फिटनेस बनी रहती है।
थकान करे शांत
ट्रिनिटी कॉलेज में जीवरसायन के व्याख्याता जॉन स्टेनली के अनुसार कैफीन थकान शांत कर सकता है। वहीं शरीर के किसी हिस्से में हो रहे दर्द को कम करते हुए ऊर्जा स्तर में भी सुधार कर सकता है।
वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके" ने स्टेनली के हवाले से कहा कि कॉफी में मौजूद कैफीन शारीरिक और मानसिक परफॉर्मेंस को उस समय सुधार सकता है, जब यह भारी काम के दौरान कमजोर पड़ गया हो। कहा गया है कि व्यायाम से करीब 20-30 मिनट पहले कॉफी पीने से आप 30 प्रतिशत अधिक समय तक व्यायाम कर सकते हैं।
बेहतर प्रदर्शन के लिए लाभकारी
कैफीन का सबसे जबर्दस्त प्रभाव तैराकी, साइक्लिंग और टेनिस जैसे खेलों में दिखता है। यह बात साबित हो चुकी है कि कैफीन अच्छे मानसिक प्रदर्शन के लिए लाभकारी है। यहां तक कि यूरोपीयन फूड सेफ्टी अथॉरिटी (ईएफएसए) तो इस नतीजे पर पहुंच चुकी है कि कैफीन सतर्कता और ध्यान पर प्रभाव डालता है और इस बात के पर्याप्त सबूत हैं। 

एरोबिक्स बढ़ाए याददाश्त...

यदि दैनिक जीवनचर्या में एक्सरसाइज की आदत डाल ली जाए तो इससे न सिर्फ शरीर फिट रहता है बल्कि पूरी तरह सेहतमंद भी रहता है। इसी में एक प्रकार है एरोबिक्स। यह न केवल बढ़ती उम्र में आपकी याददाश्त को इम्प्रूव करने में मदद करती है बल्कि ब्रेन फंक्शनिंग को भी बेहतर रखती है। यह अध्ययन डल्लास की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास स्थित सेंटर फॉर ब्रेन हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि जो लोग रेग्युलर एरोबिक्स करते हैं, उन्हें बढ़ती उम्र में आने वाली कई शारीरिक समस्याओं से निजात पाने में सफलता मिलती है।
विज्ञान बताता है कि एजिंग के साथ मेंटल एफिशिएंसी और मेमरी में कमी आती जाती है, जिसे रोकने के लिए एक्सरसाइज जरूरी मानी जाती है। सेंटर फॉर ब्रेन हेल्थ की प्रमुख निदेशक और संस्थापक सांद्रा बॉन्ड चेपमेन ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारा शोध इस बात का दावा करता है कि एरोबिक्स से किसी भी व्यक्ति की याददाश्त और ब्रेन फंक्शनिंग में काफी असर दिखाई देता है।
इस अध्ययन के लिए 57-75 आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया। इनमें से अधिकांश वे लोग थे जो रेग्युलर फिजिकल ट्रेनिंग में शामिल रहते थे या फिर वेट-लिस्ट कंट्रोल ग्रुप में जिनका नाम मौजूद था। इसमें पाया गया कि फिजिकल ट्रेनिंग ग्रुप के अधिकांश लोग नियमित एरोबिक्स करते थे। इसके बाद जब इन लोगों का मेमोरी टेस्ट लिया गया तो पाया कि वे लोग जो नियमित एरोबिक्स से जुड़े थे उनकी याददाश्त एरोबिक्स या किसी अन्य तरह की एक्सरसाइज न करने वालों की तुलना में तेज थी। वहीं यह भी पाया गया कि ऐसे लोगों का ब्रेन फंक्शन भी बेहतर देखा गया, जिसे एमआरआई के जरिए जांचा गया।  

गर्भस्थ शिशु का दिमाग यूं होता है तेज

बच्चों का दिमाग तेज रहे इस चाह में अगर आप वाकई किसी असरदार उपाय की तलाश में हैं तो हाल में हुए शोध के नतीजे आपके लिए मददगार हो सकते हैं। शोध के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कसरत गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास में मदद करती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मांट्रियल की शोधकर्ता एलिस लैबंटे के अनुसार दस दिनों तक गर्भवती महिलाओं पर किए गए शोध में हमने पाया कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कसरत करती हैं, उनके बच्चों के दिमाग का विकास जल्दी होता है।
कैसे किया अध्ययन
शोध के दौरान दस गर्भवती महिलाओं को समूह में कसरत करवाई गई जबकि आठ महिलाओं के समूह को कसरत नहीं करवाई। कसरत करने वाली महिलाओं के समूह को दिन में 20 मिनट की कार्डियो एक्सरसाइज करवाई गई।
एक सप्ताह बाद निरीक्षण
एक सप्ताह तक कसरत के बाद ईईजी से उनके गर्भस्थ शिशु का निरीक्षण किया गया और फिर पैदा होने के बाद उनके नवजात शिशु का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कसरत करने वाली महिलाओं के शिशु का मानसिक विकास बेहतर हुआ। यह शोध 'पीयर रिव्यूड मेडिकल जर्नल" में प्रकाशित हुआ है।  

हाथों की देखभाल के लिए करें कुछ खास...

आपके हाथ बच्चों को सहारा देने से लेकर अपने प्रिय का साथ देने का काम करते हैं। आपके दिल की कितनी ही अनकही बातों को कह देते हैं आपके हाथ। इनका रूप निखारे बिना आपकी खूबसूरती की कवायद अधूरी है। सर्दियां आपकी त्वचा से छीन लेती है जरूरी नमी। इसलिए इस मौसम में त्वचा को बेहतर बनाए रखने के लिए आपको करने पड़ते हैं कितने ही प्रयास।
सर्दियों का यह मौसम चुरा सकता है आपके हाथों से नमी और उन्हें बना सकता है रुखा और बेजान। सर्दियों के मौसम में हाथों पर लोशन का नियमित इस्तेमाल करें। खासकर पानी के संपर्क में आने के बाद। इससे न सिर्फ हाथों की त्वचा को नमी मिलेगी बल्कि त्वचा चमकदार व कांतिमय भी बनेगी। नहाने के बाद ऐसा हैंड लोशन लगाएं, जिसे त्वचा सोख ले। रात में हैवी औ
र क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं, ताकि क्रीम हाथों में अच्छी तरह से समा जाए।
जानिए सर्दियों में हाथों का रुखापन दूर करने के आसान उपायों के बारे में-
 दस्ताने पहनें 
सर्दियों में दस्ताने न सिर्फ आपके हाथों को गर्म रखते हैं, बल्कि ये हाथों की त्वचा को रुखा होने से भी बचाते हैं। जब भी घर से बाहर निकलें दस्ताने पहनना न भूलें। शुष्क हवाएं हाथों की त्वचा को नुकसान पहुंचाती है, जिससे त्वचा फटने लगती है। याद रखें बाहर जाने से पहले हाथों पर किसी अच्छी क्रीम से मसाज करने के बाद दस्ताने पहनने चाहिए। पूरी ठंड में अगर आप इस प्रक्रिया को अपनाएंगे तो आपके हाथ कभी भी रुखे व बेजान नहीं लगेंगे।
 मॉइश्चराइजर युक्त साबुन
हाथ धोने के लिए प्रयोग किए जाने वाले एंटीबैक्टिरियल साबुन बहुत कठोर होते हैं और हाथों को रुखा बना देते हैं। इसलिए हमेशा ऐसे साबुन का प्रयोग करें, जो कीटाणुओं को मारने के साथ सौम्य भी हो। बाजार में ऐसे कई साबुन उपलब्ध हैं जो हाथों को साफ रखने के साथ उन्हें नमी भी देते हैं। आप चाहें तो ऑलिव ऑयल और एलोवेरा युक्त साबुन का प्रयोग भी कर सकते हैं।
 नाखूनों का भी रखें ध्यान 
सर्दियों में हाथों के साथ-साथ नाखून पर भी ध्यान देना जरूरी है क्योंकि वे भी ड्राई हो जाते हैं। हैंड क्रीम का प्रयोग करते समय नाखूनों पर भी उन्हें लगाना चाहिए। यह नाखूनों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे नाखून भी चमकदार बनते हैं। हाथ धोने के बाद बटर युक्त मॉइश्चराइजर लगाएं। चाहें तो नाखूनों के बेस पर थोड़ा-सा लिप बाम भी लगा सकते हैं।
अच्छी क्वालिटी की हैंड क्रीम
हैंड क्रीम खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि क्रीम देर तक हाथों को नमी प्रदान करें। रात को सोने से पहले और दिन में भी हाथों पर इससे मसाज करना ना भूलें। अच्छी क्वालिटी की हैंड क्रीम प्रयोग करने से कुछ ही दिनों में हाथों की त्वचा में फर्क दिखने लगता है।
हाथों पर स्क्रब करें
धूप और धूल के प्रभाव से हाथों में पिगमेंटेशन और टैनिंग भी हो जाती है। इन्हें दूर करने के लिए स्क्रब करके पैक लगाएं। आप चाहे तों हाथों की ब्लीचिंग भी की जा सकती है। स्क्रबिंग के लिए होममेड स्क्रब जैसे चीनी और बेसन का प्रयोग कर सकते हैं। चीनी से स्क्रब करने के लिए हथेलियों को गीला करके थोड़ी-सी चीनी लें और तब तक हाथों की मसाज करें, जब तक चीनी घुल ना जाए। फिर साफ पानी से हाथ धो लें।  

बुधवार, 27 नवंबर 2013

न दिल की बीमारी होगी न शुगर की

सेहत के सवाल पर किसी को समझौता नहीं करना चाहिए। दरअसल, सेहतमंद शरीर न केवल हमें रोगों से दूर रखता है बल्कि लंबी आयु भी देता है। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें बड़ी मात्रा में ओमेगा3, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी ऑयल होते हैं, जो बालों और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि प्रतिदिन नट्स का सेवन किया जाए को दिल की बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके सेवन से शुगर की बीमारी भी कम हो होती है।


...तो त्वचा रहेगी हमेशा जवां

इसके लिए आपको थोड़ीसी मेहनत करनी पड़ेगी। कार्नस्टार्व को सिरके के साथ मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं और फिर इसे पंद्रह मिनट तक चेहरे पर लगाएं। इसके बाद चेहरे को गुनगुने पानी से साफ कर दें। फिर बारीक चीनी को शहद में मिलाकर उससे चेहरे की मसाज करें। इसके बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। थोड़ीसी ब्राउन शुगर लेकर उसे ऑलिव ऑयल के साथ मिक्स करें। इससे चेहरे को दस मिनट के लिए स्क्रब करें फिर हल्के गरम पानी से चेहरे को साफ कर लें। इस प्रक्रिया को करने से आपका चेहरा न केवल दमक उठेगा बल्कि जवां भी दिखने लगेगा।

फटी एडियां अब गुजरे जमाने की बात

थोड़ीसी देखभाल करके आप फटी हुई एडियों से निजात पा सकती हंै। गुनगुने पानी में पैरों को थोडी देर तक डाल करके रखें। इसके बाद उनको साफ तौलिए से पोछ लें। इसके बाद नीबू के टुकड़े में थोड़ीसी चीनी डालकर उसको पैरों में रगड़ें। आप प्यूमिक स्टोन का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। रात को पैरों में तेल लगाएं और फिर मोजे पहनकर सोएं। इससे पैर साफ और नरम रहेंगे। इसके साथ ही आप पैरों को धूलमिट्टी से साफ रखने के लिए भी मोजे जरूर पहनें।

नहाते वक्त खयाल रहे

स्किन की खूबसूरती के लिए नहाते वक्त कुछ बातों का खयाल रखना चाहिए। मसलन, रोजना नाहने से पहले पूरी बॉडी को 57 मिनट तक हाथों से रगड़ें या धूप में तेल से मालिस करें। फिर ताजे पानी से नहाएं। नहाते समय तौलिए से या हाथोंसे बॉडी को खूब अच्छे से रगड़ें। सर्दियों में गर्म पानी से स्नान करना हो तो पहले गर्म पानी से और फिर ठंडे पानी से नहाना चाहिए।

खूबियों को खजाना लाल अंगूर

लाल अंगूर खूबियों का खजाना है। इसमें रेसवेराट्रोल नामक ऐसा रसायन होता होता है, जो शरीर में मौजूद एसआईआरटी1 प्रोटीन की सक्रीयता को बढ़ाता है। इससे शारीरिक कोशिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ जाती है,जिससे व्यक्ति सेहतमंद रहने के साथ ही अधिक आयु तक जीता है। इसके एक और फायदा है कि इसके सेवन से गंभीर बीमारियां शरीर पर हमला नहीं कर पाती हैं। 


छूमंतर हो जाएगी टैनिंग प्रॉब्लम

अगर आप हाथों में टैन की समस्या से परेशान हंै, तो एक कटोरी ठंडे दही में हल्दी मिलाकर नहाने से बीस मिनट पहले लगाएं। टैनिंग की समस्या ने निजात मिल जाएगी। यदि जरूरत महसूस करें तो आप इसे गले और चेहरे पर भी लगा सकते हैं। इसके साथ ही टमाटर को काटकर उसके अंदर के भाग को हाथों पर रगड़ने से भी टैनिंग की समस्या खत्म हो जाती है।

बड़े काम का लहसुन

लहसुन में अनेक ऐसे एंजाइम्स होते है्ं, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हंै। यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 9 से 15 प्रतिशत तक घटा सकता है। यह हाई ब्लडप्रेशर को भी नियंत्रित करता है। याद रहे बाजार में मिलने वाले गार्लिक सप्लीमेंट्स के बजाय सुबह खाली पेट लहसुन का सेवन ज्यादा फायदेमंद है।

लो बीपी यानी लंबी आयु

अगर आप अपनी उम्र से ज्यादा जवां दिखती हंै, तो यह आपके लिए खुशखबरी है। दरअसल, यह अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने कहा है कि जो महिलाएं अपनी उम्र से जवां दिखती हैं, उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीने की अधिक संभावा रहती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार अगर महिला का चेहरा उम्र से कम दिखता है, तो उसे लो बीपी की प्रवृति्त होती और वे दीर्घायु रहती हैं। लो बीपी की प्रवृति्त होने पर हार्ट अटैक व हृदय संबंधी बीमारियां कम होने की संभावना रहती है। शोधकर्ताओं के अनुसार कम झुर्रियों वाली महिलाओं की तरह ही पुरुष भी अन्य की अपेक्षा ज्यादा जीते हैं। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके शोध में पहली बार त्वचा की सेहत और शरीर की सेहत में संबंध स्थापित किया गया है। अगर त्वचा देर से बूढ़ी हो रही है, तो संबंधित व्यक्ति के ज्यादा समय तक जीने की संभावना है। सहशोधकर्ता डॉ. डियाना के अनुसार बीपी की नियमित जांच करके चेहरे को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही इससे सेहत में भी लाभ होता है।

सनस्क्रीन बचाए त्वचा कैंसर से

सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के लिए धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। यह न सिर्फ हमारी त्वचा को सूर्य की किरणों से बचाता है बल्कि हमारी त्वचा की पूरी तरह से सुरक्षा करने में भी मदद करता है। हाल ही में हुए एक नए शोध में एक और खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया है कि सनस्क्रीन तीन तरह के त्वचा कैंसर से 100 फीसद सुरक्षा तो करता ही है, इसके साथ ही यह उस 'सुपरहीरो जीन" की भी रक्षा करता है, जो कैंसर को रोकने में मददगार है। ऐसा माना जाता है कि सनस्क्रीन आपको सनबर्न से तो बचाता ही है, लेकिन त्वचा कैंसरों से बचाव में भी यह महती भूमिका निभाता है। सनस्क्रीन के प्रभाव के बारे में अकादमिक बहसें चलती रही हैं और अक्सर आने वा
ले सारे परिणाम सकारात्मक दिखाई देते हैं। क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (क्यूयूटी) के बयान के अनुसार यूनिवर्सिटी ने सनस्क्रीन के प्रभाव का अध्ययन आण्विक स्तर पर करने के लिए दुनिया का पहला मानव आधारित अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सनस्क्रीन तीनों प्रकार के त्वचा कैंसर बीसीसी (बेसल सेल कार्सिनोमा), एससीसी (स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा) और मेलीग्नेंट मेलानोमा से 100 फीसद सुरक्षा प्रदान करती है।
जीन का सुरक्षा कवच  
प्रमुख शोधकर्ता एल्के हैकर ने कहा कि सनस्क्रीन स्कीन कैंसर रोकने में तो शरीर की सुरक्षा करता है, साथ ही यह महत्वपूर्ण जीन पी53 का भी बचाव करता है। यह वही जीन है जो कैंसर को रोकने में मदद करता है। हैकर ने कहा कि जैसे ही हमारी स्कीन को सूर्य की किरणों से नुकसान पहुंचता है, पी53 उस नुकसान की भरपाई में लग जाता है और त्वचा कैंसर होने से रोकता है। मगर यदि सनबर्न लगातार होता रहता है तो पी53 में परिवर्तन होने लगता है और वह सूर्य की वजह से त्वचा को पहुंचे नुकसान की भरपाई नहीं कर पाता। इस सुरक्षा के न मिल पाने के कारण त्वचा कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। 

ऑनलाइन वीडियो गेम की आदत कहीं बच्चों को बिगाड़ न दे

बच्चों में ऑनलाइन वीडियो गेम का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इसकी लत बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। एक अध्ययन से पता चला है कि ऑनलाइन वीडियो गेम खेलने की आदत न केवल बच्चे को आलसी बनाती है बल्कि जंक फूड के सेवन के लिए प्रेरित करती है। यह सभी जानते हैं कि जंक फूड के सेवन से मोटापा बढ़ता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक होता है।
प्रोडक्ट होते हैं प्रमोट 
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि ऑनलाइन वीडियो गेम में किसी एक प्रोडक्ट, सर्विस या कंपनी को प्रमोट किया जाता है। उन्होंने पाया कि ऐसे गेम्स की फैट, शुगर और सोडियम से भरपूर फूड को प्रमोट करने की प्रकृति होती है।
कैसे निकाला निष्कर्ष 
शोधकर्ताओं ने वेबसाइट पर बच्चों द्वारा खेले जाने वाले करीब 100 एडवरगेम्स (विज्ञापन से संबंधित गेम) के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। अध्ययन के लिए उन्होंने अलग-अलग तरह की 145 वेबसाइट का चुनाव किया, इसमें उन्होंने पाया कि 439 फूड ब्रांड्स को एडवरगेम्स की सहायता से प्रमोट किया जा रहा है।
क्या पाया अध्ययन में 
  अधिकतर गेम हाई फैट, हाई शुगर और हाई सोडियम प्रोडक्ट से ही संबंधित थे। फूड साइंस एंड ह्यूमन न्यूट्रीशन के एसोसिएट प्रोफेसर लूराइन वेदरस्पून ने बताया कि हमने अध्ययन के दौरान देखा कि बच्चों का झुकाव ऐसे फूड की तरफ ज्यादा था जिनमें कैलोरी की मात्रा ज्यादा थी। ऐसे गेम तेजी से खेले जाते हैं और खेलने में भी आसान होते हैं। इनमें ब्रांड नेम, लोगो, तस्वीर के साथ ही प्रोडक्ट से संबंधित बोलने वाला कैरेक्टर भी होता है।  

कैमरा पकड़ेगा कैंसर सेल

कैंसर सर्जरी में बड़ी समस्या होती है कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं शरीर में छूट जाती हैं और वह फिर पनप जाती हैं। मगर जर्मन वैज्ञीनिकों ने एक ऐसा कैमरा विकसित किया है जो कैंसर की सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार यह कैमरा कैंसर की सूक्ष्मतम कोशिकाओं को देख सकता है। कैंसर की सेल रंगीन प्रकाश में इस कैमरे के सामने चमकती हुई दिखाई देती हैं। वैज्ञनिकों के अनुसार यह कैमरा सर्जनों को कैंसर और स्वस्थ कोशिकाओं के बीच अंतर करने में मदद करेगा। सर्जरी के दौरान अक्सर यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन-सी  स्वस्थ सेल है और कौन-सी कैंसर वाली। कैंसर के मरीजों के इलाज में एक बड़ी दिक्कत यह भी होती है कि कई छोटी-छोटी कैंसर सेल्स छूट जाती हैं और फिर से शरीर में विकसित होने लगती हैं। मगर जब इतनी सूक्ष्म सेल कैमरे की मदद से देखी जा सकेंगी, तो उन्हें शरीर से बारीकी से पूरी तरह निकाला जाना भी संभव हो सकेगा। यह कैमरा जल्द ही बाजार में आएगा।  

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

मधुमक्खी पालन: रोजगार की मीठी उड़ान


यदि कृषि जगत के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो लगभग 40 फीसदी किसान अपने व्यवसाय से संतुष्ट नहीं हैं। बीजों, रासायनिक खादों के बढ़ते मूल्य, फसलों के समर्थन मूल्य का कम होना आदि ऐसे कई कारण हैं, जिनसे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थिति में जरूरी हो जाता है कि वह एक ऐसा व्यवसाय अथवा रोजगार करें, जिससे उन्हें खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी हो। मधुमक्खी पालन उद्योग इसमें उनकी भरपूर मदद कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों से न सिर्फ लोगों का रुझान इसकी तरफ बढ़ा है, बल्कि खादी ग्राम उद्योग भी अपनी तरफ से कई सुविधाएं प्राप्त करा रहा है। मधुमक्खी पालन एक लघु व्यवसाय है, जिससे शहद एवं मोम प्राप्त होता है। यह एक ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पर्याय बनता जा रहा है। फिलहाल शहद उत्पादन के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है।
योग्यता
मधुमक्खी पालन से संबंधित कई तरह के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा अथवा डिग्री कोर्स किए जा सकते हैं। डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थी के लिए साइंस स्ट्रीम से स्नातक होना जरूरी है, जबकि हॉबी कोर्स के लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं होती। प्रशिक्षण के लिए एक हफ्ते से लेकर 9 महीने तक का कोर्स उपलब्ध है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो इस व्यवसाय में दिलचस्पी रखता हो, वह भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क फीस 500 से लेकर 4000 रुपए तक है।
मधुमक्खी के प्रकार
इस व्यवसाय के लिए चार तरह की मधुमक्खियां इस्तेमाल होती हैं। ये हैं- एपिस मेलीफेरा, एपिस इंडिका, एपिस डोरसाला और एपिस फ्लोरिया। इस व्यवसाय के लिए एपिस मेलीफेरा मक्खियां ही अधिक शहद उत्पादन करने वाली और स्वभाव की शांत होती हैं। इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है।
जरूरी सामान
मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्सफ्रेम, मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद, रिमूविंग मशीन, शहद इकट्ठा करने के ड्रम का इंतजाम जरूरी है।
बचाव
जहां मधुमक्खियां पाली जाएं, उसके आसपास की जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए। बड़े चींटे, मोमभझी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू मधुमक्खियों के दुश्मन हैं, इनसे बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए।
वातावरण
यह एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे यदि किसी फूलवाली फसल के साथ किया जाए तो उसमें 20 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है। पश्चिमी देशों में बढ़ती मांग को देखते हुए मधुमक्खी पालन की बुआई वाले क्षेत्रों में अच्छी-खासी संभावनाएं हैं। इसके अलावा, सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपीलेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेडमें जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेडमें वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता है।
कब शुरू करें
मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, लेकिन नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए वरदान है।
आय और व्यय
आमतौर पर पचास डिब्बे वाली इकाई पर करीब दो लाख रुपए तक की लागत आती है, जिसमें डिब्बे खरीदने और उपकरणों का खर्च भी शामिल है। इस इकाई पर खर्च करके तीन से चार लाख रुपए कमाए जा सकते हैं।
सरकार से ऋण-व्यवस्था
पिछले कुछ वर्षों में मधुमक्खी पालन की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। इस उद्योग के लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन सुविधा उपलब्ध करवाई है। इस व्यवसाय के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक का लोन उपलब्ध है, चूंकि यह उद्योग लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है।
अवसर
मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण के बाद सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में काफी संभावनाएं हैं। गैर-सरकारी संस्थानों में जैसे सुप्रसिद्ध कंपनी डाबर, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में बी कीपिंग ट्रेड की नौकरी के लिए समय-समय पर विज्ञापन निकलते रहते हैं।
वेतनमान
इस व्यवसाय से जुड़े सरकारी कर्मचारियों का वेतनमान सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है, जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों में डिग्रीधारकों को पद के हिसाब से 30 से 50 हजार रुपए तक मिलते हैं।
प्रशिक्षण संस्थान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा रोड, नई दिल्ली
नेशनल बी बोर्ड
बी इंस्टीटय़ूशनल एरिया, अगस्त क्रांति मार्ग, हौज खास, नई दिल्ली
निदेशक, उद्यान विभाग, कृषि पंत भवन, जयपुर, राजस्थान
ल्यूपिन ह्यूपिन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन, कृष्णानगर, भरतपुर, राजस्थान
राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड, लालकोठी, जयपुर, राजस्थान
मधुमक्खी पालन एंड शोध संस्थान कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
ज्योति ग्रामोद्योग संस्थान, गंगोह, सहारनपुर,
उत्तर प्रदेश
मधुमक्खी प्रशिक्षण केंद्र, हल्द्वानी, नैनीताल
मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र, जनमहादेव रोड, खादी ग्रामोद्योग, देहरादून
केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण
संस्थान, ग्रामोद्योग आयोग, गणेशखिंड रोड, पुणे (महाराष्ट्र)
विशेषज्ञ से बातचीत
ग्रामीण विकास का पर्याय है मधुमक्खी पालन
डॉ. बीएल सारस्वत  
डिप्टी डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर
मधुमक्खी पालन उद्योग शुरू करने से पहले प्रशिक्षण कितना जरूरी है?
प्रशिक्षण संस्थान से जानकारी प्राप्त करना काफी सहायक होता है। इस उद्योग में कई तरह की जानकारी दी जाती हैं। मसलन, शहद उत्पन्न करने के लिए उचित वातावरण, नए-नए उपकरण एवं प्रबंध की जानकारी, उत्पादन के लिए उच्चकोटि की तकनीक, अधिक शहद देने वाली मधुमक्खियों की प्रजातियां, नस्ल सुधार एवं रोगों से बचने की सम्यक जानकारी तथा वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन में नवनिर्मित तकनीक आदि का ज्ञान दिया जाता है।
यह व्यवसाय कितनी लागत से शुरू किया जाना चाहिए?
शुरू में यह व्यवसाय कम लागत से छोटे पैमाने पर आरंभ करना चाहिए। मधुमक्खी की प्रमुख किस्में छोटी मधुमक्खी, सारंग मधुमक्खी, भारतीय मधुमक्खी तथा इटेलियन मधुमक्खी का इस्तेमाल करना चाहिए। इन मधुमक्खियों से शहद अधिक प्राप्त होगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा।
इसके लिए सबसे उपयुक्त मौसम कौन-सा है?
सबसे उपयुक्त मौसम नवम्बर से फरवरी तक का है। यह समय मधुमक्खियों के लिए तापमान के हिसाब से सबसे उपयुक्त है और इसी मौसम में ही रानी मक्खी अधिक संख्या में अंडे देती है।
इस उद्योग से ग्रामीण युवाओं की रोजगार की समस्या किस हद तक सुलझ सकती है?
यह ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्र के विकास का पर्याय बन सकता है। इससे बहुत आसानी से ग्रामीण युवाओं की रोजगार की समस्या को सुलझाया जा सकता है।
इस व्यवसाय में युवाओं को कितना फायदा होगा?
अगर हम 50 (बी) कॉलोनी लगाते हैं तो उसमें 2 लाख रुपए तक का खर्च आता है, लेकिन उससे मुनाफा भी उतना ही होगा और एक कॉलोनी की जगह दो कॉलोनी बन जाएंगी, मतलब दोगुना फायदा होगा।
सांभार: हिंदुस्तान.कॉम