सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के लिए धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। यह न सिर्फ हमारी त्वचा को सूर्य की किरणों से बचाता है बल्कि हमारी त्वचा की पूरी तरह से सुरक्षा करने में भी मदद करता है। हाल ही में हुए एक नए शोध में एक और खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया है कि सनस्क्रीन तीन तरह के त्वचा कैंसर से 100 फीसद सुरक्षा तो करता ही है, इसके साथ ही यह उस 'सुपरहीरो जीन" की भी रक्षा करता है, जो कैंसर को रोकने में मददगार है। ऐसा माना जाता है कि सनस्क्रीन आपको सनबर्न से तो बचाता ही है, लेकिन त्वचा कैंसरों से बचाव में भी यह महती भूमिका निभाता है। सनस्क्रीन के प्रभाव के बारे में अकादमिक बहसें चलती रही हैं और अक्सर आने वाले सारे परिणाम सकारात्मक दिखाई देते हैं। क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (क्यूयूटी) के बयान के अनुसार यूनिवर्सिटी ने सनस्क्रीन के प्रभाव का अध्ययन आण्विक स्तर पर करने के लिए दुनिया का पहला मानव आधारित अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सनस्क्रीन तीनों प्रकार के त्वचा कैंसर बीसीसी (बेसल सेल कार्सिनोमा), एससीसी (स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा) और मेलीग्नेंट मेलानोमा से 100 फीसद सुरक्षा प्रदान करती है।
जीन का सुरक्षा कवच
प्रमुख शोधकर्ता एल्के हैकर ने कहा कि सनस्क्रीन स्कीन कैंसर रोकने में तो शरीर की सुरक्षा करता है, साथ ही यह महत्वपूर्ण जीन पी53 का भी बचाव करता है। यह वही जीन है जो कैंसर को रोकने में मदद करता है। हैकर ने कहा कि जैसे ही हमारी स्कीन को सूर्य की किरणों से नुकसान पहुंचता है, पी53 उस नुकसान की भरपाई में लग जाता है और त्वचा कैंसर होने से रोकता है। मगर यदि सनबर्न लगातार होता रहता है तो पी53 में परिवर्तन होने लगता है और वह सूर्य की वजह से त्वचा को पहुंचे नुकसान की भरपाई नहीं कर पाता। इस सुरक्षा के न मिल पाने के कारण त्वचा कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
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