गुरुवार, 28 नवंबर 2013

'कंगारू केयर" बनाती है बच्चों को स्वस्थ

मां का प्यार और स्नेह बच्चों को बड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिशु, दुनिया में आने के बाद सबसे पहले मां का स्पर्श और अहसास ही महसूस करता है। मां की गंध के प्रति शिशु सबसे पहले आकर्षित होते हैं, जो बच्चे का मां के प्रति लगाव दर्शाता है। यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्ग हमेशा से नई माताओं को बच्चों को खुद से चिपकाकर सुलाने और पास रखने की सलाह देते हैं। ताकि बच्चा अकेले में भयभीत न हो और पूरी तरह से स्वस्थ रहे।
कुल मिलाकर शिशु के आसपास मां का आवरण उसे बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में ब्रिटेन में किए एक शोध में कहा गया कि जन्म के बाद बच्चों को कंगारू की तरह शरीर से चिपकाकर रखने से समय पूर्व जन्म लेने वाली संतानों की मृत्यु दर और विकलांगता दर में वैश्विक स्तर पर कमी लाई जा सकती है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन(एएसएचटीएम) से जुड़ी प्रोफेसर जॉय लॉन कहती हैं कि 'कंगारू केयर" जैसा मामूली उपाय इस बचाव का मूलमंत्र है। कंगारू अपने बच्चे को अपने पेट में बनी थैली में रखता है, जिससे बच्चा कभी उससे दूर नहीं होता और पूरी तरह से स्वस्थ रहता है।
डेढ़ करोड़ का जन्म समयपूर्व
पूरी दुनिया में करीब डेढ़ करोड़ बच्चों का जन्म समय से पहले ही हो जाता है और बच्चों को होने वाली 10 प्रतिशत बीमारियों के लिए समयपूर्व प्रसव ही जिम्मेदार है। समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में करीब दस लाख बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाती है। और जो बच्चे जीवित रहते हैं उनमें से तीन प्रतिशत बच्चे औसत या गंभीर विकलांगता के शिकार होते हैं और करीब 4.4 प्रतिशत बच्चे मामूली विकलांगता से पीड़ित होते हैं।
गहन चिकित्सा
समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में लर्निंग डिस्एबिलिटी और सेरिब्रल पॉल्सी का होना  सामान्य है।
प्रोफेसर लॉन कहती हैं कि लोगों की सोच है कि समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों को सघन चिकित्सा की जरूरत होती है, मगर  निर्धारित समय से छह सप्ताह या उससे भी अधिक समय पहले जन्म लेने वाले 85 प्रतिशत बच्चों को कंगारू केयर के जरिए बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर बच्चे को सांस की कोई समस्या न हो तो 'कंगारू केयर" सचमुच लाभदायक होती है। इससे स्तनपान को भी बढ़ावा मिलता है और बच्चे में संक्रमण भी कम होता है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 'वर्ल्ड प्रीमैच्योर डे" के अवसर पर कहा कि समय पूर्व जन्म लेने वाले एक तिहाई बच्चों की स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण मौत हो जाती है। इन बच्चों को मामूली खर्चे से बचाया जा सकता है। इसके लिए कोई सघन चिकित्सा की भी जरूरत नहीं होती।
लड़कों को खतरा ज्यादा
कई शोध बताते हैं कि लड़कियां गर्भ में भी लड़कों से पहले परिपक्व हो जाती हैं। इसी सप्ताह पीडिएट्रिक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित होने वाले शोध के अनुसार लड़कियों की तुलना में लड़कों के समयपूर्व जन्म लेने की आशंका 14 प्रतिशत ज्यादा होती है। जिसकी वजह से जो लड़के समयपूर्व जन्म लेते हैं, उनमें लड़कियों की तुलना में विकलांगता या मृत्यु दर भी अधिक होती है।  

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