अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के बदलते व्यवहार को माता-पिता बेहतर तरीके से समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में यदि कोई बाहरी व्यक्ति बच्चों के मामले में अभिभावकों को टोक दे तो उन्हें लगता है कि उनकी परवरिश में कोई खामी रह गई है। मगर ऐसा नहीं है। हाल ही में हुए एक शोध में इस बात को गलत बताया गया है। इस शोध में पाया गया कि कुछ बच्चों को अनुवांशिक रूप से संवदेनशील होने के कारण ही स्वभावगत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। शोध के मुताबिक कुछ बच्चों को प्री-स्कूल में जाने के दौरान स्व-नियंत्रण और गुस्से की परेशानी होती है। बच्चों को यह लक्षण अपने माता-पिता से विरासत में मिलता है। ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर क्यों कुछ बच्चे आसानी से प्री-स्कूल चले जाते हैं और क्यों कुछ को इस दौरान स्वभावगत समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्वाभाविक प्रक्रिया
शोध के प्रमुख लेखक डॉक्टर शेनॉन लिप्सकॉम्ब ने कहा कि शोध के नतीजों के आधार पर हम कह सकते हैं कि ये बातें बच्चे अपने माता-पिता से सीखते हैं। ऐसे में हमें इस बारे में अधिक सोचना बंद कर देना चाहिए। लेकिन इस प्रकार की अनुवांशिक समस्या से परेशान कुछ बच्चे अलग माहौल, जैसे घर और छोटे समूहों में अपना स्वभाव बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।
233 परिवारों के डेटा एकत्र
परिणाम पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 233 परिवारों से डेटा एकत्र किया और पाया कि जिन अभिभावकों में अधिक नकारात्मकता और कम स्व नियंत्रण की शिकायत थी, उनके बच्चों में स्वभावगत समस्याएं अधिक होने की आशंका थी। शोधकर्ताओं ने गोद लिए बच्चों के स्वभाव की भी जांच की और उनके जैविक माता-पिता से उनके स्वभाव की तुलना करने की कोशिश की।
हैरानी की बात यह कि उन बच्चों का स्वभाव भी अपने जैविक माता-पिता से प्रभावित था, हालांकि उनका लालन-पालन किसी और के द्वारा किया गया था। लिप्सकॉम्ब का कहना है कि हम बच्चों की अनुवांशिक जांच करवाने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन माता-पिता और अभिभावक बच्चे की जरूरतों का आकलन कर अधिक उपयुक्त मार्ग तलाश सकते हैं।
एक चुनौती है
इस शोध के जरिए हमें इस बात की जानकारी मिलती है कि आखिर क्यों कुछ बच्चे बड़ी मित्र मंडली और बड़े सामाजिक समूहों में स्वयं को असहज महसूस करते हैं। यह टीचर अथवा माता-पिता की समस्या नहीं है बल्कि बच्चे जैविक स्तर पर इस चुनौती का सामना कर रहे होते हैं।
माता-पिता इस बात को समझें
- बच्चों के बदलते व्यवहार के पीछे उसे दोष देने के बजाए माता-पिता खुद के व्यवहार में बदलाव लाएं
- आपको पता नहीं होता, लेकिन बच्चे कब वे आदतें जल्दी एडॉप्ट कर लेते हैं जो उनके माता-पिता में होती है, इसलिए धैर्यपूर्वक इस समस्या को दूर करने की कोशिश करें
- समय-समय पर बच्चों को समझाना जरूरी है
- उसके दोस्तों, आसपास के माहौल के अलावा उसकी गतिविधियों को देखते हुए उसे समझने की कोशिश करें
- बच्चे के चिड़चिड़े स्वभाव पर खुद चिढ़ंे नहीं बल्कि बच्चे को बहुत प्रेम से समझाने और उसके व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करें
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