स्मार्टफोन का उपयोग करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसी के चलते लोगों में तनाव का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। जितना लोग स्मार्ट फोन पर निर्भर होते जा रहे हैं, यह समस्या भी उतनी ही गंभीर रूप लेती जा रही है।
स्मार्टफोन की लत के कारण लोग घंटों इंटरनेट का उपयोग करते रहते हैं। जिस कारण उनको तनाव का सामना भी करना पड़ता है। ब्रिटिश लेखिका फ्रांसिस बूथ ने अपनी नई किताब में यह दावा किया है कि स्मार्टफोन्स के आने के बाद इसके आदी हो चुके लोगों में तनाव का स्तर 300 प्रतिशत तक बढ़ा है। बूथ की इस किताब के अनसुार स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण लोग हर समय इंटरनेट के माध्यम से ई-मेल, सोशल एप्स और मैसेंजर्स के संपर्क में बने रहते हैं। जिस कारण उनका दिमाग बिना रूके सक्रिय रहता है। जिस कारण दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और तनाव बढ़ने लगता है।
ऐसे की तनाव की जांच
इस परिणाम पर पहुंचने के लिए बूथ ने 40 वर्ष की आयु के कुछ वयस्कों में तनाव के स्तर की जांच की। इस जांच में हिस्सा लेने वाले लोगों को एक सप्ताह स्मार्टफोन के साथ और एक सप्ताह बिना स्मार्टफोन के रहने को कहा गया।
क्या पाया
जिस सप्ताह वे लोग बिना स्मार्टफोन के रहे, उनमें तनाव का स्तर कम देखा गया। जबकि स्मार्टफोन के उपयोग करने वाले सप्ताह में इन्हीं लोगों के तनाव में काफी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्लिफोर्ड नास बताते हैं कि मानव मस्तिष्क एक साथ बहुत से काम करने के लिए नहीं बना है और तनाव की वजह से हमारी संज्ञात्मक सोच को नुकसान होता है।
भारत का पांचवां स्थान
शोधकर्ता मैरा पीकर ने एक रिपोर्ट में कहा कि स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले लोगों में भारत का पांचवा स्थान है। उनके मुताबिक वर्ष 2013 तक भारत में 6 करोड़ 70 लाख लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इन आंकड़ों में 81 प्रश की वृद्धि हुई है।
स्मार्टफोन की लत के कारण लोग घंटों इंटरनेट का उपयोग करते रहते हैं। जिस कारण उनको तनाव का सामना भी करना पड़ता है। ब्रिटिश लेखिका फ्रांसिस बूथ ने अपनी नई किताब में यह दावा किया है कि स्मार्टफोन्स के आने के बाद इसके आदी हो चुके लोगों में तनाव का स्तर 300 प्रतिशत तक बढ़ा है। बूथ की इस किताब के अनसुार स्मार्टफोन के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण लोग हर समय इंटरनेट के माध्यम से ई-मेल, सोशल एप्स और मैसेंजर्स के संपर्क में बने रहते हैं। जिस कारण उनका दिमाग बिना रूके सक्रिय रहता है। जिस कारण दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और तनाव बढ़ने लगता है।ऐसे की तनाव की जांच
इस परिणाम पर पहुंचने के लिए बूथ ने 40 वर्ष की आयु के कुछ वयस्कों में तनाव के स्तर की जांच की। इस जांच में हिस्सा लेने वाले लोगों को एक सप्ताह स्मार्टफोन के साथ और एक सप्ताह बिना स्मार्टफोन के रहने को कहा गया।
क्या पाया
जिस सप्ताह वे लोग बिना स्मार्टफोन के रहे, उनमें तनाव का स्तर कम देखा गया। जबकि स्मार्टफोन के उपयोग करने वाले सप्ताह में इन्हीं लोगों के तनाव में काफी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्लिफोर्ड नास बताते हैं कि मानव मस्तिष्क एक साथ बहुत से काम करने के लिए नहीं बना है और तनाव की वजह से हमारी संज्ञात्मक सोच को नुकसान होता है।
भारत का पांचवां स्थान
शोधकर्ता मैरा पीकर ने एक रिपोर्ट में कहा कि स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले लोगों में भारत का पांचवा स्थान है। उनके मुताबिक वर्ष 2013 तक भारत में 6 करोड़ 70 लाख लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इन आंकड़ों में 81 प्रश की वृद्धि हुई है।
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