सोमवार, 30 दिसंबर 2013

अस्थमा के मरीज क्या खाएं और क्या नहीं

ऐसे खाद्य पदार्थों की लिस्ट बहुत लंबी है जिनसे अस्थमा के मरीजों को दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऐसी कई चीजें हैं जिनसे एलर्जी और अस्थमा अटैक पड़ने का खतरा होता है। तो आइए जानते हैं कि आपकी रसोई में ऐसे कौन से खाद्य पदार्थ हैं जो आपको अस्थमा से लड़ने में मददगार हो सकते हैं।
* बहुत कारगर है एंटी-ऑक्सीडेंट :
अपने खाने में, जितना संभव हो सके एंटी-ऑक्सीडेंट भोजन को शामिल करें। ऐसा भोजन जिसमें 'विटामिन-सी" की मात्रा अधिक हो आपके भोजन का अहम हिस्सा होना चाहिए। 'विटामिन-सी" सूजन और जलन को कम करने में मदद करता है। यह फेफड़ों पर असर करता है और श्वसन संबंधी समस्याओं से लड़ने में सहायता करता है। खट्टे फल और जूस, ब्रोकली, स्क्वॉश और अंकुरित आहार ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा होती है।
*रंग-बिरंगी सब्जियां करें शामिल :
अपने बोरिंग खाने में जरा रंग भरिए। गहरे रंग के फलों और सब्जियों, जैसे खुबानी, गाजर और लाल व पीली मिर्च और पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में अस्थमा के मरीजों के लिए लाभप्रद बीटा-कैरोटीन नाम का एक खास तत्व पाया जाता है। जिस सब्जी या फल का रंग जितना गहरा होगा उसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मात्रा उतनी अधिक होगी।
* आपके लिए नहीं है विटामिन-ई :
यूं तो विटामिन-ई काफी गुणों से भरपूर होता है, लेकिन अस्थमा मरीजों को इससे जरा दूर ही रहना चाहिए। यह खाना पकाने के लगभग सभी तेलों में मौजूद होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल जरा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। सूरजमुखी के बीज, केल (एक प्रकार की गोभी), बादाम और अधिक साबुत अनाजों में विटामिन-ई की मात्रा कम होती है। इन आहारों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें।
* विटामिन बी, बना है आपके लिए :
ऐसा भोजन जिसमें विटामिन-बी मौजूद हो, अस्थमा के मरीजों के भोजन का अहम हिस्सा होना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें, अस्थमा मरीजों को तनाव के जरिए होने वाले अटैक से बचाने में सहायक होती हैं। इस बात के  भी साक्ष्य मिले हैं कि विटामिन बी6 और नियासिन (विटामिन बी3, निकोटिन) की कमी से भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है।
* प्याज है फायदेमंद :
प्याज चाहे लाल हो या हरा, यह अस्थमा मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। प्याज में मौजूद सल्फर तत्व अस्थमा के मरीजों को जलन से राहत दिलाते हैं। यह बात साबित हो चुकी है कि प्याज का सेवन सांस संबंधी तकलीफों से भी राहत दिलाने वाला होता है।
* ओमेगा-3 फैटी एसिड दिलाए राहत :
ओमेगा-3 फैटी एसिड फेफड़ों में होने वाली जलन और उत्तकों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि लगातार जलन और खांसी से उत्तकों को काफी नुकसान पहुंचता है, जिसके चलते नियमित अस्थमा अटैक आते रहते हैं। यह मुख्य रूप से सलमन, मैक्रेल और ऐसी मछलियों में पाया जाता है जिनमें ऑयल की मात्रा अधिक होती है।
* मसालों से रहें दूर :
मसाले गर्म होते हैं और अस्थमा मरीजों को इनसे दूर ही रहना चाहिए। मसाले खाने से, मुंह, गले और फेफड़ों की कोशिकाएं उत्तेजित हो जाती हैं, परिणामस्वरूप उनमें से सेल्विया निकलने लगता है। सेल्विया से बलगम पतला हो जाता है।  

टमाटर खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है हेल्दी डाइट, क्योंकि इस पर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी होती है। वैसे तो बैलेन्स और रिच डाइट लेने वाली बात सभी को मालूम है, मगर कभी-कभी कोई चीज छूट जाए तो उसे याद कर खाने में शामिल करना न भूलें। यहां बात हो रही है टमाटर की। हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक टमाटर से युक्त आपकी रिच डाइट ब्रेस्ट कैंसर जैसे बीमारी के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोध में बताया गया कि टमाटर का सेवन महिलाओं के लिए बेहद गुणकारी है। जो पोस्टमैनोपॉजल से होने वाले खतरों को काफी कम करता है।
शोध में बताया गया है कि पोस्टमैनोपॉजल महिलाओं में उनके वजन बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसमें बताया गया है कि खाने में टमाटर की हाई डाइट लेने से शरीर में फैट और शुगर मेटाबोलिज्म को रेग्युलेट करने वाले हार्मोन के स्तर पर पॉजिटीव इफेक्ट पड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से दूर रहा जा सकता है।
रूटगर्स यूनिवर्सिटी में एपिडिमियोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर अदना लानोस ने बताया कि टमाटर का गुदा या टमाटर से बने उत्पादों की पर्याप्त मात्रा लेने से बहुत कम समय में ही कई फर्क दिखाई देने लगते हैं। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन तत्व न सिर्फ पोस्टमैनोपॉजल इफेक्ट को कम करता है बल्कि फैट और शुगर को कंट्रोल करते हुए व्यक्ति को हेल्दी और पूरी तरह से फिट भी रखता है।
इसके अलावा इस शोध में यह भी कहा गया है कि न्यूट्रीएंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स और फायटोकेमिकल्स जैसे लाइकोपीन से युक्त फ्रूट्स और वेजिटेबल्स का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।  

योगा करें, मगर सावधानी से

योगा आपको ध्यान केंद्रित करने, सकारात्मक और जीवंत बनाए रखने में मदद करता है। यदि योगा का संपूर्ण लाभ लेना हो तो कुछ गलतियों से बचें।
* खाना खाने के बाद योगा खतरनाक :
भरे पेट के साथ योगा करना कई सारी समस्याओं का कारण बनता है। खाने और योगा की प्रैक्टिस के बीच दो घंटे का अंतराल होना चाहिए।
* टाइट कपड़े न पहनें :
ठीक से सांस लेने और पसीना बेहतर तरीके से बाहर निकल पाए उसके लिए आरामदायक और लूज फिटिंग वाले कपड़े पहनकर योगा करें। शूज भी बहुत टाइट या लूज ना हो।
* जब कॉर्डियक प्रॉब्लम हो :
कॉर्डियक या हाइपरटेंशन जैसी कोई भी समस्या है तो बिना सही ट्रेनर के योगा करना उचित नहीं है। अगर घर पर योगा कर रहे हैं तो फॉर्वर्ड बेंडिंग और ऐसी मुद्राएं करने से बचें, जिसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़ना पड़े।
*मेंस्ट्रूएशन के दौरान न करें सारी मुद्राएं :
मेंस्ट्रूएशन के दौरान महिलाओं को सूर्य नमस्कार और शरीर को पीछे की ओर मोड़कर करने वाली मुद्राएं नहीं करनी चाहिए। ऐसे में पेट की मांसपेशियों पर दबाव न डाले।।
* वॉर्मअप जरूरी :
योगा करने से पहले 10 मिनट की वॉर्मअप या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। व्यायाम के बाद भी 10 मिनट तक आराम के साथ शवासन करें। इससे सांस लेने की क्षमता बढ़ती है और ध्यान केंद्रित करने की भी।
* दर्द में न करें प्रैक्टिस :
किसी भी एक्सरसाइज के दौरान झटके लगना, दर्द या असहजता होने पर उसे रोकना बेहतर होगा। ऐसे में किसी फिजियोथैरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह लें।
झटके से की जाने वाली मुद्राएं इंजुरी का कारण भी बन सकती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव होने का भी खतरा रहता है।  

संगीत के जरिए लौट सकती है खोई याददाश्त

संगीत के जरिए खोई हुई याददाश्त वापस लाई जा सकती है। ऐसा कहना है मशहूर मनोचिकित्सक रिचर्ड कोगन का। उन्होंने इस संबंध में जर्मन संगीतकार लुडविग वैन बीथोवन का उदाहरण देते हुए कहा है कि अत्यंत युवावस्था में बधिरता का शिकार होने के बावजूद संगीत की उपचार शक्ति के कारण वे कुछ बेहतरीन संगीत रचनाएं दे सके।
हर बीमारी की रामबाण दवा 
इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर का दर्द और जी-घबराना इन सभी स्थितियों में संगीत राहत दिला सकता है। कोगन खुद भी कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत में दर्द और व्यग्रता को कम करने की अद्भुत शक्ति है। एचटी सम्मेलन में 'राहत दिलाने की संगीत की शक्ति" पर सत्र को संबोधित करते हुए कोगन ने कहा कि हृदय रोगियों के लिए संगीत रक्तचाप को कम कर सकता है। यह कार्टिसोन (एक प्रकार का हॉर्मोन जो तनाव से सक्रिय होता है और कई प्रकार की बीमारियों की वजह बनता है) को कम कर सकता है। उन्होंने कहा कि आघात के बाद बोलने में कठिनाई वाले रोगियों के लिए भी संगीत मददगार हो सकता है।  

डस्की स्किन : कैसा हो मेकअप

सावंली त्वचा वाली महिलाओं को हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि वे अपनी त्वचा की रंगत निखार नहीं सकती। इसके लिए वे बाजार में उपलब्ध बहुत सारे उत्पादों का प्रयोग करती हैं। कभी-कभी इसकी वजह से वे हीन भावना की शिकार भी होती हैं।
डस्की स्किन वाली महिलाएं भी मेकअप के जरिए अपनी सुंदरता को और भी निखार सकती हैं। सांवली त्वचा वाली महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी स्किन टोन का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा चेहरे से मिलता-जुलता कलर, लिपलाइनर, और ब्लशर का इस्तेमाल करने से खूबसूरती और भी निखर जाएगी। आइए हम इसमें आपकी मदद करते हैं।
* लिक्विड फाउंडेशन :
सांवली महिलाएं मेकअप के लिए लक्विड फाउंडेशन का प्रयोग करें, यह तरल होती है न कि पावडर पेस्टी। यदि आपको अपनी स्किन टोन से मेल खाता हुआ फाउंडेशन नहीं मिलता है तो आप दो रंगों के फाउंडेशन को मिलाकर एक अच्छा रंग बना सकती है। फाउंडेशन लगाने से पहले चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगाइए, जिससे त्वाचा कोमल हो जाए।
*त्वचा को सुखाइए :
त्वचा पर लिक्विड फाउंडेशन लगाने के बाद उसे सुखाइए। इसके लिए आप पाउडर का इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि आपकी त्वचा ऑयली है तो अपने पास हर वक्त फेस पाउडर रखें। इससे त्वचा पर गीलापन नहीं आएगा और वह हमेशा ड्राय बनी रहेगी।
*गालों को ब्लश करें :
चेहरे पर हमेशा ब्लरशर लगाना सही नहीं होता मगर कभी-कभार पार्टी आदि में आप इसका प्रयोग करके सुंदर-सा लुक पा सकती हैं। चेहरे को ब्लश करने के लिए डीप ऑरेंज, वाइन या कोरल रंगों का प्रयोग करें। इससे आपकी त्वचा में निखार आएगा। सांवली त्वचा वाली महिलाओं को लिपस्टिक का चुनाव भी रंग के हिसाब से करना चाहिए। जिन महिलाओं का रंग डार्क हो उन्हें हल्के रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगर आपको लिपस्टिक लगाना पसंद है तो आप डार्क कलर की ही लिपस्टिक लगाएं, जैसे- वाइन, रेड, प्लम और ब्राउन आदि रंग आपकी सुंदरता निखारेंगे।
*आईब्रो के लिए :
डार्क रंग वाली महिलाएं मेकअप के दौरान अपनी आइब्रो को नजरअंदाज बिल्कुल भी ना करें। आईब्रो को शेप देने के लिए आपके लिए पेंसिल और पाउडर का प्रयोग करना बेहतर होगा। सुंदर आंखें खूबसूरती को बढ़ाती है।
* लिप लाइनर :
लिपस्टिक लगाने से पहले अपने होठों पर लिप लाइनर का प्रयोग कीजिए। एक अच्छी आउटलाइन आपके पूरे चेहरे की रंगत को निखार देगी। 

इनसे हो जाएगी नींद खफा

रात का खाना हमारी नींद और सेहत दोनों को प्रभावित करता है इसलिए रात में सोने से पहले कुछ चीजों से परहेज करें तो अच्छा है।
* पास्ता और पिज्जा :
पास्ता में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसे बनाने में काफी ज्यादा घी-तेल का इस्तेमाल होता है। रात में यदि आप पास्ता खाते हैं तो सोने के बाद यह सब फैट में बदलकर आपको मोटा कर सकता है। पास्ता की तरह ही पिज्जा भी एसिडिटी पैदा कर पाचनतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
* मिठाइयां :
रिसर्च की मानें तो सोने से पहले मिठाई खाने से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ती है। यह दिमाग की तरंगों पर भी प्रभाव डालती है, जिससे सोते समय बुरे सपने आने की आशंका बढ़ जाती है।
* मांस-मछली :
बिना चर्बी वाला मीट भी डिनर में नहीं लेना चाहिए। यह बेशक प्रोटीन और आयरन का भंडार है, लेकिन यदि आप इसे डिनर में शामिल करते हैं तो आरामदायक नींद नहीं ले पाएंगे।
* डार्क चॉकलेट :
विशेषज्ञ चॉकलेट को मस्तिष्क और याददाश्त के लिए फायदेमंद मानते हैं। लेकिन यह एक हाई-कैलोरी फूड है। इसमें मौजूद कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थ नींद को प्रभावित कर सकते हैं।
* कुछ विशेष सब्जियां :
प्याज, गोभी, ब्रोकली जैसी सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं। रात में इनका सेवन करने के बाद सोने की स्थिति में पेट फूलने और नींद न आने जैसी समस्या हो सकती है।
* शराब :
रात को सोने से पहले शराब का सेवन आपकी नींद को सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम कर देता है। आप ठीक प्रकार से नींद नहीं ले पाते और बीच-बीच में बार-बार जागते हैं। 

झूलने का मजा तो ले ही लीजिए...

झूले का नाम लेते ही बड़ी-बड़ी पैंगों के साथ झूलने का आनंद हर किसी को याद आ ही जाता है। मगर जब दूर जाकर इन झूलों का मजा नहीं लिया जा सकता तो घर पर भी यह आनंद आसानी से लिया जा सकता है। घर में लगने वाले झूले सिर्फ सजाने का सामान नहीं होते बल्कि आपके आराम के साथी भी बन जाते हैं और जब ठंड की गुनगुनी धूप का मजा लेना हो तो फिर इन झूलों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
झूले अब पेड़ों से हटकर घर की बालकनी, लॉन या गार्डन तक ही रह गए हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि लोगों को इसका शौक नहीं रह गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक झूले सभी को पसंद होते हैं। अब इनके स्टाइल्स भले ही मॉडर्न हो गए हों पर उस पर होने वाली मौज-मस्ती वही पुरानी है। अगर झूलों की बात की जाए तो इनके लिए घर में स्पेस होना काफी जरूरी है लेकिन कंटेम्पररी स्टाइल्स में ऐसी डिजाइंस हैं जो हर तरह की स्पेस में आसानी से फिट हो जाएंगी।
* कम्फी स्विंग  :
ये स्विंग्स साइज में बड़े होते हैं। यदि घर में जगह हो तो यह बहुत अच्छे लगेंगे। इन्हें और भी आरामदायक बनाना हो तो कुशंस से फर्निश कर सकते हैं। इन्हें शिफ्ट करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है पर ये बेहद लग्जरियस होते हैं।
* निटेड स्विंग :
ये स्विंग्स निटेड होते हैं, जिसकी वजह से इन्हें लगाना और उतारना बहुत आसान हो जाता है। रोप या फिर सॉफ्ट पॉलिस्टर फैब्रिक से बने होने के कारण इसे आसानी से फोल्ड भी किया जा सकता है। यही वजह है कि इन्हें आप अपने साथ आउटिंग्स पर भी ले जा सकते हैं। अलग-अलग शेप्स और कलर्स में भी ये आसानी से मिल जाएंगे।
* स्टेडिंग स्विंग :
स्टैंडिंग स्विंग कई आकार और किस्मों में मौजूद है। ओवल, राउंड या फिर ट्राएंगुलर ये सभी अच्छे लगते हैं। इन्हें बालकनी, लॉन या फिर गॉर्डन में रखा जा सकता है। मूवेबल होने की वजह से ये आसानी से कहीं भी शिफ्ट किए जा सकते हैं।
* डिटेचेबल स्विंग :
यह स्विंग आपको पुरानी यादों में ले जाएगा। ये दिखने में काफी स्टाइलिश लगते हैं और आप इसे कहीं भी हैंग कर सकते हैं। छोटे घर और फ्लैट्स के लिए ये अच्छा विकल्प हो सकते हैं। कम वजन वाला यह स्विंग काफी कम जगह में भी लगाया जा सकता है। इन्हें आप अपनी पसंद के अनुसार सिलेक्ट कर सकते हैं।  

अब कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाएगा स्मार्टफोन!

आधुनिक समय में स्मार्टफोन ने जिंदगी की राह को काफी आसान कर दिया है। इसके जरिए एक क्लिक में अब उन तमाम जानकारियों को पाया जा सकता है, जो पहले काफी कठिन लगती थी। इसमें तरह-तरह की मोबाइल एप्लीकेशन्स काफी मददगार साबित हो रही हैं। तो फिर स्मार्टफोन से एक और जानकारी आसानी से मिलेगी। जी हां, अब स्मार्टफोन कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने में भी आपकी मदद करेगा, अब इसके लिए आपको किसी भी प्रकार के ब्लड टेस्ट से गुजरने की जरूरत नहीं होगी!
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा एप्लीकेशन तैयार किया है जो आपके स्मार्टफोन के कैमरे के जरिए आपका कोलेस्ट्रॉल पता लगाने में मदद करेगा।
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन कोलेस्ट्रॉल एप्लीकेशन फॉर रेपिड डायग्नोटिक्स यानी एक ऐसा स्मार्टकार्ड बनाया है, जो एक मिनट के अंदर आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर बताने में सक्षम होगा। इससे पहले कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाने के लिए ब्लड की जांच की जाती थी। उसके आधार पर ही कोलेस्ट्रॉल का पता चलता था लेकिन इस एप्लीकेशन के जरिए यह काम बहुत आसान हो जाएगा। इस एप्लीकेशन के शोधकर्ता डेविड एरिकसन के अनुसार स्मार्टफोन की मदद से अब आपको कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए विशिष्ट उपकरणों की जरूरत नहीं होगी। यह आपके ब्लड, पसीने और लार में मौजूद बायो-मार्कर का निरीक्षण कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बताने में सक्षम होगा। इस सॉफ्टवेयर के जरिए शरीर की कोशिकाओं में मौजूद रंगों के आधार पर उनके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया जा सकेगा। यह शोध 'लैब ऑन ए चिप जर्नल" में प्रकाशित हुआ है।  

रविवार, 29 दिसंबर 2013

रिकॉर्ड संख्या में भारतीय-अमेरिकियों को नियुक्त किया ओबामा ने

वाशिंगटन , प्रेट्र : इस वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिकॉर्ड संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकियों को ह्वाइट हाउस में विभिन्न् पदों पर नियुक्त किया है। अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या करीब 30 लाख है।
ओबामा की दूसरी पारी के पहले वर्ष  में ह्वाइट हाउस में रिकॉर्ड संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों की नियुक्ति को विशेषज्ञ  इस समुदाय की प्रतिभा को पहचाने जाने के रूप में देखते हैं। संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय मूल के एक दर्जन से अधिक अमेरिकी लोगों को ह्वाइट हाउस में प्रमुख पदों पर नियुक्ति दी गई है। अमेरिका में शायद ही कोई ऐसा महत्वपूर्ण विभाग है जहां भारतीय मूल के लोग प्रमुख पदों पर आसीन नहीं हों। ओबामा प्रशासन  में भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों के बारे में कोई आधिकारिक सूची तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार यह संख्या 50 से अधिक है। यह अब तक का एक रिकॉर्ड है। ओबामा प्रशासन  में भारतीय मूल के पांच लोग महत्वपूर्ण पदों पर हैं, जिनकी नियुक्ति की संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने पुष्टि कर दी है। यूएसएड के प्रशासक  राजीव श्ााह ओबामा प्रशासन  मेंं श्ाीषर््ा पद पर आसीन भारतीय मूल के अमेरिकी हैं। इस वषर््ा निश्ाा बिस्वाल को दक्षिण्ा एश्ाियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री नियुक्त किया गया थ्ाा। इसके अलावा ह्वाइट हाउस फेलोश्ािप पर राष्ट्रपति के आयोग की सदस्य अजीता राजी, कृष्ाि संबंधी मुख्य वार्ताकार इस्लाम सिद्दीकी और वाण्ािज्य विभाग में कार्यकारी निदेश्ाक विनाई थ्ाुम्मलपल्ली की नियुक्ति को भी सीनेट ने मंजूरी दे दी है। यदि सीनेट की ओर से पुष्टि हो जाती है तो विवेक मुर्थ्ाी भारतीय मूल के पहले अमेरिकी सर्जन जनरल होंगे। भारतीय मूल के दो और अमेरिकी अपनी नियुक्ति की सीनेट द्वारा पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सहायक वाण्ािज्य मंत्री नियुक्त किए गए अरुण कुमार और राजनीतिक व सैन्य मामलों के लिए सहायक विदेश्ा मंत्री नियुक्त पुनीत तलवार श्ाामिल हैं। तलवार ने ईरान के परमाण्ाु समझ्ाौते को लेकर महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई थ्ाी। यदि तलवार की नियुक्ति की सीनेट द्वारा पुष्टि हो जाती है तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय में ऐसा पहली बार होगा जब दो सहायक विदेश्ा मंत्री भारतीय मूल के होंगे।

शनिवार, 28 दिसंबर 2013

नौनिहालों को बचाएं शैंपू और लोशन के संक्रमण से

आजकल हर माता-पिता अपने शिशुओं की नाजुक त्वचा के लिए बेबी प्रोडक्ट पर आंख बंद कर भरोसा करते हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि इन उत्पादों में मौजूद नुकसानदायक केमिकल्स-पेराबिन्स बच्चों में गंभीर संक्रमण के कारण हो सकता है।
'एसीएस जर्नल ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी" में प्रकाशित शोध में पाया गया है कि बच्चों के पर्सनल केयर उत्पाद से लेकर खिलौनों तक में थैलेट्स और पेराबिन नामक केमिकल मौजूद हैं,जो बच्चों के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी रोगों का खतरा पैदा कर सकते हैं। बच्चों के उत्पादों में नमी देने के लिए थैलेट्स और इन्हें संरक्षित रखने के दिलए पेराबिन का इस्तेमाल किया जाता है।
इससे पहले भी एक ब्रिटिश शोध में इन केमिकल्स से ब्रेस्ट कैंसर, स्पर्म्स का कम होना और दमा जैसे खतरों की आशंका जताई जा चुकी है।
170 सैंपल्स के जरिए निकाला निष्कर्ष
शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने अलग-अलग ब्रांड के बच्चों के पर्सनल केयर सामान व खिलौनों के 170 सैंपल इकट्ठा कर उनका अध्ययन किया है और यह निष्कर्ष निकाला है।
सतर्कता जरूरी
शोधकर्ताओं का मानना है कि बाजार से खरीदते वक्त इन उत्पादों का लेबल अच्छी तरह पढ़ना बहुत जरूरी है, जिससे बच्चों को इन हानिकारक केमिकल्स से बचाना आसान हो सके। आजकल हर प्रोडक्ट पर उसमें समाहित कन्टेंट की जानकारियां दी जा रही हैं, जिस पर ध्यान देते हुए कुछ सावधानी बरती जा सकती है।  

सलाद में चुकंदर हैं सेहत का सिकंदर

चुकंदर न सिर्फ सलाद की खूबसूरती बढ़ाने के लिए जरूरी है बल्कि खून बढ़ाने से लेकर कामेच्छा बढ़ाने तक, यह सेहत से जुड़े कई मामलों में आपके लिए बेहद मददगार हो सकता है।
जानिए, सेहत से जुड़े चुकंदर के ऐसे फायदों के बारे में जिन्हें जानने के बाद आप इसे अपनी डाइट का हिस्सा यकीनन बनाएंगे।
* पीरियड्स में आराम :
इसमें आयरन और फोलिक एसिड की अधिकता होती है, जिससे महिलाओं को पीरियड्स संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं। पीरियड्स के दर्द से लेकर अनियमितता तक कई समस्याओं का समाधान इस डाइट में मिल सकता है।
* एनीमिया :
आयरन की प्रचुर मात्रा होने के कारण चुकंदर एनीमिया के मराजों के लिए  फायदेमंद साबित हो सकता है। खासतौर पर गर्भावस्था के समय इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
* ब्लड प्रेशर :
कई शोधों में प्रमाणित हो चुका है कि इसका नियमित सेवन हाइपरटेंशन और दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह ब्लड सर्क्युलेशन ठीक रखता है और फैट्स घटाने में मदद करता है।
* जवां त्वचा के लिए :
यह शरीर से हानिकारक केमिकल्स को हटाता है और खून साफ करता है। इस वजह से त्वचा पर मुहांसे डार्क स्पॉट और रैशेज जैसी समस्या नहीं होती हैं। लंबे समय तक जवां त्वचा के लिए रोज इसका सेवन करें।
* पेट के लिए फायदेमंद :
यह लिवर और पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। यह सुपाच्य तो है ही, साथ ही यह लिवर को साफ करने का भी काम करता है। कांस्टिपेशन से आराम के लिए इससे बेहतर डाइट कुछ और नहीं है। 

दूसरों को एक्सरसाइज करते देखने से भी होते हैं हेल्दी

वर्कआउट के नाम पर ही आपको आलस आ जाता है क्या? तो चिंता नहीं सिर्फ दूसरों को जिम में जाता हुआ देखने से भी आप हेल्थ कॉन्शस हो सकते हैं। जी हां, विश्वास नहीं होता ना, मगर यह सच है। हाल ही वेस्टर्न सिडनी की यूनिवर्सिटी में किए एक नए अध्ययन में बताया गया है कि दूसरे लोगों को एक्सरसाइज करते हुए देखने से खुद की हार्ट रेट और अन्य साइकोलॉजिकल गतिविधियों पर असर पड़ता है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप खुद ही एक्सरसाइज कर रहे हों। इसलिए इसे भी हेल्दी रहने का एक जरिया माना गया है।
तब तो अब मोटापे से ग्रसित लोगों को किसी तरह की चिंता की जरूरत ही नहीं हो सकेगी, वे बिना पसीना बहाए ही बहुत जल्दी वजन को कंट्रोल कर सकने में कामयाब होंगे।
 *हैरान करने वाला शोध :
नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दूसरों को शारीरिक रूप से सक्रिय देखने से भी इंसान फिट रह सकते हैं। यानी आपको खुद कसरत करने की जरूरत नहीं है, आप केवल दूसरों को व्यायाम करते हुए देखकर ही अपना वजन कम कर सकते हैं। यह शोध वाकई हैरान करने वाला है लेकिन शोधकर्ताओं का दावा है कि इसके पीछे पुख्ता वैज्ञानिक आधार मौजूद है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न सिडनी के शोधकर्ताओं ने पुख्ता निष्कर्ष के लिए कुछ लोगों पर परीक्षण कर इस बात को अंजाम दिया है।
*क्या पाया :
शोधकर्ताओं के अनुसार टीवी पर खेल देखने या लोगों को खेलते हुए देखने से लोगों का हृदय गति, श्वसन और स्कीन ब्लड फ्लो में सुधार आता है। इससे शरीर को ठीक वैसा ही फायदा मिलता है जैसा एक्सरसाइज करने से होता है। यह पहला अध्ययन है कि जसमें शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि दूसरों को शारीरिक रूप से सक्रिय देखकर लोगों की मांसपेशियों में सक्रियता आती है। यह अध्ययन 'जर्नल फ्रंटियर्स इन ऑटोनॉमिक न्यूरोसाइंस" में प्रकाशित किया गया है।  

सेलफोन का इस्तेमाल बढ़ा रहा तनाव

सेलफोन के लगातार इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में तो सभी ने सुना होगा। पूर्व में हुए कई शोधों में सेलफोन के ज्यादा उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया जा चुका है। यह आपकी सेहत के साथ ही दिमाग के लिए भी नुकसानदेह होता है। हाल ही में हुए एक अन्य शोध से पता चला है कि छात्रों द्वारा मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल तनाव और परीक्षाओं में कम नंबर आने का कारण बन रहा है।
शोध से यह भी स्पष्ट हुआ है कि मोबाइल का उपयोग करने से छात्रों की खुशियों पर भी असर पड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सेलफोन का इस्तेमाल छात्रों के ग्रेड प्वाइंट एवरेज (जीपीए) पर नकारात्मक असर और डालता है और तनाव को बढ़ाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि सेलफोन का लगातार इस्तेमाल छात्रों की सफलता जैसे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करता है। केंट स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एंड्रयू लेप, जैकब बार्कले और आर्यन कारपिंकसिकी ने अपने अध्ययन में सेलफोन के असर का पता लगाने के लिए यूनिवर्सिटी के 500 से ज्यादा छात्रों पर अध्ययन किया गया। अध्ययन से निकले परिणामों के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि सेलफोन के इस्तेमाल से छात्रों में तनाव का स्तर बढ़ जाता है।  

पिटाई से बच्चे सुधारते नहीं, बिगड़ते हैं

यदि आप भी बच्चों की शरारत से परेशान रहते हैं और अक्सर उन्हें पीटकर सुधारने की कोशिश करते हैं तो अपनी इस आदत को बदल दीजिए। पिटाई से बच्चे सुधरते नहीं बल्कि और बिगड़ जाते हैं। ऐसा करके आप खुद अपने बच्चे को अधिक आक्रामक बना रहे हैं। साथ ही उसके व्यवहार निर्माण को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। जी हां, एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि बच्चों को मारना-पीटना उन्हें अधिक आक्रामक बनाता है। साथ ही वे बुरा बर्ताव करने लगते हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं, इसका उनके व्यवहार पर सीधा और गहरा असर पड़ता है। इससे इस बात पर कोई असर नहीं पड़ता कि बाकी समय में बच्चों के साथ आप कैसा बर्ताव करते हैं।
*पूरी तरह से की जांच-परख :
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन ऑफ सोशल वर्क में सहायक प्रोफेसर शावना ली के मुताबिक आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक रिश्तों के दौरान अगर बच्चों की पिटाई की जाती है तो इससे बच्चे को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इस शोध में हमने इस प्रचलित मान्यता को परखा और पाया कि पिटाई से कुछ समय बाद बच्चों के व्यवहार पर नकरात्मक असर पड़ता है। इससे इस बात का भी कोई लेना-देना नहीं है कि माएं अपने बच्चों के साथ कितनी गर्मजोशी से मिलती हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि पिटाई से बच्चों में आक्रामकता बढ़ती है, लेकिन इसके बावजूद अनुशासित रखने के नाम पर बच्चों को पिटाई की जाती है।
*3200 से अधिक प्रतिभागी :
इस शोध में 3200 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे। इनमें व्हाइट, अफ्रीकन अमेरिकन और हिस्पेनिक परिवारों ने भाग लिया। डेटा तब एकत्रित किए गए जब बच्चों की उम्र एक, तीन और पांच वर्ष थी। मांओं ने बताया कि लगभग कितने अंतराल पर बच्चों की पिटाई होती है और इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के आक्रामक बर्ताव और बच्चों के प्रति अपने सकारात्मक व्यवहार के बारे में भी बताया। यह शोध 'जर्नल डेवलपमेंट साइकोलॉजी" में प्रकाशित हुआ है।
*डांटना भी है नुकसानदायक :
इसके अलावा एक अन्य शोध में यह बात भी सामने आई है कि जिन किशोरों पर उनके अभिभावक चिल्लाते हैं, उनमें अवसाद और बेवजह तर्क करने की आदत भी पड़ जाती है। 

विटामिन बी 12 की कमी भी एसिडिटी की वजह

आधुनिक लाइफस्टाइल में अधिकांश लोग खानपान पर सही तरीके से ध्यान नहीं दे पाते हैं। इसके अलावा फास्ट फूड और जंक फूड के चलन ने इस खानपान को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी वजह से ज्यादातर लोग सीने में जलन और एसिडिटी की समस्या से परेशान रहते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इसके अलावा भी कुछ कारण हो सकते हैं कि जिनकी वजह से एसिडिटी की समस्या आपको परेशान किए होती है। इनमें से एक कारण है विटामिन की कमी।
हाल ही हुए एक नए शोध में पता चला है कि जब शरीर में विटामिन बी 12 की कमी होती है तो एसिडिटी की समस्या ज्यादा होती है। 'अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल" में प्रकाशित शोध में इस बात का दावा किया गया है।
*2 लाख मरीजों पर अध्ययन :
केजर परमानेंट डिविजन ऑफ रिसर्च के वैज्ञानिकों ने हार्ट बर्न के दो लाख मरीजों पर अध्ययन किया है, जिनमें 12 प्रतिशत लोगों में विटामिन बी 12 की कमी मिलती है। शोध में पाया गया है कि विटामिन बी 12 को रक्त में घोलने में गैस्ट्रिक एसिड की बड़ी भूमिका है और विटामिन बी की कमी के कारण शरीर में एसिड रिफ्लेक्स की स्थिति आ सकती है। शरीर में अगर विटामिन बी की कमी की भरपाई न हो तो डिमेंशिया, ब्रेन डैमेज, एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शरीर को प्रतिदिन 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी 12 आवश्यकता होती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि हार्टबर्न के मरीज प्रोटोन पंप इनब्हीटर (पीपीआई) का इस्तेमाल करते हैं, उससे भी विटामिन बी की मात्रा में कमी आती है, इसलिए इसकी जगह खानपान में सुधार जैसे बचाव ज्यादा मददगार हो सकते हैं।
खानपान में विटामिन बी 12
अक्सर यह सवाल उठता है कि हमें अपने खानपान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर में विटामिन बी 12 की कमी न हो। हालांकि मांसाहारी पदार्थों में विटामिन बी 12 की भरपूर मात्रा होती है, लेकिन शाकाहारी लोगों को विशेष रूप से अपने भोजन पर ध्यान देना चाहिए। विटामिन बी 12 के कुछ मुख्य स्रोत हैं। जैसे हमें डेयरी उत्पादों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए जिनमें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क आदि महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी विटामिन बी 12 आंशिक रूप से पाया जाता है।
नॉन वेजिटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकन आदि से विटमिन बी 12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है, परंतु इसका ज्यादा सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है, इसलिए नॉनवेज का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए। 

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

थोड़ी सी मौज-मस्ती


टोट बैग : आराम के साथ स्टाइल भी

फैशन के दौर में अब बैग या छोटे पर्स को आप इग्नोर नहीं कर सकतीं, क्योंकि बैग आज जरूरत ही नहीं फैशन स्टेटमेंट का हिस्सा भी बन चुके हैं।
कभी बड़ा बैग, तो कभी छोटा बैग। यही नहीं, बैग के फैब्रिक में भी काफी बदलाव हुआ है। तभी तो सारी महिलाएं फैशन के अनुरूप एक सुंदर बैग अपने साथ जरूर कैरी करना चाहती हंै, ताकि वे कहीं भी बाहर जाते समय अपने जरूरी सामान को ले जा सके।
*आउटफिट्स के साथ हो मैच :
सच तो यही है कि आउटफिट्स से मैच करता हैंडबैग आपके स्टाइल को कंप्लीट भी करता है। इसलिए जब भी अपने लिए बैग खरीदने जाएं, तो अपनी जरूरत को ध्यान में तो रखें ही, साथ ही लेटेस्ट ट्रेंड का भी ध्यान रखें।
लेटेस्ट ट्रेंड की बात करें, तो ब्राइट और स्टाइलिश टोट बैग इन दिनों फैशन में है। टोट बैग्स आज न केवल फैशन स्टेटमेंट बन गए हैं, बल्कि इन्हें काफी सुविधाजनक और ट्रेंडी भी माना जा रहा है।
* क्यों खास है टोट बैग :
-टोट बैग्स असल में एक प्रकार के ओपन बैग्स है, जिनके दोनों ओर हैंडलनुमा स्ट्रैप्स लगे हुए होते हैं। ये ज्यादातर कपड़े या लेदर से बने होते हैं और इनमें आसानी से ढेर सारा सामान कैरी किया जा सकता है।
-टोट बैग्स की अनेक वैरायटी बाजार में है। खासतौर पर कपड़ों और जूट जैसे मैटेरियल से बने टोट बैग ज्यादा चलन में हैं। यही नहीं इन बैग्स को बीड्स, रेशमी लेस, रेशम आदि से सजाकर या इन पर पेंटिंग करके और भी खूबसूरत लुक दिया जा रहा है।
-पहले टोट बैग्स केवल सिंगल जेब या दो जेब वाले, खुले बिना जिप के साधारण स्टाइल में बनाए जाते थे, लेकिन आज समय की मांग के अनुसार इनमें मोबाइल पाउच, साइड वॉलेट आदि जैसे विकल्प भी दिए जा रहे हैं यानी जिप वाली दो-तीन जेबें भी इसमें आपको देखने को मिलेगीं।
* गहरे रंग का चलन :
सर्दियों को ध्यान में रखते हुए ब्राइट कलर का बैग लें, क्योंकि इन दिनों ब्राइट और स्टाइलिश बैग का फैशन है। कलर में हरा, पीला, गुलाबी, इंडिगो और लाल का फैशन है। ये रंग आपको फ्रेश अहसास कराते हैं। इसलिए बिना किसी डर के अपना मनपसंद कलर ले लें। 

कहीं आपकी नींद भी उड़ तो नहीं गई है!

कहते हैं प्यार में अक्सर नींद उड़ जाती है लेकिन अगर आप प्यार में नहीं हैं और फिर भी आपको नींद नहीं आती है तो आपके लिए कई वजहें हो सकती हैं।
जी हां, 'हफिंगटन पोस्ट" में प्रकाशित शोध में 'रिजॉनेट" नामक कंपनी ने एक सर्वेक्षण करवाया। जिसमें किन स्थितियों में लोगों की नींद उड़ती है, इसके खुलासे हुए हैं।
अगर आपको भी रात में ठीक तरह से नींद नहीं आती है तो गौर करें, इनमें से कोई वजह तो नहीं जो आजकल आपकी नींद को उड़ा दे रही है।
* कम आय :
शोध में पाया गया कि नींद न आने से परेशान 40 प्रतिशत लोगों की आय उनकी जरूरतों की अपेक्षा कम है। वहीं 19 प्रतिशत लोगों के बच्चों 15 से 17 साल की उम्र के हैं, जिनके भविष्य की चिंता उन्हें सोने नहीं देती है।
* संबंधों में कड़वाहट :
प्यार में ही नींद नहीं उड़ती बल्कि प्यार खोने पर भी नींद तेजी से उड़ जाती है। शोध के अनुसार 35 प्रतिशत लोगों को तलाक लेने या संबंध तोड़ने की स्थिति में नींद नहीं आती है।
* दवाओं का असर :
शोध के अनुसार- अधिक दवाएं लेने वाले लोगों को अनिद्रा की समस्या अधिक होती है। इतना ही नहीं, 16 प्रतिशत लोग इलाज के दौरान इतने असहज रहते हैं कि उन्हें अनिद्रा की समस्या शुरू हो जाती है।
* बडा ओहदा, बड़ी जिम्मेदारियां :
शोध में पाया गया कि 32 प्रतिशत लोग जो किसी कंपनी में बड़े पद और बड़ी जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं, उन्हें नींद से जुड़ी समस्याओं की रिस्क अधिक रहती है।
* नशे की लत :
शोध के अनुसार धूम्रपान करने वाले 48 प्रतशित लोगों को नींद न आने की समस्या अधिक होती है। नींद न आने की ऐसी ही कोई वजह आपकी भी तो नहीं? यदि है तो उन्हें थोड़ा बदलने की कोशिश कीजिए नहीं तो इसका असर आपके स्वास्थ्य पर आसानी से दिखाई दे जाएगा।  

नॉर्मल डिलिवरी में मदद करेगी 'हिप्नोबर्थ थैरेपी"

महिलाओं के जीवन का सबसे खूबसूरत पल वह होता है, जब वह मां बनती हैं। मगर मां बनने की यह प्रक्रिया महिलाओं के लिए दूसरे जनम से कम नहीं होती। शारीरिक संरचनाओं के आधार पर महिलाओं को प्रैग्नेंसी के दौरान कई तरह की समस्याओं से जूझना होता है और वहीं नॉर्मल डिलिवरी को लेकर चिंताएं भी उत्पन्ना होती है। इन समस्याओं को देखते हुए आधुनिक समय में 'हिप्नोबर्थ थैरेपी" को बढ़ावा दिया जा रहा है। जी हां, नॉर्मल डिलिवरी (सामान्य प्रसव) के लिए गर्भवती महिलाएं इस तकनीक को आजमाकर प्रसव के दर्द को कम कर सकती हैं। डिलिवरी के लिए यह तकनीक बहुत ही आसान मानी जा रही है।
*यूं आई सामने :
'हिप्नोसिस थैरेपी" तब चर्चा में आई, जब दुनिया की मशहूर हस्तियों ने इसे आजमाया। ब्रिटिश राजकुमारी केट मिडल्टन से लेकर किम कार्दिशियन जैसी सेलिब्रिटी भी सामान्य प्रसव के दौरान हिप्नोसिस की नई तकनीक 'हिप्नोबर्थ" को आजमा चुकी हंै। 'फॉक्स न्यूज" में प्रकाशित खबर में इस थैरेपी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का पता चला है।
*इस तकनीक का मतलब :
कनेक्टिकट में हिप्नोबर्थ तकनीक पर काम रहीं सिंथिया ओवरगार्ड के अनुसार 'हिप्नोसिस" का मतलब है 'आराम" और 'फोकस"। इस तकनीक से हम गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में स्ट्रेस को कम करने और लेबर पेन के वक्त उनका फोकस बढ़ाने और दर्द से ध्यान हटाने की कोशिश करते हैं। इससे शरीर में फील गुड हार्मोन 'ऑक्सीटोसिन" बढ़ता है और प्रजनन आसान होता है।
*खतरा होता है कम :
ओवरगार्ड का मानना है कि महिलाएं सामान्यतया प्रजनन के दौरान इतनी अधिक डर और असुरक्षा महसूस करती हैं कि उनके शरीर में एड्रेनलाइन का स्तर बढ़ता है, जिससे यूटरस की तरफ ब्लड सर्क्युलेशन कम होता है और डिलिवरी में ज्यादा तकलीफ होती है। लेकिन इस तकनीक को आजमाने से खतरा कम हो जाता है।
*क्या है इस थैरेपी में :
इस थैरेपी के अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को प्राणायाम, दृश्यों पर ध्यान देने से लेकर हिप्नोटिज्म के कई छोटे-छोटे सेशन दिए जाते हैं, जिससे वे तनावमुक्त रहें। लेबर पेन के दौरान कमरे में मध्यम रोशनी, हल्का संगीत और ध्यान बढ़ाने का सेशन होता है। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान दर्द को कम करना है। यह विधि प्राकृतिक रूप से प्रजनन के दौरान तनाव पर नियंत्रण रखने में कारगर हो सकती है।  

घर को भी दीजिए कंटेम्पररी लुक

यदि आप भी अपने घर की सजावट बदलने की सोच रहे हैं तो खादी और इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स का प्रयोग कर उसे एक अलग लुक दे सकते हैं। खादी कंफर्ट के लिहाज से अच्छी तो है ही, साथ ही जब लोग आपके घर आएंगे तो वो आपके घर के स्वदेशी और पारंपरिक लुक की भी तारीफ करेंगे।
खादी की खासियत यह होती है कि समर्स में वो कूल फीलिंग देती है जबकि विंटर्स में थोड़ी वॉर्म फीलिंग। यही वजह है कि होम डेकोर के लिए भी इसे काफी पसंद किया जाता है। खादी कॉटन हो या फिर खादी सिल्क आप अपनी च्वॉइस के अनुसार किसी भी फैब्रिक को सिलेक्ट कर सकते हैं। साथ ही आप हैंडमेड चीजों से भी अपने घर को एक एथनिक लुक दे सकते हैं।
* बैडिंग्स :
बेड कवर्स, कुशंस और क्विल्ट्स में भी आपके पास बहुत सारी वैराइटीज् के  ऑप्शन्स एंब्रॉयडरी जैसे मंगलागिरी, फुलकारी और काथा में मिल जाएंगे जो होम डेकोर को एक एथनिक लुक देते हैं। सबसे अच्छी बात तो यह है कि खादी से बने टेबल क्लॉथ और नैपकिन टेबल क्लॉथ्स, मैट्स भी डेकोर का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ये खूबसूरत भी दिखते हैं और डेकोर को कंम्पलीट भी करते हैं। ये चीजें आपको कश्मीरी कढ़ाई से लेकर साउथ इंडियन प्रिंट्स तक में मिल जाएंगे।
* परदे :
वाइब्रेंट और कूल कलर्स के साथ-साथ खादी कॉटन के फैब्रिक में आपको इनकी ढेरों वैरायटी मिल जाएगी। ग्रीन, ह्वाइट, यलो जैसे कलर्स जो समर्स के लिए आइडियल माने जाते हैं बहुत ही एलिगेंट और सोबर प्रिंट्स में आपको मिल जाएंगे। अगर आपको ऐसा लगता है कि ये ओल्ड फैशंड लगेंगे तो आपको बता दें कि खादी कर्टन्सस मार्केट में बहुत ही लेटेस्ट पैटर्न में उपलब्ध हैं। अगर थोड़ा रिच लुक चाहते हैं तो कॉटन की जगह आप सिल्क कर्टंस भी यूज कर सकते हैं। मगर इस बात का ध्यान रखें कि इस मौसम में सिल्क कर्टंस को ओवरऑल यूज करने के बजाय कॉटन के साथ मैच कर लें।
* एक्सेसरीज :
एक्सेसरीज आपको पूरी तरह से खादी के बने तो नहीं मिलेंगे लेकिन एक ट्रेडिशनल और इंडियन टच के लिए डिफरेंट तरह के हैंडीक्राफ्ट्स जरूर सिलेक्ट किए जा सकते हैं। इनमें से कुछ  चीजें जैसे टेबल लैम्प्स, पेपर लैम्प्स, फोटो फ्रेम्स जो हैंडमेड होते हैं, डेकोर के लिए यूज किए जा सकते हैं।
फोटो फ्रेम्स तो आपको वुडन, फैब्रिकेटेड और लेदर में भी मिल जाएंगे। यहां तक कि लैम्प शेड्स भी आपको प्रिंटेड पेपर या क्लॉथ के बने मिल जाएंगे। इसके अलावा जूट के बने वाज या लैम्प शेड्स, टेराकोटा या वुडन की सजावटी चीजें या वेस्ट क्लॉथ से बने भी आइटम्स भी आप ले सकते हैं।  

एनीमिया में फायदेमंद है अंजीर

अगर आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है तो आपको सेहत संबंधी समस्याओं का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा। रोगों से लड़ने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पौष्टिक और संतुलित चीजों का सेवन करते हैं। आज हम जानते हैं अंजीर के बारे में। ठंड में इसका सेवन काफी लाभदायक होता है। इसमें कैल्शियम और लौह तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह दिमाग को शांत रखता है और शरीर को आराम देता है। डायबिटीज में अंजीर बहुत उपयोगी होता है। सूखे अंजीर में आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण यह एनीमिया में लाभप्रद होता है।
* कौन-कौन से विटामिन :
अंजीर में विटामिन ए, बी1, बी2, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैगनीज, सोडियम, पोटैशियम और क्लोरीन पाया जाता है।
* कई व्याधियां होती हैं दूर :
इसका सेवन करने से डायबिटीज, सर्दी-जुकाम, अस्थमा और अपच जैसी तमाम व्याधियां दूर हो जाती हैं।
इसके अलावा अंजीर में निम्न खूबियां होती हैं
1. अंजीर पोटैशियम का अच्छा स्रोत है, जो ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।  
2. अंजीर में फाइबर होता है जो वजन को संतुलित रखता है और ओबेसिटी को कम करता है।
3. सूखे अंजीर में फेनोल, ओमेगा-3, ओमेगा 6 होता है। यह फैटी एसिड कोरोनरी हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में मदद करता है।
4. इसमें पाए जाने वाले फाइबर से पोस्ट मेनोपॉजल ब्रेस्ट कैंसर होने का भय नहीं रहता।
5.अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
6. कम पोटेशियम और अधिक सोडियम लेवल के कारण हाइपरटेंशन की समस्या पैदा हो जाती है। लेकिन अंजीर में पोटेशियम अधिक होता है और सोडियम कम होता है इसलिए यह हाइपरटेंशन की समस्या होने से बचाता है।
7.दो अंजीर को बीच से आधा काट कर एक ग्लास पानी में रातभर के लिए भिगो दें। सुबह उसका पानी पीने और अंजीर खाने से ब्लड सर्क्युलेशन बढ़ता है।
* पोषक तत्व कितने :
1 सूखे अंजीर में-
कैलोरी 49
प्रोटीन 0.579 ग्राम
फाइबर 2.32  ग्राम
कुल वसा 0.222 ग्राम
सैचुरेटेड फैट 0.0445 ग्राम
पॉलीअनसैचुरेटेड फैट 0.106 ग्राम
मोनोसैचुरेटेड फैट 0.049 ग्राम
सोडियम 2 मिग्रा   

स्मोकिंग कर सकता है आपके जीन में बदलाव!

अभी तक स्मोकिंग पर बहुत से शोध हो चुके हैं और जिसमें इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कई नेगेटिव इफेक्ट्स को बताया गया है। मगर हाल ही में स्वीडन की उपसाल यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मोकिंग की वजह से लोगों के जीन में कई बदलाव हो सकते हैं। जीन में बदलाव होने के कारण स्वास्थ्य को इसका खामियाजा ज्यादा भुगतना पड़ता है। इसके साथ ही इसका असर बच्चों और अन्य पीढ़ियों में भी दिखाई देता है।
नए शोध के परिणामों के तहत शोधकर्ताओं ने बताया कि स्मोकिंग के कारण जीन में होने वाले बदलाव की वजह से कैंसर और मधुमेह जैसे रोग होने की आशंका भी बढ़ जाती है। उपसाल क्लिनिकल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मोकिंग करने से पुरुषों के प्रतिरोधी तंत्र और स्पर्म्स की क्षमता और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
*ऐसे किया शोध :
स्मोकिंग के कारण जीन में हुए परिवर्तनों के बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं ने स्मोकिंग करने वाले और तंबाकू खाने वाले लोगों को शोध में शामिल किया।
इस शोध से पता चला कि स्मोकिंग करने वालों के कई जीन में परिवर्तन हुए। जबकि तंबाकू सेवन करने वाले लोगों के जीन में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला।
*क्या निकला निष्कर्ष :
उपसाल यूनिवर्सिटी और उपसाल क्लिनिकल सेंटर के शोधकर्ता और इस इस शोध के प्रमुख असा जॉनसन ने बताया कि जीन पर तंबाकू सेवन का सीधा-सीधा असर नहीं होता जबकि इसके जलने के बाद पैदा होने वाले तत्व जीन पर प्रभाव डालते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मोकिंग पर लगाम लगाते हुए इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है और काफी हद तक स्वास्थ्यगत फायदे मिल सकते हंै।





   

विटामिन 'डी" बचाए स्तन कैंसर से

बदलती जीवनशैली के कारण स्तन कैंसर काफी बढ़ गया है। स्तन कैंसर का नाम सुनते ही डर लगने लगता है, क्योंकि कैंसर एक ऐसा रोग है जो तेजी से फैलता है। परंतु अब इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन 'डी" के सेवन से स्तन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
लंदन की सर्जन एवं प्रो. केफाह मोकबेल के अनुसार इससे हर साल एक हजार जीवन बचाए जा सकते हैं। वैसे तो धूप विटामिन 'डी" का सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन महिलाएं अक्सर अपनी दिनचर्चा में इससे महरूम हो जाती है।
प्रो. मोकबेल का दावा है कि 20 साल की आयु के बाद महिलाओं को प्रतिदिन विटामिन 'डी" की एक गोली का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से स्वस्थ महिलाओं में भी स्तन कैंसर होने की आशंका काफी घट जाती है।
महिलाओं में अक्सर विटामिन 'डी" की कमी देखी जाती है। इसे सामान्य स्तर पर बनाए रखकर कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। अध्ययन के अनुसार विटामिन 'डी" की गोलियों का खर्च काफी कम है और लाभ काफी अधिक क्योंकि इससे बड़ी परेशानी की आशंका काफी कम हो जाती है। एक अध्ययन के अनुसार ब्रिटेन में हर साल 50 हजार महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ रही हैं। इसमें 1200 मौत के मुंह में चली जाती हैं।
*इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी :
अध्ययन के अनुसार वैसे तो विटामिन 'डी" हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका अदा करता है। लेकिन अब यह भी माना जाता है कि विटामिन 'डी" इम्यून सिस्टम और कोशिका विभाजन को नियंत्रित करने में भी लाभकारी है। यह दोनों कैंसर की रोक के अहम कारक हैं।
अमेरिका के हार्वर्ड स्कूल और पब्लिक हेल्थ के अनुसार विटामिन 'डी" की कमी से कई बड़ी बीमारियों जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, फ्लू, कई प्रकार के कैंसर, टीबी और स्केरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि इस पर शोध कर कर रहे शोधकर्ताओं ने यह माना कि सोरायसिस के लिए केवल यही कारक जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन सोरायसिस के लिए यह कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस रोग के इलाज के लिए उन्हें अभी अधिक अध्ययन की आवश्यकता है लेकिन इस प्रकार की सावधानियों को बरतने से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

जल्द बूढ़े हो जाते हैं डिप्रेशन में रहने वाले

कई शोधों से यह साफ हो चुका है कि डिप्रेशन में रहने से आप कई प्रकार के रोगों का शिकार हो सकते हैं। बहुत से लोगों का भी यह मानना है कि डिप्रेशन इंसान को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना देता है।
हाल ही एक शोध से साफ हुआ है कि शारीरिक समस्याओं के साथ ही डिप्रेशन में रहने से व्यक्ति जल्द बुढ़ापे से ग्रस्त हो जाता है। नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि डिप्रेशन के कारण शारीरिक क्षमताओं पर भी विपरीत असर पड़ता है और यह कोशिकाओं में एजिंग की प्रक्रिया को तेज कर देता है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि जो लोग गंभीर किस्म के डिप्रेशन का शिकार होते हैं वे अन्य लोगों के मुकाबले जल्दी बूढ़े हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन को पूरा करने के लिए 2407 लोगों पर रिसर्च की। डिप्रेशन में रहने वाले लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती।
नींद पूरी न होने का असर आपकी त्वचा के साथ ही शरीर पर भी पड़ता है। ऐसे में त्वचा पर झुर्रियां और आंखों के नीचे काले घेरे बनना आम है। ऐसा भी बताया गया है कि कम नींद लेने वालों को बुढ़ापा जल्दी आता है।  

किसी लत पर काबू पाने में मददगार होता है ध्यान

 हम अक्सर अपनी बुरी आदतों से परेशान रहते हैं। आदत पर काबू पाने के लिए आपको कई उपाय आजमाने पड़ते हैं। कई बार कुछ दिनों तक उस आदत से दूर रहने के बाद एक बार फिर व्यक्ति उनका शिकार हो जाता है। मगर ताजा शोध में कहा गया है कि बुरी आदतों या आसक्ति पर नियंत्रण करने के लिए पुनर्सुधार उपचारों में 'ध्यान" को शामिल करने से अच्छे परिणाम मिलने की संभावना अधिक होती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह उच्चस्तरीय निष्कर्ष बताता है कि तकनीक पर आधारित उपचार, किसी व्यसन से बाहर निकलने में मदद करने के लिए एक पूरक की तरह सहायक होता है। हम इस बात का वैज्ञानिक और गणितीय तर्क भी देते हैं।
*कम्प्यूटर वैज्ञानिक का शोध :
शोधकर्ताओं ने बताया कि यह निष्कर्ष एक कम्प्यूटर वैज्ञानिक द्वारा पशु और मानव अध्ययन पर किए नए सर्वेक्षण में सामने आया है। मैसाचुसेट्स एम्हर्स्ट के कम्प्यूटर वैज्ञानिक यरिव लेविऑफ, तंत्रिका विज्ञान शोधकर्ता जेरोल्ड मेयेर और कम्प्यूटर वैज्ञानिक एंड्रयू बाटरे के सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित यह शोध 'फ्रंटियर इन साइकाइट्री" नामक पत्रिका के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ता लेवी के अनुसार सर्वेक्षण का उद्देश्य मौजूदा पशु एवं मानव अध्ययनों का प्रयोग करके लत को बेहतर ढंग से समझने और उसके इलाज के नए तरीकों की तलाश करना है। शोधकर्ताओं ने इस सर्वेक्षण के संदर्भ में 'एलोस्टेटिक सिद्धांत का वर्णन भी किया है। यह सिद्धांत के अनुसार जब कोई व्यक्ति नशीली दवा लेता है या प्रतिफल (रिवार्ड) सिस्टम पर जोर देता है तो वह संतुलन की अवस्था खो देता है।  

30 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी हो सकती है खतरनाक

आज के आधुनिक समय में करियर की वजह से लोगों की शादी की उम्र बढ़ती जा रही है। जिसके कारण बच्चों की प्लानिंग भी 30 की उम्र के बाद ज्यादा हो रही है। हाल ही एक शोध में यह बात सामने आई है कि 30 के बाद प्रेग्नेंसी से कई प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं। इस शोध में माना गया है कि जो महिलाएं 30 की उम्र तक पहली बार गर्भवती होती हैं, उन्हें अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शोधकर्ताओं का यह मानना है कि 30 साल की उम्र में पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को समय से पूर्व प्रसव यानी प्रीमैच्योर डिलिवरी या मृत शिशु का खतरा अधिक होता है। साथ ही स्मोकिंग करने वाली या अधिक वजन वाली महिलाओं को भी यह खतरा कहीं अधिक होता है।
शोध के दौरान 30 से 34 वर्ष की गर्भवती महिलाओं का 25 से 29 वर्ष की गर्भवती महिलानों से तुलनात्मक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि 20 से 30 साल के भीतर की आयु महिलाओं के लिए पहली बार मां बनने का सही समय है। यह शोध 'ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी जर्नल" में प्रकाशित हुआ है।  

दिमाग में भी होता है ब्रेक लगाने का स्विच!

'थिंक ट्वाइस एंड देन स्पीक" बोलने से पहले दो बार सोच लो और फिर बोलो। यह बात कहना आसान है, मगर इस पर अमल लाना बेहद जरूरी है क्योंकि बोलने में तो कुछ ही पल लगते हैं लेकिन कभी मुंह से ऐसी भी बातें निकल जाती हैं, जो दूसरों को चोट पहुंचा सकती हैं। इसलिए यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है तो जरा सोच लीजिए आपकी बातें किसी को चोट पहुंचाने का काम तो नहीं कर रही है ना!
इसी बात को ध्यान रखते हुए वैज्ञानिकों ने व्यक्ति के दिमाग और उसकी प्रणाली को जानने की कोशिश की। विशेषज्ञों ने पता लगाया है कि इंसान के दिमाग में एक ऐसा सर्किट होता है, जो किसी परिस्थिति में दिमाग को सोचने से रोकता है। जिसे सेल्फ कंट्रोलिंग से आसानी से जाना जा सकता है।
ह्यूस्टन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र और सैन डिएगो की यूनिवर्सिर्टी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। विशेषज्ञों ने सोचा कि क्या लोगों के शरीर के अंदर स्वानुशासन का ऐसा कोई यंत्र या प्रक्रिया है, जिससे किसी सहयोगी से या सोशल मीडिया पर किसी मित्र से बात करते हुए कब और कहां रूका जाए, इसका निर्धारण किया जा सके।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्सर कई लोग इस बात का निर्धारण नहीं कर पाते कि किसी दोस्त या सोशल मीडिया पर किसी से बात करते समय कहां और कब रूकना चाहिए। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए इंसान के दिमाग में एक यंत्र मौजूद होता है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी तकनीक पेश की है, जिससे दिमाग की उत्तेजन प्रणाली के माध्यम से स्वानुशासन प्रणाली को तेज किया जा सकता है।
यूटीहेल्थ मेडिकल स्कूल के द विवियन एल स्मिथ डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोसर्जरी में ऐसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध के वरिष्ठ लेखक नितिन टंडन ने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में ऐसे तमाम अवसर आते हैं, जहां किसी को भी प्रतिक्रियाओं को रोकना चाहिए। उदाहरण के लिए उस समय हर हाल में जब बात सामाजिक संदर्भ में अनुचित हो तो बोलना रोक दें। इसके लिए सेल्फ कंट्रोलिंग पावर जरूरी है। जिससे अनुचित बातों को बोलने से रोका जा सके। यह कंट्रोलिंग पावर ही दिमाग के स्विच को स्टीम्युलेट होने से रोकती है।  

बच्चों का देर से सोना ठीक नहीं

'अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज, मेक्स ए मैन हेल्दी, वेल्दी एंड वाइज"। अमूमन हर पैरेन्ट्स अपने बच्चों को सुबह जल्दी उठने और रात को जल्दी सोने का यह पाठ पढ़ाते हैं। ताकि वे स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान बनें। मगर क्या आपने कभी गौर किया है कि धीरे-धीरे दिनचर्या में आप इतने मशगूल हो जाते हैं कि बच्चे देर रात तक जागते हुए टीवी कम्प्यूटर या पढ़ाई में लगे रहते हैं, आपको ध्यान ही नहीं रहता। जिसका असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बताया गया है कि देर रात तक जागने वाले बच्चों का दिमाग कमजोर हो जाता है और वे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
रात में देर से सोने वाले टीनएजर्स पढ़ने-लिखने में पीछे होते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भावनात्मक परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इनके मुकाबले जो बच्चे जल्दी से जाते हैं, उनका शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर होता है।
*क्या पाया अध्ययन में :
हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस पर अध्ययन किया। इस रिसर्च टीम के हेड लॉरेन के मुताबिक जो बच्चे रात में 11:30 के बाद के बाद बिस्तर पर जाते हैं, स्कूल में उनका ग्रेड प्वाइंट बेहद खराब होता है। इन्हें इमोशनल दिक्कतों से भी दो-चार होना पड़ता है। हाई स्कूल, ग्रेजुएशन और कॉलेज जाने के दिनों में भी इन्हें काफी मुश्किलें हो सकती हैं।
*2,700 टीनएजर्स पर किया शोध :
इस अध्ययन के लिए 13 से 18 साल के बीच के तकरीबन 2,700 टीनएजर्स के सोने के घंटों पर शोध हुआ। यह शोध अमेरिका के नेशनल लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ अडोलसेंट हेल्थ की ओर से वर्ष 1995 और 1996 में की गई थीं। इसके बाद 2001-02 में जब स्टडी में शामिल बच्चे और बड़े हो गए तो इनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की गईं और अब इसका एनालिसिस किया गया। इस शोध का मकसद यह पता करना था कि क्या बच्चों के सोने के वक्त का उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर कोई असर पड़ता है या नहीं। शोध के दौरान यह पता चला कि इनमें से 23 प्रतिशत बच्चे 11:15 बजे या फिर इसके बाद सोने जाते थे।
स्टडी के बीच वक्त का जो अंतराल था, उसमें सारे टीनएजर्स कॉलेज तक पहुंच चुके थे। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड से पता चला कि ग्रेजुएशन में उनका ग्रेड काफी चिंताजनक था।  

हाथों को बचाएं फटने से

ठंड के मौसम में हाथों की त्वचा रूखी हो जाती है। इस मौसम में त्वचा निकलना, नाखूनों के पास क्रैक पड़ना जैसी समस्याएं भी आम होती हैं। जिनसे बचने की कोशिश की जाना चाहिए। यह देखने में काफी भद्दी तो लगती ही है।
सर्दियों के दिनों में मॉइश्चराइजर का साथ जरूर त्वचा को राहत देता है मगर हाथों की खूबसूरती बरकरार रखने के लिए सिर्फ मॉइश्चराइजर ही काफी नहीं है। ऐसे में अगर आप ठंड में हथेलियों के रूखेपन को वाकई दूर करना चाहते हैं तो इन पांच स्टेप में रोज अपने हाथों का खयाल रखें।
-एक कटोरे में गुनगुना पानी लें और कुछ बूंदें ऑलिव ऑयल की उसमें मिलाएं।
-करीब 20 से 25 मिनट तक इस पानी में दोनों हाथों को डुबोकर रखें।
-फिर हाथों को तौलिए से सुखाकर उस पर बेसन और मलाई का लेप लगाकर हल्का स्क्रब करें।
-फिर गुनगुने पानी से साफ कर लें।
-अब हाथों को पोंछकर उस पर मॉइश्चराइजर लगाएं। सोने से पहले नियमित रूप से ऐसा मैनीक्योर करने से हाथों के रूखेपन को दूर भगाने में मददगार हो सकता है। 

टमाटर में है स्वाद के साथ सेहत भी

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है हेल्दी डाइट, क्योंकि इस पर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी होती है। वैसे तो बैलेन्स और रिच डाइट लेने वाली बात सभी को मालूम है, मगर कभी-कभी कोई चीज छूट जाए तो उसे याद कर खाने में शामिल करना न भूलें। यहां बात हो रही है टमाटर की। यूं तो हर रोज आप अपने खाने में टमाटर को शामिल करते ही हैं लेकिन क्या आप टमाटर के सेवन से महिलाओं को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं, नहीं तो हम आपको बताते हैं। हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक टमाटर से युक्त आपकी रिच डाइट ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोध में बताया गया कि टमाटर का सेवन महिलाओं के लिए बेहद गुणकारी है। जो पोस्टमैनोपॉजल से होने वाले खतरों को काफी कम करता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार पोस्टमैनोपॉज स्टेज में महिलाओं में उनके वजन बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। खाने में टमाटर की हाई डाइट लेने से शरीर में फैट और शुगर मेटाबोलिज्म को रेग्युलेट करने वाले हार्मोन के स्तर पर पॉजिटीव इफेक्ट पड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से दूर रहा जा सकता है।
*बहुत कम समय में ज्यादा फर्क :
न्यूजर्सी की रूटगर्स यूनिवर्सिटी में एपिडिमियोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर अदना लानोस ने बताया कि टमाटर का गुदा या टमाटर से बने उत्पादों की पर्याप्त मात्रा लेने से बहुत कम समय में ही कई फर्क दिखाई देने लगते हैं। टमाटर में पाया जाने वाला 'लाइकोपीन तत्व" न सिर्फ पोस्टमैनोपॉजल इफेक्ट को कम करता है बल्कि फैट और शुगर को कंट्रोल करते हुए व्यक्ति को हेल्दी और पूरी तरह से फिट भी रखता है।
इसके अलावा इस शोध में यह भी कहा गया है कि न्यूट्रीएंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स और फायटोकेमिकल्स जैसे लाइकोपीन से युक्त फ्रूट्स और वेजिटेबल्स का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।
*क्या पाया शोध में :
शोध के दौरान महिलाओं को दो समूहों में बांटा गया। दस सप्ताह तक एक समूह को टमाटर की अधिकता वाली डाइट और दूसरे समूह को सोया उत्पादों की अधिकता वाली डाइट का सेवन कराया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सोया उत्पादों की अपेक्षा टमाटर की अधिकता वाली डाइट के सेवन से महिलाओं का ब्लड शुगर लेवल और फैट का स्तर नौ प्रतिशत तक कम हुआ और ब्रेस्ट कैंसर से बचाव वाला हार्मोन 'एडीपोनेक्टिन" का स्तर बढ़ा। यह महिलाओं के स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी थी, जिसके आधार पर शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे।  

ठंड में ऐसे बचाएं पौधों की खूबसूरती...

बारिश में पौधों की हरियाली आपको जितनी सुहाती है, ठंड में उनकी चिंता भी उतनी ही सताती होगी। ऐसा हो भी क्यों ना, इस मौसम में खुश्क और सर्द हवाएं पौधों की जड़ों तक नुकसान जो पहुंचाती हैं।
ऐसे में अगर आप बागवानी के मामले में ये उपाय अपनाएंगे तो ठंड के मौसम का असर आपके पौधों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।
* पौधों में पानी :
ठंड का मतलब यह कतई नहीं है कि आप पौधों में पानी देना छोड़ दें। यकीनन रात में पौधों को थोड़ी ओस जरूर मिलती है लेकिन सर्द हवाएं पौधों की नमी तेजी से छीन लेती हैं। ऐसे में उनमें पानी डालने में मौसम के नाम पर कोताही न करें।
पौधों में कितना पानी दें, इसका कोई सुनहरा नियम नहीं है क्योंकि हर पौधे की पानी की जरूरत अलग है और उसकी सिंचाई जरूरत को ध्यान में रखकर ही होनी चाहिए।
* मिट्टी की नमी :
घर में अगर बगीचा बनाया है तो घास और झाड़ियों की मिट्टी को भरपूर नमी मिले यह ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए सामान्यत: आदर्श नियम है कि एक अंगूठे यानी छह से आठ इंच तक दूरी से मिट्टी पर पानी डालें।
* पौधों की कटिंग :
सर्दी के मौसम में पौधों को धूप अच्छी तरह मिले इसके लिए उनके सूखे पत्तों की छटाई जरूरी है। इसके अलावा, पौधों में 15 दिन के गैप पर खाद, मिट्टी ढीली करने जैसी रुटीन प्रक्रिया तो है ही।
इन बातों का ध्यान रखते हुए आप अपने घर के बगीचे को न सिर्फ हरा-भरा बल्कि बेहद खूबसूरत बना सकते हैं।  

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

मेरे विचारों को 'सांध्य प्रकाश" ने दी जगह

भोपाल और ग्वालियर से प्रकाशित दैनिक अखबार 'सांध्य प्रकाश" के 12 दिसंबर के ग्वालियर संस्करण में पेज चार पर मुद्दा कॉलम में प्रकाशित।  
भोपाल और ग्वालियर से प्रकाशित दैनिक अखबार 'सांध्य प्रकाश" के 12 दिसंबर के ग्वालियर संस्करण में पेज चार पर मुद्दा कॉलम में प्रकाशित।

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

दिल्ली की सरकार: रास्ता तो है, पर नीयत चाहिए


धर्मेंद्र सिंह राजावत

भाजपा और 'आप" ने किरण बेदी का सुझाव खारिज कर दिया। मुझे लगता है कि यह सही भी रहा। लेकिन, एक सबसे बड़ा सवाल, जोकि समूची दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता के दिमाग में गूंज रहा है, 'दोबारा चुनाव से किसका हित होगा?" 'आप" का, भाजपा का, कांग्रेस का या फिर आम जनता का?
देखा जाए तो भाजपा और 'आप" के स्टैंड सही लगते हैं। भाजपा जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं कर आम चुनाव से पहले अपनी छवि को साफ-सुथरा पेश करने की कोशिश कर रही है तो 'आप" ने जो वादे किए हैं, उसे निभा रही है। लेकिन, ऐसे में जो हालात बन रहे हैं उससे कांग्रेस को हर स्थिति में फायदा होता दिख रहा है। किसी ने सरकार नहीं बनाई तो छह माह बाद अपनी गलती को सुधारने का उसको मौका मिलना तय है। दूसरी बात, आठ सीट जीतने वाली कांग्रेस के लिए छह माह बाद होने वाले चुनाव में खोने के लिए भी कुछ नहीं होगा। बुरी तरह हारी कांग्रेस निश्चित है कि अपनी सीट बढ़ाने की कोशिश करेगी। शायद इसमें कामयाब भी हो जाए। ऐसे में अगर किसी को नुकसान होगा तो भाजपा और 'आप" को। यहां गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा को यदि 34 प्रतिशत और 'आप" को 30 प्रतिशत के करीब वोट मिले हैं तो कांग्रेस को भी 24 प्रतिशत के लगभग। सीटें भले ही उम्मीद से ज्यादा कम हो गई हों, मगर वोट प्रतिशत में बहुत बड़ा अंतर नहीं है, ऐसे में यदि वह थोड़ा-सा भी वोट बैंक में सुधार कर लेती है तो यह भाजपा और 'आप" के लिए नुकसानदेह होगा। इसलिए भाजपा और 'आप" को एक बार ही सही, मगर इस दिशा में भी सोचना चाहिए।
हमने बात शुरू की थी किरण बेदी से। दरअसल, मेरे दिमाग में एक विचार तभी से आ रहा है, जब से बेदी ने 'आप" और भाजपा के गठबंधन की मध्यस्थता का टि्वट किया है। आप लोगों को याद होगा कि चुनाव से पहले भाजपा और 'आप" दोनों ने किरण बेदी को लेकर अपनी राय व्यक्त की थी। दोनों पार्टियों की चाहत थी कि बेदी उनसे जुड़ें। साफ-सुथरी छवि और आम से लेकर खास लोगों में लोकप्रिय बेदी दोनों की पसंद थीं। मुझे लगता है कि अब यह मौका ऐसा आ गया है, जब दोनों पार्टियों को ये साबित करना चाहिए कि वह केवल चुनाव में बेदी का उपयोग करने भर के लिए ही नहीं बल्कि वास्तव में उनको पसंद करतीं हैं।
भाजपा, 'आप" को समर्थन नहीं देना चाहती। 'आप" भी किसी से न तो समर्थन लेना चाहती है और न ही देना। दोनों की मजबूरी के बारे में हम ऊपर जिक्र कर ही चुके हैं। अब सवाल उठता है कि क्या भाजपा और 'आप" दोनों किरण बेदी को समर्थन देना चाहेंगे? दरअसल, किरण बेदी दोनों की पसंद भी हैं और बेदी के मुताबिक दोनों पार्टियों के मुद्दे काफी हद तक एक हैं। यदि दोनों पार्टियों के सहयोग से किरण बेदी को मुख्यमंत्री चुन लिया जाता है तो 'आप" के जो मुद्दे हैं, निश्चित ही उन्हें वह आगे बढ़ाएंगी और भाजपा के मुद्दे भी काफी हद तक उनमें समाहित होंगे। जनलोकपाल बिल को लेकर अन्ना हजारे द्वारा किए गए आंदोलन में किरण बेदी भी शामिल थीं। निश्चित है कि वे भी जनलोकपाल बिल चाहती हैं। ऐसे में उनके सीएम चुनने से 'आप" ने जो जनता से वादा किया है, वह निश्चित ही पूरा हो जाएगा।
दूसरा, बेदी को सीएम चुनने से 'आप" जनता के बीच जाकर कह सकती है कि उसने उससे वादाखिलाफी नहीं की है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि बेदी जनता की भी पसंद हैं। दोनों पार्टियों के इस रास्ते से जहां जनता एक चुनाव से बच जाएगी वहीं 'आप" और भाजपा को आम चुनाव की तैयारी का वक्त मिल जाएगा। दोनों की छवि को भी धक्का नहीं लगेगा और कांग्रेस को इस मौके का फायदा उठाने का चांस भी नहीं मिलेगा। हालांकि, यह हमारे दिल की बात है, बाकी फैसला तो भाजपा , 'आप" और आप सभी को ही करना है।  

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

बाइक के साथ बीवी बिकाऊ


न्यूयॉर्क। घर में रखे पुराने सामान के साथ शायद ही कोई पति अपनी सुन्दर सी पत्नी को बेचे, लेकिन एक सख्श है  सा जिसने अपनी पुरानी बाइक के साथ खुद की बीवी को भी बेचने का ऑनलाइन एड दे दिया।
अपनी पुरानी हार्ले डेविडसन के साथ बीवी को भी बेचने का एड क्रेगलिस्ट नाम की वेबसाइट पर देने वाला यह आदमी अमरीका का रहने वाला है, जिसका नाम बॉब है।
बॉब ने इस वेबसाइट पर दिए एड में अपनी हार्ले डेविडसन बाइक तथा बीवी के की एकसाथ फोटो खींचकर डालने के साथ उनके बारे में मजेदार जानकारियां भी पोस्ट की।
बॉब ने यह तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरी हार्ले डेविडसन स्पोर्टस्टर बाइक 2006 की मॉडल है जो शानदार है। जबकि मेरी पत्नी 1959 का मॉडल है इसें पसंद करने वाले खरीदार को यह भी बता दूं कि वह दिखने में बहुत खूबसूरत है।
इसके बाद बॉब ने लिखा की बाइक "वेल मेंटेन" है, जबकि बाइक के साथ मुस्कुराती हुई बीवी के बारे में लिखा की वो "हाई मेंटेन" है। इसके आगे लिखा की मेरी बाइक नया नवेला या अनुभवी कोई भी चला सकता है,उसें अच्छ लगेगा। जबकि चेतावनी देते हुए आगे लिखा कि मेरी पत्नी को सिर्फ "विशेषज्ञ" ही पसंद है। वेबसाइट पर दिए गए इस एड में बाइक तथा बीवी दोनों की कीमत 5900 डॉलर रखी और लिखा कि वो मोलभाव के लिए तैयार है। यदि खरीददार वर्जिनिया से है तो वो उसकी डिलीवरी भी कर सकता है। सांभार: पत्रिका

उम्र बढ़ाना है तो बादाम खाएं

उम्र बढ़ाना है तो बादाम खाइए। पढ़कर कुछ अटपटा लगा रहा होगा, मगर यह काफी हद तक ठीक है। कहा जाता है कि बादाम खाने वाले लोग लम्बे समय तक जीते हैं, इस बात का पता हाल ही में हुई शोध में भी चला। शोध में बताया गया है कि रोजाना एक मुट्ठी बादाम खाने वालों की मृत्युदर में 20 फीसदी तक की कमी आती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध के मुताबिक बादाम खाने का फायदा लोगों तब सबसे ज्यादा होता है जब वो उसें चबा चबा कर खाते हैं। अमरीकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक लाख बीस हजार लोगों पर शोध किया है। जिसमें सामने आया कि रोज एक मुट्ठी बादाम खाने वालों की मृत्युदर में 20 फीसदी कमी आई। यहीं नहीं बल्कि डाना-फैबर इंस्टीटयूट और ब्रीगम एंड वीमंस हॉस्पिटल के मुख्य शोधकर्ता के मुताबिक बादाम खाने वाले लोगों की मौतों में 28 फीसदी की कमी पाई गई। इसके अलावा कैंसर से मरने वाले लोगों की मौतों में भी 11 फीसदी तक की कमी पाई गई। कहा जाता है कि बादाम खाने वाले लोगों की उम्र लम्बी ही नहीं होती बल्कि यह कोलेस्ट्रॉल और सूजन को भी कम करता है।  

सोमवार, 9 दिसंबर 2013

अमेरिका में भाजपा-आप की जीत की खुशी

चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा और नवोदित आम आदमी पार्टी के जीत पर भारतीय मूल के अमेरिकी समर्थकों ने कई जगहों पर रैली निकालकर अपनी खुशी का इजहार किया।
भाजपा के समर्थकों ने 2014 के आम चुनावों में भाजपा की ओर से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को अपना समय और संसाधन मुहैया कराने का वादा किया।
समर्थकों ने अमेरिका भर में जीत का जश्न मनाया। ह्यूस्टन, लॉन्ग आईलैंड, शिकागो, जर्सी सिटी और टैंपा में रैली निकाली गई। छत्तीसगढ़ में चुनावी प्रचार में शामिल होने वाले ओवरसीज फ्रेंड ऑफ बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पटेल ने कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्रियों के सुशासन और भाजपा की जीत में नरेंद्र मोदी के करिश्मे ने काम किया।
उन्होंने कहा कि आज हम वादा करते हैं कि भाजपा को अगले आम चुनावों में सत्ता में लाएंगे और मोदी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाएंगे। विजय पालोद ने कहा कि विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए अब ऐसा करना संभव दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के समर्थक मोदी के लिए समर्थन हासिल करने के वास्ते ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ नरेंद्र मोदी (ओएफनमो) नाम का एक संगठन भी बनाएंगे।

स्वागत आप की जीत का
विधानसभा चुनाव में पहली बार खड़ी हुई अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की जीत का पार्टी समथर््ाक और अमेरिकी विशेषज्ञों ने स्वागत किया। अमेरिकी इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धुमे ने कहा कि आम आदमी पार्टी की जीत ने शहरी भारत में नए तरह की नेतृत्व क्षमता के उदय का संकेत दिया है। कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मिलन वैष्णव ने कहा कि आप की जीत अप्रत्याशित नहीं बल्कि ऐतिहासिक है।  

मिलेगी मुहांसों से मुक्ति

आप यदि मुहांसों से परेशान हैं तो अब आप बेफिक्र हो जाइए। क्योंकि कुछ घरेलू नुस्कों से इनसे निजात पाई जा सकती है। आप जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन तीनों का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। रोज सोने से पहले दो-तीन चुटकी पावडर हथेली पर लेकर उसमें इतना पानी मिलाएं कि उबटन जैसा बन जाए। इसे खूब मिलाएं और फिर उसे चेहरे पर लगा लें और सो जाएं, सुबह उठकर सादे पानी से चेहरा धो लें। पंद्रह यह दिन तक यह काम करें। इसी के साथ प्रतिदिन ढाई सौ ग्राम मूली खाएं ताकि रक्त शुद्ध हो जाए और अन्दर से त्वचा को स्वस्थ पोषण मिले। कुछ हफ्तों में ही मुहांसे खत्म हो जाएंगे और त्वचा निखर जाएगी।



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Will get rid of acne
If you are troubled by pimples, then now you are worried. Because they can be overcome by some domestic nusks. You mix equal quantity of powdered nutmeg, black pepper and red sandalwood three. Before sleeping every day, take two to three pinches of powder on the palm and add so much water to it that it becomes like a boil. Mix it well and then apply it on the face and go to sleep, wake up in the morning and wash face with plain water. Do this work for fifteen days. With this, eat 250 grams radish daily so that the blood gets purified and the skin gets healthy nutrition from inside. Acne will disappear in a few weeks and the skin will be dry.

Dharmendra Singh Rajawat              www.movetonature.blogspot.com

त्वचा में आएगा निखार

कुछ घरेलू नुस्खों से भी त्वाचा को निखारा जा सकता है। यह बाजार में बिकने वाले उत्पादों से बेहतर होता है, क्योंकि नेजुरल रहता है। नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, नहाने से पांच मिनट पहले पानी मिलाकर इनका उबटन बना लें। इसे साबुन की तरह पूरे शरीर में लगाएं और कुछ मिनट बाद नहा लें। सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से घमौरियों, फुंसियों तथा त्वचा की सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही त्वचा मुलायम और चमकदार भी हो जाती है।
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Skin will improve

Some home remedies can also enhance skin. It is superior to the products sold in the market, as Nejural remains. Grind equal quantity of salt, turmeric and fenugreek, and make them boiled by adding water five minutes before bathing. Apply it all over the body like soap and take a shower after few minutes. Use once a week relieves prickly rash, pimples and all skin diseases. Also, the skin becomes soft and shiny.


Dharmendra Singh    movetonature.blogspot.com

तुलसी: सर्दी और बुखार को कहें बाय-बाय

सर्दी और बुखार में तुलसी काफी कारगर होती है। तुलसी की कुछ पत्तियों को पीस लें और दही में मिला लें। इसे रोजाना सुबह खाली पेट तीन महीने तक खाने से लाभ होगा। इसमें एक-दो चम्मच शहद भी मिलाकर खाया जा सकता है। छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी की चटनी शहद में मिलाकर दें। इसे दूध के साथ नहीं खाना चाहिए।

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Basil: Say cold and fever bye-bye
Basil is very effective in cold and fever. Grind some leaves of basil and mix it in the curd. Eating it on an empty stomach every morning for three months will benefit. It can also be eaten by mixing one or two teaspoons of honey. Give small children half gram of basil sauce mixed with honey. It should not be eaten with milk.



Dharmendra Singh Rajawat                     www.movetonature.blogspot.com

शरीर पर न हो कसावट की चीजें

यदि आपकी आदत भी कसी हुई बेल्ट, घड़ी या अंत:वत्र  पहनने की है तो इसे बदल दीजिए, क्योंकि ऐसा करने से त्वचा संबंधी बीमारी होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। हाल ही में हुए शोध में यह बात सामने आई कि जो लोग टाइट पोशाक पहनते हैं, उनको सोरायसिस यानी त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा अधिक होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के शोधकर्ताओं ने 4 विश्वविद्यायलयों के साथ मिलकर इस पर अध्ययन किया।  अध्ययन में यह बात सामने आई कि अधिक कसे हुए अंत:वत्र , घड़ी या फिर बेल्ट पहनने वाले लोगों को इस सोरायसिस रोग के होने का खतरा अधिक होता है। इस अध्ययन के शोधकर्ता प्रोफेसर क्रिस ग्रिफिथ्स की मानें तो इनसे सोरायसिस का खतरा अधिक है यह हम मान सकते हैं। हो सकता है कि बहुत कसी फैब्रिक से निकलने वाला केमिकल त्वचा की ऊपरी परत के लिए सोरायसिस का ट्रिगर हो सकता है। 

तो फिर कुछ मीठा हो ही जाए...!

चॉकलेट न सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी कमाल की चीज है। कई शोधों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि चॉकलेट में ऐसे तत्व होते हैं जो सेहत के लिए लाभकारी साबित होते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप किसी भी चॉकलेट को कितनी भी मात्रा में खा सकते हैं। चॉकलेट की सही मात्रा और उसका प्रकार सेहत के नजरिए से बहुत मायने रखता है। जैसे कि मिल्क या व्हाइट चॉकलेट सेहत के लिए बहुत फायदेमंद नहीं होती। शोधों की मानें तो डार्क चॉकलेट दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होती है। इसमें 60 फीसद तक कोको क्रीम होती है, जो दिल को होने वाली समस्याओं से बचाती है।
कोको क्रीम में मौजूद फ्लेवनॉयल्स दिल के दौरे (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करते हैं। नियमित व संतुलित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से रक्तचाप के नियंत्रण में भी मदद मिलती है। चॉकलेट खाने से दिमाग की क्षमता भी बढ़ती है। डार्क चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो दिमाग में रक्त के संचार को ठीक करते हैं।
चॉकलेट खाने से व्यक्ति की सोचने के साथ ही याददाश्त भी मजबूत होती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार हॉट चॉकलेट खाने से बढ़ती उम्र में भी दिमाग को ठीक रख पाने में मदद मिलती है। चॉकलेट का सेवन वजन नियंत्रण में भी मदद करता है।
वजन बढ़ना मिथ्या
काफी लोगों की यह धारणा है कि चॉकलेट खाने से वजन बढ़ता है लेकिन शोध बताते हैं कि नियंत्रित मात्रा में चॉकलेट के सेवन से बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स संतुलित रहता है। इसके अलावा सही तरीके से चॉकलेट का सेवन मेटाबॉलिज्म को भी ठीक रखता है। चॉकलेट फाइबर का भी अच्छा स्रोत होता है।  

विटामिन 'सी" युक्त पानी से नहाना है फायदेमंद

विटामिन 'सी" युक्त पानी से नहाना आपकी त्वचा और बालों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। सेहत और सौंदर्य से जुड़ा यह नया चलन इन दिनों पश्चिमी देशों के लोगों को खासा पसंद आ रहा है। लोग अपने बाथरूम में विटामिन 'सी" फिल्टर नामक एक उपकरण का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पानी में क्लोरीन की मात्रा को कम करके त्वचा और बालों को बेहतर बनाता है। पानी में मौजूद क्लोरीन के कई बार कुछ अतिरिक्त प्रभाव देखने में आते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक क्लोरीनयुक्त पानी त्वचा को खुश्क बना सकता है। इससे बालों में रूसी भी हो सकती है। इससे सिरदर्द और आंखों में चुभन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। जबकि विटामिन 'सी" फिल्टर पानी में मौजूद क्लोरीन के अवशेषों के आशंकित अतिरिक्त प्रभाव को दूर करता है। यह त्वचा में होने वाली बीमारी, एग्जिमा को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है।
आलीशन होटलों से लेकर इमारतों में
विशेषज्ञों के मुताबिक विटामिन 'सी" क्लोरीन के हानिकारक प्रभावों को कम करता है। अमेरिका के कृषि विभाग द्वारा विटामिन 'सी" को क्लोरीन का आजमाया हुआ प्रतिकारक माना गया है। अमेरिका की आलीशान होटलों समेत कई इमारतों में पहले से ही विटामिन 'सी" युक्त क्लोरीन फिल्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लॉस वेगास स्थित एमजीएम ग्रांड होटल का कहना है कि विटामिन 'सी" फिल्टर से युक्त फव्वारे स्वस्थ त्वचा और बाल को प्रोत्साहित करने वाले मूल उपकरण हैं। इस होटल ने अपने स्टे वेल कमरों के बाथरूम में विटामिन 'सी" फिल्टर लगाए हैं।  

ऑफिस में यूं दूर करें तनाव

ऑफिस में आपके साथी और काम के बोझ के कारण तनाव हो सकता है। इसका असर आपके काम पर पड़ता है। इसे कम करने के लिए आप इन 5 तरीकों को अपनाकर तनाव कम कर सकते हैं।
संगीत सुनें
यूनिवर्सिटी ऑफ विंडसर, कनाडा के अध्ययन के अनुसार काम के दौरान संगीत सुनने से सकारात्मसक ऊर्जा मिलती है और जिससे दिमाग ज्यादा एकाग्र होता है। जिसका असर आदमी के काम पर पड़ता है और वह काम को अच्छे तरीके से करता है। इसलिए काम के दौरान संगीत सुनने की आदत डालें।
 पीठ का दर्द
ऑफिस में काम के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी बैक पेन से होती है।  पीठ में दर्द का सबसे बड़ा कारण है कुर्सी, अगर कुर्सी पर बेढंगे तरीके से बैठा जाए तो बैक पेन होता है। इससे बचने के लिए गर्दन के व्यायाम कीजिए।
थोड़ी देर टहलें
ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठने की बजाए थोड़ी देर टहल लीजिए। इस दौरान आप अपने साथियों से बात कर सकते हैं। ऐसा करने शरीर में खून का संचार तेजी से होगा और नींद भी नहीं आएगी।
बॉस से डिस्कस करें
अपने काम के बारे में अपने बॉस से डिस्कस कीजिए। आपने जो काम किया है उसकी जानकारी बॉस को दीजिए, अपने आइडिया और प्लांनिंग्स के बारे में बात कीजिए। इससे आपको सुकून मिलेगा साथ ही संतुष्टि भी।
पेट का ध्यान रखें
खान-पान का असर काम पर पड़ता है। इसलिए ऑफिस में लंच के दौरान हमेशा सेहतमंद आहार ही खाइए। अधपका खाना, ज्यादा स्पाइसी और ऑयली खाने से बचिए। सलाद और हरी सब्जियों का ज्यादा प्रयोग कीजिए। 

कैसे पहचानें ठंड में होने वाली एलर्जी को

सर्दियों में एलर्जी आम बात है। एलर्जी में जरा-सी लापरवाही गंभीर रूप ले सकती है। किसी भी गंभीर समस्या से बचे रहने के लिए एलर्जी और इसके लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। जानिए, सर्दियों में होने वाली एलर्जी और इसके  लक्षणों के बारे में।
सर्दियों को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन यह मौसम एलर्जी का कारण भी होता है। संवेदी त्वचा वाले लोगों के लिए इस मौसम में ज्यादा परेशानी होती है। डॉक्टरों के मुताबिक ठंड बढ़ने के साथ ही एलर्जी रोगियों की संख्या में भी वृद्धि होती है। यदि आप भी एलर्जी से दूर रहकर सर्दियों के सुहाने मौसम का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो अपनी सेहत और किसी भी प्रकार की एलर्जी के प्रति सजग रहें।
आपको यह पता होना चाहिए कि सर्दी में किस प्रकार की एलर्जी हो सकती है व इसके लक्षण होते हैं। सर्दियों में एलर्जी होने के कई कारण होते हैं। कई कारणों में से एक कारण कपड़े भी होते हैं। गर्म कपड़ों से एलर्जी होने के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। ऐसे में शरीर पर खुजली और चकत्ते या फफोले हो जाते हैं। खुली हुई त्वचा ऐसे में शुष्क हो जाती है। कई बार एलर्जी इस कदर बढ़ जाती है कि नाक और कान लाल हो जाते हैं। वहीं होंठों पर सफेद रंग की परत बन जाती है।
सर्दियों में होने वाली एलर्जी
सर्दियों में नाक की एलर्जी सबसे ज्यादा होती है। इस एलर्जी को नेजल 'ब्रॉन्कियल एलर्जी' भी कहते हैं। एलर्जी होने के लिए यदि धूल व मिट्टी जिम्मेददार हो तो उपचार के लिए एंटीहिस्टामिनिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। यदि लंबे समय से एलर्जी की समस्या है, तो उपचार के लिए एंटी एलर्जिक दवा के साथ ही स्टेरॉयड या स्प्रे का उपयोग भी किया जा सकता है। अस्थमा के मरीजों को एलर्जी से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन्हेलर का इस्तेमाल करना चाहिए।
सर्दियों में होने वाली एलर्जी के लक्षण
सांस की तकलीफ से पीड़ित लोगों में मौसम के बदलाव के साथ छाती में जकड़न और सांस लेने में परेशानी की समस्या बढ़ जाती है। बच्चों व वयस्कों की सांस की नली (रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट) के ऊपरी व निचले भाग में भी संक्रमण बढ़ जाता है। इसके सामान्य लक्षणों के रूप में नाक बहना, छींक आना, आंखों में पानी आना, नाक में खुजली, बलगम जमा होना और थकावट आदि लक्षण हैं।

  • सर्दी होने पर नाक से पानी आना
  • लगातार छीकें आना, आंखों में खुजली, लाली, सूजन, जलन या पानी बहना
  • बदन दर्द, सिर या आंखों में भारीपन
  • नाक में खुजली, खराश के साथ हल्का दर्द
  • नाक का बहना या बंद होना
  • गले में खुजली होना या खांसी आना
  • छींकना, खांसना और अस्थमा या दमे का अटैक
  • त्वचा पर लाली होना और खुजली होना
  • कान में तकलीफ होने पर सुनने की क्षमता में कमी आना
  • मुंह के आसपास सूजन या निगलने में परेशानी होना
  • श्वास मार्ग अवरुद्ध होने से सांस लेने में परेशानी होना
  • नाक की त्वचा का लाल हो जाना या सूजन आना

इसके अलावा सर्दियों में सन एलर्जी भी आम है। सर्दियों में अधिक देर तक धूप में बैठने से त्वचा जल जाती है और चेहरे व शरीर पर लाल व काले धब्बे हो जाते हैं। इस तरह की एलर्जी को सन एलर्जी कहा जाता है। इसके अलावा सर्दियों में स्केबिज नामक संक्रामक एलर्जी भी हो सकती है। सर्दियों में हमारी त्वचा बहुत कड़ी और रूखी हो जाती है, जिस कारण बहुत खुजली होती है, इसे स्केबिज कहते हैं।  

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

खट्टे हैं तो क्या हुआ

प्रकृति ने हमें, जितने भी फल दिए हैं, लगभग सभी हमारे लिए फायदेमंद होते हैं, फिर चाहे वह खट्टे ही क्यों न हों। संतरे, किन्नू और नीबू सहित जितने भी खट्टे फल होते हैं, सभी में घुलनशील फाइबर होते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को रक्त प्रवाह में जाने से रोकते हैं। इनमें मौजूद विटमिन सी रक्त वाहिका नलियों की सफाई करता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल शरीर से बाहर निकल जाता है। इनमें एंजाइम्स भी होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया तेज करके कोलेस्ट्रॉल घटाने में सहायक होते हैं।

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What happened if it is sour

Almost all the fruits that nature has given us, are beneficial for us, even if they are sour. All citrus fruits, including oranges, kinnow and lemon, all contain soluble fiber, which prevents bad cholesterol from entering the bloodstream. The vitamin C present in these cleans the blood vessel tubes, which removes bad cholesterol from the body. They also contain enzymes, which help in reducing cholesterol by speeding up the process of metabolism.

Dharmendra Singh   movetonature.blogspot.com

साबूदाना: तुरंत मिलेगा ऊर्जा

साबूदाने के सेवन से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि फैट्स की मात्रा कम होती है। यह व्रत में शरीर को जरूरी कैलोरी मुहैया कराता है। चावल के साथ साबूदाना का कांबिनेशन शरीर की गर्मी को कम करने और ठंडक पहुंचाने में मदद करता है।  

लतीफा: सब कुछ ठीक हो जाएगा

कपिल, 'डॉक्टर साहब। मेरी आंखें कमजोर हैं। मेरे हाथ कमजोर हैं। मेरे पांव कमजोर हैं।"
बीच में ही मरीज को रोकते हुए डॉक्टर बोला, 'चिंता की कोई बात नहीं। सब कुछ ठीक हो जाएगा। यह लो दवा।"
कुछ समय बाद मरीज से डॉक्टर बोला, 'अब चुपचाप क्यों बैठे हो? लाओ मेरी फीस और जाओ घर। दवा खाना शुरू करो। बहुत फायदा होगा।"
मरीज कुछ संकोच करते हुए बोला, 'डॉक्टर साहब आपने मेरी पूरी बात तो सुनी ही नहीं थी। दरअसल, मेरी जेब भी कमजोर है।"

लतीफा: फिर से जवान हो जाएंगे

डॉक्टर एक बूढ़े मरीज से बोलीं, 'ऐसी दवा दूंगी कि आप फिर से जवान हो जाएंगे।"
बूढ़ा मरीज निवेदन करके बोला,   'नहीं डॉक्टर। ऐसा जुल्म मत करना, नहीं तो हमारी पेंशन बंद हो जाएगी।'


लतीफा: आपको कैंसर होगा

शिक्षक ने छात्र से सवाल किया, 'दांत सड़ गया है। इस वाक्य को भूतकाल में बदलो।"
छात्र, 'तंबाकू खाई थी।"
शिक्षक खीझते हुए, 'अच्छा! चलो अब इसे भविष्य काल में बदलो। "
छात्र आंख मटकाते हुए, 'आपको कैंसर होगा।"


लतीफा: मैं पूंछ खींचूंगा

प्रिया अपने भाई से, ' अगर आप कुत्ते के कान खींचोगे तो मैं तुम्हारे कान खींचूंगी। समझे बुद्दू।"
भाई, 'मैं तो उसकी पूंछ खींचूंगा।"

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Latifa: I'll pull the tail

Priya to her brother, 'If you pull the dog's ears, I will pull your ears. Got it, Buddu. "

Brother, 'I'll pull his tail. "


Dharmendra Singh    movetonature.blogspot.com

शरारती बच्चे बनते हैं बेहतर लर्नर

अक्सर बच्चों की शैतानी, पैरेन्ट्स को खासी परेशान कर देती है। उन्हें लगता है ये कब बड़े होंगे और उनकी शैतानियों में कब कमी आएगी। मगर चिंता मत कीजिए, आपके बच्चे की यह शैतानी भी उसके बेहतर भविष्य के लिए अच्छी हो सकती है! जी हां, एक नया अध्ययन अभिभावकों के लिए कमाल की जानकारी लेकर आया है। इस अध्ययन के अनुसार भोजन के समय बच्चे जितनी अधिक खेल व शरारत करते हैं वे आगे चलकर उतने ही अच्छे विद्यार्थी या सीखने वाले (लर्नर) बन सकते हैं।
क्या जानना चाहा 
लोवा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया कि कैसे 16 महीने की उम्र में बच्चे तरल (नॉन सॉलिड) खाद्य पदार्थों जैसे दलिया से लेकर गोंद तक के लिए शब्दों को जान पाते होंगे। पुराने शोध बताते हंै कि नन्हा बच्चा ठोस वस्तुओं के बारे में ज्यादा आसानी से इसलिए जान पाता है क्योंकि वे आसानी से उनके अपरिवर्तनीय आकार और शक्ल के हिसाब से उनकी पहचान कर सकते हैं।
लोवा विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर लारिसा सैमुएलसन ने कहा कि अगर आप बच्चों को परिचित जगह पर बैठाते हैं। उन परिस्थितियों में शब्द सीखने की क्षमता बढ़ जाती है क्योंकि इस दौरान बच्चे खाने में नॉन-सॉलिड चीजें ज्यादा खाते हैं।  सैमुएलसन के अनुसार अगर बच्चों को हाईचेयर (बच्चों के बैठने वाली कुर्सी) पर बैठाकर इस चीजों से रूबरू कराते हैं तो यह उनके लिए और अच्छा होता है। वे ऐसे बैठने के भी आदि होते हैं तो इससे उन्हें नॉन सॉलिड चीजों के बारे में जानने और उन्हें याद रखने में मदद मिलती है। इस तरह से परखा
शोधकर्ताओं की टीम ने अपने विचार को परखने के लिए छह महीने के बच्चों को 14 नॉन सॉलिड वस्तुओं, जिनमें अधिकतर भोजन और पेय पदार्थ थे, से परिचित कराया। इनमें एप्पल सॉस, पुडिंग, जूस और सूप आदि शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इन बच्चों को ये चीजें दी और 'डैक्स" और 'कीव" जैसे शब्द बनाने को दिए। एक मिनट बाद उन्होंने इन बच्चों को इसी भोजन को दूसरे आकार और रूप में पहचानने को कहा। बेशक कई बच्चे मुस्कुराते हुए इस कार्य में जुट गए और इस भोजन को छूकर, फेंककर, हाथ लगाकर उससे खेलकर नॉन सॉलिड चीजों को समझने लगे और उन्होंने इन्हें उनके काल्पनिक नामों से पुकारा।
अध्ययन से पता चला है कि वे बच्चे जो खाद्य पदार्थों में ज्यादा रूचि से जुटे हुए थे, उन्होंने इन खाद्य पदार्थों को उनकी बनावट द्वारा सही ढंग से पहचान लिया।  

कील-मुहांसे की समस्या से बचाएगी समुद्री शैवाल!

कील-मुहांसों की समस्या से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी है। हाल ही में एक अध्ययन में पता चला है कि चेहरे पर आने वाले कील-मुहांसे और दाग-धब्बों से निजात पाने के लिए समुद्री शैवाल काफी फायदेमंद होता है। खासकर किशोरावस्था में कील-मुहांसों की समस्या से उनकी खूबसूरती कम हो जाती है। इसकी वजह से परेशान लोग हर तरह के उपाय अपनाते हैं लेकिन समस्या जस की तस रहती है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या से निपटने के लिए बेहद कारगर उपाय ढूंढ निकाला है। उनका मानना है कि समुद्री शैवाल दाग-धब्बों और मुंहासों से निजात दिलाने में असरदार साबित हो सकती है।
फैटी एसिड करेंगे मदद
शैवाल के द्वारा बनने वाले फैटी एसिड में त्वचा को साफ करने के गुण होते हैं। इसके कारण यह मुंहासों को पनपने नहीं देता और अगर पनप जाते हैं तो दाग-धब्बों को मिटाने में मदद करता है। स्टिरलिंग इंस्टीट्यूट के अध्ययन के मुताबिक फैटी एसिड 'प्रोपियोनिबैक्टेरियम एक्ने" को बढ़ने से रोकता है,जो त्वचा पर कील-मुहांसे पैदा करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।   

माफ करेंगे तो दिल रहेगा स्वस्थ

दूसरों को माफ करना और किसी भी कड़वाहट को भूलकर आगे बढ़ना सिर्फ आपसी रिश्तों के लिए ही अच्छा नहीं है बल्कि यह अच्छी सेहत का भी गूढ़ मंत्र है। हमेशा दूसरों के लिए मन में कड़वाहट लाते हुए रिश्तों में गांठ बांधना कभी भी अच्छा नहीं हो सकता। इसके लिए आपसी सामंजस्य जरूरी है और यह तभी हो सकता है कि आप अपने ईगो, अपने क्रोध को खत्म करते हुए दूसरों को आसानी से माफ कर सकें।
एक नए अध्ययन की मानें तो इस गुण के धनी लोगों का दिल हमेशा सेहतमंद रहता है। अमेरिका की सैन डिएगो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अपने गुस्से को बर्दाश्त कर लेते हैं, उनका ब्लड प्रेशर भी स्थिर रहता है। इस अध्ययन में कहा गया है कि माफ करने से तनाव कम होता है और इसका शरीर पर भी कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है। अध्ययन दल के प्रमुख डॉक्टर ब्रिटा लार्सेन ने कहा कि गुस्सा करने वालों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। क्रोध न सिर्फ रिश्तों को पल में बिगाड़ने का काम करता है बल्कि इसके दुष्प्रभाव सेहत पर भी आसानी से दिख जाते हैं। इसलिए, जनाब यदि आप भी अपने दिल की सेहत को सही रखना चाहते हैं तो कम से कम इस बात का प्रण तो कर ही लीजिए कि ईगो और क्रोध को अपने नजदीक नहीं आने देंगे...।  

कॉमन कोल्ड का यूं करें इलाज

कॉमन कोल्ड की कोई स्थाई चिकित्सा नहीं है। यह समस्या आमतौर पर तीन-चार दिनों में स्वत: ठीक हो जाती है, लेकिन ठंड छाती में बैठ जाए तो गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए कॉमन कोल्ड में होने वाली समस्याओं से बचने के लिए कुछ उपचार को अपनाने में कोई बुराई नहीं है। जुकाम के दौरान लोगों को सिर व शरीर में दर्द व भारीपन महसूस होता है, जिसकी वजह से कई परेशानी होती है।
कॉमन कोल्ड की चिकित्सा का अर्थ दवाओं का सेवन करना नहीं है। आप चाहें तो घर पर कुछ खास नुस्खों के जरिए जुकाम को कम कर सकते हैं। ज्यादातर लोग जुकाम के दौरान दवा लेने से बचते हैं, क्योंकि यह दवाएं नाक से निकलने वाले द्रव्य को रोक देती है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी दवा नुकसान कर सकती है।एंटी एलर्जिक होने के कारण इन दवाओं से ड्रायनेस व सुस्ती आ जाती है। साथ ही नाक सूख जाने से कभी-कभी दिक्कत भी हो सकती है। सिर में भारीपन व दर्द की शिकायत होती है जो गंभीर समस्या का कारण बन जाती है।
जानें, कॉमन कोल्ड की समस्या से बचने के लिए किस तरह की चिकित्सा का प्रयोग करना चाहिए
नाक साफ करें
जुकाम के दौरान जरूरी है कि नाक से निकलने वाले द्रव्य को रोका ना जाए। समय-समय पर सही तरीके से नाक की सफाई करें। इससे अंदर जमा कफ नाक के रास्ते बाहर आ जाता है और आपको हल्का महसूस होता है। अगर द्रव्य को निकलने से रोका जाए तो यह सिर में वापस चला जाता है जो कि परेशानी का कारण बन सकता है। नाक साफ करने के बाद हाथ धोना न भूलें।
पानी की कमी न हो दें
आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि जुकाम होने पर पानी या किसी तरल पदार्थ के सेवन का मन नहीं करता। ऐसे में जुकाम की समस्या और बढ़ जाती है। जुकाम के दौरान मन ना करने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में गर्म पानी पीते रहें। इसके साथ ही अन्य लिक्विड भी लेते रहें, इससे आराम मिलेगा। गर्म पानी, सूप, हल्दी मिला दूध, काली चाय आदि का सेवन कफ ढीला करने में मदद करता है। वहीं कैफीन और अल्कोहल का सेवन न करें, क्योंकि इससे यूरीन अधिक होती है और शरीर का फ्लूएड कम होता है।
मसालेदार भोजन 
भारतीय मसालों से बने तीखे भोजन का सेवन जुकाम की समस्या में मददगार साबित हो सकता है। अत्यधिक ठंड और कफ से जकड़न की राहत के लिए मसाले से भरपूर डाइट काफी फायदेमंद हो सकती है। इस दौरान मीट, डेयरी उत्पाद और तले हुए भोजन से दूरी बरतना भी उतनी ही जरूरी है।
गरारे करें
गले में दर्द की समस्या के कारण्ा कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एक ग्लास गरम पानी में चुटकी भर नमक, चुटकी भर खाने का सोडा मिलाकर दिन में दो बार तथा सोते समय गरारे करने से गले की खराश में आराम मिलता है।
विटामिन का सेवन
जुकाम के दौरान विटामिन ए, सी और ई से भरपूर डाइट कफ और जुकाम के संक्रमण को खत्म करने और आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। विटामिन सी, एक एंटी इंफेक्टिव विटामिन है, जो सर्दी के उपचार में काफी लाभदायक है। एक ग्लास गर्म पानी में नीबू के रस के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से भी काफी फायदा होता है।  

पौष्टिक आहार देगा सही फिटनेस

त्योहार और शादियों के मौज-मस्ती भरे मौसम में खूबसूरत और फिट नजर आना सभी की प्राथमिकता होती है। लेकिन इस दौरान अक्सर हमारा खानपान गड़बड़ा जाता है। ऐसे में पौष्टिक खानपान का ध्यान रखकर स्वयं को स्वस्थ और फिट रख सकते हैं। यह बात एक शोध में सामने आई है।
कम भोजन और स्वस्थ भोजन में अंतर
हेल्थ वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके" का मानना है कि वजन कम करने के लिए केवल व्यायाम ही काफी नहीं है। इसके साथ ही सही और पौष्टिक खानपान पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है। यहां कम भोजन करने और स्वस्थ भोजन करने के अंतर को समझना भी जरूरी है। भोजन की मात्रा से अधिक फर्क इस बात से पड़ता है कि आखिर आप किस प्रकार का भोजन कर रहे हैं।
पानी खूब पीएं
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना स्वस्थ रहने का दूसरा महत्वपूर्ण नुस्खा है। गर्मी के मौसम में प्यास ज्यादा लगती है, इसलिए हम ज्यादा पानी पीते हैं। मगर ठंड के मौसम में बहुत से लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते। जबकि ज्यादा मात्रा में पानी पीने से न केवल शरीर में पानी और कैलोरी में संतुलन बना रहता है बल्कि त्वचा मुलायम रहती है।
नमक का सेवन कम
नमक का अधिक सेवन त्वचा में सूजन पैदा कर देता है इसलिए खाना बनाते या खाते समय भोजन में नमक की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
फाइबर हो शामिल
इसी तरह भोजन में फाइबर की उचित मात्रा शामिल करने से हाजमा दुरूस्त रहता है और शरीर स्वस्थ रहता है। फाइबर युक्त खाद्यपदार्थ जैसे संतरे, मशरूम, रैस्बेरी, ब्रोकली और गोभी स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभप्रद होते हैं। ताजा फल, सब्जियों और अनाज के सेवन से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिलती है और वजन नियंत्रित रहता है। 

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

खाने पर दें ध्यान, घट जाएगा कोलेस्ट्रॉल

आज के दौर में कई लोगों का कोलेस्टॉल बढ़ा मिल जाएगा। लोग इसे कम करने के लिए अनेक तरह के जतन करते हैं। कुछ लोग बाजार में बिकने वाली दवाओं का भी सेवन करते हंै, जबकि वे अपने खानपान को ही सुधार कर इस पर काबू पा सकते हैं। यदि व्यक्ति प्रतिदिन पचास ग्राम मेथी का सेवन करे तो उसके शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी कम हो जाएगी। मेथी में प्रोटीन, विटामिनसी, नायसिन, पोटैशियम व डायोसजेनिन जैसे तत्व होते हैं, जो कई शारीरिक समस्याओं को भी दूर करते हैं। मेथी से शरीर में डायोसजेनिन नामक सेक्स हार्मोन भी बढ़ता है।