शनिवार, 28 दिसंबर 2013

पिटाई से बच्चे सुधारते नहीं, बिगड़ते हैं

यदि आप भी बच्चों की शरारत से परेशान रहते हैं और अक्सर उन्हें पीटकर सुधारने की कोशिश करते हैं तो अपनी इस आदत को बदल दीजिए। पिटाई से बच्चे सुधरते नहीं बल्कि और बिगड़ जाते हैं। ऐसा करके आप खुद अपने बच्चे को अधिक आक्रामक बना रहे हैं। साथ ही उसके व्यवहार निर्माण को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। जी हां, एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि बच्चों को मारना-पीटना उन्हें अधिक आक्रामक बनाता है। साथ ही वे बुरा बर्ताव करने लगते हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं, इसका उनके व्यवहार पर सीधा और गहरा असर पड़ता है। इससे इस बात पर कोई असर नहीं पड़ता कि बाकी समय में बच्चों के साथ आप कैसा बर्ताव करते हैं।
*पूरी तरह से की जांच-परख :
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन ऑफ सोशल वर्क में सहायक प्रोफेसर शावना ली के मुताबिक आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक रिश्तों के दौरान अगर बच्चों की पिटाई की जाती है तो इससे बच्चे को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इस शोध में हमने इस प्रचलित मान्यता को परखा और पाया कि पिटाई से कुछ समय बाद बच्चों के व्यवहार पर नकरात्मक असर पड़ता है। इससे इस बात का भी कोई लेना-देना नहीं है कि माएं अपने बच्चों के साथ कितनी गर्मजोशी से मिलती हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि पिटाई से बच्चों में आक्रामकता बढ़ती है, लेकिन इसके बावजूद अनुशासित रखने के नाम पर बच्चों को पिटाई की जाती है।
*3200 से अधिक प्रतिभागी :
इस शोध में 3200 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे। इनमें व्हाइट, अफ्रीकन अमेरिकन और हिस्पेनिक परिवारों ने भाग लिया। डेटा तब एकत्रित किए गए जब बच्चों की उम्र एक, तीन और पांच वर्ष थी। मांओं ने बताया कि लगभग कितने अंतराल पर बच्चों की पिटाई होती है और इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के आक्रामक बर्ताव और बच्चों के प्रति अपने सकारात्मक व्यवहार के बारे में भी बताया। यह शोध 'जर्नल डेवलपमेंट साइकोलॉजी" में प्रकाशित हुआ है।
*डांटना भी है नुकसानदायक :
इसके अलावा एक अन्य शोध में यह बात भी सामने आई है कि जिन किशोरों पर उनके अभिभावक चिल्लाते हैं, उनमें अवसाद और बेवजह तर्क करने की आदत भी पड़ जाती है। 

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