'थिंक ट्वाइस एंड देन स्पीक" बोलने से पहले दो बार सोच लो और फिर बोलो। यह बात कहना आसान है, मगर इस पर अमल लाना बेहद जरूरी है क्योंकि बोलने में तो कुछ ही पल लगते हैं लेकिन कभी मुंह से ऐसी भी बातें निकल जाती हैं, जो दूसरों को चोट पहुंचा सकती हैं। इसलिए यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है तो जरा सोच लीजिए आपकी बातें किसी को चोट पहुंचाने का काम तो नहीं कर रही है ना!
इसी बात को ध्यान रखते हुए वैज्ञानिकों ने व्यक्ति के दिमाग और उसकी प्रणाली को जानने की कोशिश की। विशेषज्ञों ने पता लगाया है कि इंसान के दिमाग में एक ऐसा सर्किट होता है, जो किसी परिस्थिति में दिमाग को सोचने से रोकता है। जिसे सेल्फ कंट्रोलिंग से आसानी से जाना जा सकता है।
ह्यूस्टन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र और सैन डिएगो की यूनिवर्सिर्टी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। विशेषज्ञों ने सोचा कि क्या लोगों के शरीर के अंदर स्वानुशासन का ऐसा कोई यंत्र या प्रक्रिया है, जिससे किसी सहयोगी से या सोशल मीडिया पर किसी मित्र से बात करते हुए कब और कहां रूका जाए, इसका निर्धारण किया जा सके।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्सर कई लोग इस बात का निर्धारण नहीं कर पाते कि किसी दोस्त या सोशल मीडिया पर किसी से बात करते समय कहां और कब रूकना चाहिए। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए इंसान के दिमाग में एक यंत्र मौजूद होता है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी तकनीक पेश की है, जिससे दिमाग की उत्तेजन प्रणाली के माध्यम से स्वानुशासन प्रणाली को तेज किया जा सकता है।
यूटीहेल्थ मेडिकल स्कूल के द विवियन एल स्मिथ डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोसर्जरी में ऐसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध के वरिष्ठ लेखक नितिन टंडन ने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में ऐसे तमाम अवसर आते हैं, जहां किसी को भी प्रतिक्रियाओं को रोकना चाहिए। उदाहरण के लिए उस समय हर हाल में जब बात सामाजिक संदर्भ में अनुचित हो तो बोलना रोक दें। इसके लिए सेल्फ कंट्रोलिंग पावर जरूरी है। जिससे अनुचित बातों को बोलने से रोका जा सके। यह कंट्रोलिंग पावर ही दिमाग के स्विच को स्टीम्युलेट होने से रोकती है।
इसी बात को ध्यान रखते हुए वैज्ञानिकों ने व्यक्ति के दिमाग और उसकी प्रणाली को जानने की कोशिश की। विशेषज्ञों ने पता लगाया है कि इंसान के दिमाग में एक ऐसा सर्किट होता है, जो किसी परिस्थिति में दिमाग को सोचने से रोकता है। जिसे सेल्फ कंट्रोलिंग से आसानी से जाना जा सकता है।
ह्यूस्टन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र और सैन डिएगो की यूनिवर्सिर्टी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। विशेषज्ञों ने सोचा कि क्या लोगों के शरीर के अंदर स्वानुशासन का ऐसा कोई यंत्र या प्रक्रिया है, जिससे किसी सहयोगी से या सोशल मीडिया पर किसी मित्र से बात करते हुए कब और कहां रूका जाए, इसका निर्धारण किया जा सके।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्सर कई लोग इस बात का निर्धारण नहीं कर पाते कि किसी दोस्त या सोशल मीडिया पर किसी से बात करते समय कहां और कब रूकना चाहिए। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए इंसान के दिमाग में एक यंत्र मौजूद होता है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी तकनीक पेश की है, जिससे दिमाग की उत्तेजन प्रणाली के माध्यम से स्वानुशासन प्रणाली को तेज किया जा सकता है।
यूटीहेल्थ मेडिकल स्कूल के द विवियन एल स्मिथ डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोसर्जरी में ऐसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध के वरिष्ठ लेखक नितिन टंडन ने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में ऐसे तमाम अवसर आते हैं, जहां किसी को भी प्रतिक्रियाओं को रोकना चाहिए। उदाहरण के लिए उस समय हर हाल में जब बात सामाजिक संदर्भ में अनुचित हो तो बोलना रोक दें। इसके लिए सेल्फ कंट्रोलिंग पावर जरूरी है। जिससे अनुचित बातों को बोलने से रोका जा सके। यह कंट्रोलिंग पावर ही दिमाग के स्विच को स्टीम्युलेट होने से रोकती है।
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