बुधवार, 25 दिसंबर 2013

टमाटर में है स्वाद के साथ सेहत भी

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है हेल्दी डाइट, क्योंकि इस पर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी होती है। वैसे तो बैलेन्स और रिच डाइट लेने वाली बात सभी को मालूम है, मगर कभी-कभी कोई चीज छूट जाए तो उसे याद कर खाने में शामिल करना न भूलें। यहां बात हो रही है टमाटर की। यूं तो हर रोज आप अपने खाने में टमाटर को शामिल करते ही हैं लेकिन क्या आप टमाटर के सेवन से महिलाओं को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं, नहीं तो हम आपको बताते हैं। हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक टमाटर से युक्त आपकी रिच डाइट ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शोध में बताया गया कि टमाटर का सेवन महिलाओं के लिए बेहद गुणकारी है। जो पोस्टमैनोपॉजल से होने वाले खतरों को काफी कम करता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार पोस्टमैनोपॉज स्टेज में महिलाओं में उनके वजन बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। खाने में टमाटर की हाई डाइट लेने से शरीर में फैट और शुगर मेटाबोलिज्म को रेग्युलेट करने वाले हार्मोन के स्तर पर पॉजिटीव इफेक्ट पड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से दूर रहा जा सकता है।
*बहुत कम समय में ज्यादा फर्क :
न्यूजर्सी की रूटगर्स यूनिवर्सिटी में एपिडिमियोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर अदना लानोस ने बताया कि टमाटर का गुदा या टमाटर से बने उत्पादों की पर्याप्त मात्रा लेने से बहुत कम समय में ही कई फर्क दिखाई देने लगते हैं। टमाटर में पाया जाने वाला 'लाइकोपीन तत्व" न सिर्फ पोस्टमैनोपॉजल इफेक्ट को कम करता है बल्कि फैट और शुगर को कंट्रोल करते हुए व्यक्ति को हेल्दी और पूरी तरह से फिट भी रखता है।
इसके अलावा इस शोध में यह भी कहा गया है कि न्यूट्रीएंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स और फायटोकेमिकल्स जैसे लाइकोपीन से युक्त फ्रूट्स और वेजिटेबल्स का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से दूर रहा जा सकता है।
*क्या पाया शोध में :
शोध के दौरान महिलाओं को दो समूहों में बांटा गया। दस सप्ताह तक एक समूह को टमाटर की अधिकता वाली डाइट और दूसरे समूह को सोया उत्पादों की अधिकता वाली डाइट का सेवन कराया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सोया उत्पादों की अपेक्षा टमाटर की अधिकता वाली डाइट के सेवन से महिलाओं का ब्लड शुगर लेवल और फैट का स्तर नौ प्रतिशत तक कम हुआ और ब्रेस्ट कैंसर से बचाव वाला हार्मोन 'एडीपोनेक्टिन" का स्तर बढ़ा। यह महिलाओं के स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी थी, जिसके आधार पर शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे।  

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