'अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज, मेक्स ए मैन हेल्दी, वेल्दी एंड वाइज"। अमूमन हर पैरेन्ट्स अपने बच्चों को सुबह जल्दी उठने और रात को जल्दी सोने का यह पाठ पढ़ाते हैं। ताकि वे स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान बनें। मगर क्या आपने कभी गौर किया है कि धीरे-धीरे दिनचर्या में आप इतने मशगूल हो जाते हैं कि बच्चे देर रात तक जागते हुए टीवी कम्प्यूटर या पढ़ाई में लगे रहते हैं, आपको ध्यान ही नहीं रहता। जिसका असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बताया गया है कि देर रात तक जागने वाले बच्चों का दिमाग कमजोर हो जाता है और वे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
रात में देर से सोने वाले टीनएजर्स पढ़ने-लिखने में पीछे होते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भावनात्मक परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इनके मुकाबले जो बच्चे जल्दी से जाते हैं, उनका शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर होता है।
*क्या पाया अध्ययन में :
हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस पर अध्ययन किया। इस रिसर्च टीम के हेड लॉरेन के मुताबिक जो बच्चे रात में 11:30 के बाद के बाद बिस्तर पर जाते हैं, स्कूल में उनका ग्रेड प्वाइंट बेहद खराब होता है। इन्हें इमोशनल दिक्कतों से भी दो-चार होना पड़ता है। हाई स्कूल, ग्रेजुएशन और कॉलेज जाने के दिनों में भी इन्हें काफी मुश्किलें हो सकती हैं।
*2,700 टीनएजर्स पर किया शोध :
इस अध्ययन के लिए 13 से 18 साल के बीच के तकरीबन 2,700 टीनएजर्स के सोने के घंटों पर शोध हुआ। यह शोध अमेरिका के नेशनल लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ अडोलसेंट हेल्थ की ओर से वर्ष 1995 और 1996 में की गई थीं। इसके बाद 2001-02 में जब स्टडी में शामिल बच्चे और बड़े हो गए तो इनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की गईं और अब इसका एनालिसिस किया गया। इस शोध का मकसद यह पता करना था कि क्या बच्चों के सोने के वक्त का उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर कोई असर पड़ता है या नहीं। शोध के दौरान यह पता चला कि इनमें से 23 प्रतिशत बच्चे 11:15 बजे या फिर इसके बाद सोने जाते थे।
स्टडी के बीच वक्त का जो अंतराल था, उसमें सारे टीनएजर्स कॉलेज तक पहुंच चुके थे। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड से पता चला कि ग्रेजुएशन में उनका ग्रेड काफी चिंताजनक था।
रात में देर से सोने वाले टीनएजर्स पढ़ने-लिखने में पीछे होते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भावनात्मक परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इनके मुकाबले जो बच्चे जल्दी से जाते हैं, उनका शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर होता है।
*क्या पाया अध्ययन में :
हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस पर अध्ययन किया। इस रिसर्च टीम के हेड लॉरेन के मुताबिक जो बच्चे रात में 11:30 के बाद के बाद बिस्तर पर जाते हैं, स्कूल में उनका ग्रेड प्वाइंट बेहद खराब होता है। इन्हें इमोशनल दिक्कतों से भी दो-चार होना पड़ता है। हाई स्कूल, ग्रेजुएशन और कॉलेज जाने के दिनों में भी इन्हें काफी मुश्किलें हो सकती हैं।
*2,700 टीनएजर्स पर किया शोध :
इस अध्ययन के लिए 13 से 18 साल के बीच के तकरीबन 2,700 टीनएजर्स के सोने के घंटों पर शोध हुआ। यह शोध अमेरिका के नेशनल लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ अडोलसेंट हेल्थ की ओर से वर्ष 1995 और 1996 में की गई थीं। इसके बाद 2001-02 में जब स्टडी में शामिल बच्चे और बड़े हो गए तो इनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की गईं और अब इसका एनालिसिस किया गया। इस शोध का मकसद यह पता करना था कि क्या बच्चों के सोने के वक्त का उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर कोई असर पड़ता है या नहीं। शोध के दौरान यह पता चला कि इनमें से 23 प्रतिशत बच्चे 11:15 बजे या फिर इसके बाद सोने जाते थे।
स्टडी के बीच वक्त का जो अंतराल था, उसमें सारे टीनएजर्स कॉलेज तक पहुंच चुके थे। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड से पता चला कि ग्रेजुएशन में उनका ग्रेड काफी चिंताजनक था।
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