अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे पढ़ाई में बेहतर रहें तो उन्हें दोपहर में हल्की झपकी लेने से न रोकिए। इस तरह का यह पहला अध्ययन है जिसमें यह दावा किया गया है कि दिन के समय एक घंटे की नींद प्री-स्कूल के बच्चों की मेमोरी को बेहतर करता है, जिससे उनके सीखने की प्रक्रिया तेज होती है।
मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह निष्कर्ष निकाला है। रिसर्चर्स ने पाया कि बच्चों की शुरुआती जिंदगी में मेमोरी को मजबूत करने के लिए दिन की नींद एक अहम भूमिका निभाती है। रिसर्च के ये नतीजे 40 बच्चों पर किए गए प्रयोगों के आधार पर निकाले गए हैं। शोधकर्ता साइकोलॉजिस्ट रेबेका स्पेंसर ने कासे डकलोज और लॉरा कुर्दजेल के साथ किए अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला।
ऐसे किया अध्ययन
इस अध्ययन के तहत बच्चों के समूह को दो वर्गों में बांटा गया। इसमें पहले समूह के बच्चों की एक्टिविटी औसतन 77 मिनट की नींद के बाद देखी गई। जबकि दूसरे समूह के बच्चे पूरे समय जागते रहे। जब इन बच्चों का मेमोरी टेस्ट लिया गया था तो शोधकर्ताओं को यह जानकर बेहद आश्चर्य हुआ कि जिन बच्चों ने दिन में कुछ देर की नींद ली थी, उनकी याददाश्त अन्य बच्चों की तुलना में तेज थी। वहीं दूसरे समूह के बच्चों में याद करने की आदत ज्यादा नहीं देखी गई।
थोड़ी देर की झपकी करे तरोताजा
दिनभर की भागदौड़ के दौरान कभी-कभी काम के समय में भी काफी सुस्ती आने लगती है, जिससे काम में मन लगना थोड़ा कठिन हो जाता है। यही वजह है कि आजकल कॉर्पोरेट सेक्टर्स में कहीं-कहीं नैपिंग रूम बनाए जा रहे हैं ताकि कुछ देर की झपकी के बाद व्यक्ति खुद को तरोताजा महसूस कर सके। झपकी लेने से ऊर्जा में दोगुना वृद्धि हो जाती है। सूचना प्रौद्योगिकी, बीपीओ, मीडिया और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में दूसरे क्षेत्रों की तुलना में काम के घंटे तो ज्यादा होते ही हैं, साथ ही उनका काम थका देने वाला भी होता है। इस वजह से तनाव भी बढ़ता जाता है।
मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह निष्कर्ष निकाला है। रिसर्चर्स ने पाया कि बच्चों की शुरुआती जिंदगी में मेमोरी को मजबूत करने के लिए दिन की नींद एक अहम भूमिका निभाती है। रिसर्च के ये नतीजे 40 बच्चों पर किए गए प्रयोगों के आधार पर निकाले गए हैं। शोधकर्ता साइकोलॉजिस्ट रेबेका स्पेंसर ने कासे डकलोज और लॉरा कुर्दजेल के साथ किए अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला।
ऐसे किया अध्ययन
इस अध्ययन के तहत बच्चों के समूह को दो वर्गों में बांटा गया। इसमें पहले समूह के बच्चों की एक्टिविटी औसतन 77 मिनट की नींद के बाद देखी गई। जबकि दूसरे समूह के बच्चे पूरे समय जागते रहे। जब इन बच्चों का मेमोरी टेस्ट लिया गया था तो शोधकर्ताओं को यह जानकर बेहद आश्चर्य हुआ कि जिन बच्चों ने दिन में कुछ देर की नींद ली थी, उनकी याददाश्त अन्य बच्चों की तुलना में तेज थी। वहीं दूसरे समूह के बच्चों में याद करने की आदत ज्यादा नहीं देखी गई।
थोड़ी देर की झपकी करे तरोताजा
दिनभर की भागदौड़ के दौरान कभी-कभी काम के समय में भी काफी सुस्ती आने लगती है, जिससे काम में मन लगना थोड़ा कठिन हो जाता है। यही वजह है कि आजकल कॉर्पोरेट सेक्टर्स में कहीं-कहीं नैपिंग रूम बनाए जा रहे हैं ताकि कुछ देर की झपकी के बाद व्यक्ति खुद को तरोताजा महसूस कर सके। झपकी लेने से ऊर्जा में दोगुना वृद्धि हो जाती है। सूचना प्रौद्योगिकी, बीपीओ, मीडिया और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में दूसरे क्षेत्रों की तुलना में काम के घंटे तो ज्यादा होते ही हैं, साथ ही उनका काम थका देने वाला भी होता है। इस वजह से तनाव भी बढ़ता जाता है।

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