एक श्रोता कवि से बोला, ' जनाब! मैं जब भी आपकी कविताएं पढ़ता हूं तो मुझे आश्चर्य होता है।
कवि, ' शायद इस बात पर कि मैं इन्हें लिखता कैसे हूं।
श्रोता, ' जी नहीं, इस बात पर कि आप आखिर इन्हें लिखते ही क्यों हो?"
कवि, ' शायद इस बात पर कि मैं इन्हें लिखता कैसे हूं।
श्रोता, ' जी नहीं, इस बात पर कि आप आखिर इन्हें लिखते ही क्यों हो?"
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