शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

लतीफा: कविताएं पढ़ता हूं तो मुझे आश्चर्य होता

एक श्रोता कवि से बोला, ' जनाब! मैं जब भी आपकी कविताएं पढ़ता हूं तो मुझे आश्चर्य होता है।
 कवि, ' शायद इस बात पर कि मैं इन्हें लिखता कैसे हूं।
श्रोता, ' जी नहीं, इस बात पर कि आप आखिर इन्हें लिखते ही क्यों हो?"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें