न्यूयॉर्क (एजेंसी)। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जो बताएगी कि आपको दिल का दौरा कब पड़ने वाला है। अभी तक इस तरह की कोई भी पद्धति चिकित्सकीय जगत में मौजूद नहीं थी। इस खोज से उन लोगों को काफी मदद मिल सकेगी जिनमें दिल का दौरा पड़ने के लक्षण्ा मौजूद हैं।
कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीएसआरआई) के शोधकर्ताओं ने 'फ्लुइड (तरल पदाथर््ा) बायोप्सी तकनीक" की खोज की है। इसके जरिये रक्त में मौजूद कुछ विश्ोष कोश्ािकाओं की पहचान करके भविष्य में दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका का पता लगाया जा सकता है। श्ाोध के प्रमुख लेखक व सहायक प्रोफेसर पीटर कुन ने बताया, यह तकनीक रक्त में सर्कुलेटिंग एंडोथेलियल कोश्ािकाओं (सीईसी) की आसानी से पहचान कर लेती है। स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा दिल का दौरा झ्ोल चुके व्यक्ति के रक्त में ये कोश्ािकाएं पाई जाती हैं। जर्नल फिजिकल बायोलॉजी में प्रकाश्ाित रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ता अब इस तकनीक का परीक्षण्ा दिल का दौरा पड़ने के प्रारंभिक चरण्ा में रोगी की पहचान करने के लिए कर रहे हैं। एंडोथेलियल कोश्ािकाएं धमनियों के चारों तरफ एक तरह की दीवार बना देती है जिससे दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका कई गुना बढ़ जाती है।
कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीएसआरआई) के शोधकर्ताओं ने 'फ्लुइड (तरल पदाथर््ा) बायोप्सी तकनीक" की खोज की है। इसके जरिये रक्त में मौजूद कुछ विश्ोष कोश्ािकाओं की पहचान करके भविष्य में दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका का पता लगाया जा सकता है। श्ाोध के प्रमुख लेखक व सहायक प्रोफेसर पीटर कुन ने बताया, यह तकनीक रक्त में सर्कुलेटिंग एंडोथेलियल कोश्ािकाओं (सीईसी) की आसानी से पहचान कर लेती है। स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा दिल का दौरा झ्ोल चुके व्यक्ति के रक्त में ये कोश्ािकाएं पाई जाती हैं। जर्नल फिजिकल बायोलॉजी में प्रकाश्ाित रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ता अब इस तकनीक का परीक्षण्ा दिल का दौरा पड़ने के प्रारंभिक चरण्ा में रोगी की पहचान करने के लिए कर रहे हैं। एंडोथेलियल कोश्ािकाएं धमनियों के चारों तरफ एक तरह की दीवार बना देती है जिससे दिल का दौरा पड़ने की आश्ांका कई गुना बढ़ जाती है।
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