धर्मेंद्र सिंह राजावत
राजनीति में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति ने इलाहबाद में एक शौचालय को तुड़वाकर मंदिर बनवा दिया। मंदिर के बजाय शौचालय बनाने को तवज्जो देने की केंद्रीय मंत्री की कवायद को इससे काफी बड़ा झटका लगा। व्यक्ति की इस गुस्ताखी से खफा मंत्री जी ने इलाहबाद जाकर उसको काफी भला-बुरा कहा। इसके साथ ही अनेक केस लगवाकर जेल में डलवा देने की उसको धमकी भी दे दी। व्यक्ति भी उम्मीद से ज्यादा दबंग निकला। उसने भी मंत्री जी की धमकी का जवाब धमकी से दिया। इतना ही नहीं उसने तो उनको न केवल मंत्री पद बल्कि पार्टी से पत्ता साफ करा देने की धमकी दे डाली। इस वाक्या के दूसरे ही दिन वह दिल्ली में मैडम के पास जा पहुंचा। कोशिश की तो उसको मिलने का समय भी मिल गया।
'हां, बताएं क्या समस्या है आपको?" मैडम ने सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! समस्या मुझे नहीं है, मगर आपको जरूर होने वाली है।"
'क्या मतलब है आपका?" मैडम ने फिर सवाल किया।
रामनाथ, ' गुश्ताखी की माफी चाहूंगा, पर मैं सही कह रहा हूं। आपने मंत्री जी को कुछ भी बोलने की छूट दी, यह अच्छी बात है, मगर कुछ भी बनवाने की आजादी देकर अच्छा नहीं किया।"
' आप क्या कहना चाहते हो। साफ-साफ कहो। मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है।" मैडन ने डांटते हुए कहा
रामनाथ, 'मैडम! मंत्री जी शौचालय बनवाकर अपनी ही सरकार को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं।"
'शौचालय से सरकर का क्या लेना-देना?" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! जिस घर में शौचालय होगा, उस घर के लोग बेफिक्र होकर खाएंगे- पिएंगे। निश्चित है कि ऐसा होने पर खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ेगी। और जब खपत बढ़ेगी तो महंगाई का आसमान छूना तय है। इसके बाद सरकार का क्या होगा, मुझे लगता है कि यह आपको बताने की जरूरत नहीं है। अब आप ही तय कीजिए कि यह सरकार के खिलाफ मंत्री जी की साजिश नहीं है तो क्या है। दूसरा, मैं जो सरकार के हित में कर रहा हूं, उसमें वह अड़ंगा लगा रहे हैं।"
' मंत्री जी को मैं देख लूंगी, पर आप यह तो बताइए की आप सरकार के लिए क्या कर रहे हैं?" मैडम ने उससे फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! आपके इस सेवक ने इलाहबाद में शौचालय को मंदिर बनवाकर इसकी शुरुआत कर दी है।"
' मंदिर बनाने से क्या होगा। यह तो विपक्षी पार्टी का काम है। हम इसे क्यों करें।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम ! मंदिर बनवाकर हम बेहतर शासन का तो रास्ता साफ करेंगे ही साथ ही विपक्षी पार्टी को मुकाबले से ही बाहर कर देंगे।"
' आप कहना क्या चाहते हैं। मैं समझी नहीं। आप तो साफ-साफ बताइए।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' जब हम शौचालयों को तोड़कर मंदिर बनवाएंगे तो निश्चित है कि उसमें भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। और जब व्यक्ति भगवान की भक्ति में लीन होगा तो खाना-पीना सब भूल जाएगा। कम से कम लोग व्रत तो रखना शुरू कर ही देंगे।"
' इससे क्या होगा?" मैडम ने फिर सवाल दागा
रामनाथ, ' मैडम ! सीधा सा फंडा है, जब लोग कम खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की खपत भी कम होगी। और जब खपत कम होगी तो महंगाई भी औंधे मुंह नीचे आ जाएगी। फिर हम फक्र से लोगों के बीच चुनाव में कह पाएंगे कि हमने महंगाई को कभी भी सिर नहीं उठाने दिया।"
मैडम, 'यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। मंदिर बनवाने का इतना बड़ा फायदा। यही वजह है कि विपक्षी इस मुद्दे को छोड़ते ही नहीं। आरे हैं! आप विपक्षी पार्टी को मुकाबले से बाहर करने की भी बात कह रहे थे। उसे कैसे बाहर करेंगे?"
रामनाथ, ' अरे मैडम! विपक्षी केवल एक मंदिर बनवाने को लेकर राजनीति कर रहे हैं, मगर हम तो हजारों बनवाएंगे। इसके बाद उनके पास कोई मुद्दा बचेगा क्या? मैडम ! 2014 नजदीक है और जिस तरह के हालात हैं, उससे तो लगता है कि कभी भी चुनाव हो सकते हैं। इसलिए, 'शौचालय तोड़ मंदिर बनाओ" निगम बनाकर मुझे उसका मुखिया बना दीजिए। इसके बाद देखिए कैसे हम आपकी सरकार को सत्ता में लाकर एक बार फिर आपको किंग मेकर बना देते हैं।"
मैडम, ' मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। वाकई यह कमाल का आइडिया है।"
रामनाथ, ' मैडम ! लेकिन, मंत्री जी का क्या करना है?"
मैडम, ' क्या करना है। मन से कहती हूं कि वह मंत्री जी से कहंे कि वह किसी मंदिर में जाकर 'जय राम-जय राम" करें। इससे उनका भी भला होगा और मेरा भी।"
मैडम ने तत्काल मन को बुलाकर मंत्री जी को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश दे दिया। जब उनको मंत्रालय से बेदखल कर दिया गया तो रामनाथ उनसे जाकर मिला।
' मंत्री जी शौचालय आम आदमी की जरूरत हो सकती है, पर आपकी नहीं। फिर क्यों इसके लिए सभी से लड़ाई मोल ले रहे थे। अभी तो मैंने अपका मंत्रालय छिनवाया है। आगे से राजनीति के ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दूंगा कि शौचालय जाने से भी डर लगने ल
गेगा आपको। मैं भी जनता हूं कि मंदिर जाए बिना लोग कई दिनों तक रह सकते हैं, पर शौचालय के बिना एक भी दिन नहीं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि भी कोई चीज होती है। जब सबको सारी सुविधाएं मुहैया करा दोगे तो फिर राजनीति किस मुद्दे पर करोगे। कुछ अपना और हम जैसे लोगों के बारे में भी सोचा करो?
राजनीति में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति ने इलाहबाद में एक शौचालय को तुड़वाकर मंदिर बनवा दिया। मंदिर के बजाय शौचालय बनाने को तवज्जो देने की केंद्रीय मंत्री की कवायद को इससे काफी बड़ा झटका लगा। व्यक्ति की इस गुस्ताखी से खफा मंत्री जी ने इलाहबाद जाकर उसको काफी भला-बुरा कहा। इसके साथ ही अनेक केस लगवाकर जेल में डलवा देने की उसको धमकी भी दे दी। व्यक्ति भी उम्मीद से ज्यादा दबंग निकला। उसने भी मंत्री जी की धमकी का जवाब धमकी से दिया। इतना ही नहीं उसने तो उनको न केवल मंत्री पद बल्कि पार्टी से पत्ता साफ करा देने की धमकी दे डाली। इस वाक्या के दूसरे ही दिन वह दिल्ली में मैडम के पास जा पहुंचा। कोशिश की तो उसको मिलने का समय भी मिल गया।
'हां, बताएं क्या समस्या है आपको?" मैडम ने सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! समस्या मुझे नहीं है, मगर आपको जरूर होने वाली है।"
'क्या मतलब है आपका?" मैडम ने फिर सवाल किया।
रामनाथ, ' गुश्ताखी की माफी चाहूंगा, पर मैं सही कह रहा हूं। आपने मंत्री जी को कुछ भी बोलने की छूट दी, यह अच्छी बात है, मगर कुछ भी बनवाने की आजादी देकर अच्छा नहीं किया।"
' आप क्या कहना चाहते हो। साफ-साफ कहो। मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है।" मैडन ने डांटते हुए कहा
रामनाथ, 'मैडम! मंत्री जी शौचालय बनवाकर अपनी ही सरकार को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं।"
'शौचालय से सरकर का क्या लेना-देना?" मैडम ने फिर सवाल कियारामनाथ, ' मैडम! जिस घर में शौचालय होगा, उस घर के लोग बेफिक्र होकर खाएंगे- पिएंगे। निश्चित है कि ऐसा होने पर खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ेगी। और जब खपत बढ़ेगी तो महंगाई का आसमान छूना तय है। इसके बाद सरकार का क्या होगा, मुझे लगता है कि यह आपको बताने की जरूरत नहीं है। अब आप ही तय कीजिए कि यह सरकार के खिलाफ मंत्री जी की साजिश नहीं है तो क्या है। दूसरा, मैं जो सरकार के हित में कर रहा हूं, उसमें वह अड़ंगा लगा रहे हैं।"
' मंत्री जी को मैं देख लूंगी, पर आप यह तो बताइए की आप सरकार के लिए क्या कर रहे हैं?" मैडम ने उससे फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम! आपके इस सेवक ने इलाहबाद में शौचालय को मंदिर बनवाकर इसकी शुरुआत कर दी है।"
' मंदिर बनाने से क्या होगा। यह तो विपक्षी पार्टी का काम है। हम इसे क्यों करें।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' मैडम ! मंदिर बनवाकर हम बेहतर शासन का तो रास्ता साफ करेंगे ही साथ ही विपक्षी पार्टी को मुकाबले से ही बाहर कर देंगे।"
' आप कहना क्या चाहते हैं। मैं समझी नहीं। आप तो साफ-साफ बताइए।" मैडम ने फिर सवाल किया
रामनाथ, ' जब हम शौचालयों को तोड़कर मंदिर बनवाएंगे तो निश्चित है कि उसमें भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। और जब व्यक्ति भगवान की भक्ति में लीन होगा तो खाना-पीना सब भूल जाएगा। कम से कम लोग व्रत तो रखना शुरू कर ही देंगे।"
' इससे क्या होगा?" मैडम ने फिर सवाल दागा
रामनाथ, ' मैडम ! सीधा सा फंडा है, जब लोग कम खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की खपत भी कम होगी। और जब खपत कम होगी तो महंगाई भी औंधे मुंह नीचे आ जाएगी। फिर हम फक्र से लोगों के बीच चुनाव में कह पाएंगे कि हमने महंगाई को कभी भी सिर नहीं उठाने दिया।"
मैडम, 'यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। मंदिर बनवाने का इतना बड़ा फायदा। यही वजह है कि विपक्षी इस मुद्दे को छोड़ते ही नहीं। आरे हैं! आप विपक्षी पार्टी को मुकाबले से बाहर करने की भी बात कह रहे थे। उसे कैसे बाहर करेंगे?"
रामनाथ, ' अरे मैडम! विपक्षी केवल एक मंदिर बनवाने को लेकर राजनीति कर रहे हैं, मगर हम तो हजारों बनवाएंगे। इसके बाद उनके पास कोई मुद्दा बचेगा क्या? मैडम ! 2014 नजदीक है और जिस तरह के हालात हैं, उससे तो लगता है कि कभी भी चुनाव हो सकते हैं। इसलिए, 'शौचालय तोड़ मंदिर बनाओ" निगम बनाकर मुझे उसका मुखिया बना दीजिए। इसके बाद देखिए कैसे हम आपकी सरकार को सत्ता में लाकर एक बार फिर आपको किंग मेकर बना देते हैं।"
मैडम, ' मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। वाकई यह कमाल का आइडिया है।"
रामनाथ, ' मैडम ! लेकिन, मंत्री जी का क्या करना है?"
मैडम, ' क्या करना है। मन से कहती हूं कि वह मंत्री जी से कहंे कि वह किसी मंदिर में जाकर 'जय राम-जय राम" करें। इससे उनका भी भला होगा और मेरा भी।"
मैडम ने तत्काल मन को बुलाकर मंत्री जी को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश दे दिया। जब उनको मंत्रालय से बेदखल कर दिया गया तो रामनाथ उनसे जाकर मिला।
' मंत्री जी शौचालय आम आदमी की जरूरत हो सकती है, पर आपकी नहीं। फिर क्यों इसके लिए सभी से लड़ाई मोल ले रहे थे। अभी तो मैंने अपका मंत्रालय छिनवाया है। आगे से राजनीति के ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दूंगा कि शौचालय जाने से भी डर लगने ल
गेगा आपको। मैं भी जनता हूं कि मंदिर जाए बिना लोग कई दिनों तक रह सकते हैं, पर शौचालय के बिना एक भी दिन नहीं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि भी कोई चीज होती है। जब सबको सारी सुविधाएं मुहैया करा दोगे तो फिर राजनीति किस मुद्दे पर करोगे। कुछ अपना और हम जैसे लोगों के बारे में भी सोचा करो?
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