आपको जानकर शायद आश्चर्य हो सकता है, लेकिन आपके घर में मौजूद कई ऐसी चीजें हो सकती हैं जो गर्भावस्था के दौरान अबॉर्शन की वजहें भी बन जाती हैं! हाल में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध में माना गया है कि प्लास्टिक की बोतलों से लेकर मेकअप, शैंपू, डियोडरेंट आदि कई चीजों में इस्तेमाल होने वाला बाइस्फेनॉल ए (बीपीए) नामक रसायन के संपर्क से गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस शोध की तर्ज पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस केमिकल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रहा है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान प्लास्टिक बोतल, सनग्लास, सीडी केस आदि कई चीजों में मौजूद बीपीए की मात्रा और गर्भवती महिलाओं पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है। शोधकर्ता डॉ रूथ लैथे के अनुसार- इस अध्ययन के आधार पर हम मान सकते हैं कि बीपीए नामक केमिकल से बनी चीजों से दूरी रखकर महिलाओं को ऐसे गर्भपात से बचाया जा सकता है जिसकी वजह पता नहीं चल पाती है।
उन्होंने यह भी माना कि इस केमिकल से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं है पर सतर्कता जरूर बरती जा सकती है, मसलन गर्म भोजन सीधे प्लास्टिक के बर्तन में न निकालें या डिब्बाबंद डाइट आदि कम लें।
इसके अलावा अन्य शोध के दौरान वर्ष 2005 से लेकर 2009 तक गर्भधारण के प्रयास में जुटे 501 जोड़ों का अध्ययन किया गया है। जिसमें पाया गया कि बीपीए के साथ-साथ थैलेट्स की मात्रा भी प्रजनन क्षमता को कम करती है।
इस शोध में बीपीए को महिलाओं और थैलेट्स को पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए खतरा माना गया है।
उन्होंने यह भी माना कि इस केमिकल से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं है पर सतर्कता जरूर बरती जा सकती है, मसलन गर्म भोजन सीधे प्लास्टिक के बर्तन में न निकालें या डिब्बाबंद डाइट आदि कम लें।
इसके अलावा अन्य शोध के दौरान वर्ष 2005 से लेकर 2009 तक गर्भधारण के प्रयास में जुटे 501 जोड़ों का अध्ययन किया गया है। जिसमें पाया गया कि बीपीए के साथ-साथ थैलेट्स की मात्रा भी प्रजनन क्षमता को कम करती है।
इस शोध में बीपीए को महिलाओं और थैलेट्स को पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए खतरा माना गया है।

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