बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

सेब खाएं, मगर जूस से दूरी बनाएं

'एन एपल ए डे कीप द डॉक्टर अवे" जी हां, सेब के बारे में लगभग सभी को यह पता है कि रोज एक सेब का सेवन डॉक्टर को खुद से दूर रखने में मदद करता है। सेब के अनेक फायदे हैं, जिनकी वजह से सेब हमेशा सेहतमंद माना जाता है। लेकिन अगर सेब नहीं है तो क्या सेब का जूस भी उतना ही फायदेमंद है जितना सेब, जवाब है 'नहीं"।
बाजार में बिकने वाले सेब के जूस का स्वाद भले ही कितना भी लाजवाब क्यों न हो लेकिन इसकी कुछ ऐसी कमियां हैं जिन्हें जानने के बाद आप जूस के बजाय सेब खाना ही फायदेमंद समझेंगे।
आर्सेनिक तत्व
सेब के जूस में आर्सेनिक तत्व भी होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद नहीं हैं। यही वजह है कि कुछ समय पहले फूड एंड ड्रग ऑर्गेनाइजेशन (एफडीए) ने जूस बनाने वाली कंपनियों को आर्सेनिक की मात्रा सीमित करने और लेबल पर दिखाने के निर्देश दिए हैं।
*कैलोरी की अधिकता :
बाजार में बिकने वाले सेब के जूस में कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में होती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है।
 केमिकल्स 
डिब्बाबंद सेब के जूस को प्रिजर्व करने के दौरान उनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर, फ्लेवर और कई प्रकार के प्रिजर्वेटिव्स मिलाते हैं, जो सेब के पौष्टिक तत्वों को नष्ट कर देते हैं।
 शकर की अधिकता
सेब की अपेक्षा जूस में शक्कर की अधिकता होती है, जिस वजह से इसका अधिक सेवन शरीर में इन्सुलिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में शकर की वजह से दांतों पर भी इसका असर होता है।
पौष्टिकता पर सवाल
सेब में जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स के साथ-साथ फाइबर पर्याप्त मात्रा में होते हैं, लेकिन जूस बनाने की प्रक्रिया में कई जरूरी पोषक तत्व तो नष्ट होते ही हैं, फाइबर भी नहीं रहता। बेहतर विकल्प है कि सेब के जूस के बजाय नियमित रूप से सेब ही खाएं। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें