शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

फूड सप्लीमेंट में क्या और कितना

बॉडी बनाने की कोशिशों के बावजूद भी आप तय नहीं कर पा रहे कि फूड सप्लीमेंट को खाएं या न खाएं तो जवाब है कि खा लें। ये कोई बुरी चीज नहीं होती। बुरी होती है उसकी क्वालिटी, बुरा होता है उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, बुरे होते हैं फूड सप्लीमेंट के उल्टे-सीधे कॉम्बिनेशन और इसके साथ ना बरती जाने वाली सावधानी ।
वक्त के साथ बॉडी बिल्डिंग के विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है। कम समय लगाकर या कम खाकर भी शरीर को उसकी जरूरत की हर चीज मुहैया कराने की कड़ी में फूड सप्लीमेंट ईजाद हुआ। दरअसल इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सही खानपान को जुटाना काफी मुश्किल होता है। जो लोग कॉलेज या दफ्तर जाते हैं उन्हें शरीर बनाने के लिए सप्लीमेंट्स की जरूरत पड़ जाती है।
इन प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते वक्त एक बात जरूर ध्यान रखें कि ये फूड सप्लीमेंट हैं और कभी भी मुख्य भोजन नहीं बन सकते। खाना-पीना छोड़कर इनके पीछे भागेंगे तो पैसे, वक्त और शरीर की बर्बादी होगी। अगर प्रोटीन पाउडर सूट नहीं कर रहा तो तुरंत उसे खाना छोड़ दें। सही तरीका यह है कि आप अपने ट्रेनर से पहले इस बारे में जान लें कि आपकी जरूरत के हिसाब से क्या ठीक है और क्या नहीं।
कौन सा अच्छा 
प्रोटीन बढ़िया है और महंगा भी। अगर बजट से बाहर जा रहा है तो एग (अंडा) प्रोटीन भी ले सकते हैं। ये सस्ता होता है और अच्छा भी। ध्यान रहे कि सप्लीमेंट सालों-साल खाने वाली चीज नहीं है। एक बार आपने टारगेट छू लिया तो फिर थोड़े दिन शरीर और पेट को आराम दें।
पूरी कीमत वसूल करें
पहली बात तो ये कि जिस दिन जिम न जाएं उस दिन प्रोटीन पाउडर या गेनर को तय डाइट से आधा लें। प्रोटीन से सबसे ज्यादा फायदा हासिल करने के लिए उसे पूरे खाने में तब्दील कर दें जैसे केले, चीनी, दूध, मक्खन, ड्राइ फ्रूट्स डालकर उसका शेक बना लें। इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इसे आप ठंडे दूध में भी ले सकते हैं। अगर लीन बॉडी चाहिए तो टोंड दूध का इस्तेमाल करें वरना फुल क्रीम वाले दूध के साथ लें। जूस में भी ले सकते हैं। इसके अलावा खाली पेट प्रोटीन पाउडर न पीएं।
इनसे बचकर रहें
ऐसे पाउडर्स का इस्तेमाल करने से परहेज करें तो बड़ी तेजी से मोटापा बढ़ाते हों। चेहरे पर सूजन सी आ जाए या ढेरों मुंहासे आने लगें तो सा
वधान हो जाएं। या तो वो पाउडर आपको सूट नहीं कर रहा या फिर उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है।
अक्सर ऐसा देखने में आया है कि जिन प्रोटीन पाउडरों की क्वालिटी ठीक नहीं होती उनमें पानी या दूध डालने पर ढेर सारी छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं, वो आसानी मिक्स नहीं हो पाती। बहुत ज्यादा चिकने या बहुत ज्यादा भुरभुरे सप्लीमेंट भी अच्छे नहीं माने जाते।
कितना खाएं 
हर डिब्बे पर इसके बारे में लिखा होता है। वैसे अच्छी कद-काठी वाले शख्स को एक माह में दो किलो प्रोटीन पाउडर लग जाता है। बहुत कम मात्रा में खाएंगे तो मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाएगा।  

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