यूं तो इंतजार का नाम लेते ही यह काफी लंबा लगने लगता है...। मगर हमेशा से माना गया है कि इंतजार का फल सब्र होता है, और यह सही भी जिसे एक शोध में पाया गया है। यह इंतजार कहीं भी हो सकता है, किसी के आने का, कहीं जाने का और ऐसी किसी भी जगह जहां लंबी कतार के बिना जाना संभव ही न हो सके। मगर इस इंतजार के दौरान अक्सर जो सबसे बड़ी बात सामने आती है वह यह कि इंतजार करते-करते व्यक्ति का धैर्य जवाब दे जाता है। मगर जो लोग इंतजार कर लेते हैं उन्हें समय रहते वह अवसर तो मिल जाता है, जिसके लिए वे कतारों में लगे थे बल्कि इसके साथ उनमें संयम और धैर्य भी बढ़ जाता है।
जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा किए नए शोध में पाया गया है कि रेलवे टिकट बुक कराना हो, डॉक्टर से परामर्श लेना हो या फिर टेलीफोन का बिल जमा कराना हो, ऐसे में कई बार आपको लंबी लाइनों में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। कई बार इससे
आपके मन में झुंझलाहट भी पैदा हो जाती है। मगर शोध कहता है कि कतारों में खड़े होकर इंतजार करना आपके लिए अच्छा होता है, क्योंकि लंबी लाइनों में खड़े होकर इंतजार करने से लोगों का संयम यानी धैर्य बढ़ता है और इसका असर उनके व्यवहार पर पड़ता है। अध्ययन से यह भी पता चला कि इससे आर्थिक मामलों से जुड़े बेहतर फैसले लेने की क्षमता भी बढ़ती है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जब कोई लंबी लाइन में खड़े होकर किसी चीज का इंतजार करता है, तो इससे उसके मन में उस चीज की अहमियत बढ़ जाती है।
किसी चीज की अहमियत बढ़ने से व्यक्ति के मन में उस चीज की कद्र बढ़ती है और उनका संयम भी बढ़ता है। इसके मुकाबले जिन लोगों को बिना इंतजार और मेहनत किए कोई चीज मिल जाती है, वे उसकी अहमियत नहीं समझते। अध्ययन के परिणाम 'जर्नल ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर एंड ह्यूमन डिसीजन प्रोसेस" के नए अंक में प्रकाशित किए जा चुके हैं।
भारत के लिए नया नहीं
वैसे हमारे मुल्क में तो 'संतोषी सदा सुखी" और 'धीरज मोटी बात छे" जैसे ब्रह्म वाक्य पीढ़ियों से दीवारों पर लिखे जाते रहे हैं। और नानी दादियों द्वारा बच्चों को सिखाए जाते रहे हैं।
जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा किए नए शोध में पाया गया है कि रेलवे टिकट बुक कराना हो, डॉक्टर से परामर्श लेना हो या फिर टेलीफोन का बिल जमा कराना हो, ऐसे में कई बार आपको लंबी लाइनों में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। कई बार इससेआपके मन में झुंझलाहट भी पैदा हो जाती है। मगर शोध कहता है कि कतारों में खड़े होकर इंतजार करना आपके लिए अच्छा होता है, क्योंकि लंबी लाइनों में खड़े होकर इंतजार करने से लोगों का संयम यानी धैर्य बढ़ता है और इसका असर उनके व्यवहार पर पड़ता है। अध्ययन से यह भी पता चला कि इससे आर्थिक मामलों से जुड़े बेहतर फैसले लेने की क्षमता भी बढ़ती है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जब कोई लंबी लाइन में खड़े होकर किसी चीज का इंतजार करता है, तो इससे उसके मन में उस चीज की अहमियत बढ़ जाती है।
किसी चीज की अहमियत बढ़ने से व्यक्ति के मन में उस चीज की कद्र बढ़ती है और उनका संयम भी बढ़ता है। इसके मुकाबले जिन लोगों को बिना इंतजार और मेहनत किए कोई चीज मिल जाती है, वे उसकी अहमियत नहीं समझते। अध्ययन के परिणाम 'जर्नल ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर एंड ह्यूमन डिसीजन प्रोसेस" के नए अंक में प्रकाशित किए जा चुके हैं।
भारत के लिए नया नहीं
वैसे हमारे मुल्क में तो 'संतोषी सदा सुखी" और 'धीरज मोटी बात छे" जैसे ब्रह्म वाक्य पीढ़ियों से दीवारों पर लिखे जाते रहे हैं। और नानी दादियों द्वारा बच्चों को सिखाए जाते रहे हैं।
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