सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

अपने बदलते व्यवहार पर जरा ध्यान दें...

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि नींद के दौरान आपने किसी को फोन पर मैसेज किया हो और सुबह उठकर कुछ याद ही न आए? अपने व्यवहार में आ रहे इस बदलाव पर अगर अब तक आपने गौर नहीं किया है, तो अब इसे गंभीरता से लें।
'द अटलांटिक"
में प्रकाशित एक अध्ययन की मानें तो नींद में चलने या बात करने की तरह नींद में मैसेज करना यानी 'स्लीप टेक्सटिंग" भी एक मानसिक रोग हो चुका है।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ डेटिंस्ट्री के प्रोफेसर माइकल गेल्ब ने अपने अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि देर रात तक टेक्सटिंग या मैसेजिंग की वजह से कई बार आप नींद में ही मैसेज करते हैं और जागने के बाद आपको कुछ याद ही नहीं रहता है। यह सोने और जागने के बीच की स्थिति होती है, जिस वजह से आपको अपनी ही गतिविधि याद नहीं रह पाती है।शोधकर्ताओं का मानना है कि आमतौर पर यह स्थिति बहुत अधिक मैसेज करने वाले उन लोगों के साथ सोने के दो घंटे की भीतर होती है। इस दौरान नींद हल्की होती है जिसे 'रेपिड आई मूवमेंट" के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह आगे चलकर याददाश्त व नींद संबंधी समस्याओं की बड़ी वजह हो सकता है।
हालांकि शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि काउंसलिंग और दवाओं के जरिए भी इस समस्या का उपचार किया जा सकता है लेकिन बचाव सबसे अच्छा विकल्प है।
क्या किया जाए 
माइकल कहते है कि ऐसी स्थिति के दौरान जरूरी है कि हम सोने से पहले फोन बंद करें, मैसेजिंग को नियंत्रित करें और समाजिक होने के लिए दूसरी गतिवधियों पर बल दें। 

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