नीना, ' हैलो सोनम! मेरे चित्रों की प्रदर्शनी लगी है, देखने आओगी न?
सोनम, ' मेरे भी एक चित्र की प्रदर्शनी पिछले माह लगी थी, कृति कला की दीर्घा में।"
नीना, ' मगर मुझे तो दिखी नहीं।"
सोनम, ' अरे! वह गैलरी में नहीं मुख्य द्वार पर लगी थी।"
नीना, ' बधाई हो! क्या विषय था चित्र का?"
सोनम, ' मैंने एक गत्ते पर लिखा था, दाएं मुड़ें।"
सोनम, ' मेरे भी एक चित्र की प्रदर्शनी पिछले माह लगी थी, कृति कला की दीर्घा में।"
नीना, ' मगर मुझे तो दिखी नहीं।"
सोनम, ' अरे! वह गैलरी में नहीं मुख्य द्वार पर लगी थी।"
नीना, ' बधाई हो! क्या विषय था चित्र का?"
सोनम, ' मैंने एक गत्ते पर लिखा था, दाएं मुड़ें।"
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