मोटर वाहनों से रोड टैक्स, गुड्स टैक्स और स्पेशल सेस जैसे टैक्सों के अलावा और कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा। यानी वाहनों पर एंट्री टैक्स, मैकेनिकल टैक्स और सर्विस टैक्स लगाना अब संभव नहीं होगा। मगर साढ़े सात टन से अधिक सकल भार वाले मालवाहक वाहनों पर 500 रुपया प्रति टन/प्रति वर्ष के हिसाब से न्यूनतम लाइफटाइम टैक्स वसूला जाएगा।
ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट काउंसिल (टीडीसी) की 35वीं बैठक में राज्यों ने केंद्र के इन प्रस्तावों को मान लिया है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों, कारों और टैक्सी/मैक्सी के एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण की स्थिति में टैक्स की दरों और टूरिस्ट बसों को नेशनल परमिट के तौरतरीकों पर भी राज्य सहमत हो गए हैं। मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक दो साल तक के नए दोपहिया वाहनों और कारों को दूसरे राज्य में स्थायी रूप से ले जाने पर नए राज्य में पूरा टैक्स वसूला जाएगा। वहीं, पहले वाले राज्य में वसूला गया टैक्स रिफंड होगा। दो साल से पुराने दोपहियों के दूसरे राज्य में स्थायी स्थानांतरण पर वहां कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसी तरह, दोपहियों को अस्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
टैक्सी/मैक्सी और 10 लाख रुपए या इससे अधिक कीमत की लक्जरी कारों/एलएमवी को स्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर वहां वाहन की उम्र व कीमत के अनुसार रियायती दर पर टैक्स वसूला जाएगा। सभी राज्यों में रिफंड एवं टैक्स की गणना एक ही तरह से होगी। टैक्सी/ मैक्सी को अस्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। मगर परमिट शुल्क अधिक होगा। परमिट जारी करने के लिए जल्द से जल्द एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। राज्य सरकारें सभी वाहनों पर एक समान न्यूनतम दर से अधिक टैक्स वसूलने के लिए स्वतंत्र होंगी।
एक से दूसरे राज्यों के बीच कांट्रैक्ट कैरिज के रूप में चल रही टूरिस्ट बसों को नेशनल रमिट जारी करने के मसले पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। यह दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। नेशनल परमिट बस में सीटों की संख्या और सालाना परमिट शुल्क के आधार पर दिया जाएगा। वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के मामले में दीर्घ अवधि के वन टाइम प्रीमियम पर भी विचार किया जाएगा। इस प्रीमियम की वसूली एवं सरकारों को भुगतान की जिम्मेदारी वित्तीय संस्थाएं
वहन करेंगी।
ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट काउंसिल (टीडीसी) की 35वीं बैठक में राज्यों ने केंद्र के इन प्रस्तावों को मान लिया है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों, कारों और टैक्सी/मैक्सी के एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण की स्थिति में टैक्स की दरों और टूरिस्ट बसों को नेशनल परमिट के तौरतरीकों पर भी राज्य सहमत हो गए हैं। मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक दो साल तक के नए दोपहिया वाहनों और कारों को दूसरे राज्य में स्थायी रूप से ले जाने पर नए राज्य में पूरा टैक्स वसूला जाएगा। वहीं, पहले वाले राज्य में वसूला गया टैक्स रिफंड होगा। दो साल से पुराने दोपहियों के दूसरे राज्य में स्थायी स्थानांतरण पर वहां कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसी तरह, दोपहियों को अस्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।टैक्सी/मैक्सी और 10 लाख रुपए या इससे अधिक कीमत की लक्जरी कारों/एलएमवी को स्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर वहां वाहन की उम्र व कीमत के अनुसार रियायती दर पर टैक्स वसूला जाएगा। सभी राज्यों में रिफंड एवं टैक्स की गणना एक ही तरह से होगी। टैक्सी/ मैक्सी को अस्थायी रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। मगर परमिट शुल्क अधिक होगा। परमिट जारी करने के लिए जल्द से जल्द एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। राज्य सरकारें सभी वाहनों पर एक समान न्यूनतम दर से अधिक टैक्स वसूलने के लिए स्वतंत्र होंगी।
एक से दूसरे राज्यों के बीच कांट्रैक्ट कैरिज के रूप में चल रही टूरिस्ट बसों को नेशनल रमिट जारी करने के मसले पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। यह दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। नेशनल परमिट बस में सीटों की संख्या और सालाना परमिट शुल्क के आधार पर दिया जाएगा। वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के मामले में दीर्घ अवधि के वन टाइम प्रीमियम पर भी विचार किया जाएगा। इस प्रीमियम की वसूली एवं सरकारों को भुगतान की जिम्मेदारी वित्तीय संस्थाएं
वहन करेंगी।
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