सोमवार, 27 जनवरी 2014

अब घर पर ही हो सकेगी अल्जाइमर की जांच

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। भारत में अल्जाइमर के करीब 32 लाख मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण्ा जगी है। श्ाोधकर्ताओं ने घर पर किए जा सकने वाले ऐसे टेस्ट का विकास किया है, जिससे अल्जाइमर के श्ाुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकेगा। यह टेस्ट अपेक्षाकृत सस्ता है।
ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं द्वारा विकसित ये टेस्ट डॉक्टरों की मदद से घर पर किया जा सकता है, जो मरीज के संज्ञानात्मक नुकसान या डिमेंश्ािया को देखेगा, जिसमें अल्जाइमर भी श्ाामिल होगा। इस टेस्ट का नाम सेल्फ-एडमिनिस्टर्ड गेरो-कॉग्निटीव एग्जामिनेश्ान (एसएजीई टेस्ट) है। जिसे पूरा होने में 15 मिनट से भी कम लगते हैं, जो संज्ञानात्मक क्षमता मापने का सबसे विश्वसनीय टेस्ट माना जा रहा है।
ओहियो राज्य विश्वविद्यालय के श्ाोधकर्ता 45 सामुदायिक कार्यक्रमों में गए, जहां उन्होंने लोगों से श्ाुरुआती संज्ञानात्मक नुकसान या डिमेंश्ािया के लिए साधारण्ा और खुद किया गया टेस्ट देने को कहा।
*1047 लोग हुए शामिल :
इसमें 1047 लोग टेस्ट के लिए साधारण्ा पेन और कागज लेकर बैठे और 28 फीसद लोगों को संज्ञानात्मक नुकसान का श्ािकार पाया गया।
जर्नल ऑफ न्यूरोसाइकिएट्री एंड क्लिनिकल न्यूरोसाइंसेज् में प्रकाश्ाित श्ाोध में कहा गया है कि मरीजों द्वारा एसएजीई टेस्ट घर पर भी किया जा सकता है। मरीज इसके परिण्ााम को डॉक्टरों के साथ साझा कर सकते हैं और इससे डिमेंश्ािया या अल्जाइमर के लक्षण्ाों के बारे में प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकता है। अल्जाइमर और स्ट्रोक भारत में डिमेंश्ािया के दो सबसे आम कारण्ा हैं।  

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