सोमवार, 27 जनवरी 2014

प्रयोगशाला में तैयार हुई रीढ़ की हड्डी

बर्लिन (प्रे)। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने प्रयोगश्ााला में प्राकृतिक गुण्ाों वाली  रीढ़ की कृत्रिम हड्डी का विकास किया है, जो स्टेम कोश्ािकाओं के कई गुना वृद्धि में अनुकूल साबित होगी और इससे ल्युकेमिया का उपचार आसान हो जाएगा।
श्ाोधकर्ताओं ने बताया कि इस झिल्लीदार ढंाचे का इस्तेमाल प्रयोगशाला में स्टेम कोश्ािकाओं के उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे आने वाले कुछ वर्षों में ल्युकेमिया का इलाज ढूंढा जा सकेगा। कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ इंटेलीजेंट सिस्टम, स्टुटगर्ट और तुबिनजेन यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं ने एक ऐसा सिंथेटिक पदार्थ विकसित किया है जो स्टेम कोश्ािकाओं में वृद्धि में मदद करता है। रक्त में मौजूद एरिथ्रोसाइट्स या प्रतिरक्षी कोश्ािकाएं रीढ़ की हड्डी में मौजूद हेमटोपॉएटिक स्टेम कोश्ािकाएं से बदलती रहती हैं। ल्युकेमिया के मरीज की प्रभावित कोश्ािकाओं को हेमटोपॉएटिक कोश्ािकाओं में बदलते रहने रक्त से जुड़ी कई अन्य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। हालांकि ल्यूकेमिया के सभी मरीजों के इलाज के लिए ये तरीका नहीं अपनाया जा सकता।
श्ाोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला  में रीढ़ की हड्डी की कई प्राकृतिक विश्ोषताएं कृत्रिम रूप से विकसित की हैं। रीढ़ की हड्डी की मैट्रिक्स की तरह ही प्रयोगशाला  में तैयार रीढ़ की हड्डी में प्रोटीन का इस्तेमाल किया है।  

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