फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स के इस्तेमाल से आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। अनुसंधानकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि सोशल नेटवर्किंग साइटें मनोरोगों और मतिभ्रम का कारण बन सकती हैं।
अध्ययन के अनुसार चूंकि इंटरनेट एक्सेस लगातार बढ़ता जा रहा है इसलिए इससे जुड़ी मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी पनप रही हैं। सोशल नेटवर्किंग साइटों के इस्तेमाल से इंटरनेट एडिक्शन की समस्या हो सकती है। तकनीक से संबंधित मतिभ्रम पैदा हो सकते हैं। वर्चुअल रिलेशनशिप प्रभावित हो सकती है।
क्या है लक्षण
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के सैकलर फैकल्टी ऑफ मेडिसिन और शाल्वता मेंटल हेल्थ केयर सेंटर के डॉ. यूरी नितजान का कहना है कि फेसबुक और चैट ग्रुप्स जैसे कम्प्यूटर कम्युनिकेशंस इस कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। नितजान के अनुसार सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करने से पीड़ित लोगों ने कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं का जिक्र किया, जिसमें अकेलापन अथवा अपने प्रिय व्यक्ति से बिछुड़ जाना या उससे बिछुड़ जाने का डर सताना, तकनीकी के साथ नौसिखियापन जैसी बातें शामिल थीं। अध्ययन के अनुसार हर एक मामले में मनोरोग के सिम्पटम्स उभरने और इसके धीरे-धीरे विकास के बीच संबंध पाया गया। इन मनोरोगों में मतिभ्रम, एंग्जाइटी, कन्फ्यूजन व कम्प्यूटर कम्युनिकेशंस का ज्यादा इस्तेमाल आदि शामिल था।
अच्छी बात यह भी
अध्ययन के दौरान इन समस्याओं के बीच अच्छी बात यह भी थी कि जो मरीज खुद अपनी इच्छा से इलाज के लिए आए थे, वे उचित इलाज व देखभाल के कारण पूरी तरह रिकवरी पाने में सफल भी रहे। जहां फेसबुक जैसी तकनीकों के ढेरों फायदे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स से चोट खाते भी नजर आए। इन साइट्स के जरिए आप ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं, जो अकेलेपन के शिकार हैं या अपनी दैनिक जिंदगी से परेशान हैं या साइबर बुलीइंग (इंटरनेट पर डराना-धमकाना) अथवा अन्य हिंसात्मक बर्ताव में मशगूल रहते हैं।
ज्यादातर मिलता है धोखा
अध्ययन में शामिल मरीजों ने अकेलेपन से निजात पाने की चाहत रखी और वास्तविक रिश्तों में कुछ तसल्ली ढूंढने की कोशिश की। यद्यपि इंटरनेट पर रिलेशनशिप शुरुआत में बहुत सकारात्मक नजर आती है लेकिन बाद में फीलिंग्स हर्ट होना, धोखा खाना और निजता में दखल जैसी समस्याएं आने लगीं। यह अध्ययन 'इसराइल जर्नल ऑफ साइकिएट्री एंड रिलेटेड साइंसेस्" में प्रकाशित हुआ है। सार्वजनिक रूप से अपने राजनीतिक दृष्टिकोण्ा को दर्श्ााने वाले प्रोफेसरों को सबसे कम पसंद किया गया। इसके अलावा अपने परिवार को लेकर गंभीर रहने वाले प्रोफेसर को छात्रों ने सबसे ज्यादा पसंद किया और सम्माननीय माना।
अध्ययन के अनुसार चूंकि इंटरनेट एक्सेस लगातार बढ़ता जा रहा है इसलिए इससे जुड़ी मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी पनप रही हैं। सोशल नेटवर्किंग साइटों के इस्तेमाल से इंटरनेट एडिक्शन की समस्या हो सकती है। तकनीक से संबंधित मतिभ्रम पैदा हो सकते हैं। वर्चुअल रिलेशनशिप प्रभावित हो सकती है।
क्या है लक्षण
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के सैकलर फैकल्टी ऑफ मेडिसिन और शाल्वता मेंटल हेल्थ केयर सेंटर के डॉ. यूरी नितजान का कहना है कि फेसबुक और चैट ग्रुप्स जैसे कम्प्यूटर कम्युनिकेशंस इस कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। नितजान के अनुसार सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करने से पीड़ित लोगों ने कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं का जिक्र किया, जिसमें अकेलापन अथवा अपने प्रिय व्यक्ति से बिछुड़ जाना या उससे बिछुड़ जाने का डर सताना, तकनीकी के साथ नौसिखियापन जैसी बातें शामिल थीं। अध्ययन के अनुसार हर एक मामले में मनोरोग के सिम्पटम्स उभरने और इसके धीरे-धीरे विकास के बीच संबंध पाया गया। इन मनोरोगों में मतिभ्रम, एंग्जाइटी, कन्फ्यूजन व कम्प्यूटर कम्युनिकेशंस का ज्यादा इस्तेमाल आदि शामिल था।
अच्छी बात यह भी
अध्ययन के दौरान इन समस्याओं के बीच अच्छी बात यह भी थी कि जो मरीज खुद अपनी इच्छा से इलाज के लिए आए थे, वे उचित इलाज व देखभाल के कारण पूरी तरह रिकवरी पाने में सफल भी रहे। जहां फेसबुक जैसी तकनीकों के ढेरों फायदे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स से चोट खाते भी नजर आए। इन साइट्स के जरिए आप ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं, जो अकेलेपन के शिकार हैं या अपनी दैनिक जिंदगी से परेशान हैं या साइबर बुलीइंग (इंटरनेट पर डराना-धमकाना) अथवा अन्य हिंसात्मक बर्ताव में मशगूल रहते हैं।
ज्यादातर मिलता है धोखा
अध्ययन में शामिल मरीजों ने अकेलेपन से निजात पाने की चाहत रखी और वास्तविक रिश्तों में कुछ तसल्ली ढूंढने की कोशिश की। यद्यपि इंटरनेट पर रिलेशनशिप शुरुआत में बहुत सकारात्मक नजर आती है लेकिन बाद में फीलिंग्स हर्ट होना, धोखा खाना और निजता में दखल जैसी समस्याएं आने लगीं। यह अध्ययन 'इसराइल जर्नल ऑफ साइकिएट्री एंड रिलेटेड साइंसेस्" में प्रकाशित हुआ है। सार्वजनिक रूप से अपने राजनीतिक दृष्टिकोण्ा को दर्श्ााने वाले प्रोफेसरों को सबसे कम पसंद किया गया। इसके अलावा अपने परिवार को लेकर गंभीर रहने वाले प्रोफेसर को छात्रों ने सबसे ज्यादा पसंद किया और सम्माननीय माना।

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