शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

बढ़ती उम्र में भी जी-भर के खेलिए वीडियोगेम

 वीडियोगेम का नाम सुनते ही बच्चे उछल पड़ते हैं। बच्चे और युवाओं में वीडियोगेम का शौक काफी देखा जाता है। यूं तो बच्चों के पास पढ़ाई और कई आउटडोर एक्टिविटीज् रहती हैं, इसलिए उन्हें वीडियोगेम कम खेलने की इजाजत दी जाती है। मगर इन वीडियोगेम का उपयोग बड़ी उम्र के लोग भी करें तो यह उनमें अद्भुत खुशी का संचार कर सकता है। जी हां, एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि ओल्ड एज वाले लोगों को यदि वीडियोगेम खेलने के प्रति इन्करेज किया जाए तो यह न सिर्फ उन्हें हैप्पी रखने में मदद करेगा बल्कि उनमें ढलती उम्र में इमोशनल वेल्बीइंग का बेटर सेंस भी डेवलेप होने लगता है। साथ ही वे किसी काम में खुद को व्यस्त भी पाते हैं। तब तो बच्चों को ही अपने दादा-दादी को खुद इसे सीखाना चाहिए ताकि जब बच्चे बाहर खेलने चले जाएं तो दादी-दादी भी कुछ समय के लिए बचपन की इन चीजों का बड़ी उम्र में आनंद ले सकें।
नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में 63 और इससे अधिक आयु वर्ग के तकरीबन 140 बुजुर्ग लोगों को शामिल किया। इस अध्ययन के तहत पार्टिसिपेंट्स के टेस्ट के लिए एक बैटरी दी गई। जिसके जरिए उनके इमोशनल और सोशल वेल्बीइंग को जांचा गया। इनमें से 61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया वे वीडियो गेम का प्रयोग कभी-कभी ही करते हैं जबकि 35 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि वे हर सप्ताह में कम से कम एक बार तो वीडियो गेम खेलते हैं।
निगेटिविटी भी नहीं घेरेगी
शोध में यह भी पाया गया कि जो लोग वीडियो गेम नहीं खेलते उनमें निगेटिव इमोशन्स की भरमार होती है और ऐसे लोग निगेटिविटी से हमेशा घिरे रहते हैं। ऐसे में उनमें डिप्रेशन का लेवल बहुत हाई हो जाता है।
इस शोध के प्रमुख डॉ.जासोन अलाइरे ने बताया कि हमने इस शोध में पाया है कि गेमिंग और बेटर वेल्बीइंग और इमोशनल फंक्शनिंग के मध्य गहरा संबंध होता है। यह अध्ययन 'जर्नल कम्प्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर" में प्रकाशित किया गया है। इस शोध के साथ ही हम एक ऐसे अध्ययन की योजना बना रहे हैं जिसमें यह जाना जाएगा कि क्या वाकई डिजीटल गेम्स ओल्ड एज वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी इम्प्रूव करते हैं।  

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