शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

नींद पर असर डालती है पूर्णिमा की रात!

 रोशनी के इस अध्ययन से नींद का गहरा जुड़ाव है। यदि वैज्ञानिकों की मानें तो उनका कहना है कि पूर्णिमा की रात ठीक से नींद लेने में खलल डालती है। लंबे समय तक किए एक अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई कि पूर्णिमा के दिन नींद में पांच मिनट ज्यादा समय लगा और लोग 20 मिनट कम सोए।
'करंट बायोलॉजी" में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जब चांद पूरा था तो प्रतिभागियों को नींद आने और अच्छी तरह नींद लेने में वक्त लगा, जबकि बंद अंधेरे कमरे में उन्हें अच्छी नींद आई। इस दौरान उनके शरीर की बायलॉजिकल क्लॉक से जुड़े 'मेलाटोनिन" नामक हार्मोन के स्तर में भी कमी देखी गई। अंधेरे में शरीर में अधिक मेलाटोनिन बना जबकि रोशनी में इसके निर्माण में कमी आई।
यही मुख्य वजह है कि पूर्णिमा की रात में ज्यादा उजाला होने की वजह से नींद पर इसका असर पड़ता है। स्विट्जरलैंड के बेसल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्रिश्चियन कैजोहेन और उनके साथियों के इस अध्ययन में यह सुझाव भी दिया गया है कि चंद्रमा का प्रभाव इसकी चमक से संबंधित नहीं हो सकता।
कम नींद बढ़ाती है जंक फूड का ज्यादा सेवन
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में किए एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि यदि रात की नींद बेहतर ढंग से नहीं हो पाती है तो इसका संबंध व्यक्ति की खाने पर भी पड़ता है। विशेषकर कम नींद जंक फूड का सेवन ज्यादा बढ़ाती है, जिसका असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। जो कई मायनों में हानिकारक साबित होता है।
हकैसे किया शोध
इस शोध में शामिल प्रतिभागी इस बात से अनजान थे कि इस अध्ययन का उद्देश्य क्या है। उन्हें प्रयोगशाला में जिस बिस्तर पर सुलाया गया था, वहां से वे चंद्रमा को नहीं देख सकते थे। इनमें से हर प्रतिभागी ने प्रयोगशाला में दो रातें बिताईं।
हक्या निकले परिणाम
अध्ययन के परिणामों में पाया गया कि पूर्णिमा की रात में गहरी नींद से जुड़ी दिमागी गतिविधियां घटकर आधी रह गईं और मेलटोनिन का स्तर भी गिर गया।
हक्या कहते हैं वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा की गति इंसान की नींद पर असर डालती हुई लगती है। यह तब भी होता है कि जब कोई चांद को देखता भी नहीं है और उसे यह भी नहीं पता होता कि चांद किस अवस्था में है। 

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